Ontario Grade 12 CIA4U Analysing Current Economic Issues (Grade 12, University Preparation)
अध्याय: 5
1. A. Economic Inquiry and Skill Development
A1 Economic Inquiry · A2 Developing Transferable Skills
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
2. B. Fundamentals of Economics
B1 Scarcity and Choice · B2 Supply and Demand Models · B3 Growth and Sustainability · B4 Economic Thought and Decision Making
- व्यष्टि अर्थशास्त्र का परिचय और उत्पादन संभावना वक्र – व्यष्टि अर्थशास्त्र एक खरीदार या एक फ़र्म जैसी छोटी इकाइयों को पढ़ता है; समष्टि अर्थशास्त्र पूरी अर्थव्यवस्था को। संसाधन दुर्लभ हैं और उनके कई उपयोग हैं, इसलिए हर अर्थव्यवस्था को तय करना होता है कि क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन हो। उत्पादन संभावना वक्र (PPC) दो वस्तुओं के वे सबसे अच्छे मेल दिखाता है जो सारे संसाधन पूरे लगाने पर बन सकते हैं। इस पर चलने की एक अवसर लागत होती है जो आम तौर पर बढ़ती है, इसलिए वक्र अवतल होता है।
- पूर्ण प्रतियोगिता और कीमत निर्धारण – पूर्ण प्रतियोगिता में बहुत सारी फ़र्में एक जैसी वस्तु बहुत सारे खरीदारों को बेचती हैं, इसलिए हर फ़र्म कीमत स्वीकारक है। बाज़ार कीमत वहाँ तय होती है जहाँ बाज़ार माँग = बाज़ार पूर्ति (Qd = Qs)। माँग बढ़े तो कीमत और मात्रा दोनों बढ़ती हैं; पूर्ति बढ़े तो कीमत घटती है और मात्रा बढ़ती है।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
- नागरिकशास्त्र और सरकार: नागरिक और सरकार मिलकर कैसे काम करते हैं – नागरिकशास्त्र (civics) यह सिखाता है कि लोग ख़ुद पर शासन कैसे करते हैं और नागरिक कैसे भाग लेते हैं। लोकतंत्र में शक्ति जनता की होती है, जो स्वतंत्र चुनाव में प्रतिनिधि चुनती है। सरकार के तीन अंग हैं: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका जाँचती है कि वे संविधान के अनुसार हों। ज़्यादातर देशों में सरकार के स्तर भी होते हैं: स्थानीय, राज्य या प्रांतीय, और राष्ट्रीय। क़ानून एक विचार से शुरू होकर विधेयक बनता है, बहस और मतदान के बाद स्वीकृत होता है। नागरिकों के अधिकार भी हैं और कर्तव्य भी। सक्रिय नागरिक जानकारी रखते हैं, वोट देते हैं, सेवा करते हैं और शांतिपूर्ण ढंग से बदलाव लाते हैं।
3. C. Firms, Markets, and Economic Stakeholders
C1 The Firm and Market Structures · C2 Economic Trade-offs and Decisions · C3 The Role of Government in Redressing Imbalance
- बाज़ार संरचना: पूर्ण प्रतियोगिता से एकाधिकार तक – बाज़ार संरचना बताती है कि कितनी फ़र्में बेचती हैं, उनका माल कितना मिलता-जुलता है, और नई फ़र्म का आना कितना आसान है। पूर्ण प्रतियोगिता: बहुत फ़र्में, एक-जैसा माल, मुक्त प्रवेश, कीमत स्वीकारक, दीर्घकाल में सामान्य लाभ। एकाधिकारी प्रतियोगिता: बहुत फ़र्में, विभेदित माल, आसान प्रवेश, थोड़ी कीमत शक्ति। अल्पाधिकार: कुछ परस्पर निर्भर फ़र्में, ऊँची बाधाएँ, रणनीति (खेल सिद्धांत, गठजोड़, कीमत नेतृत्व)। एकाधिकार: एक फ़र्म, कोई निकट विकल्प नहीं, ऊँची बाधाएँ, कीमत निर्धारक, असामान्य लाभ और कीमत विभेद संभव। प्रतिस्पर्धा-योग्य बाज़ार दिखाते हैं कि नए आने का डर भी ताक़त को सीमित करता है।
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
- नागरिकशास्त्र और सरकार: नागरिक और सरकार मिलकर कैसे काम करते हैं – नागरिकशास्त्र (civics) यह सिखाता है कि लोग ख़ुद पर शासन कैसे करते हैं और नागरिक कैसे भाग लेते हैं। लोकतंत्र में शक्ति जनता की होती है, जो स्वतंत्र चुनाव में प्रतिनिधि चुनती है। सरकार के तीन अंग हैं: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका जाँचती है कि वे संविधान के अनुसार हों। ज़्यादातर देशों में सरकार के स्तर भी होते हैं: स्थानीय, राज्य या प्रांतीय, और राष्ट्रीय। क़ानून एक विचार से शुरू होकर विधेयक बनता है, बहस और मतदान के बाद स्वीकृत होता है। नागरिकों के अधिकार भी हैं और कर्तव्य भी। सक्रिय नागरिक जानकारी रखते हैं, वोट देते हैं, सेवा करते हैं और शांतिपूर्ण ढंग से बदलाव लाते हैं।
4. D. Macroeconomics
D1 Macroeconomic Models and Measures · D2 Fiscal Policy · D3 Monetary Policy
- समग्र माँग, उपभोग और बचत प्रवृत्तियाँ, और निवेश गुणक – समग्र माँग (AD) = अंतिम वस्तुओं पर कुल नियोजित खर्च: C + I + G + (X − M); दो-क्षेत्रक मॉडल में AD = C + I। उपभोग आय पर निर्भर है: C = c̄ + bY, जहाँ b = MPC। APC = C/Y, MPC = ΔC/ΔY, APS = S/Y, MPS = ΔS/ΔY; APC + APS = 1 और MPC + MPS = 1। अल्पकालीन संतुलन उत्पादन वहाँ है जहाँ AD = AS (नियोजित खर्च = उत्पादन), या बचत = नियोजित निवेश। निवेश बढ़ने पर आय कई गुना बढ़ती है: k = ΔY/ΔI = 1/(1 − MPC) = 1/MPS।
- सरकारी बजट और अर्थव्यवस्था – सरकारी बजट एक साल की योजना है जिसमें अनुमानित आय (प्राप्तियाँ) और योजनाबद्ध खर्च (व्यय) लिखे होते हैं। प्राप्तियाँ राजस्व (कर, गैर-कर) या पूँजीगत (उधार, कर्ज़ वसूली, विनिवेश) होती हैं। व्यय राजस्व (कोई संपत्ति नहीं) या पूँजीगत (संपत्ति बने या कर्ज़ घटे) होता है। बजट संतुलित, अधिशेष या घाटे का हो सकता है, और घाटा राजस्व, राजकोषीय और प्राथमिक घाटे से नापा जाता है।
- बैंकों द्वारा मुद्रा सृजन और केंद्रीय बैंक (RBI) – बैंक जमा का केवल एक हिस्सा रिज़र्व (वैधानिक आरक्षित अनुपात, LRR) रखते हैं और बाकी उधार देते हैं। हर कर्ज़ खर्च होकर नई जमा बनकर बैंकों में लौटता है, तो कुल जमा पहली जमा का कई गुना हो जाती है: कुल जमा = प्रारंभिक जमा × 1/LRR। RBI भारत का केंद्रीय बैंक है: करेंसी जारी करता है, सरकार और बैंकों का बैंकर है, अंतिम ऋणदाता है, साख का नियंत्रण करता है और विदेशी मुद्रा भंडार रखता है। साख नियंत्रण के उपकरण: रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, बैंक दर, CRR, SLR, खुले बाज़ार की क्रियाएँ और सीमांत आवश्यकता।
5. E. Global Interdependence and Inequalities
E1 Theories and Models of International Trade · E2 International Economic Developments · E3 International Economic Power and Inequality
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार: तुलनात्मक लाभ, संरक्षण और विदेशी मुद्रा बाज़ार – देश उन चीज़ों में विशेषज्ञता लेकर फ़ायदा पाते हैं जिनकी अवसर लागत उनके लिए सबसे कम हो (तुलनात्मक लाभ), और अपनी लागतों के बीच की दर पर व्यापार करते हैं। टैरिफ़, कोटा और सब्सिडी घरेलू कंपनियों को बचाते हैं पर कीमत बढ़ाते हैं और निरर्थक हानि करते हैं। व्यापार गुट और WTO नियम तय करते हैं। विदेशी मुद्रा बाज़ार में किसी देश की वास्तविक ब्याज दर बढ़े तो पूँजी अंदर आती है, उसकी मुद्रा मज़बूत होती है और शुद्ध निर्यात घटता है।
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
- विकास का भूगोल: कोई जगह अमीर या गरीब क्यों? – विकास का मतलब है लोग बेहतर जीवन जिएँ: ज़्यादा आय, अच्छा स्वास्थ्य, ज़्यादा पढ़ाई और चुनने की आज़ादी। इसे सूचकों से नापते हैं, जैसे प्रति व्यक्ति GNI, जीवन प्रत्याशा और स्कूली वर्ष, और मानव विकास सूचकांक (HDI, 0 से 1) से, जो तीनों को जोड़ता है। विकास असमान है: अमीर कोर और गरीब परिधि दुनिया के क्षेत्रों के बीच भी हैं और एक देश के अंदर भी। जहाँ अमीर और गरीब इलाक़े मिलते हैं, वहाँ मज़दूर, सामान, कारख़ाने और पैसे का आना-जाना होता है, जिसके अच्छे और बुरे दोनों असर हैं। विकास का एक ही मॉडल नहीं: देश निर्यात कारख़ानों, सेवाओं, या खनन और खेती से बढ़े हैं, हर रास्ते के अपने जोखिम हैं।