व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र
अर्थशास्त्र यह पढ़ता है कि लोग दुर्लभ संसाधनों से अपनी इच्छाएँ कैसे पूरी करते हैं।
व्यष्टि अर्थशास्त्र छोटी इकाइयाँ देखता है: एक खरीदार, एक फ़र्म, एक वस्तु (जैसे प्याज़) की कीमत।
समष्टि अर्थशास्त्र पूरी अर्थव्यवस्था देखता है: देश का कुल उत्पादन, कुल रोज़गार, सामान्य कीमत स्तर।
| व्यष्टि | समष्टि |
|---|---|
| एक परिवार की चाय की माँग | पूरे देश की कुल माँग |
| गेहूँ की कीमत | महँगाई (सब कीमतें) |
| एक फ़र्म का उत्पादन | राष्ट्रीय आय |
वास्तविक (सकारात्मक) और आदर्शात्मक अर्थशास्त्र
वास्तविक कथन बताता है क्या है, था या होगा। इसे आँकड़ों से जाँच सकते हैं। जैसे: "भारत की जनसंख्या 140 करोड़ से ज़्यादा है।"
आदर्शात्मक कथन बताता है क्या होना चाहिए। इसमें अपनी राय (अच्छा-बुरा) होती है, इसलिए लोग असहमत हो सकते हैं। पहचान के शब्द: चाहिए, ज़रूरी है, बेहतर। जैसे: "सरकार को मुफ़्त बिजली देनी चाहिए।"
वास्तविक कथन गलत भी हो सकता है; ज़रूरी बात है कि उसे जाँचा जा सके।
अर्थव्यवस्था क्या है?
अर्थव्यवस्था वह व्यवस्था है जिससे लोग रोज़ी कमाते हैं: परिवार श्रम, भूमि और पूँजी देते हैं; फ़र्में इनसे वस्तुएँ और सेवाएँ बनाती हैं; इनकी खरीद-बिक्री होती है।
आर्थिक समस्या दो बातों से पैदा होती है:
- दुर्लभता: संसाधन (भूमि, श्रम, पूँजी, समय) इच्छाओं के मुकाबले कम हैं।
- वैकल्पिक उपयोग: हर संसाधन कई कामों में लग सकता है (ज़मीन पर धान या फ़ैक्टरी)।
इसलिए चुनाव करना पड़ता है, और हर चुनाव में कुछ छूटता है।
अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएँ
- क्या और कितना उत्पादन करें? अनाज या मोबाइल? एक ज़्यादा तो दूसरा कम।
- कैसे उत्पादन करें? श्रम-प्रधान (ज़्यादा मज़दूर) या पूँजी-प्रधान (ज़्यादा मशीनें) तकनीक? भारत में मज़दूर ज़्यादा हैं, इसलिए अक्सर श्रम-प्रधान तकनीक।
- किसके लिए उत्पादन करें? उत्पादन लोगों में कैसे बँटे? यह आय और सरकारी नीति पर निर्भर है।
बाज़ार अर्थव्यवस्था ये सवाल कीमतों और माँग से हल करती है, केंद्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था सरकार से, और मिश्रित अर्थव्यवस्था (भारत) दोनों से।
उत्पादन संभावना वक्र (PPC)
उत्पादन संभावना वक्र दो वस्तुओं के वे सब मेल दिखाता है जो सारे संसाधन पूरी तरह और कुशलता से लगाने पर, दी हुई तकनीक से, बन सकते हैं।
मान्यताएँ: सिर्फ़ दो वस्तुएँ; संसाधन स्थिर; तकनीक स्थिर; संसाधनों का पूरा और कुशल उपयोग।
| बिंदु | गेहूँ (टन) | कपड़ा (थान) | 1 और गेहूँ के लिए छोड़ा कपड़ा (MRT) |
|---|---|---|---|
| A | 0 | 15 | – |
| B | 1 | 14 | 1 |
| C | 2 | 12 | 2 |
| D | 3 | 9 | 3 |
| E | 4 | 5 | 4 |
| F | 5 | 0 | 5 |
वक्र पर, अंदर और बाहर
वक्र पर: पूरा और कुशल उपयोग। अंदर: कुछ संसाधन बेकार (बेरोज़गारी)। बाहर: अभी के संसाधनों और तकनीक से असंभव।
खिसकाव
ज़्यादा संसाधन या दोनों वस्तुओं की बेहतर तकनीक से वक्र बाहर खिसकता है (संवृद्धि)। भूकंप जैसी आपदा से अंदर। सिर्फ़ एक वस्तु की तकनीक सुधरे तो वक्र उस वस्तु के अक्ष पर घूमता है।
अवसर लागत और MRT
अवसर लागत = छोड़े गए अगले सबसे अच्छे विकल्प का मूल्य। ज़मीन पर गेहूँ उगाया, तो जो कपड़ा बन सकता था वही अवसर लागत है।
सीमांत रूपांतरण दर (MRT) = दूसरी वस्तु की एक और इकाई पाने के लिए छोड़ी गई इकाइयाँ = Δकपड़ा ÷ Δगेहूँ। यही PPC का ढलान है।
PPC मूल बिंदु की ओर अवतल क्यों?
क्योंकि MRT बढ़ती है। संसाधन दोनों कामों में एक जैसे कुशल नहीं होते। पहले वे मज़दूर गेहूँ में जाते हैं जो कपड़े में कमज़ोर हैं, इसलिए थोड़ा कपड़ा छूटता है। बाद में कपड़े के माहिर मज़दूर हटाने पड़ते हैं, तो बहुत कपड़ा छूटता है। अगर संसाधन दोनों में बराबर कुशल हों, तो MRT स्थिर और PPC सीधी रेखा होगा।
घर पर करके देखें
आज शाम आपके पास 2 घंटे हैं: पढ़ाई या क्रिकेट। एक तालिका बनाइए: 0, 30, 60, 90, 120 मिनट पढ़ाई और उसके साथ कितने ओवर क्रिकेट बचते हैं। ग्राफ़ बनाइए। रेखा सीधी है या उभरी? पढ़ाई के आख़िरी 30 मिनट की अवसर लागत क्या है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अवसर लागत = छोड़े गए अगले सबसे अच्छे विकल्प का मूल्य
- MRT = छोड़ी गई Y ÷ मिली अतिरिक्त X = ΔY/ΔX (PPC का ढलान)
- बढ़ती MRT → अवतल PPC; स्थिर MRT → सीधी रेखा
हल किए गए उदाहरण
1. वास्तविक या आदर्शात्मक: "पिछले साल भारत में बेरोज़गारी लगभग 3% थी।"
वास्तविक। यह बताता है क्या था और आँकड़ों से जाँचा जा सकता है।
2. वास्तविक या आदर्शात्मक: "अमीरों को ज़्यादा कर देना चाहिए।"
आदर्शात्मक। इसमें "चाहिए" है, यह राय है।
3. तालिका से C (2, 12) से D (3, 9) जाने पर MRT निकालें।
छोड़ा कपड़ा = 12 − 9 = 3। अतिरिक्त गेहूँ = 1। MRT = 3 ÷ 1 = 3 थान प्रति टन।
4. अर्थव्यवस्था (3 गेहूँ, 6 कपड़ा) बना रही है जबकि PPC (3, 9) संभव बताता है। इसका मतलब?
बिंदु वक्र के अंदर है। कुछ संसाधन बेकार पड़े हैं, इसलिए 3 थान कपड़ा कम बन रहा है।
5. नए बीज से गेहूँ दोगुना, पर कपड़े की तकनीक वही। PPC में क्या बदलेगा?
वक्र गेहूँ अक्ष पर बाहर घूमेगा। कपड़े का अधिकतम (15) वही रहेगा, गेहूँ का अधिकतम बढ़ेगा।
6. किसी PPC पर MRT 2, 2, 2, 2 है। उसका आकार?
सीधी रेखा, क्योंकि अवसर लागत स्थिर है।
आम गलतियाँ
- संख्या वाले हर कथन को वास्तविक मान लेना। वह तभी वास्तविक है जब जाँचा जा सके।
- वक्र के अंदर के बिंदु को असंभव समझना। वह संभव है, बस संसाधन बर्बाद हो रहे हैं। असंभव बाहर वाले बिंदु हैं।
- बेरोज़गारों को काम मिलने पर PPC को बाहर खिसका मान लेना। बिंदु अंदर से वक्र पर आता है; वक्र नहीं खिसकता।
- MRT को "छोड़ा ÷ पाया" की जगह उल्टा लिखना।