भुगतान संतुलन क्या है?
भुगतान संतुलन (BoP) एक साल में किसी देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच हुए सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित रिकॉर्ड है।
- जमा (+): विदेशी पैसा अंदर लाए: निर्यात, प्राप्त भुगतान, विदेशी निवेश का आना।
- नामे (−): पैसा बाहर भेजे: आयात, भुगतान, हमारा विदेश में निवेश।
यह दोहरी प्रविष्टि पर बनता है, इसलिए कुल मिलाकर हमेशा संतुलित रहता है।
खाते और घटक
1. चालू खाता
इसमें वे लेन-देन हैं जिनसे संपत्ति या कर्ज़ का स्वामित्व नहीं बदलता।
- दृश्य व्यापार (वस्तुएँ): वस्तुओं का निर्यात-आयात। वस्तु निर्यात − वस्तु आयात = व्यापार संतुलन (BoT)।
- अदृश्य मदें: (क) सेवाएँ: IT, बैंकिंग, जहाज़रानी, पर्यटन; (ख) अंतरण: एकतरफ़ा भुगतान जैसे मज़दूरों का घर भेजा पैसा; (ग) आय: सीमा पार ब्याज, लाभ, लाभांश, मज़दूरी।
चालू खाता शेष = व्यापार संतुलन + शुद्ध अदृश्य मदें। ऋणात्मक हो तो चालू खाता घाटा (CAD)।
2. पूँजी खाता
इसमें वे लेन-देन हैं जो निवासियों की संपत्ति या कर्ज़ बदलते हैं।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): स्थायी नियंत्रण, जैसे कारख़ाना लगाना।
- विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेश (FPI): बिना नियंत्रण के शेयर-बॉन्ड ख़रीदना।
- उधार: विदेश से ऋण (बाहरी वाणिज्यिक उधार, सरकारी ऋण)।
- बैंकिंग पूँजी और NRI जमा।
3. भूल-चूक
आँकड़ों की गलती के लिए संतुलन मद।
घर पर करके देखें
घर की पाँच विदेशी चीज़ें (आयात) और विदेश में बिकने वाली एक भारतीय चीज़ लिखिए। हर एक किस खाते में जाएगी?
व्यापार संतुलन बनाम भुगतान संतुलन
| व्यापार संतुलन | भुगतान संतुलन | |
|---|---|---|
| शामिल | केवल वस्तुएँ | वस्तुएँ, सेवाएँ, अंतरण, आय, पूँजी |
| शेष | अधिशेष या घाटा हो सकता है | लेखे में हमेशा संतुलित |
| किसका भाग | चालू खाता | पूरा रिकॉर्ड |
स्वायत्त और समायोजक मदें
स्वायत्त लेन-देन अपने कारण (लाभ, ज़रूरत) से होते हैं: व्यापार, निवेश, प्रेषण। इन्हें 'रेखा के ऊपर' की मदें कहते हैं।
समायोजक लेन-देन केवल स्वायत्त मदों का अंतर भरने के लिए होते हैं: RBI का विदेशी मुद्रा भंडार घटाना-बढ़ाना या IMF से उधार। ये 'रेखा के नीचे' हैं।
भुगतान संतुलन अधिशेष और घाटा
- अधिशेष: स्वायत्त प्राप्तियाँ > स्वायत्त भुगतान। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है।
- घाटा: स्वायत्त भुगतान > स्वायत्त प्राप्तियाँ। भंडार घटता है या देश उधार लेता है।
यानी 'भुगतान संतुलन हमेशा संतुलित' समायोजक मदों को मिलाकर; 'भुगतान संतुलन घाटा' केवल स्वायत्त मदों का।
घाटा क्यों मायने रखता है
- भंडार घटने से रुपया कमज़ोर हो सकता है।
- लंबा घाटा विदेशी कर्ज़ बढ़ाता है।
- 1991 में भारत के भंडार कुछ हफ़्तों के आयात जितने ही बचे थे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- व्यापार संतुलन = वस्तु निर्यात − वस्तु आयात
- शुद्ध अदृश्य मदें = शुद्ध सेवाएँ + शुद्ध अंतरण + शुद्ध आय
- चालू खाता शेष = व्यापार संतुलन + शुद्ध अदृश्य मदें
- पूँजी खाता शेष = पूँजी अंतर्वाह − पूँजी बहिर्वाह
- कुल (स्वायत्त) शेष = चालू + पूँजी + भूल-चूक; भंडार में बदलाव इसे शून्य करता है
हल किए गए उदाहरण
1. वस्तु निर्यात ₹400, वस्तु आयात ₹500। व्यापार संतुलन?
400 − 500 = −₹100: व्यापार घाटा 100।
2. व्यापार घाटा 100, शुद्ध सेवाएँ +60, शुद्ध अंतरण +30, आय 0। चालू खाता?
−100 + 60 + 30 = −10: चालू खाता घाटा 10।
3. चालू या पूँजी खाता: (a) टाटा ने UK कंपनी ख़रीदी, (b) भारतीय पर्यटक पेरिस में, (c) NRI ने भारतीय बैंक में जमा किया, (d) Infosys को अमेरिकी ग्राहक से फ़ीस।
(a) पूँजी (FDI बहिर्वाह, नामे)। (b) चालू (सेवा आयात, नामे)। (c) पूँजी (अंतर्वाह, जमा)। (d) चालू (सेवा निर्यात, जमा)।
4. चालू खाता −10, पूँजी खाता +40। अधिशेष या घाटा? भंडार का क्या?
स्वायत्त कुल = +30: अधिशेष 30। भंडार 30 बढ़ेगा।
5. दृश्य निर्यात 800, आयात 1000, शुद्ध अदृश्य +150, शुद्ध पूँजी अंतर्वाह +30। CAD और कुल शेष?
BoT = −200; चालू = −50; कुल = −20: घाटा 20, भंडार 20 घटेगा।
6. चालू खाता घाटा 60 है। भंडार न बदले, इसके लिए पूँजी अंतर्वाह कितना चाहिए?
+60।
आम गलतियाँ
- कहना कि भुगतान संतुलन हमेशा घाटे या अधिशेष में रहता है। लेखे में यह हमेशा संतुलित है; घाटा/अधिशेष केवल स्वायत्त मदों का।
- प्रेषण को पूँजी खाते में डालना। यह एकतरफ़ा अंतरण है, चालू खाते में।
- व्यापार संतुलन और भुगतान संतुलन को एक मानना। व्यापार संतुलन में केवल वस्तुएँ।
- FDI को चालू खाते में रखना। यह पूँजी खाते की मद है।