सूचकांक क्या है?
सूचकांक एक सांख्यिकीय औज़ार है जो संबंधित चीज़ों के समूह (दाम, उत्पादन, मज़दूरी) में समय या स्थान के साथ होने वाले सापेक्ष बदलाव को नापता है।
- आधार वर्ष (0): जिस साल से तुलना करते हैं। इसका सूचकांक हमेशा 100। यह सामान्य साल हो: न युद्ध, न बाढ़, न अचानक तेज़ी।
- चालू वर्ष (1): जिस साल का अध्ययन कर रहे हैं।
- P0: आधार वर्ष का दाम; P1: चालू वर्ष का दाम; q: मात्रा (भार के रूप में)।
सूचकांक 125 = आधार वर्ष से 25% बढ़त; 90 = 10% गिरावट।
सरल समूही विधि
P01 = ΣP1 ÷ ΣP0 × 100।
कदम: आधार वर्ष के दाम जोड़ो, चालू वर्ष के दाम जोड़ो, भाग दो, 100 से गुणा करो।
यह आसान है, पर हर चीज़ को बराबर महत्व मिलता है, और ऊँचे दाम (रुपयों में) वाली चीज़ें नतीजे पर हावी हो जाती हैं।
मूल्यानुपातों का सरल औसत
हर चीज़ का मूल्यानुपात = P1 ÷ P0 × 100। सूचकांक = Σ(मूल्यानुपात) ÷ n। इससे महँगी चीज़ें हावी नहीं होतीं, पर सबको बराबर भार फिर भी मिलता है।
भारित सूचकांक
चीज़ों का महत्व अलग-अलग है। परिवार नमक से कहीं ज़्यादा चावल पर ख़र्च करता है। इसलिए भार लेते हैं।
- लास्पेयर (आधार वर्ष की मात्रा भार): P01 = Σp1q0 ÷ Σp0q0 × 100। बताता है कि वही पुरानी टोकरी अब कितनी महँगी है।
- पाशे (चालू वर्ष की मात्रा भार): P01 = Σp1q1 ÷ Σp0q1 × 100।
- मूल्यानुपातों का भारित औसत: Σ(RW) ÷ ΣW, जहाँ R = P1 ÷ P0 × 100 और W = भार।
भारत के मुख्य सूचकांक: CPI, WPI, IIP
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
परिवार जो सामान और सेवाएँ ख़रीदते हैं (भोजन, कपड़ा, मकान, ईंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य), उनकी तय टोकरी के खुदरा दामों का बदलाव नापता है। CPI (ग्रामीण, शहरी और संयुक्त) NSO प्रकाशित करता है, आधार वर्ष 2012; नया आधार वर्ष लाया जा रहा है। औद्योगिक श्रमिकों का CPI जैसी पुरानी शृंखलाएँ श्रम ब्यूरो प्रकाशित करता है। CPI से महँगाई नापी जाती है और महँगाई भत्ता तय होता है।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI)
थोक स्तर पर प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन-बिजली और विनिर्मित उत्पादों के दामों का बदलाव नापता है। इसमें सेवाएँ नहीं होतीं। आर्थिक सलाहकार का कार्यालय प्रकाशित करता है, आधार 2011-12।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)
खनन, विनिर्माण और बिजली में उत्पादन की मात्रा (दाम नहीं) का बदलाव नापता है। NSO हर महीने प्रकाशित करता है, आधार 2011-12। यह बताता है कि उद्योग बढ़ रहा है या नहीं।
दूसरे सूचकांक
सेंसेक्स (BSE, 30 बड़ी कंपनियाँ) और निफ़्टी (NSE, 50 कंपनियाँ) शेयर दामों की चाल दिखाते हैं। कृषि उत्पादन सूचकांक और सेवा क्षेत्र सूचकांक भी हैं।
सूचकांक के उपयोग
- महँगाई और जीवन-निर्वाह लागत का बदलाव नापना।
- महँगाई भत्ता तय करना और मज़दूरी-पेंशन समायोजित करना।
- वास्तविक आय निकालना: वास्तविक आय = मौद्रिक आय ÷ CPI × 100।
- सरकार और RBI को नीति (ब्याज दर, कर, सब्सिडी) में मदद।
- औद्योगिक उत्पादन (IIP) और शेयर बाज़ार (सेंसेक्स) का रुझान।
- GDP को अपस्फीत करके वास्तविक GDP निकालना।
ध्यान रखने की बातें
सामान्य आधार वर्ष चुनो, समूह का प्रतिनिधित्व करने वाली चीज़ें लो, सही भार दो, और सही दाम-स्रोत (खुदरा या थोक) लो।
मुद्रास्फीति (महँगाई) और सूचकांक
मुद्रास्फीति सामान्य दाम-स्तर का लगातार बढ़ना है। दाम बढ़ें तो उतने ही पैसे में कम चीज़ें आती हैं; पैसे की क्रय-शक्ति घटती है।
महँगाई दर = (इस साल का सूचकांक − पिछले साल का सूचकांक) ÷ पिछले साल का सूचकांक × 100।
भारत में RBI महँगाई के लिए मुख्य रूप से CPI देखता है। WPI महँगाई थोक बाज़ार का दबाव दिखाती है।
पैसे की क्रय-शक्ति = 100 ÷ मूल्य सूचकांक × 100। CPI 125 हो तो ₹100 में आधार वर्ष का सिर्फ़ ₹80 का सामान आता है।
खुद करके देखो: तुम्हारे परिवार का मूल्य सूचकांक
घर में 3 चीज़ों का एक साल पहले और आज का दाम पूछो (जैसे दूध, आलू और रसोई गैस)। ΣP0 और ΣP1 निकालो, फिर सूचकांक। क्या तुम्हारे परिवार का सूचकांक 100 से ऊपर है? फिर 3D के आख़िरी कदम में यही संख्याएँ स्लाइडर पर रखो (ज़रूरत हो तो पैमाना बदलो) और मिलाओ।
बोर्ड परीक्षा का पैटर्न
आते हैं: सरल समूही या भारित विधि से सूचकांक बनाना (4 अंक), CPI और WPI में अंतर, सूचकांक के उपयोग, और महँगाई या वास्तविक आय पर छोटा प्रश्न (3 अंक)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सरल समूही: P01 = ΣP1 ÷ ΣP0 × 100
- मूल्यानुपात R = P1 ÷ P0 × 100; सरल औसत = ΣR ÷ n
- लास्पेयर: Σp1q0 ÷ Σp0q0 × 100
- पाशे: Σp1q1 ÷ Σp0q1 × 100
- मूल्यानुपातों का भारित औसत = ΣRW ÷ ΣW
- महँगाई दर = (I1 − I0) ÷ I0 × 100
- वास्तविक आय = मौद्रिक आय ÷ CPI × 100
हल किए गए उदाहरण
1. आधार दाम ₹40, ₹50, ₹110; चालू दाम ₹50, ₹60, ₹140। सरल समूही सूचकांक निकालो।
ΣP0 = 200, ΣP1 = 250। सूचकांक = 250 ÷ 200 × 100 = 125। दाम 25% बढ़े।
2. वही दाम; आधार मात्राएँ 10, 8, 2। लास्पेयर सूचकांक निकालो।
Σp0q0 = 400 + 400 + 220 = 1020। Σp1q0 = 500 + 480 + 280 = 1260। सूचकांक = 1260 ÷ 1020 × 100 ≈ 123.5।
3. मूल्यानुपात 125, 120 और 127.3 हैं। मूल्यानुपातों का सरल औसत निकालो।
(125 + 120 + 127.3) ÷ 3 = 372.3 ÷ 3 ≈ 124.1।
4. पिछले साल CPI 150 था और इस साल 162। महँगाई दर निकालो।
(162 − 150) ÷ 150 × 100 = 12 ÷ 150 × 100 = 8%।
5. एक कर्मचारी का वेतन ₹20,000 से ₹24,000 हुआ, जबकि CPI 100 से 125 हुआ। क्या उसकी वास्तविक आय बढ़ी?
अब वास्तविक आय = 24,000 ÷ 125 × 100 = ₹19,200। यह ₹20,000 से घटी। दाम वेतन से तेज़ बढ़े।
6. मूल्यानुपात 110, 120, 150 पर भार 4, 3, 1। भारित सूचकांक निकालो।
ΣRW = 440 + 360 + 150 = 950; ΣW = 8। सूचकांक = 950 ÷ 8 = 118.75।
आम गलतियाँ
- 100 से गुणा करना भूल जाना।
- ΣP0 को ΣP1 से भाग देना (उल्टा)। चालू ÷ आधार।
- सूचकांक को ही महँगाई दर कह देना। 108 का मतलब आधार से 8% ऊपर है, इस साल 8% महँगाई तभी जब पिछला साल ही आधार हो।
- WPI (थोक, सेवाएँ नहीं) और CPI (खुदरा, सेवाएँ भी) को मिला देना।