Romania Clasa a XI-a Economics
अध्याय: 4
1. The consumer
Needs, resources and demand
- व्यष्टि अर्थशास्त्र का परिचय और उत्पादन संभावना वक्र – व्यष्टि अर्थशास्त्र एक खरीदार या एक फ़र्म जैसी छोटी इकाइयों को पढ़ता है; समष्टि अर्थशास्त्र पूरी अर्थव्यवस्था को। संसाधन दुर्लभ हैं और उनके कई उपयोग हैं, इसलिए हर अर्थव्यवस्था को तय करना होता है कि क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन हो। उत्पादन संभावना वक्र (PPC) दो वस्तुओं के वे सबसे अच्छे मेल दिखाता है जो सारे संसाधन पूरे लगाने पर बन सकते हैं। इस पर चलने की एक अवसर लागत होती है जो आम तौर पर बढ़ती है, इसलिए वक्र अवतल होता है।
2. The producer / entrepreneur
Property and supply · Production
- उत्पादक संतुलन और पूर्ति – उत्पादक संतुलन में होता है जब लाभ सबसे ज़्यादा हो और उत्पादन बदलने का कोई कारण न हो। MR–MC विधि में दो शर्तें: MR = MC, और MC बढ़ती हुई हो (MC, MR को नीचे से काटे)। पूर्ति = हर कीमत पर फ़र्में जितना बेचना चाहती और बेच सकती हैं। बाज़ार पूर्ति सब फ़र्मों की पूर्ति का जोड़ है। पूर्ति अपनी कीमत, आगत कीमतों, तकनीक, कर, अन्य वस्तुओं की कीमत, फ़र्मों की संख्या और उम्मीदों पर निर्भर है। अपनी कीमत से वक्र पर संचलन; बाकी कारकों से खिसकाव। Es = पूर्ति की मात्रा में % परिवर्तन ÷ कीमत में % परिवर्तन।
- उत्पादन फलन: TP, AP, MP और कारक के प्रतिफल – उत्पादन फलन बताता है कि दिए गए आगतों से फ़र्म अधिकतम कितना उत्पादन कर सकती है: q = f(L, K)। अल्पकाल में कुछ आगत स्थिर होते हैं, इसलिए उत्पादन सिर्फ़ परिवर्ती आगत बदलकर बदलता है। TP कुल उत्पादन है, MP एक और इकाई आगत से अतिरिक्त उत्पादन, और AP प्रति इकाई उत्पादन। स्थिर ज़मीन पर ज़्यादा मज़दूर लगाने पर MP पहले बढ़ता, फिर घटता और अंत में ऋणात्मक होता है: परिवर्ती अनुपात का नियम।
3. The market
Price mechanism · Forms of market · Macro topics (2 h)
- पूर्ण प्रतियोगिता और कीमत निर्धारण – पूर्ण प्रतियोगिता में बहुत सारी फ़र्में एक जैसी वस्तु बहुत सारे खरीदारों को बेचती हैं, इसलिए हर फ़र्म कीमत स्वीकारक है। बाज़ार कीमत वहाँ तय होती है जहाँ बाज़ार माँग = बाज़ार पूर्ति (Qd = Qs)। माँग बढ़े तो कीमत और मात्रा दोनों बढ़ती हैं; पूर्ति बढ़े तो कीमत घटती है और मात्रा बढ़ती है।
- बाज़ार: अर्थ, प्रकार और रूप – बाज़ार वह कोई भी व्यवस्था है जहाँ ख़रीदार और विक्रेता मिलकर पैसे के बदले वस्तु, सेवा या संपत्ति का लेन-देन करते हैं। यह गली का हाट, कोई वेबसाइट या फ़ोन कॉल भी हो सकता है। कीमत माँग और पूर्ति के खिंचाव से तय होती है। बाज़ारों को जगह, समय, सौदे के आकार, प्रतियोगिता और बिकने वाली चीज़ से बाँटते हैं: वस्तु, श्रम, मुद्रा, पूँजी और विदेशी मुद्रा। देशों के बीच ये मिलकर विश्व बाज़ार बनाते हैं।
- व्यापार चक्र: तेज़ी, मंदी और नीति की भूमिका – वास्तविक GDP लंबे समय में एक रुझान पर बढ़ता है, पर थोड़े समय में उसके ऊपर-नीचे झूलता है। यही व्यापार चक्र है: विस्तार, शिखर (तेज़ी), संकुचन और गर्त (मंदी)। तेज़ी में बेरोज़गारी कम और महँगाई ज़्यादा; मंदी में नौकरियाँ जाती हैं और महँगाई घटती है। सरकार राजकोषीय नीति से और केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति से इन झूलों को छोटा करते हैं।
4. Open economy
Economic integration
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।