बाज़ार क्या है?
आम बोलचाल में बाज़ार दुकानों वाली जगह है। अर्थशास्त्र में बाज़ार वह कोई भी व्यवस्था है जहाँ ख़रीदार और विक्रेता संपर्क में आकर कुछ लेन-देन करते हैं, आम तौर पर पैसे के बदले। संपर्क आमने-सामने, फ़ोन से या ऑनलाइन हो सकता है।
हर सौदा अपनी मर्ज़ी से होता है: दोनों तभी राज़ी होते हैं जब दोनों को फ़ायदा लगे। ख़रीदार को चीज़ पैसे से ज़्यादा क़ीमती लगती है; विक्रेता को पैसा चीज़ से ज़्यादा। जिस रक़म पर दोनों राज़ी हों, वह कीमत है।
बाज़ार समाज को बड़े सवालों के जवाब देने में मदद करते हैं: क्या बनाएँ, कितना बनाएँ, किसके लिए बनाएँ।
कीमत कैसे तय होती है: माँग और पूर्ति
माँग: हर कीमत पर ख़रीदार कितना चाहते हैं और ख़रीद सकते हैं। पूर्ति: हर कीमत पर विक्रेता कितना बेचने को तैयार हैं।
- ख़रीदार ज़्यादा चाहें और माल कम हो (कमी), तो ख़रीदार होड़ करते हैं और कीमत बढ़ती है।
- माल ज़्यादा हो और ख़रीदार कम (अधिशेष), तो विक्रेता होड़ करते हैं और कीमत घटती है।
- जहाँ दोनों बराबर हों, कीमत रुक जाती है। यही साम्य कीमत है।
कीमत एक संकेत है। बढ़ती कीमत उत्पादकों से कहती है ज़्यादा बनाओ और ख़रीदारों से कहती है बचाओ; घटती कीमत उल्टा कहती है। इसे कीमत तंत्र कहते हैं।
बाज़ार के प्रकार
- जगह के आधार पर: स्थानीय (गाँव का हाट), राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय या विश्व बाज़ार।
- समय के आधार पर: दैनिक (ताज़ी सब्ज़ी), साप्ताहिक हाट, मौसमी मेले; अर्थशास्त्र में अल्पकाल और दीर्घकाल भी।
- सौदे के आकार से: थोक (व्यापारियों को बड़ी मात्रा में) और खुदरा (अंतिम उपभोक्ता को थोड़ी मात्रा में)।
- संपर्क के ढंग से: भौतिक बाज़ार और ऑनलाइन (ई-कॉमर्स) बाज़ार।
- प्रतियोगिता से: पूर्ण प्रतियोगिता (बहुत विक्रेता, एक-सा माल), एकाधिकारी प्रतियोगिता (बहुत विक्रेता, थोड़ा अलग माल), अल्पाधिकार (कुछ बड़ी फ़र्में) और एकाधिकार (एक विक्रेता)।
क्या बिकता है, उसके आधार पर बाज़ार के रूप
| बाज़ार | क्या बिकता है | उसकी कीमत |
|---|---|---|
| वस्तु और सेवा बाज़ार | खाना, कपड़े, बाल कटाई, फ़ोन | कीमत |
| श्रम बाज़ार | काम का समय और हुनर | मज़दूरी या वेतन |
| मुद्रा बाज़ार | छोटे समय के कर्ज़ (लगभग 1 साल तक) | ब्याज दर |
| पूँजी बाज़ार | शेयर और लंबे बॉन्ड | शेयर भाव, बॉन्ड प्रतिफल |
| विदेशी मुद्रा बाज़ार | मुद्राएँ (रुपया, यूरो, डॉलर, येन) | विनिमय दर |
श्रम बाज़ार में मज़दूर श्रम बेचते हैं और फ़र्में ख़रीदती हैं। मुद्रा बाज़ार में बैंक और फ़र्में थोड़े समय के लिए उधार लेते-देते हैं; केंद्रीय बैंक इस पर नज़र रखता है। पूँजी बाज़ार कारख़ानों और सड़कों के लिए लंबे समय का पैसा जुटाता है; शेयर बाज़ार इसका हिस्सा है। विदेशी मुद्रा बाज़ार से देशों के पार भुगतान होता है। विश्व बाज़ार निर्यात, आयात और निवेश से जुड़े इन सब बाज़ारों का मेल है।
प्रतियोगिता और सरकार की भूमिका
जब बहुत विक्रेता मुक़ाबला करते हैं तो हर कोई कम कीमत, अच्छी गुणवत्ता या नए विचार देने की कोशिश करता है। फ़ायदा ख़रीदार का। एकाधिकार में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं होता, अक्सर किसी प्रवेश बाधा जैसे पेटेंट, लाइसेंस या किसी ख़ास संसाधन पर क़ब्ज़े के कारण, इसलिए वह ज़्यादा कीमत ले सकता है। सरकारें प्रतिस्पर्धा के नियम बनाती हैं, उपभोक्ताओं की रक्षा करती हैं और कभी-कभी ज़रूरी चीज़ों की कीमत तय करती हैं। बाज़ार कई चीज़ों के लिए अच्छा काम करता है, पर हमेशा नहीं: प्रदूषण और सड़क की बत्ती जैसी सार्वजनिक चीज़ों के लिए सरकार की ज़रूरत होती है।
करके देखें
एक दिन में आप जिन-जिन बाज़ारों का हिस्सा बने, उनकी सूची बनाइए: नाश्ता ख़रीदना (वस्तु), माता-पिता का वेतन (श्रम), बैंक में जमा (मुद्रा बाज़ार), परिवार का म्यूचुअल फ़ंड (पूँजी), यात्रा में पैसा बदलना (विदेशी मुद्रा)। फिर 3D के आख़िरी चरण में छँटाई का खेल खेलिए। पहले अनुमान, फिर जाँच: सब्ज़ी मंडी में शाम को आम बच जाएँ तो उनकी कीमत का क्या होगा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बाज़ार = ख़रीदार + विक्रेता + लेन-देन की चीज़ + कीमत
- माँग > पूर्ति → कमी → कीमत बढ़ती है
- पूर्ति > माँग → अधिशेष → कीमत घटती है
- माँग = पूर्ति → साम्य कीमत
- श्रम → मज़दूरी; मुद्रा → ब्याज दर; पूँजी → शेयर भाव; विदेशी मुद्रा → विनिमय दर
- थोक = व्यापारियों को बड़ी मात्रा; खुदरा = उपभोक्ता को थोड़ी मात्रा
हल किए गए उदाहरण
1. क्या ऑनलाइन शॉपिंग ऐप बाज़ार है? समझाइए।
हाँ। ऐप के ज़रिए ख़रीदार और विक्रेता संपर्क में आते हैं और तय कीमत पर पैसे के बदले सामान लेते-देते हैं। बाज़ार के लिए भौतिक जगह ज़रूरी नहीं।
2. बाज़ार और उसकी कीमत बताइए: (a) अस्पताल नर्स रखता है, (b) कंपनी नए शेयर बेचती है, (c) यात्री डॉलर को यूरो में बदलता है।
(a) श्रम बाज़ार, कीमत = मज़दूरी/वेतन। (b) पूँजी बाज़ार, कीमत = शेयर भाव। (c) विदेशी मुद्रा बाज़ार, कीमत = विनिमय दर।
3. ₹40 प्रति kg पर ख़रीदार 600 kg प्याज़ चाहते हैं पर विक्रेता 450 kg देते हैं। क्या होगा?
माँग (600) पूर्ति (450) से ज़्यादा, 150 kg की कमी। ख़रीदार होड़ करेंगे, कीमत तब तक बढ़ेगी जब तक दोनों बराबर न हों।
4. शाम को फल वाले के पास 30 kg केले बचे हैं जो ख़राब हो जाएँगे। कीमत का क्या होना चाहिए, क्यों?
यह अधिशेष है। विक्रेता ज़्यादा ख़रीदार खींचने के लिए कीमत घटाएगा, क्योंकि न बिके केले से कुछ नहीं मिलता।
5. दुकान थोक व्यापारी से 100 कॉपियाँ ₹16 प्रति कॉपी में लेकर ₹24 में बेचती है। ये कौन-से बाज़ार हैं, और दुकान का सकल मार्जिन क्या है?
थोक व्यापारी से बड़ी मात्रा में ख़रीद थोक बाज़ार है; छात्रों को बेचना खुदरा बाज़ार। मार्जिन = (24 − 16) × 100 = ₹800।
6. 1 यूरो = 90 रुपये। 150 यूरो के बदले पर्यटक को कितने रुपये मिलेंगे, और किस बाज़ार में?
150 × 90 = ₹13 500, विदेशी मुद्रा बाज़ार में।
आम गलतियाँ
- बाज़ार को सिर्फ़ इमारत या गली समझना। ख़रीदार-विक्रेता का कोई भी संपर्क बाज़ार है।
- मुद्रा बाज़ार (छोटे कर्ज़) और पूँजी बाज़ार (शेयर और लंबे कर्ज़) को एक समझना।
- मज़दूरी को कीमत न मानना। मज़दूरी श्रम की कीमत है।
- सोचना कि कमी में कीमत घटती है। कमी में कीमत बढ़ती है; अधिशेष में घटती है।