आँकड़े क्यों इकट्ठे करें?
आँकड़े यानी संख्याओं में तथ्य, जो किसी सवाल का जवाब देने में मदद करें। जैसे: "हमारे कस्बे के परिवार महीने में कितना चावल खाते हैं?" जवाब के लिए पहले आँकड़े इकट्ठे करने होंगे। इकट्ठा करने वाला अन्वेषक (जाँचकर्ता) है। जवाब देने वाला उत्तरदाता है। जिन लोगों या चीज़ों का अध्ययन हो, वे मिलकर समष्टि (जनसंख्या) कहलाते हैं।
प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत
- प्राथमिक आँकड़े: अन्वेषक अपने उद्देश्य के लिए पहली बार इकट्ठा करता है। ये मौलिक होते हैं और ज़रूरत पर ठीक बैठते हैं, पर समय, पैसा और मेहनत ज़्यादा लगती है।
- द्वितीयक आँकड़े: किसी और ने पहले ही इकट्ठे करके छापे हैं। सस्ते और जल्दी मिलते हैं, पर तुम्हारे उद्देश्य पर पूरी तरह न बैठें, इसलिए पहले जाँचो।
द्वितीयक आँकड़ों के स्रोत
सरकारी रिपोर्टें (भारत की जनगणना, NSSO रिपोर्ट, आर्थिक सर्वेक्षण), भारतीय रिज़र्व बैंक की रिपोर्टें, अख़बार, शोध-पत्र और सरकारी संस्थाओं की वेबसाइटें।
प्राथमिक आँकड़े इकट्ठे करने की विधियाँ
1. व्यक्तिगत साक्षात्कार
अन्वेषक उत्तरदाता से आमने-सामने मिलता है। जवाब पूरे मिलते हैं, शंका वहीं दूर होती है। पर बड़े क्षेत्र में महँगा और धीमा है, और अन्वेषक जवाबों को प्रभावित कर सकता है।
2. डाक द्वारा प्रश्नावली
छपी या ऑनलाइन प्रश्नावली भेजी जाती है; लोग भरकर लौटाते हैं। सस्ती है और दूर तक पहुँचती है। पर कई लोग जवाब नहीं भेजते, और यह सिर्फ़ पढ़े-लिखे लोगों के लिए है।
3. टेलीफ़ोन साक्षात्कार
फ़ोन पर सवाल पूछे जाते हैं। तेज़ और सस्ता, पर जिनके पास फ़ोन नहीं वे छूट जाते हैं और चेहरे के भाव नहीं दिखते।
अच्छी प्रश्नावली कैसे बनाएँ
- छोटी रखो। सिर्फ़ ज़रूरी सवाल।
- आसान, साफ़ शब्द; एक सवाल में एक बात।
- सामान्य से विशेष सवालों की ओर बढ़ो।
- दिशा देने वाले सवाल न पूछो, जैसे "क्या आपको नहीं लगता कि दाम बहुत ज़्यादा हैं?"
- भावनाएँ दुखाने वाले या हिसाब माँगने वाले सवाल न रखो।
- जहाँ हो सके, विकल्प वाले (हाँ/नहीं, बहुविकल्पी) सवाल रखो।
पायलट सर्वेक्षण
मुख्य सर्वे से पहले छोटा परीक्षण सर्वे। इससे कमज़ोर सवाल, लगने वाला समय और ख़र्च पता चलते हैं।
जनगणना विधि और प्रतिदर्श विधि
- जनगणना (संपूर्ण गणना): समष्टि की हर इकाई का अध्ययन। पूरी जानकारी, पर महँगी और धीमी।
- प्रतिदर्श विधि: समष्टि का प्रतिनिधित्व करने वाला छोटा समूह चुनकर अध्ययन। समय और पैसा बचता है और नतीजे भरोसेमंद हो सकते हैं। अच्छा प्रतिदर्श प्रतिनिधि होता है: ज़रूरी बातों में पूरी समष्टि जैसा दिखता है।
यादृच्छिक और अयादृच्छिक प्रतिचयन
यादृच्छिक प्रतिचयन
हर इकाई के चुने जाने का बराबर मौका। तरीके: लॉटरी (पर्चियाँ डिब्बे में) या यादृच्छिक संख्या तालिका (आजकल कंप्यूटर)।
अयादृच्छिक प्रतिचयन
सबको बराबर मौका नहीं। अन्वेषक सुविधा (जो पास हों), निर्णय (जिन्हें वह ठीक समझे) या कोटा (हर समूह से तय संख्या) से चुनता है। आसान है, पर पक्षपात हो सकता है।
प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियाँ
प्रतिचयन त्रुटि = प्रतिदर्श से मिला मान − समष्टि का असली मान। यह इसलिए होती है क्योंकि हमने सिर्फ़ एक हिस्सा देखा। बड़ा और अच्छा चुना प्रतिदर्श इसे घटाता है।
अप्रतिचयन त्रुटियाँ जनगणना में भी हो सकती हैं:
- आँकड़े प्राप्त करने में त्रुटि: ग़लत माप, ग़लत नकल, उलझे सवाल।
- अनुत्तर त्रुटि: कुछ लोग जवाब ही नहीं देते।
- प्रतिचयन पक्षपात: समष्टि के कुछ सदस्य कभी चुने ही नहीं जा सकते।
भारत की जनगणना और NSSO
भारत की जनगणना
यह हर 10 साल में भारत के हर व्यक्ति की गिनती करती है। पहली नियमित पूरी जनगणना 1881 में और आज़ादी के बाद पहली 1951 में हुई। इसमें जनसंख्या, उम्र, लिंग, साक्षरता, व्यवसाय, आवास और प्रवास के आँकड़े जुटते हैं। इसे महापंजीयक और जनगणना आयुक्त का कार्यालय चलाता है।
NSSO (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय)
1950 में बना, पूरे देश में बड़े प्रतिदर्श सर्वे करने के लिए। 2019 में इसे केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के साथ मिलाकर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) बना दिया गया। इसके सर्वे-दौर घरेलू ख़र्च, रोज़गार-बेरोज़गारी, साक्षरता, स्वास्थ्य और ज़मीन जोत पर होते हैं। नतीजे रिपोर्टों और पत्रिका सर्वेक्षण में छपते हैं।
खुद करके देखो: घर पर छोटा सर्वे
3 छोटे, साफ़ सवाल लिखो, जैसे "आपका परिवार हफ़्ते में कितने लीटर दूध लेता है?" 10 पड़ोसियों से पूछो (प्राथमिक आँकड़े)। अब पर्चियों से लॉटरी निकालकर उनमें से 3 चुनो (यादृच्छिक प्रतिदर्श)। 3 के औसत की तुलना सभी 10 के औसत से करो। अंतर तुम्हारी प्रतिचयन त्रुटि है। फिर 3D के आख़िरी कदम में आकार 4, 10 और 30 करके देखो।
बोर्ड परीक्षा का पैटर्न
अक्सर पूछे जाते हैं: प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों में अंतर (3 अंक), जनगणना बनाम प्रतिदर्श (3 अंक), अच्छी प्रश्नावली के गुण (4 अंक), प्रतिचयन व अप्रतिचयन त्रुटियाँ, और भारत की जनगणना व NSSO पर टिप्पणी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्राथमिक आँकड़े: अन्वेषक द्वारा पहली बार इकट्ठे
- द्वितीयक आँकड़े: किसी और के पहले से इकट्ठे
- जनगणना: समष्टि की हर इकाई का अध्ययन
- प्रतिदर्श: समष्टि के प्रतिनिधि हिस्से का अध्ययन
- प्रतिचयन त्रुटि = प्रतिदर्श मान − समष्टि मान
- यादृच्छिक प्रतिदर्श: हर इकाई को बराबर मौका
हल किए गए उदाहरण
1. एक छात्रा 50 दुकानदारों से उनकी रोज़ की बिक्री पूछती है। ये प्राथमिक आँकड़े हैं या द्वितीयक?
प्राथमिक। उसने अपने अध्ययन के लिए खुद पहली बार इकट्ठे किए।
2. 5 किसानों की आय ₹5,000, ₹6,000, ₹7,000, ₹8,000 और ₹9,000 है। प्रतिदर्श में दूसरा और पाँचवाँ किसान चुना गया। माध्य की प्रतिचयन त्रुटि निकालो।
समष्टि माध्य = 35,000 ÷ 5 = ₹7,000। प्रतिदर्श माध्य = (6,000 + 9,000) ÷ 2 = ₹7,500। त्रुटि = 7,500 − 7,000 = ₹500।
3. इस सवाल में क्या ग़लत है: "क्या आप नहीं मानते कि हमारी कैंटीन बहुत महँगी है?"
यह दिशा देने वाला सवाल है, "हाँ" की ओर धकेलता है। बेहतर: "कैंटीन के दाम आपको कैसे लगते हैं? (कम / ठीक / ज़्यादा)"।
4. सरकार भारत के हर गाँव की साक्षरता दर जानना चाहती है। जनगणना करे या प्रतिदर्श? क्यों?
जनगणना। हर गाँव का आँकड़ा चाहिए, इसलिए हर इकाई गिननी होगी। प्रतिदर्श कई गाँव छोड़ देगा।
आम गलतियाँ
- रिपोर्ट में पढ़े जनगणना आँकड़ों को अपने लिए "प्राथमिक" कहना। तुम्हारे लिए वे द्वितीयक हैं।
- मान लेना कि प्रतिदर्श हमेशा जनगणना से ख़राब है। अच्छा यादृच्छिक प्रतिदर्श सस्ता और काफ़ी सटीक होता है।
- कहना कि अप्रतिचयन त्रुटि सिर्फ़ प्रतिदर्श में होती है। यह जनगणना में भी हो सकती है।
- दिशा देने वाले या दोहरे सवाल लिखना, जैसे "क्या आपको चाय और कॉफ़ी पसंद है?"