दो-क्षेत्रक अर्थव्यवस्था में आय का चक्रीय प्रवाह
मान लो केवल दो क्षेत्रक हैं: परिवार और फर्में। न सरकार, न विदेश व्यापार; परिवार पूरी आय खर्च करते हैं; फर्में सारा उत्पादन परिवारों को बेचती हैं।
- वास्तविक प्रवाह: परिवार फर्मों को साधन सेवाएँ (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) देते हैं; फर्में परिवारों को वस्तुएँ और सेवाएँ देती हैं।
- मौद्रिक प्रवाह: फर्में परिवारों को साधन भुगतान (किराया, मज़दूरी, ब्याज, लाभ) देती हैं; परिवार फर्मों को वस्तुओं का दाम (उपभोग व्यय) देते हैं।
दोनों प्रवाह उलटी दिशाओं में चलते हैं। एक का खर्च दूसरे की आय है, इसलिए पैसा घूमता रहता है: आय का चक्रीय प्रवाह।
रिसाव और अंतःक्षेपण
परिवार आय का हिस्सा बचाएँ तो यह रिसाव है। फर्में वह बचत उधार लेकर निवेश करें तो यह अंतःक्षेपण है। प्रवाह तभी स्थिर रहता है जब रिसाव = अंतःक्षेपण (S = I)।
तीनों विधियाँ एक ही जवाब क्यों देती हैं
साल भर में घेरे को तीन जगह मापा जा सकता है:
- फर्मों पर: बनी वस्तुओं का मूल्य (इनपुट घटाकर) → उत्पाद / मूल्य वर्धित विधि।
- जहाँ पैसा परिवारों तक पहुँचे: साधन आय → आय विधि।
- जहाँ परिवार और दूसरे खर्च करें: अंतिम व्यय → व्यय विधि।
बने हुए मूल्य का हर रुपया किसी को आय के रूप में मिलता है और कोई उसे खरीदता है। इसलिए उत्पाद = आय = व्यय।
मूल्य वर्धित (उत्पाद) विधि
फर्म का मूल्य वर्धन = उत्पादन का मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग। उत्पादन का मूल्य = बिक्री + स्टॉक में बदलाव।
किसान: उत्पादन 50, इनपुट 0 → 50। चक्की: 80 − 50 = 30। बेकर: 100 − 80 = 20। GVA = 100।
चरण: (1) उत्पादकों को प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक क्षेत्र में बाँटो; (2) हर एक का सकल मूल्य वर्धन (GVAmp) निकालो; (3) जोड़कर GDPmp पाओ; (4) मूल्यह्रास और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाओ, NFIA जोड़ो, राष्ट्रीय आय मिलेगी।
सावधानियाँ
- मध्यवर्ती वस्तुएँ न गिनो (दोहरी गणना से बचो)।
- पुरानी वस्तुओं की बिक्री न गिनो (केवल डीलर का कमीशन नया मूल्य है)।
- स्व-उपभोग के लिए उत्पादन (किसान का रखा अनाज) और अपने मकान का आरोपित किराया गिनो।
- घर के बिना-पैसे के काम (माँ का घर पर खाना बनाना) नहीं गिनते, क्योंकि उनका मूल्य आँकना कठिन है।
आय विधि
देश के अंदर पैदा हुई सब साधन आय जोड़ो:
- कर्मचारियों का पारिश्रमिक: मज़दूरी, वेतन, बोनस, सामाजिक सुरक्षा में नियोक्ता का अंशदान।
- प्रचालन अधिशेष: किराया + रॉयल्टी + ब्याज + लाभ (लाभांश, निगम कर, अवितरित लाभ)।
- स्व-नियोजितों की मिश्रित आय (दुकानदार जो अपना श्रम और पूंजी लगाता है)।
जोड़ = घरेलू आय (NDPfc)। NFIA जोड़ने पर राष्ट्रीय आय (NNPfc)।
सावधानियाँ
- हस्तांतरण भुगतान (छात्रवृत्ति, वृद्धावस्था पेंशन, उपहार) न जोड़ो: बदले में कोई सेवा नहीं।
- आकस्मिक लाभ (लॉटरी) या पुरानी संपत्ति बेचकर पूंजीगत लाभ न जोड़ो।
- उपभोग के कर्ज़ और सरकारी कर्ज़ पर ब्याज आम तौर पर हस्तांतरण माना जाता है।
व्यय विधि
देश में बनी वस्तुओं और सेवाओं पर अंतिम खर्च जोड़ो:
GDPmp = C + I + G + (X − M)
- C = निजी अंतिम उपभोग व्यय (परिवार)।
- I = सकल घरेलू पूंजी निर्माण (स्थायी निवेश + स्टॉक में बदलाव)।
- G = सरकारी अंतिम उपभोग व्यय।
- X − M = शुद्ध निर्यात।
सावधानियाँ
- मध्यवर्ती वस्तुओं पर खर्च न जोड़ो।
- सरकार के हस्तांतरण भुगतान न जोड़ो।
- शेयर, बॉन्ड या पुरानी वस्तुएँ खरीदना न जोड़ो (ये वित्तीय या पुरानी परिसंपत्तियाँ हैं, नया उत्पादन नहीं)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मूल्य वर्धन = उत्पादन का मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग
- उत्पादन का मूल्य = बिक्री + स्टॉक में बदलाव
- NDPfc (आय विधि) = कर्मचारियों का पारिश्रमिक + प्रचालन अधिशेष + मिश्रित आय
- GDPmp (व्यय विधि) = C + I + G + (X − M)
- राष्ट्रीय आय (NNPfc) = NDPfc + NFIA
हल किए गए उदाहरण
1. किसान चक्की को ₹60 का गेहूँ बेचता है। चक्की बेकर को ₹90 का आटा बेचती है। बेकर परिवारों को ₹130 की ब्रेड बेचता है। हर एक का मूल्य वर्धन और GDP निकालो।
किसान 60 − 0 = 60; चक्की 90 − 60 = 30; बेकर 130 − 90 = 40। GDP = 60 + 30 + 40 = 130 = अंतिम ब्रेड का मूल्य।
2. फर्म की बिक्री ₹500, आरंभिक स्टॉक ₹40, अंतिम स्टॉक ₹70, कच्चा माल ₹200। उत्पादन का मूल्य और सकल मूल्य वर्धन?
स्टॉक में बदलाव = 70 − 40 = 30। उत्पादन का मूल्य = 500 + 30 = 530। GVA = 530 − 200 = ₹330।
3. कर्मचारियों का पारिश्रमिक 400, किराया 60, ब्याज 50, लाभ 120, मिश्रित आय 170, NFIA −10। घरेलू आय और राष्ट्रीय आय?
घरेलू आय (NDPfc) = 400 + 60 + 50 + 120 + 170 = 800। राष्ट्रीय आय = 800 + (−10) = 790।
4. निजी उपभोग 700, सरकारी उपभोग 150, सकल निवेश 200, निर्यात 60, आयात 90। GDPmp?
GDPmp = 700 + 200 + 150 + (60 − 90) = 1020।
5. राष्ट्रीय आय में क्या शामिल होगा? (क) वृद्धावस्था पेंशन, (ख) अपने मकान का किराया, (ग) पुरानी कार डीलर का कमीशन, (घ) शेयर खरीदना।
(ख) हाँ, आरोपित किराया एक सेवा है; (ग) हाँ, डीलर की सेवा नई है। (क) नहीं, हस्तांतरण; (घ) नहीं, वित्तीय परिसंपत्ति।
6. दो-क्षेत्रक अर्थव्यवस्था में परिवार ₹1000 कमाते और ₹800 खर्च करते हैं। फर्में ₹200 निवेश करती हैं। क्या प्रवाह स्थिर है?
बचत = 1000 − 800 = 200 = निवेश। रिसाव = अंतःक्षेपण, तो चक्रीय प्रवाह ₹1000 पर स्थिर है।
आम गलतियाँ
- मूल्य वर्धन की जगह सब फर्मों की कुल बिक्री जोड़ना। यह दोहरी गणना है।
- आय विधि में हस्तांतरण भुगतान (पेंशन, छात्रवृत्ति) जोड़ना। कोई उत्पादक सेवा नहीं दी गई।
- उत्पादन का मूल्य निकालते समय स्टॉक में बदलाव भूल जाना।
- व्यय विधि में पुरानी वस्तुओं की खरीद जोड़ना। वे बनने वाले साल में गिनी जा चुकी हैं।