पूर्ण रोज़गार और अनैच्छिक बेरोज़गारी
पूर्ण रोज़गार: जो लोग मौजूदा मज़दूरी पर काम करने योग्य और इच्छुक हैं, सबको काम मिले। फिर भी कुछ बेरोज़गारी रहती है: नौकरी बदलने वाले (संघर्षात्मक) या जो उस मज़दूरी पर काम नहीं चाहते (ऐच्छिक)।
अनैच्छिक बेरोज़गारी: लोग मौजूदा मज़दूरी पर काम करने योग्य और इच्छुक हैं पर काम नहीं मिलता। केन्स के अनुसार यह समग्र माँग की कमी से होती है।
ऐच्छिक बेरोज़गारी: व्यक्ति चालू मज़दूरी पर काम नहीं करना चाहता। यह नीति की समस्या नहीं।
न्यून माँग और अवस्फीतिक अंतराल
न्यून माँग: पूर्ण रोज़गार स्तर पर AD समग्र पूर्ति से कम।
अवस्फीतिक अंतराल = पूर्ण रोज़गार पर AS − पूर्ण रोज़गार पर AD। उदाहरण: Yf = 500, 500 पर AD = 460, अंतराल = 40।
प्रभाव
- बिना बिका माल → फर्में उत्पादन और नौकरियाँ घटातीं → अनैच्छिक बेरोज़गारी।
- संतुलन पूर्ण रोज़गार से नीचे (यहाँ 300 पर, गुणक नीचे की ओर काम करता: 40 × 5 = 200 कम)।
- कीमतें गिरने लगतीं; निवेश घटता।
अधिमाँग और स्फीतिक अंतराल
अधिमाँग: पूर्ण रोज़गार स्तर पर AD समग्र पूर्ति से ज़्यादा।
स्फीतिक अंतराल = पूर्ण रोज़गार पर AD − पूर्ण रोज़गार पर AS। उदाहरण: 500 पर AD = 540, अंतराल = 40।
प्रभाव
- सब संसाधन पहले से काम में, तो वास्तविक उत्पादन नहीं बढ़ सकता।
- खरीदार उन्हीं वस्तुओं के लिए होड़ करते → सामान्य कीमत स्तर बढ़ता (मुद्रास्फीति)।
- मौद्रिक आय बढ़ती पर वास्तविक आय नहीं; बचत करने वाले और स्थिर आय वाले घाटे में।
सरकारी खर्च और कर से सुधार (राजकोषीय नीति)
| उपाय | न्यून माँग | अधिमाँग |
|---|---|---|
| सरकारी खर्च | बढ़ाओ (सड़क, स्कूल, रोज़गार योजनाएँ) | घटाओ |
| कर | घटाओ, ताकि लोगों के पास खर्च को ज़्यादा हो | बढ़ाओ, ताकि लोग कम खर्च करें |
| सार्वजनिक उधार | जनता से कम उधार | जनता से ज़्यादा उधार (खर्च सोख लेता) |
| घाटे की वित्त व्यवस्था | इस्तेमाल हो सकती है | घटाओ |
G बढ़ने से AD ऊपर खिसकती है। 40 का अंतराल भरने को केवल 40 अतिरिक्त G चाहिए (Yf पर AD 40 बढ़ती); आय 40 × k बढ़ती है।
मुद्रा पूर्ति से सुधार (मौद्रिक नीति)
| RBI उपकरण | न्यून माँग (साख बढ़ाओ) | अधिमाँग (साख घटाओ) |
|---|---|---|
| रेपो / बैंक दर | घटाओ | बढ़ाओ |
| रिवर्स रेपो | घटाओ | बढ़ाओ |
| CRR / SLR | घटाओ | बढ़ाओ |
| खुले बाज़ार की क्रियाएँ | बॉन्ड खरीदो | बॉन्ड बेचो |
| सीमांत आवश्यकता | घटाओ | बढ़ाओ |
सस्ता, आसान कर्ज़ उधार पर निवेश और उपभोग बढ़ाता → AD ऊपर। महँगा, कम कर्ज़ उलटा करता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अवस्फीतिक अंतराल = Yf − Yf पर AD
- स्फीतिक अंतराल = Yf पर AD − Yf
- संतुलन आय में बदलाव = अंतराल × k, जहाँ k = 1/(1 − MPC)
हल किए गए उदाहरण
1. पूर्ण रोज़गार उत्पादन ₹1000 करोड़। उस पर AD ₹900 करोड़। अंतराल का नाम और माप?
Yf पर AD < AS: न्यून माँग। अवस्फीतिक अंतराल = 1000 − 900 = ₹100 करोड़।
2. पूर्ण रोज़गार उत्पादन ₹800 करोड़, उस स्तर पर AD ₹860 करोड़। अंतराल का नाम और माप?
अधिमाँग। स्फीतिक अंतराल = 860 − 800 = ₹60 करोड़।
3. अवस्फीतिक अंतराल ₹50 करोड़ और MPC = 0.8। संतुलन आय पूर्ण रोज़गार से कितनी नीचे?
k = 5। कमी = 50 × 5 = ₹250 करोड़।
4. C = 40 + 0.8Y, I = 60, पूर्ण रोज़गार उत्पादन 600। Yf पर AD और अंतराल?
600 पर AD = 40 + 480 + 60 = 580। अवस्फीतिक अंतराल = 600 − 580 = 20। (संतुलन Y = 500, Yf से 100 नीचे = 20 × 5।)
5. कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं और पूर्ण रोज़गार है। एक राजकोषीय और दो मौद्रिक उपाय सुझाओ।
राजकोषीय: सरकारी खर्च घटाओ या कर बढ़ाओ। मौद्रिक: रेपो दर बढ़ाओ; सरकारी बॉन्ड बेचो (OMO) या CRR बढ़ाओ।
6. बहुत लोग मौजूदा मज़दूरी पर काम करना चाहते हैं पर नौकरियाँ नहीं। यह क्या है और कारण क्या हो सकता है?
अनैच्छिक बेरोज़गारी, जिसका कारण न्यून माँग (पूर्ण रोज़गार पर AD बहुत कम) है।
आम गलतियाँ
- अंतराल को मौजूदा संतुलन पर मापना, पूर्ण रोज़गार उत्पादन पर नहीं। अंतराल Yf पर मापा जाता है।
- कहना कि अधिमाँग वास्तविक उत्पादन बढ़ाती है। पूर्ण रोज़गार पर उत्पादन नहीं बढ़ सकता; केवल कीमतें बढ़ती हैं।
- महँगाई रोकने को बॉन्ड खरीदने की सलाह देना। बॉन्ड खरीदने से पैसा बढ़ता है; माँग घटाने को RBI बॉन्ड बेचता है।
- चालू मज़दूरी पर काम न करना चाहने वाले को अनैच्छिक बेरोज़गार कहना। वह ऐच्छिक बेरोज़गारी है।