उत्पादक संतुलन: MR–MC विधि
लाभ (π) = TR − TC। फ़र्म अधिकतम लाभ चाहती है।
उत्पादक संतुलन वह उत्पादन है जहाँ लाभ अधिकतम हो। शर्तें:
- MR = MC।
- उस उत्पादन पर MC बढ़ती हुई हो (MC, MR को नीचे से काटे); यानी इसके बाद MC > MR।
कारण: MR > MC हो तो एक और इकाई आगम में लागत से ज़्यादा जोड़ती है, इसलिए और बनाएँ। MR < MC हो तो आख़िरी इकाई लाभ घटाती है, इसलिए कम बनाएँ।
| q | MR (= P) | MC | जुड़ा लाभ (MR − MC) |
|---|---|---|---|
| 1 | 50 | 40 | 10 |
| 2 | 50 | 30 | 20 |
| 3 | 50 | 20 | 30 |
| 4 | 50 | 30 | 20 |
| 5 | 50 | 50 | 0 |
| 6 | 50 | 70 | −20 |
संतुलन q = 5 पर। यही बिंदु है जहाँ TR − TC सबसे ज़्यादा है (TR − TC विधि)।
पूर्ति और बाज़ार पूर्ति
पूर्ति = किसी समय में हर कीमत पर फ़र्म वस्तु की जितनी मात्रा बेचने को तैयार और सक्षम है। स्टॉक कुल रखी मात्रा है; पूर्ति उसका वह हिस्सा है जो कीमत पर बेचने को रखा गया।
बाज़ार पूर्ति = हर कीमत पर सब फ़र्मों की पूर्ति का जोड़ (क्षैतिज योग)।
| कीमत ₹ | फ़र्म A | फ़र्म B | बाज़ार |
|---|---|---|---|
| 4 | 2.5 | 0 | 2.5 |
| 6 | 5 | 3 | 8 |
| 8 | 7.5 | 6 | 13.5 |
| 10 | 10 | 9 | 19 |
पूर्ति के निर्धारक
- अपनी कीमत: ऊँची कीमत, ज़्यादा पूर्ति (पूर्ति का नियम)।
- आगतों की कीमत: महँगे आगत, लागत बढ़ी, पूर्ति घटी।
- तकनीक: बेहतर तकनीक से लागत घटी, पूर्ति बढ़ी।
- कर और आर्थिक सहायता: इकाई कर से लागत बढ़ती (पूर्ति घटती); सहायता से घटती (पूर्ति बढ़ती)।
- अन्य वस्तुओं की कीमत: गेहूँ महँगा हो तो किसान धान से ज़मीन हटा सकता है, धान की पूर्ति घटती है।
- फ़र्मों की संख्या: ज़्यादा फ़र्में, ज़्यादा बाज़ार पूर्ति।
- फ़र्म के उद्देश्य और उम्मीदें: कल कीमत बढ़ने की उम्मीद हो तो आज पूर्ति रोक सकती है।
पूर्ति अनुसूची, पूर्ति वक्र और पूर्ति का नियम
पूर्ति अनुसूची कीमतों और पूर्ति की मात्राओं की तालिका है; उसका ग्राफ़ पूर्ति वक्र है, जो आम तौर पर ऊपर चढ़ता है।
पूर्ति का नियम: अन्य बातें समान रहें तो कीमत बढ़ने पर पूर्ति की मात्रा बढ़ती और घटने पर घटती है। कारण: ऊँची कीमत पर ऊँची MC वाली इकाइयाँ बनाना भी लाभदायक हो जाता है। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फ़र्म का पूर्ति वक्र न्यूनतम AVC से ऊपर MC वक्र का बढ़ता भाग है।
पूर्ति वक्र पर संचलन बनाम खिसकाव
| संचलन | खिसकाव |
|---|---|
| कारण: अपनी कीमत बदली | कारण: कोई और कारक बदला |
| विस्तार (कीमत ऊपर, ज़्यादा पूर्ति) / संकुचन (कीमत नीचे, कम पूर्ति) | वृद्धि (दाएँ) / कमी (बाएँ) |
दाएँ खिसकाव: बेहतर तकनीक, सस्ते आगत, आर्थिक सहायता, ज़्यादा फ़र्में। बाएँ: महँगे आगत, नया कर, कम फ़र्में, दूसरी वस्तु महँगी।
पूर्ति की कीमत लोच (प्रतिशत विधि)
Es = पूर्ति की मात्रा में % परिवर्तन ÷ कीमत में % परिवर्तन = (ΔQ/ΔP) × (P/Q), मूल P और Q लेकर। Es धनात्मक होती है क्योंकि कीमत और पूर्ति साथ चलते हैं।
- Es = 0: पूर्णतः बेलोचदार (खड़ी)।
- Es < 1: बेलोचदार (मात्रा अक्ष को काटती सीधी रेखा)।
- Es = 1: इकाई (मूल बिंदु से गुज़रती कोई भी सीधी रेखा)।
- Es > 1: लोचदार (कीमत अक्ष को काटती सीधी रेखा)।
- Es = ∞: पूर्णतः लोचदार (पड़ी)।
Es समय, वस्तु के स्वभाव (जल्दी खराब होने वाली वस्तुएँ कम लोचदार), उत्पादन बढ़ाने की लागत और खाली क्षमता पर निर्भर है।
घर पर करके देखें
किसी फल वाले से पूछें: "अगर कल आम ₹20 किलो महँगा हो जाए, तो क्या आप ज़्यादा लाएँगे? अगले हफ़्ते कितना ज़्यादा?" % बदलाव लिखें और कल व अगले हफ़्ते की Es निकालें। अगले हफ़्ते की Es बड़ी क्यों है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लाभ = TR − TC
- संतुलन: MR = MC और MC बढ़ती (इसके बाद MC > MR)
- बाज़ार पूर्ति = हर कीमत पर फ़र्मों की पूर्ति का योग
- Es = (% ΔQs) ÷ (% ΔP) = (ΔQ/ΔP) × (P/Q)
- मूल से रेखा: Es = 1; कीमत अक्ष को काटे: Es > 1; मात्रा अक्ष को काटे: Es < 1
हल किए गए उदाहरण
1. कीमत ₹50। इकाई 1 से 6 की MC: 40, 30, 20, 30, 50, 70। संतुलन उत्पादन?
q = 5 पर MR = MC = 50 और MC बढ़ रही है। इसलिए q = 5।
2. q = 2 (MC घटती) और q = 4 (MC बढ़ती) दोनों पर MR = MC = 30। संतुलन कौन-सा?
q = 4, क्योंकि MC बढ़ती हुई होनी चाहिए। q = 2 पर और बनाने से लाभ बढ़ता है।
3. कीमत ₹10 से ₹12; पूर्ति 100 से 130। Es?
%ΔQ = 30%, %ΔP = 20%। Es = 1.5 (लोचदार)।
4. Es = 2। कीमत 5% बढ़ी। पूर्ति 400 थी। नई मात्रा?
%ΔQ = 10% = 40। नई मात्रा = 440।
5. Es = 0.5। पूर्ति 200 से 220। कीमत कितने % बढ़ी?
%ΔQ = 10%। %ΔP = 10/0.5 = 20%।
6. सरकार खाद पर सहायता देती है। गेहूँ की पूर्ति?
उत्पादन लागत घटती है, पूर्ति बढ़ती है: वक्र दाएँ खिसकता है।
आम गलतियाँ
- पहले MR = MC बिंदु पर रुक जाना, जबकि वहाँ MC घट रही हो।
- ऊँची कीमत से पूर्ति मात्रा बढ़ने को "पूर्ति में वृद्धि" कहना। यह विस्तार (संचलन) है।
- प्रतिशत विधि में नए मानों को आधार बनाना। मूल P और Q लें।
- हर सीधी पूर्ति रेखा की Es = 1 मानना। सिर्फ़ मूल बिंदु से गुज़रने वाली की।