बाज़ार विफलता क्या है?
खुले बाज़ार में कीमतें बताती हैं कि क्या और कितना बनाना है। अक्सर यह ठीक चलता है। पर कभी-कभी बाज़ार पूरे समाज के हिसाब से गलत मात्रा बनाता है।
बाज़ार विफलता का मतलब: खुला बाज़ार संसाधनों का सबसे अच्छा (कुशल) उपयोग नहीं करता।
- निजी लागत/लाभ: खरीदार या विक्रेता को होने वाली लागत या लाभ।
- बाहरी लागत/लाभ: दूसरे लोगों (तीसरे पक्ष) पर पड़ने वाली लागत या लाभ।
- सामाजिक लागत = निजी लागत + बाहरी लागत।
समाज के लिए कुशल मात्रा वहाँ है जहाँ सीमांत सामाजिक लाभ (MSB) = सीमांत सामाजिक लागत (MSC)। दोनों मात्राओं का अंतर कल्याण हानि (deadweight loss) देता है।
बाहरी प्रभाव: नकारात्मक और सकारात्मक
नकारात्मक बाहरी प्रभाव: दूसरों को नुकसान। जैसे धुआँ, शोर, ट्रैफ़िक जाम। विक्रेता नुकसान को नहीं गिनता, इसलिए वस्तु ज़्यादा बनती है।
सकारात्मक बाहरी प्रभाव: दूसरों को फ़ायदा। जैसे टीका (दूसरे भी बचते हैं), शिक्षा। वस्तु कम बनती है।
हल किया विचार
माँग: P = 100 − Q, निजी लागत: P = 20 + Q, बाहरी लागत 20 प्रति इकाई। बाज़ार: Q = 40। समाज: 100 − Q = 40 + Q, Q = 30। यानी 10 इकाई ज़्यादा।
सार्वजनिक, मेरिट और डिमेरिट वस्तुएँ
निजी वस्तु प्रतिद्वंद्वी (rival) होती है (मैंने सेब खाया तो तुम नहीं खा सकते) और अपवर्जनीय (excludable) होती है (बिना पैसे वाले को रोका जा सकता है)।
शुद्ध सार्वजनिक वस्तु गैर-प्रतिद्वंद्वी और गैर-अपवर्जनीय होती है: स्ट्रीट लाइट, बाढ़ से बचाव का बाँध, देश की रक्षा, लाइटहाउस। बिना पैसे दिए इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए लोग दूसरों के भरोसे बैठते हैं: फ्री-राइडर समस्या। कंपनी कमा नहीं पाती, तो बाज़ार इसे बनाता ही नहीं।
मेरिट वस्तुएँ (शिक्षा, स्वास्थ्य जाँच) लोगों की सोच से ज़्यादा फ़ायदेमंद हैं, इसलिए कम ली जाती हैं। डिमेरिट वस्तुएँ (तंबाकू, शराब) सोच से ज़्यादा नुकसानदेह हैं, इसलिए ज़्यादा ली जाती हैं।
अधूरी जानकारी, बाज़ार शक्ति और असमानता
अधूरी जानकारी: खरीदार या विक्रेता सब कुछ नहीं जानते। असमान जानकारी में एक पक्ष ज़्यादा जानता है। पुरानी कार का विक्रेता उसकी खराबी जानता है, खरीदार नहीं।
बाज़ार शक्ति: एकाधिकारी (monopoly) ऊँची कीमत लेकर कम बनाता है। मज़दूरों का आसानी से न हिल पाना और कंपनियों का गुट (cartel) बनाना भी कमियाँ हैं।
असमानता: बाज़ार कुशल होकर भी कुछ लोगों को बहुत गरीब छोड़ सकता है। बहुत असमान आय को भी कई लोग बाज़ार विफलता मानते हैं।
सरकार के उपाय (और सरकारी विफलता)
- अप्रत्यक्ष कर नुकसानदेह वस्तु पर: "जो प्रदूषण करे वही भरे"।
- सब्सिडी फ़ायदेमंद वस्तु पर (टीके, सोलर पैनल)।
- नियम और प्रतिबंध: धुएँ की सीमा, शराब की न्यूनतम उम्र।
- खरीद-बिक्री योग्य प्रदूषण परमिट।
- सीधी व्यवस्था: सरकार कर के पैसे से सड़क, स्ट्रीट लाइट देती है।
- जानकारी: लेबल, चेतावनी, रेटिंग।
- प्रतिस्पर्धा कानून और एकाधिकार पर कीमत नियम।
सरकारी विफलता: गलत जानकारी, ऊँचा खर्च, अनचाहे असर या राजनीतिक दबाव से उपाय उल्टा भी पड़ सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सामाजिक लागत = निजी लागत + बाहरी लागत
- सामाजिक लाभ = निजी लाभ + बाहरी लाभ
- कुशल उत्पादन: MSB = MSC
- कल्याण हानि = ½ × (फालतू इकाइयाँ) × (MSC और MSB का अंतर)
- सही प्रदूषण कर प्रति इकाई = बाहरी लागत प्रति इकाई
हल किए गए उदाहरण
1. माँग P = 100 − Q, निजी लागत P = 20 + Q, बाहरी लागत 20 प्रति इकाई। बाज़ार और समाज की सही मात्रा निकालो।
बाज़ार: 100 − Q = 20 + Q, 2Q = 80, Q = 40। सामाजिक लागत 40 + Q: 100 − Q = 40 + Q, Q = 30। बाज़ार 10 इकाई ज़्यादा बनाता है।
2. इसी बाज़ार में कल्याण हानि निकालो।
Q = 40 पर MSC = 80, MSB = 60, अंतर 20। हानि = ½ × 10 × 20 = 100।
3. कितना कर प्रति इकाई बाज़ार को ठीक करेगा?
कर = बाहरी लागत = 20। लागत 40 + Q होगी, 100 − Q = 40 + Q से Q = 30, जो सही मात्रा है।
4. वर्गीकरण करो: (क) आसमान में आतिशबाज़ी, (ख) सिनेमा टिकट, (ग) टीका।
(क) सार्वजनिक वस्तु। (ख) निजी वस्तु। (ग) मेरिट वस्तु, सकारात्मक बाहरी प्रभाव के साथ।
आम गलतियाँ
- सोचना कि बाज़ार विफलता मतलब बाज़ार बंद हो गया। असल में मात्रा गलत होती है।
- सरकार जो भी दे उसे सार्वजनिक वस्तु मान लेना। सरकारी स्कूल शुद्ध सार्वजनिक वस्तु नहीं है।
- कहना कि नकारात्मक बाहरी प्रभाव से कम उत्पादन होता है। उससे ज़्यादा उत्पादन होता है।
- भूल जाना कि सरकारी कदम भी विफल हो सकते हैं।