South 고등학교 2학년 Humans and Economic Activity
अध्याय: 4
1. Humans and economic decisions
Rational decision-making · Irrational choices · Rationality and fairness
- निर्णय लेना: सही चुनाव कैसे करें, कदम-दर-कदम – निर्णय लेना यानी दो या ज़्यादा विकल्पों में से सबसे अच्छा चुनना। अच्छा निर्णय कुछ चरणों में होता है: समस्या पहचानो, विकल्प खोजो, मानदंड तय करो, हर मानदंड को महत्व (weight) दो, अंक दो, चुनो, काम करो और फिर नतीजे की समीक्षा करो। डिसीजन मैट्रिक्स इसे आसान गिनती में बदल देता है।
- व्यवहारिक अर्थशास्त्र: असली लोग कैसे निर्णय लेते हैं – पारंपरिक अर्थशास्त्र मानता है कि लोग पूरी तरह तर्कसंगत हैं: सब विकल्प जानते हैं, लागत और लाभ तौलते हैं और हमेशा सबसे अच्छा चुनते हैं। व्यवहारिक अर्थशास्त्र मनोविज्ञान और प्रयोगों से दिखाता है कि असल में लोग कैसे चुनते हैं। हमारी तर्कसंगतता समय, जानकारी और दिमाग़ी क्षमता से सीमित है, इसलिए हम शॉर्टकट (अनुमानी नियम) अपनाते हैं, जिनसे एंकरिंग, उपलब्धता, भेड़चाल, हानि से बचाव, वर्तमान पूर्वाग्रह और फ़्रेमिंग जैसे पूर्वाग्रह आते हैं। लोग निष्पक्षता और सामाजिक मानदंडों की भी परवाह करते हैं। सरकारें और कंपनियाँ इन विचारों से 'नज' और 'चयन संरचना' बनाती हैं, जैसे डिफ़ॉल्ट विकल्प। नज चुनने की आज़ादी रखते हैं पर नैतिक सवाल भी उठाते हैं।
2. Humans and the world of work
Finding jobs · Labour problems
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
- रोज़गार क़ानून: किसी के लिए काम करने के नियम – रोज़गार क़ानून (श्रम क़ानून) नियोक्ता और कर्मचारी के रिश्ते के नियम हैं। रोज़गार अनुबंध तब बनता है जब कोई व्यक्ति वेतन के बदले, नियोक्ता के निर्देश में (अधीनता) काम करता है। अनुबंध स्थायी, निश्चित अवधि, एजेंसी के ज़रिए अस्थायी, अंशकालिक या दूरस्थ हो सकता है; सिविल या फ़्रीलांस अनुबंध नौकरी नहीं है। कर्मचारी के अधिकार हैं (कम से कम न्यूनतम वेतन, सीमित घंटे, आराम और सवेतन छुट्टी, सुरक्षित कार्यस्थल, बराबर व्यवहार, उत्पीड़न से मुक्ति) और कर्तव्य हैं (सावधान काम, वैध निर्देश मानना, वफ़ादारी, सुरक्षा नियम)। नियोक्ता क़ानून के भीतर काम व्यवस्थित कर सकता है और अनुशासन दे सकता है। सकल वेतन कर और सामाजिक बीमा से पहले का है, शुद्ध बाद का; नियोक्ता की कुल लागत ज़्यादा होती है। ट्रेड यूनियन सामूहिक समझौते करती हैं। अनुबंध इस्तीफ़े, वैध कारण और निष्पक्ष प्रक्रिया वाली बर्ख़ास्तगी, आपसी सहमति या अवधि ख़त्म होने से समाप्त होता है।
3. Humans and the economic community
Income distribution theories · Competition and its limits · Information technology and economy
- आय असमानता – आय असमानता का मतलब है कि लोगों के बीच आय बराबर नहीं बँटी है। अर्थशास्त्री लोगों को सबसे ग़रीब से सबसे अमीर तक क्रम में रखकर 20-20% के पाँच समूहों (पंचमक, quintiles) में बाँटते हैं और उनके हिस्से की तुलना करते हैं। लॉरेंज़ वक्र लोगों के संचयी % के सामने आय का संचयी % दिखाता है; यह समानता की सीधी रेखा से जितना ज़्यादा झुके, असमानता उतनी ज़्यादा। गिनी गुणांक = A ÷ (A + B) इसे 0 (पूरी समानता) से 1 (सारी आय एक व्यक्ति के पास) के बीच एक संख्या बना देता है। संपत्ति (जो तुम्हारे पास है) आमतौर पर आय (जो तुम कमाते हो) से ज़्यादा असमान होती है। सरकार प्रगतिशील कर, सहायता, न्यूनतम मज़दूरी और मुफ़्त शिक्षा-स्वास्थ्य से असमानता घटाती है।
- बाज़ार विफलता (Market Failure) – जब खुला बाज़ार अपने-आप समाज के लिए सबसे अच्छा नतीजा नहीं देता, तो उसे बाज़ार विफलता कहते हैं। कुछ चीज़ें ज़रूरत से ज़्यादा बनती हैं (प्रदूषण, सिगरेट) और कुछ कम (स्ट्रीट लाइट, टीके, शिक्षा)। मुख्य कारण: बाहरी प्रभाव, सार्वजनिक वस्तुएँ, मेरिट और डिमेरिट वस्तुएँ, अधूरी जानकारी, बाज़ार शक्ति और असमानता। सरकार कर, सब्सिडी, नियम, सीधी सेवा और जानकारी से इसे सुधारती है, पर सरकार भी चूक सकती है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था: प्लेटफ़ॉर्म, रिव्यू और निजी डेटा – डिजिटल अर्थव्यवस्था (digital economy) अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा है जो इंटरनेट, मोबाइल और डेटा से चलता है। इसका केंद्र है प्लेटफ़ॉर्म: एक ऐप या वेबसाइट जो खरीदार और विक्रेता (या सवारी और ड्राइवर, होटल और मेहमान) को जोड़ती है और फ़ीस लेती है। प्लेटफ़ॉर्म नेटवर्क प्रभाव से बढ़ते हैं: एक तरफ़ ज़्यादा लोग, तो दूसरी तरफ़ भी ज़्यादा लोग आते हैं। ग्राहक रेटिंग और रिव्यू देखकर चुनते हैं, इसलिए हर व्यवसाय को अच्छी डिजिटल पहचान चाहिए। प्लेटफ़ॉर्म बहुत सारा निजी डेटा जमा करते हैं, इसलिए सहमति और डेटा-सुरक्षा कानून ज़रूरी हैं।
4. Humans and future society
Fourth industrial revolution · Low birth rate and ageing · Carbon emissions and development
- भविष्य का काम (Future of Work) – तकनीक से काम बदलते हैं। मशीन और AI वे काम ले लेते हैं जो रोज़ एक ही तरह दोहराए जाते हैं। साथ ही नए काम बनते हैं, और लोगों से बात करने, देखभाल और नया सोचने वाले काम बढ़ते हैं। तैयार रहने का तरीक़ा है ज़िंदगी भर नए हुनर सीखते रहना।
- जनसंख्या का वृद्ध होना – जनसंख्या का वृद्ध होना यानी आबादी में बुज़ुर्गों का हिस्सा बढ़ता जाना। इसके दो कारण हैं: कम जन्म (कुल प्रजनन दर लगभग 2.1 से कम) और लंबी उम्र। हर बुज़ुर्ग पर कम कामगार होने से पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और श्रम-आपूर्ति पर दबाव पड़ता है, जबकि स्कूलों में कम सीटें चाहिए। समाज परिवारों की मदद, देर से और लचीले रिटायरमेंट, पेंशन-देखभाल सुधार, तकनीक, आजीवन सीखने और कभी-कभी आप्रवास से जवाब देते हैं।
- जलवायु नीति: दुनिया जलवायु परिवर्तन पर कैसे कदम उठाती है – जलवायु नीति वे समझौते, कानून और योजनाएँ हैं जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाती हैं (शमन, mitigation) और लोगों को बदलती जलवायु से निपटने में मदद करती हैं (अनुकूलन, adaptation)। वायुमंडल सबका साझा है, इसलिए कोई देश अकेले यह समस्या हल नहीं कर सकता। देश संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढाँचा सम्मेलन (UNFCCC, 1992), क्योटो प्रोटोकॉल (1997) और पेरिस समझौते (2015) से मिलकर काम करते हैं। पेरिस में हर देश अपना लक्ष्य (NDC) तय करता है और हर पाँच साल में उसे बढ़ाता है, ताकि गर्मी 2 °C से काफ़ी नीचे रहे और 1.5 °C की कोशिश हो। देश के भीतर सरकारें कार्बन टैक्स, कैप-एंड-ट्रेड, नियम-मानक और स्वच्छ ऊर्जा को सहायता देती हैं। कई देशों ने नेट ज़ीरो (कार्बन तटस्थता) का लक्ष्य रखा है। न्याय ज़रूरी है: अमीर देशों ने इतिहास में ज़्यादा उत्सर्जन किया, इसलिए "साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व", जलवायु वित्त और तकनीक साझा करना ज़रूरी है।