National Year 10 Statistics
अध्याय: 2
1. 1. The collection of data
1a Planning · 1b Types of data · 1c Population and sampling · 1d Collecting data
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- आँकड़ों का संग्रह: प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत, प्रतिचयन, भारत की जनगणना और NSSO – आँकड़े प्राथमिक (खुद पहली बार इकट्ठे) या द्वितीयक (किसी और के इकट्ठे) होते हैं। प्राथमिक आँकड़े साक्षात्कार, डाक प्रश्नावली या फ़ोन से मिलते हैं। हम सबका अध्ययन कर सकते हैं (जनगणना) या कुछ का (प्रतिदर्श)। प्रतिदर्श यादृच्छिक या अयादृच्छिक होता है। नतीजों में प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियाँ हो सकती हैं। भारत में जनगणना हर 10 साल सबकी गिनती करती है और NSSO (अब NSO) प्रतिदर्श सर्वे करता है।
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
2. 2. Processing, representing and analysing data (part 1)
2a Tabulation, diagrams and representation · 2b Measures of central tendency · 2c Measures of dispersion · 2d Further summary statistics
- सांख्यिकी: प्रश्न पूछना, औसत और स्टैक्ड दंड आलेख – सांख्यिकी एक ऐसे प्रश्न से शुरू होती है जिसके कई जवाब हो सकते हैं। हम आँकड़े इकट्ठा करते हैं, उन्हें व्यवस्थित करते हैं, ग्राफ बनाते हैं और एक संख्या निकालते हैं जो सबका सार बताए। माध्य बराबर का हिस्सा है, माध्यिका बीच का मान है और बहुलक सबसे ज़्यादा आने वाला मान है। भारित माध्य कुछ मानों को ज़्यादा महत्व देता है। स्टैक्ड और 100% स्टैक्ड दंड आलेख दिखाते हैं कि पूरा हिस्सों में कैसे बँटा है।
- प्रकीर्णन की माप: परिसर, माध्य विचलन, प्रसरण और मानक विचलन – प्रकीर्णन का मतलब है फैलाव: मान बीच (केंद्र) से कितनी दूर हैं। परिसर = सबसे बड़ा − सबसे छोटा। माध्य विचलन = माध्य (या माध्यिका) से औसत दूरी। प्रसरण = माध्य से दूरियों के वर्गों का औसत। मानक विचलन = √प्रसरण। वर्गीकृत आँकड़ों में हर पद को बारंबारता f से गुणा करते हैं।
- सूचकांक: सरल समूही विधि, WPI, CPI, IIP, उपयोग और मुद्रास्फीति – सूचकांक एक संख्या है जो बताती है कि किसी चीज़ (दाम या उत्पादन) में आधार वर्ष की तुलना में कितना बदलाव हुआ; आधार वर्ष का सूचकांक 100 होता है। सरल समूही मूल्य सूचकांक = ΣP1 ÷ ΣP0 × 100। भारित सूचकांक ज़्यादा ख़रीदी जाने वाली चीज़ों को ज़्यादा महत्व देते हैं। भारत के मुख्य सूचकांक हैं: खुदरा दामों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), थोक दामों का थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और कारख़ाना उत्पादन का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)। महँगाई दर एक साल में मूल्य सूचकांक की प्रतिशत बढ़त है।