औसत क्या है?
केंद्रीय प्रवृत्ति का माप (औसत) एक अकेला मान है जो पूरे आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करे। ज़्यादातर मान इसके आस-पास जमा रहते हैं। तीन मुख्य माप हैं: समांतर माध्य, माध्यिका और बहुलक।
चिह्न: n या N = मदों की संख्या, Σ (सिग्मा) = "सबका जोड़", x̄ = माध्य, f = बारंबारता।
समांतर माध्य
व्यक्तिगत श्रेणी
- प्रत्यक्ष विधि: x̄ = Σx ÷ n।
- कल्पित माध्य विधि: कोई भी मान A चुनो, d = x − A; x̄ = A + Σd ÷ n। बड़ी संख्याओं में काम बचाती है।
खंडित (विविक्त) श्रेणी
- प्रत्यक्ष: x̄ = Σfx ÷ N।
- कल्पित माध्य: x̄ = A + Σfd ÷ N।
सतत श्रेणी
वर्ग-चिह्न (मध्य-मान) m को x मानो।
- प्रत्यक्ष: x̄ = Σfm ÷ N।
- कल्पित माध्य: x̄ = A + Σfd ÷ N, d = m − A।
- पद-विचलन: d′ = (m − A) ÷ c, c = सामान्य वर्ग चौड़ाई; x̄ = A + (Σfd′ ÷ N) × c।
दो गुण
- माध्य से विचलनों का जोड़ हमेशा शून्य: Σ(x − x̄) = 0। इसीलिए यह संतुलन बिंदु है।
- माध्य से विचलनों के वर्गों का जोड़ सबसे कम होता है।
भारित समांतर माध्य
जब सब मद बराबर महत्व के न हों, हर मद को भार w दो: x̄w = Σwx ÷ Σw। जैसे मूल्य सूचकांक में चावल (ज़्यादा ख़रीदा जाता है) को नमक से ज़्यादा भार।
गुण: आसान, हर मान का इस्तेमाल, आगे के गणित में उपयोगी। दोष: बहुत बड़े-छोटे मानों से बहुत प्रभावित; खुले सिरे वाले वर्गों में बिना अनुमान के नहीं निकलता।
माध्यिका
माध्यिका आँकड़ों को क्रम में सजाने पर बीच का मान है। आधे मद इससे नीचे और आधे ऊपर। यह स्थिति-संबंधी औसत है।
व्यक्तिगत श्रेणी
क्रम में सजाओ। माध्यिका = (n + 1) ÷ 2वें मद का मान। n सम हो तो बीच के दो मदों का औसत।
खंडित श्रेणी
संचयी बारंबारता (cf) निकालो। (N + 1) ÷ 2 निकालो। जिस x की cf पहली बार इसके बराबर या ज़्यादा हो, वही माध्यिका।
सतत श्रेणी
N ÷ 2 निकालो। जिस वर्ग में cf पहली बार N ÷ 2 तक पहुँचे, वह माध्यिका वर्ग।
माध्यिका = l + ((N/2 − c.f.) ÷ f) × h; l = माध्यिका वर्ग की निचली सीमा, c.f. = उससे पहले वर्ग की संचयी बारंबारता, f = माध्यिका वर्ग की बारंबारता, h = वर्ग चौड़ाई।
गुण: बहुत बड़े मानों से प्रभावित नहीं, इसलिए आय और संपत्ति के आँकड़ों के लिए अच्छी। दोष: बाकी मानों के आकार को नहीं देखती।
बहुलक
बहुलक वह मान है जो सबसे ज़्यादा बार आता है।
- व्यक्तिगत और खंडित श्रेणी: देखकर: सबसे ज़्यादा बारंबारता वाला मान। बारंबारताएँ पास-पास हों तो समूहन तालिका मदद करती है।
- सतत श्रेणी: बहुलक वर्ग (सबसे ज़्यादा बारंबारता) ढूँढो। फिर बहुलक = l + ((f1 − f0) ÷ (2f1 − f0 − f2)) × h; f1 = बहुलक वर्ग की, f0 = पहले वर्ग की, f2 = बाद वाले वर्ग की बारंबारता।
आँकड़ों में एक बहुलक (एकबहुलकी), दो (द्विबहुलकी) या ज़्यादा हो सकते हैं। आयतचित्र से भी बहुलक निकलता है।
माध्य, माध्यिका और बहुलक का संबंध
सममित वितरण में माध्य = माध्यिका = बहुलक। थोड़े असममित वितरण में लगभग संबंध है बहुलक ≈ 3 माध्यिका − 2 माध्य। जब कुछ बहुत बड़े मान हों (जैसे आय में), तो माध्य > माध्यिका > बहुलक।
आर्थिक अर्थ: कौन-सा औसत कब?
- माध्य: प्रति व्यक्ति आय, प्रति हेक्टेयर औसत उपज, औसत लागत। जब कुल मायने रखे और बहुत बड़े-छोटे मान न हों।
- माध्यिका: ऐसे देश में आम आय या मज़दूरी जहाँ कुछ लोग बहुत अमीर हों; मकानों की माध्यिका कीमत।
- बहुलक: सबसे आम कमीज़ साइज़, किसी चीज़ का सबसे लोकप्रिय दाम, गाँव में सबसे आम परिवार का आकार। व्यापारी माल रखने की योजना में इसका इस्तेमाल करते हैं।
उदाहरण: आय 2, 4, 6, 8, 20। माध्य = 8, पर पाँच में से चार परिवार 8 से कम कमाते हैं। माध्यिका 6 आम परिवार को बेहतर दिखाती है।
खुद करके देखो: जेब-ख़र्च के औसत
7 दोस्तों से उनका हफ़्ते का जेब-ख़र्च पूछो। माध्य, माध्यिका और बहुलक निकालो। अब मान लो एक दोस्त को ₹1,000 मिलते हैं। फिर से निकालो। कौन-सा औसत सबसे ज़्यादा बदला? फिर यही 3D के आख़िरी कदम के स्लाइडर से करके देखो।
बोर्ड परीक्षा का पैटर्न
यह इकाई (सहसंबंध और सूचकांक के साथ) लगभग 25 अंक की है। पद-विचलन से माध्य या सतत श्रेणी की माध्यिका/बहुलक पर 6 अंक का प्रश्न आता है, और किस स्थिति में कौन-सा औसत ठीक है, इस पर छोटे प्रश्न। हमेशा सूत्र लिखो, तालिका (x, f, cf, d′, fd′) दिखाओ और इकाई के साथ उत्तर दो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- माध्य (व्यक्तिगत) = Σx ÷ n; कल्पित माध्य: A + Σd ÷ n
- माध्य (खंडित) = Σfx ÷ N; A + Σfd ÷ N
- माध्य (सतत, पद-विचलन) = A + (Σfd′ ÷ N) × c, d′ = (m − A) ÷ c
- भारित माध्य = Σwx ÷ Σw
- माध्यिका (व्यक्तिगत) = ((n + 1) ÷ 2)वाँ मद
- माध्यिका (सतत) = l + ((N/2 − c.f.) ÷ f) × h
- बहुलक (सतत) = l + ((f1 − f0) ÷ (2f1 − f0 − f2)) × h
- बहुलक ≈ 3 माध्यिका − 2 माध्य
हल किए गए उदाहरण
1. 12, 15, 18, 21, 24 का माध्य कल्पित माध्य विधि (A = 18) से निकालो।
d = x − 18: −6, −3, 0, 3, 6। Σd = 0। माध्य = 18 + 0 ÷ 5 = 18।
2. x: 1, 2, 3, 4, 5 (प्रति परिवार बच्चे), f: 4, 6, 8, 5, 2। माध्य निकालो।
fx: 4, 12, 24, 20, 10; Σfx = 70; N = 25। माध्य = 70 ÷ 25 = 2.8 बच्चे।
3. वर्ग 0–10, 10–20, 20–30, 30–40, 40–50 और f = 5, 8, 12, 10, 5। पद-विचलन से माध्य (A = 25, c = 10)।
m: 5, 15, 25, 35, 45; d′: −2, −1, 0, 1, 2; fd′: −10, −8, 0, 10, 10; Σfd′ = 2; N = 40। माध्य = 25 + (2 ÷ 40) × 10 = 25.5।
4. 7, 3, 9, 12, 5, 10 की माध्यिका निकालो।
क्रम: 3, 5, 7, 9, 10, 12। n = 6, तो तीसरे और चौथे का औसत: (7 + 9) ÷ 2 = 8।
5. ऊपर वाली तालिका (f = 5, 8, 12, 10, 5) की माध्यिका निकालो।
cf: 5, 13, 25, 35, 40। N/2 = 20 → माध्यिका वर्ग 20–30। l = 20, c.f. = 13, f = 12, h = 10। माध्यिका = 20 + (7 ÷ 12) × 10 = 25.83।
6. उसी तालिका का बहुलक निकालो।
बहुलक वर्ग 20–30: f1 = 12, f0 = 8, f2 = 10। बहुलक = 20 + (4 ÷ (24 − 18)) × 10 = 20 + 6.67 = 26.67।
7. एक मज़दूर 4 दिन ₹300 रोज़ और 1 दिन ₹500 कमाता है। उसकी भारित औसत दैनिक मज़दूरी?
Σwx = 300 × 4 + 500 × 1 = 1,700; Σw = 5। भारित माध्य = ₹340।
8. माध्य = 40, माध्यिका = 38। बहुलक का अनुमान लगाओ।
बहुलक ≈ 3 × 38 − 2 × 40 = 114 − 80 = 34।
आम गलतियाँ
- आँकड़ों को क्रम में सजाए बिना माध्यिका निकालना।
- व्यक्तिगत श्रेणी में N/2 लेना; वहाँ (n + 1) ÷ 2 लो, और सतत श्रेणी में N/2।
- माध्यिका वर्ग की अपनी c.f. ले लेना, जबकि पिछले वर्ग की लेनी है।
- पद-विचलन विधि में c से गुणा करना भूल जाना।