व्यक्तिगत और बाज़ार माँग
माँग = किसी दी गई कीमत और समय पर खरीदार वस्तु की जितनी मात्रा खरीदना चाहता और खरीद सकता है। पैसे के बिना इच्छा माँग नहीं है।
बाज़ार माँग = हर कीमत पर सब खरीदारों की माँग का जोड़ (क्षैतिज योग)।
| कीमत ₹ | A | B | बाज़ार |
|---|---|---|---|
| 10 | 2 | 1 | 3 |
| 8 | 4 | 2 | 6 |
| 6 | 6 | 4 | 10 |
| 4 | 8 | 6 | 14 |
| 2 | 10 | 8 | 18 |
माँग के निर्धारक
- अपनी कीमत: कीमत ऊपर, मात्रा नीचे (माँग का नियम)।
- आय: सामान्य वस्तु की माँग आय के साथ बढ़ती है; निम्नस्तरीय वस्तु (जैसे मोटा अनाज) की माँग आय बढ़ने पर घटती है।
- संबंधित वस्तुओं की कीमत: स्थानापन्न (चाय-कॉफ़ी): कॉफ़ी महँगी → चाय की माँग बढ़ी। पूरक (कार-पेट्रोल): पेट्रोल महँगा → कार की माँग घटी।
- रुचि और पसंद: फ़ैशन, विज्ञापन, मौसम।
- भविष्य की कीमतों की उम्मीद।
- खरीदारों की संख्या और आय का बँटवारा: बाज़ार माँग पर असर।
माँग फलन: Dx = f(Px, Y, Pr, T, E, N)।
माँग अनुसूची और माँग वक्र
माँग अनुसूची कीमतों और माँगी मात्राओं की तालिका है। उसका ग्राफ़ माँग वक्र है: y-अक्ष पर कीमत, x-अक्ष पर मात्रा। यह आम तौर पर नीचे ढलता है।
माँग का नियम
अन्य बातें समान रहने पर, कीमत घटे तो माँगी मात्रा बढ़ती है और कीमत बढ़े तो घटती है।
क्यों? (1) प्रतिस्थापन प्रभाव: वस्तु दूसरों से सस्ती हो जाती है। (2) आय प्रभाव: कम कीमत से वास्तविक आय बढ़ती है। (3) ह्रासमान MU। (4) कम कीमत पर नए खरीदार आते हैं।
अपवाद: गिफ़ेन वस्तुएँ, प्रतिष्ठा वस्तुएँ, भविष्य में कीमत बढ़ने का डर, अनिवार्य वस्तुएँ।
माँग वक्र पर संचलन बनाम खिसकाव
| वक्र पर संचलन | वक्र में खिसकाव |
|---|---|
| कारण: अपनी कीमत बदली | कारण: कोई और कारक बदला |
| विस्तार (कीमत घटी, ज़्यादा खरीद) या संकुचन (कीमत बढ़ी, कम खरीद) | वृद्धि (वक्र दाएँ) या कमी (वक्र बाएँ) |
| वही वक्र | नया वक्र |
दाएँ खिसकाव के उदाहरण: आय बढ़ी (सामान्य वस्तु), स्थानापन्न महँगा हुआ, पूरक सस्ता हुआ, वस्तु फ़ैशन में आई।
माँग की कीमत लोच
माँग की कीमत लोच (Ed) बताती है कि कीमत बदलने पर माँगी मात्रा कितनी तेज़ी से बदलती है। ऋण चिह्न छोड़ देते हैं।
श्रेणियाँ
- Ed = 0: पूर्णतः बेलोचदार (खड़ी रेखा)।
- Ed < 1: बेलोचदार।
- Ed = 1: इकाई लोचदार (आयताकार अतिपरवलय)।
- Ed > 1: लोचदार।
- Ed = ∞: पूर्णतः लोचदार (पड़ी रेखा)।
प्रतिशत विधि
Ed = (मात्रा में % परिवर्तन) ÷ (कीमत में % परिवर्तन) = (ΔQ/ΔP) × (P/Q), मूल P और Q लेकर।
कुल व्यय विधि
| कीमत घटी, TE… | Ed |
|---|---|
| बढ़ा | > 1 |
| वही रहा | = 1 |
| घटा | < 1 |
TE = P × Q। Ed > 1 पर कीमत और TE उलटी दिशा में, Ed < 1 पर एक ही दिशा में चलते हैं।
ज्यामितीय (बिंदु) विधि
सीधी रेखा पर Ed = निचला खंड ÷ ऊपरी खंड। मध्य बिंदु पर Ed = 1, ऊपर > 1, नीचे < 1।
लोच को प्रभावित करने वाले कारक
- वस्तु का स्वभाव: अनिवार्य बेलोचदार, विलासिता लोचदार।
- निकट स्थानापन्न: ज़्यादा स्थानापन्न → ज़्यादा लोच।
- आय का हिस्सा: बहुत छोटा हिस्सा (नमक, माचिस) → बेलोचदार।
- उपयोगों की संख्या: कई उपयोग (बिजली) → लोचदार।
- समय: लंबा समय → ज़्यादा लोच।
- आदत: आदत वाली वस्तुएँ बेलोचदार।
- उपभोग टाल सकें तो लोचदार।
घर पर करके देखें
परिवार के 5 लोगों से पूछें कि ₹20, ₹15, ₹10 और ₹5 पर वे कितने समोसे लेंगे। हर कीमत पर जोड़ें (बाज़ार माँग), वक्र बनाएँ, और ₹20 से ₹15 के बीच प्रतिशत विधि लगाएँ। फिर हर कीमत पर कुल खर्च से जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बाज़ार माँग = हर कीमत पर व्यक्तिगत माँगों का योग
- Ed = (% ΔQ) ÷ (% ΔP) = (ΔQ/ΔP) × (P/Q)
- TE = P × Q; P↓ TE↑ ⇒ Ed > 1; TE वही ⇒ Ed = 1; TE↓ ⇒ Ed < 1
- बिंदु विधि: Ed = निचला खंड ÷ ऊपरी खंड
हल किए गए उदाहरण
1. कीमत ₹10 से ₹8, मात्रा 4 से 8। Ed?
%ΔP = −20%। %ΔQ = 100%। Ed = 100/20 = 5 (लोचदार)।
2. कीमत ₹20 से ₹25, मात्रा 100 से 90। Ed?
%ΔP = 25%; %ΔQ = −10%। Ed = 10/25 = 0.4 (बेलोचदार)।
3. Ed = 2। कीमत 10% घटी। मात्रा कितने % बढ़ेगी?
%ΔQ = 2 × 10 = 20%।
4. ₹5 पर 40 इकाई, ₹4 पर 50 इकाई। कुल व्यय विधि लगाएँ।
TE ₹5 पर = 200; ₹4 पर = 200। TE वही, इसलिए Ed = 1।
5. Ed = 1.5; कीमत ₹40 से ₹44, मूल मात्रा 200। नई मात्रा?
%ΔP = 10%। %ΔQ = 15% कमी = 30 इकाई। नई मात्रा = 170।
6. कॉफ़ी महँगी हुई। चाय के माँग वक्र पर क्या असर?
चाय स्थानापन्न है, इसलिए चाय की माँग बढ़ेगी: पूरा वक्र दाएँ खिसकेगा।
आम गलतियाँ
- कीमत घटने से मात्रा बढ़ने को "माँग में वृद्धि" कहना। यह विस्तार (संचलन) है।
- प्रतिशत विधि में नई कीमत और मात्रा को आधार बनाना। मूल मान लें।
- माँग वक्र के ढलान को लोच मान लेना। सीधी रेखा का ढलान हर जगह एक है पर हर बिंदु पर Ed अलग।
- निम्नस्तरीय वस्तु को सिर्फ़ घटिया गुणवत्ता समझना। यह वह वस्तु है जिसकी माँग आय बढ़ने पर घटे।