विकास से क्या वादा? अलग-अलग लक्ष्य
लोगों के विकास के लक्ष्य अलग होते हैं। भूमिहीन किसान ज़्यादा दिन काम और बेहतर मज़दूरी चाहता है। अमीर किसान फ़सल का ऊँचा समर्थन मूल्य चाहता है। अमीर परिवार की लड़की भाई जैसी आज़ादी चाहती है। नदी किनारे रहने वाले ऐसा बाँध नहीं चाहते जो घर डुबो दे, जबकि उद्योग उसकी बिजली चाहते हैं।
यानी अलग लोगों के लक्ष्य अलग, और परस्पर विरोधी भी हो सकते हैं। एक का विकास दूसरे का विनाश हो सकता है।
आय और दूसरे लक्ष्य
ज़्यादातर लोग ज़्यादा आय चाहते हैं। पर लोग बराबर व्यवहार, आज़ादी, सुरक्षा, सम्मान और काम की सुरक्षित जगह भी चाहते हैं। ये अभौतिक लक्ष्य हैं: इन्हें नापना आसान नहीं, पर ये बहुत अहम हैं।
नौकरी करने वाली महिला का घर और समाज में सम्मान बढ़ता है। घर से दूर अच्छी नौकरी से, परिवार के पास थोड़ी कम वेतन वाली नौकरी बेहतर लग सकती है। जीवन की गुणवत्ता सिर्फ़ पैसे पर नहीं टिकी।
देशों की तुलना: राष्ट्रीय और प्रति व्यक्ति आय
राष्ट्रीय आय देश के सभी निवासियों की कुल आय है। यह तुलना के लिए ठीक नहीं, क्योंकि देशों की आबादी अलग है।
प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) = कुल आय ÷ कुल आबादी। विश्व बैंक इसी से देशों को बाँटता है। ज़्यादा प्रति व्यक्ति आय वाले 'उच्च आय' या अमीर देश; कम वाले 'निम्न आय' देश। भारत निम्न-मध्यम आय वाला देश है।
औसत असमानता छिपाता है
दो देशों की औसत आय बराबर हो सकती है, पर एक में सब परिवार लगभग बराबर कमाते हों और दूसरे में कुछ बहुत अमीर और ज़्यादातर गरीब। इसलिए औसत को सावधानी से इस्तेमाल करें।
सार्वजनिक सुविधाएँ, स्वास्थ्य और शिक्षा
पैसा हर चीज़ नहीं ख़रीद सकता। साफ़ माहौल, प्रदूषण-मुक्त हवा, असली दवाइयाँ और संक्रामक रोगों से बचाव के लिए अक्सर सार्वजनिक सुविधाएँ चाहिए, जो मिलकर दी जाती हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन), स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र इसके उदाहरण हैं। केरल में अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं से शिशु मृत्यु दर कम है।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): 1000 जीवित जन्मों में से एक साल से पहले मरने वाले बच्चे।
- साक्षरता दर: 7 साल और उससे बड़े लोगों में पढ़-लिख सकने वालों का हिस्सा।
- निवल उपस्थिति अनुपात: किसी आयु-वर्ग के स्कूल जाने वाले बच्चों का हिस्सा।
- जीवन प्रत्याशा: जन्म के समय औसतन कितने साल जीने की उम्मीद।
मानव विकास सूचकांक (HDI)
UNDP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) की मानव विकास रिपोर्ट देशों की तुलना HDI से करती है, जो जोड़ता है:
- स्वास्थ्य: जन्म के समय जीवन प्रत्याशा।
- शिक्षा: बड़ों के स्कूली वर्षों का औसत और बच्चों के अपेक्षित स्कूली वर्ष।
- आय: प्रति व्यक्ति आय, हर देश में पैसे से क्या ख़रीदा जा सकता है, उसके हिसाब से (अमेरिकी डॉलर, PPP)।
भारत से कम आय वाले कुछ पड़ोसी देश बेहतर स्वास्थ्य या शिक्षा के कारण HDI में आगे हैं। यानी आय ही सब कुछ नहीं।
विकास की धारणीयता
धारणीय (सतत) विकास वह है जो आज की ज़रूरतें पूरी करे पर आने वाली पीढ़ियों का नुकसान न करे। कई वैज्ञानिक चेताते हैं कि आज का विकास शायद टिक न पाए।
- भूजल नवीकरणीय है, क्योंकि बारिश उसे भरती है। पर भारत के कई हिस्सों में इसका ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है और जल स्तर तेज़ी से गिर रहा है।
- कच्चा तेल और कोयला जैसे अनवीकरणीय संसाधन इस्तेमाल से ख़त्म हो जाएँगे। नए भंडार मिल सकते हैं, पर भंडार सीमित है।
पर्यावरण का नुकसान देशों की सीमाएँ नहीं मानता; यह सबको प्रभावित करता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ आबादी
- औसत = सभी मानों का जोड़ ÷ मानों की संख्या
- शिशु मृत्यु दर = 1000 जीवित जन्मों पर 1 साल से पहले मरने वाले बच्चे
- साक्षरता दर = 7+ आयु के साक्षर लोग ÷ 7+ आयु के लोग × 100
- HDI = स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा) + शिक्षा (स्कूली वर्ष) + आय (प्रति व्यक्ति, PPP)
- धारणीय विकास: आज की ज़रूरतें पूरी हों, पर आने वाली पीढ़ियों का नुकसान न हो।
- नवीकरणीय संसाधन: प्रकृति भरती है (भूजल); अनवीकरणीय: ख़त्म होंगे (तेल, कोयला)।
हल किए गए उदाहरण
1. देश A की राष्ट्रीय आय ₹120 करोड़ और आबादी 4 करोड़ है। प्रति व्यक्ति आय निकालिए।
प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ आबादी = ₹120 करोड़ ÷ 4 करोड़ लोग = ₹30 प्रति व्यक्ति।
2. पाँच परिवारों की मासिक आय ₹10,000, ₹12,000, ₹8,000, ₹10,000 और ₹10,000 है। औसत निकालिए।
जोड़ = 50,000। औसत = 50,000 ÷ 5 = ₹10,000।
3. देश X की आय: 500, 500, 500, 500, 500। देश Y: 200, 300, 300, 200, 1500। औसत मिलाइए, आप कहाँ रहना चाहेंगे?
X: 2500 ÷ 5 = 500। Y: 2500 ÷ 5 = 500। औसत बराबर, पर Y बहुत असमान; ज़्यादातर लोग X चुनेंगे।
4. दो देशों की तुलना कुल राष्ट्रीय आय से करना ठीक क्यों नहीं?
आबादी अलग है। वही कुल आय ज़्यादा लोगों में बँटे तो हर व्यक्ति को कम मिलता है, इसलिए प्रति व्यक्ति आय लेते हैं।
5. एक राज्य में 7+ आयु के 1,200 लोगों में 900 साक्षर हैं। साक्षरता दर निकालिए।
साक्षरता दर = 900 ÷ 1,200 × 100 = 75%।
6. एक शहर में 1,600 जीवित जन्मों में 24 बच्चे एक साल से पहले मरे। शिशु मृत्यु दर निकालिए।
IMR = 24 ÷ 1,600 × 1000 = 15 प्रति 1000 जीवित जन्म।
आम गलतियाँ
- देशों की तुलना कुल राष्ट्रीय आय से करना। आबादी को ध्यान में रखने वाली प्रति व्यक्ति आय लें।
- यह सोचना कि ऊँचा औसत मतलब सब खुशहाल। औसत बड़ी असमानता छिपा सकता है।
- यह मानना कि सिर्फ़ आय विकास नापती है। स्वास्थ्य, शिक्षा, आज़ादी और सुरक्षा भी ज़रूरी।
- भूजल को अनवीकरणीय मानना। यह नवीकरणीय है, पर भरने से ज़्यादा तेज़ी से निकाला जा रहा है।