लोग एक संसाधन के रूप में
देश के लोग सिर्फ़ खाने वाले मुँह नहीं हैं। वे ज़मीन या मशीन की तरह एक संसाधन हैं। प्रशिक्षित और स्वस्थ व्यक्ति ज़्यादा सामान बनाता है और बेहतर सेवा देता है।
मानव पूँजी यानी देश के लोगों में कौशल, ज्ञान और स्वास्थ्य का भंडार। मानव पूँजी निर्माण यानी लोगों पर ख़र्च करके इस भंडार को बढ़ाना।
भौतिक पूँजी बनाम मानव पूँजी
- भौतिक पूँजी (मशीन, इमारत) दिखती है और बिकती है। मानव पूँजी व्यक्ति के अंदर है, उससे अलग बिक नहीं सकती।
- भौतिक पूँजी इस्तेमाल से घिसती है (मूल्यह्रास)। मानव पूँजी बीमारी से घट सकती है, पर नई पढ़ाई से फिर बढ़ती है।
- भौतिक पूँजी आसानी से दूसरे देश जा सकती है। मानव पूँजी तभी जाती है जब लोग जाते हैं।
- मानव पूँजी से समाज को भी फ़ायदा होता है (पढ़ी-लिखी माँ पूरे परिवार को स्वस्थ रखती है)। इसे सामाजिक लाभ कहते हैं।
मानव पूँजी के स्रोत
- शिक्षा: स्कूल, कॉलेज और व्यावसायिक कोर्स ज्ञान और कौशल देते हैं।
- स्वास्थ्य: भोजन, साफ़ पानी, टीके और अस्पताल लोगों को काम के लायक रखते हैं।
- काम पर प्रशिक्षण: कंपनियाँ काम के दौरान सिखाती हैं, उत्पादन बढ़ता है।
- प्रवास: लोग बेहतर काम के लिए गाँव से शहर या विदेश जाते हैं। जाने का ख़र्च निवेश है क्योंकि बाद में आय बढ़ती है।
- सूचना: नौकरी, फ़ीस और स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी पर ख़र्च भी मानव पूँजी निर्माण है।
विकास में मानव पूँजी की भूमिका
- ज़्यादा उत्पादन: पढ़ा-लिखा मज़दूर उतने ही समय में ज़्यादा बनाता है।
- नए विचार और तकनीक: कुशल लोग नई विधियाँ खोजते और अपनाते हैं।
- भौतिक पूँजी का सही उपयोग: मशीन चलाने को प्रशिक्षित हाथ चाहिए।
- सामाजिक बदलाव: पढ़े-लिखे लोग छोटे, स्वस्थ परिवार रखते हैं।
मानव पूँजी और आर्थिक संवृद्धि
आर्थिक संवृद्धि यानी वास्तविक राष्ट्रीय आय में बढ़ोतरी। मानव पूँजी संवृद्धि बढ़ाती है और संवृद्धि से स्कूल-अस्पताल पर ख़र्च के लिए पैसा आता है। दोनों एक चक्र में एक-दूसरे को बढ़ाते हैं। भारत का सॉफ़्टवेयर क्षेत्र इसका उदाहरण है।
मानव पूँजी बनाम मानव विकास
मानव पूँजी शिक्षा-स्वास्थ्य को उत्पादन बढ़ाने का साधन मानती है। मानव विकास उन्हें अपने आप में लक्ष्य मानता है: हर व्यक्ति को पढ़ने और स्वस्थ रहने का हक़ है।
भारत में समस्याएँ
- बढ़ती जनसंख्या से स्कूल-अस्पताल पर दबाव।
- प्रतिभा पलायन (brain drain): कुशल लोग विदेश चले जाते हैं।
- काम पर प्रशिक्षण कम और कई जगह पढ़ाई की गुणवत्ता कमज़ोर।
- शिक्षा और स्वास्थ्य पर ख़र्च ज़रूरत से कम।
भारत में शिक्षा क्षेत्र का विकास
1951 से भारत में बहुत से स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बने। साक्षरता 1951 में लगभग 18% से बढ़कर 2011 की जनगणना में लगभग 74% हो गई। पुरुष-महिला का अंतर घटा है, पर ख़त्म नहीं हुआ।
शिक्षा पर ख़र्च
1950 के दशक में शिक्षा पर सरकारी ख़र्च GDP के 1% से कम था; अब लगभग 4% या थोड़ा ज़्यादा है। कोठारी आयोग (1964) ने 6% का लक्ष्य रखा; राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी यही कहती है।
उठाए गए कदम
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2009): 6–14 साल के बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा।
- मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील)।
- समग्र शिक्षा और युवाओं के लिए कौशल योजनाएँ।
- शिक्षा के लिए कर पर शिक्षा उपकर (cess)।
आगे की ज़रूरत
बेहतर पढ़ाई, ज़्यादा लड़कियों और गरीब बच्चों का स्कूल पूरा करना, और उच्च शिक्षा को रोज़गार कौशल से जोड़ना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मानव पूँजी: लोगों में कौशल, ज्ञान और स्वास्थ्य का भंडार।
- मानव पूँजी निर्माण: शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, प्रवास और सूचना पर ख़र्च से इस भंडार को बढ़ाना।
- भौतिक पूँजी: मशीन, इमारत जैसी मनुष्य-निर्मित चीज़ें।
- प्रतिभा पलायन: कुशल लोगों का देश छोड़ना।
- मानव विकास: शिक्षा-स्वास्थ्य को अपने आप में लक्ष्य मानना।
हल किए गए उदाहरण
1. रिया के परिवार ने नर्सिंग कोर्स पर ₹20,000 ख़र्च किए। अब वह हर महीने ₹8,000 ज़्यादा कमाती है। ख़र्च कितने महीने में वसूल होगा?
20,000 ÷ 8,000 = 2.5 महीने। इसके बाद की अतिरिक्त आय निवेश का लाभ है। इसलिए शिक्षा को निवेश कहते हैं।
2. बिना प्रशिक्षण मज़दूर रोज़ 40 कमीज़ बनाता है, प्रशिक्षण के बाद 60। उत्पादन कितने प्रतिशत बढ़ा?
(60 − 40) ÷ 40 × 100 = 50%।
3. GDP = ₹300 लाख करोड़; शिक्षा ख़र्च = ₹12 लाख करोड़। यह GDP का कितना % है और 6% से कितना दूर?
12 ÷ 300 × 100 = 4%। 6% लक्ष्य से 2 प्रतिशत अंक कम।
4. वर्गीकरण करें: (क) खराद मशीन ख़रीदना, (ख) पोलियो टीकाकरण, (ग) IT नौकरी के लिए युवक का पुणे जाना।
(क) भौतिक पूँजी; (ख) स्वास्थ्य → मानव पूँजी; (ग) प्रवास → मानव पूँजी।
आम गलतियाँ
- मानव पूँजी को मशीन की तरह बेचने योग्य मानना। वह व्यक्ति से अलग नहीं होती।
- सिर्फ़ स्कूली पढ़ाई गिनना। स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, प्रवास, सूचना भी स्रोत हैं।
- मानव पूँजी और मानव विकास को एक समझना।
- सिर्फ़ साक्षरता को अच्छी मानव पूँजी मान लेना; गुणवत्ता और स्वास्थ्य भी ज़रूरी।