व्यावसायिक बैंकों द्वारा साख (मुद्रा) सृजन
बैंक जानते हैं कि सब जमाकर्ता एक साथ पैसा नहीं निकालते। इसलिए बैंक जमा का एक हिस्सा नकद रिज़र्व रखता है और बाकी उधार देता है। न्यूनतम हिस्सा RBI तय करता है: वैधानिक आरक्षित अनुपात (LRR), जो CRR और SLR से बनता है।
- आशा ₹1000 जमा करती है (प्राथमिक जमा)। LRR = 20%, तो रिज़र्व ₹200, कर्ज़ ₹800।
- रवि ₹800 खर्च करता है। विक्रेता उसे जमा करता है: 800 की नई (व्युत्पन्न) जमा। रिज़र्व 160, कर्ज़ 640।
- यह दोहराता है: 512, 409.6, … हर दौर पिछले का 80%।
कुल जमा = 1000 + 800 + 640 + … = 1000 × 1/0.2 = ₹5000। सृजित साख = 5000 − 1000 = ₹4000। प्रक्रिया तब रुकती है जब कुल रिज़र्व = पहली ₹1000।
मुद्रा गुणक
मुद्रा गुणक = 1 ÷ LRR। LRR 20% → 5; LRR 10% → 10। कम LRR = ज़्यादा साख।
मान्यताएँ और सीमाएँ
सारा पैसा बैंकों में लौटता है (जनता नकद नहीं रखती), बैंक सारा अतिरिक्त रिज़र्व उधार देते हैं, और लोग उधार लेना चाहते हैं। असल में नकद रिसाव और कम कर्ज़ माँग से गुणक छोटा होता है।
केंद्रीय बैंक: RBI के कार्य
केंद्रीय बैंक देश का शीर्ष बैंक है। भारत में यह भारतीय रिज़र्व बैंक (1935) है।
- करेंसी जारी करना: नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार (₹1 छोड़कर)। मुद्रा में जनता का भरोसा बनाए रखता है।
- सरकार का बैंकर: सरकार के खाते रखता, छोटे कर्ज़ देता, सार्वजनिक ऋण संभालता, मौद्रिक मामलों पर सलाह देता।
- बैंकों का बैंक और पर्यवेक्षक: बैंक इसके पास रिज़र्व रखते; यह बैंकों के बीच चेक निपटाता; बैंकों को लाइसेंस देता और जाँचता।
- अंतिम ऋणदाता: संकट में फँसे बैंक को कर्ज़ देता ताकि जमाकर्ता घबराएँ नहीं।
- साख नियंत्रक: मौद्रिक नीति के उपकरणों से मुद्रा पूर्ति, कीमतें और वृद्धि नियंत्रित करता।
- विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक: देश की विदेशी मुद्रा और सोना रखता, रुपये की विनिमय दर स्थिर रखता।
साख नियंत्रण के उपकरण
मात्रात्मक उपकरण (कुल साख बदलते)
- रेपो दर: जिस दर पर RBI बैंकों को अल्पकाल के लिए (सरकारी प्रतिभूतियों के बदले) उधार देता है। रेपो ↑ → कर्ज़ महँगा → साख कम।
- रिवर्स रेपो दर: बैंकों के अतिरिक्त पैसे को अपने पास रखने पर RBI जो दर देता है। रिवर्स रेपो ↑ → बैंक ज़्यादा रखते, कम उधार देते।
- बैंक दर: जिस दर पर RBI बैंकों को लंबी अवधि के लिए, प्रतिभूतियाँ खरीदे बिना, उधार देता है (पुनर्बट्टा)। ↑ → साख कम।
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR): जमा का वह हिस्सा जो बैंकों को नकद RBI के पास रखना होता है। CRR ↑ → उधार को कम पैसा।
- वैधानिक तरलता अनुपात (SLR): जमा का वह हिस्सा जो बैंकों को खुद तरल परिसंपत्तियों (नकद, सोना, सरकारी बॉन्ड) में रखना होता है। SLR ↑ → उधार कम।
- खुले बाज़ार की क्रियाएँ (OMO): RBI खुले बाज़ार में सरकारी बॉन्ड खरीदता या बेचता है। बेचने से बैंकों से पैसा निकलता → साख कम। खरीदने से पैसा आता → साख ज़्यादा।
गुणात्मक उपकरण
- सीमांत आवश्यकता (मार्जिन): गिरवी रखी चीज़ के मूल्य और उस पर मिलने वाले कर्ज़ का अंतर। ₹10 लाख के माल पर 40% मार्जिन → कर्ज़ केवल ₹6 लाख। जैसे सट्टे वाले शेयर व्यापार पर मार्जिन बढ़ाने से केवल उस क्षेत्र की साख घटती है।
| महँगाई रोकने को (साख घटाओ) | मंदी रोकने को (साख बढ़ाओ) |
|---|---|
| रेपो, रिवर्स रेपो, बैंक दर, CRR, SLR, मार्जिन बढ़ाओ; बॉन्ड बेचो | इन्हें घटाओ; बॉन्ड खरीदो |
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुद्रा गुणक = 1 ÷ LRR
- कुल जमा = प्रारंभिक जमा × 1/LRR
- सृजित साख = कुल जमा − प्रारंभिक जमा
- प्रतिभूति पर कर्ज़ = प्रतिभूति का मूल्य × (1 − मार्जिन)
हल किए गए उदाहरण
1. प्रारंभिक जमा ₹2000, LRR 10%। मुद्रा गुणक और कुल जमा?
गुणक = 1 ÷ 0.1 = 10। कुल जमा = 2000 × 10 = ₹20,000।
2. प्रारंभिक जमा ₹5000, LRR 25%। सृजित साख?
कुल जमा = 5000 × 4 = 20,000। सृजित साख = 20,000 − 5000 = ₹15,000।
3. ₹8,000 की प्रारंभिक जमा से ₹40,000 की कुल जमा बनी। LRR?
गुणक = 40,000 ÷ 8,000 = 5। LRR = 1 ÷ 5 = 20%।
4. ₹500 जमा हो और LRR = 20% हो, तो पहले तीन दौर दिखाओ।
दौर 1: जमा 500, रिज़र्व 100, कर्ज़ 400। दौर 2: जमा 400, रिज़र्व 80, कर्ज़ 320। दौर 3: जमा 320, रिज़र्व 64, कर्ज़ 256।
5. व्यापारी ₹10 लाख का माल गिरवी रखता है। मार्जिन 30% है। कितना कर्ज़ मिलेगा?
कर्ज़ = 10 × (1 − 0.3) = ₹7 लाख।
6. महँगाई ऊँची है। RBI के कोई तीन कदम बताओ।
रेपो दर बढ़ाना, CRR बढ़ाना, खुले बाज़ार में सरकारी बॉन्ड बेचना (OMO)। रिवर्स रेपो, बैंक दर, SLR या मार्जिन बढ़ाना भी।
आम गलतियाँ
- गुणक = 1 ÷ LRR की जगह गुणक = LRR लेना।
- रेपो और रिवर्स रेपो उलझाना: रेपो = RBI बैंकों को देता; रिवर्स रेपो = बैंक RBI के पास पैसा रखते।
- कहना कि CRR बैंक अपने पास रखते हैं। CRR RBI के पास रखा जाता है; SLR बैंक खुद रखते हैं।
- सोचना कि RBI के बॉन्ड खरीदने से मुद्रा पूर्ति घटती है। खरीद में पैसा बाज़ार में जाता है, तो मुद्रा पूर्ति बढ़ती है।