सरकारी बजट क्या है?
सरकारी बजट एक लिखित योजना है। इसमें एक वित्त वर्ष में सरकार की अनुमानित प्राप्तियाँ और अनुमानित व्यय होते हैं। भारत में वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।
संविधान (अनुच्छेद 112) इसे वार्षिक वित्तीय विवरण कहता है। इसके दो भाग हैं: राजस्व बजट और पूँजीगत बजट।
घर पर करके देखें
एक महीने के घर के पैसों की दो सूची बनाइए: आया पैसा और गया पैसा। हर मद पर लिखिए: इससे कर्ज़ या संपत्ति बदली (पूँजीगत) या नहीं (राजस्व)?
सरकारी बजट के उद्देश्य
- संसाधनों का पुनः आवंटन: पैसा ज़रूरी कामों (स्कूल, स्वास्थ्य) की ओर मोड़ना। हानिकारक चीज़ों (तंबाकू) पर ज़्यादा कर, उपयोगी चीज़ों पर सब्सिडी।
- आय की असमानता घटाना: अमीरों से ज़्यादा कर (प्रगतिशील कर), गरीबों पर खर्च (मुफ़्त राशन, छात्रवृत्ति)।
- आर्थिक स्थिरता: तेज़ी-मंदी पर काबू। महँगाई में खर्च कम या कर ज़्यादा; मंदी में खर्च ज़्यादा।
- सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन: रेलवे जैसे लोकहित वाले उद्यम चलाना।
- आर्थिक संवृद्धि: सड़क, बिजली, बंदरगाह बनाना ताकि उत्पादन बढ़े।
- क्षेत्रीय असमानता घटाना: पिछड़े इलाकों पर ज़्यादा खर्च।
घटक: प्राप्तियाँ
राजस्व प्राप्तियाँ
इनसे न कर्ज़ बनता है, न संपत्ति घटती है।
- कर राजस्व: प्रत्यक्ष कर (आयकर, निगम कर; जिस पर लगा वही चुकाता है) और अप्रत्यक्ष कर (GST, सीमा शुल्क; बोझ ख़रीदार पर चला जाता है)।
- गैर-कर राजस्व: सरकारी कंपनियों से ब्याज व लाभांश, फ़ीस, जुर्माना, लाइसेंस शुल्क, अनुदान।
पूँजीगत प्राप्तियाँ
इनसे कर्ज़ बनता है या संपत्ति घटती है।
- उधार (जनता, RBI या विदेश से): कर्ज़ बनता है।
- कर्ज़ों की वसूली: पहले दिए कर्ज़ वापस आना; संपत्ति घटती है।
- विनिवेश: सरकारी कंपनियों के शेयर बेचना; संपत्ति घटती है।
कर्ज़ वसूली और विनिवेश को गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ कहते हैं।
घटक: व्यय
राजस्व व्यय से न संपत्ति बनती है, न कर्ज़ घटता है। जैसे: वेतन, पेंशन, ब्याज, सब्सिडी, राज्यों को अनुदान।
पूँजीगत व्यय से संपत्ति बनती है या कर्ज़ घटता है। जैसे: सड़क, बाँध, अस्पताल बनाना, मशीन ख़रीदना, राज्यों को कर्ज़ देना, पुराना कर्ज़ चुकाना।
| जाँच | राजस्व | पूँजीगत |
|---|---|---|
| प्राप्ति | न कर्ज़, न संपत्ति बिकी | कर्ज़ बढ़ा या संपत्ति घटी |
| व्यय | न संपत्ति, न कर्ज़ घटा | संपत्ति बढ़ी या कर्ज़ घटा |
संतुलित, अधिशेष और घाटे का बजट
- संतुलित बजट: अनुमानित आय = अनुमानित खर्च। सुरक्षित लगता है, पर मंदी से लड़ने की गुंजाइश नहीं देता।
- अधिशेष बजट: आय > खर्च। महँगाई रोकने में उपयोगी, क्योंकि बाज़ार से पैसा खींचता है।
- घाटे का बजट: खर्च > आय (उधार को छोड़कर)। मंदी और विकास में उपयोगी, पर कर्ज़ बढ़ाता है। भारत समेत ज़्यादातर देश ऐसा बजट बनाते हैं।
घाटे के माप
1. राजस्व घाटा
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ। इसका मतलब है सरकार रोज़ के खर्च के लिए भी उधार ले रही है। यह ख़तरे का संकेत है।
2. राजकोषीय घाटा
राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)। यह सरकार के कुल उधार के बराबर है।
3. प्राथमिक घाटा
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान। यह पुराने कर्ज़ के ब्याज को छोड़कर, इस साल की ज़रूरत के लिए उधार दिखाता है।
ज़्यादा घाटा क्यों चिंता है
- ज़्यादा कर्ज़ = अगले साल ज़्यादा ब्याज (कर्ज़ का जाल)।
- सरकारी उधार से निजी कंपनियों के लिए कम पैसा बचता है।
- नोट छापकर पूरा करने से महँगाई बढ़ सकती है।
पर अगर उधार सड़क-बिजली पर लगे तो विकास भी बढ़ता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ
- राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ) = उधार
- प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
- गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ = कर्ज़ वसूली + विनिवेश
- GDP के % में घाटा = (घाटा ÷ GDP) × 100
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करें: (a) GST, (b) सरकारी कंपनी के शेयर बेचकर पैसा, (c) कर्ज़ पर ब्याज भुगतान, (d) बाँध बनाना।
(a) राजस्व प्राप्ति। (b) पूँजीगत प्राप्ति (विनिवेश)। (c) राजस्व व्यय। (d) पूँजीगत व्यय।
2. राजस्व प्राप्तियाँ 300, राजस्व व्यय 350। राजस्व घाटा?
350 − 300 = ₹50 करोड़।
3. कुल व्यय 450, राजस्व प्राप्तियाँ 300, कर्ज़ वसूली 10, विनिवेश 20। राजकोषीय घाटा?
गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ = 30। राजकोषीय घाटा = 450 − 330 = ₹120 करोड़ (यही उधार है)।
4. राजकोषीय घाटा 120, ब्याज 80। प्राथमिक घाटा?
120 − 80 = ₹40 करोड़।
5. राजकोषीय घाटा ₹6,000 करोड़, GDP ₹1,50,000 करोड़। GDP का कितना %?
6,000 ÷ 1,50,000 × 100 = 4%।
6. प्राथमिक घाटा शून्य है। इसका क्या अर्थ है?
राजकोषीय घाटा = ब्याज। सरकार केवल पुराने कर्ज़ का ब्याज चुकाने के लिए उधार ले रही है।
7. उधार 200, राजस्व घाटा 80, ब्याज 90। राजकोषीय और प्राथमिक घाटा ज्ञात करें; उधार का कितना भाग रोज़ के खर्च में गया?
राजकोषीय घाटा = 200; प्राथमिक = 200 − 90 = 110। 80/200 = 40% उधार रोज़ के खर्च में गया।
आम गलतियाँ
- कर्ज़ वसूली को राजस्व प्राप्ति मानना। इससे संपत्ति (दिया कर्ज़) घटती है, इसलिए यह पूँजीगत प्राप्ति है।
- शिक्षा का हर खर्च पूँजीगत मानना। शिक्षक का वेतन राजस्व व्यय है; स्कूल भवन बनाना पूँजीगत।
- राजकोषीय घाटा निकालते समय उधार को प्राप्तियों में जोड़ देना। राजकोषीय घाटा ख़ुद उधार है।
- प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा + ब्याज लिखना। सही है: घटा ब्याज।