फ़ार्म इकाइयों के प्रकार और सहकारी समितियाँ
कृषि इकाई (फ़ार्म यूनिट) एक खेती का कारोबार है। इसका मालिक और चलाने वाला कौन है, इससे इसका प्रकार तय होता है।
- पारिवारिक खेत: एक परिवार भूमि का मालिक है और ज़्यादातर काम खुद करता है। यह छोटा और लचीला होता है।
- कृषि कंपनी: एक या कई साझेदारों का कारोबार। यह आमतौर पर बड़ा होता है। इसमें मज़दूर रखे जाते हैं और उपज दुकानों व कारखानों को बिकती है।
- सहकारी समिति: कई किसान मिलकर काम करते हैं। वे बीज साथ खरीदते हैं, मशीनें बाँटते हैं या फ़सल साथ बेचते हैं। हर सदस्य का हिस्सा होता है और उसकी बात सुनी जाती है।
सहकारी समिति छोटे किसानों की मदद करती है। बड़ा समूह खरीदते समय कम दाम और बेचते समय अच्छा दाम माँग सकता है। इसे थोक खरीद कहते हैं।
भौतिक संसाधन और भूमि
भौतिक संसाधन वे चीज़ें हैं जिन्हें छुआ जा सकता है: भूमि, इमारतें, मशीनें (जैसे ट्रैक्टर), औज़ार, बीज और पशु।
भूमि सबसे ज़रूरी है। इसे हेक्टेयर में नापते हैं (1 हेक्टेयर = 10,000 m², यानी लगभग 100 m × 100 m का वर्ग)। भूमि अपनी हो सकती है या किराए की। किराए का खेत हर साल किराया माँगता है, फ़सल खराब हो तब भी।
ज़्यादा भूमि से ज़्यादा फ़सल मिल सकती है। पर मशीनें और इमारतें घिसती भी हैं। इस मूल्य-ह्रास को अवमूल्यन (डेप्रिसिएशन) कहते हैं। किसान को इसकी योजना बनानी चाहिए।
मानव संसाधन और भर्ती
मानव संसाधन खेत पर काम करने वाले लोग हैं: मालिक, परिवार और रखे गए मज़दूर।
- स्थायी श्रमिक पूरे साल काम करते हैं और नियमित वेतन पाते हैं।
- मौसमी श्रमिक सिर्फ़ व्यस्त समय में रखे जाते हैं, जैसे बुवाई और कटाई।
भर्ती का मतलब है लोगों को ढूँढना और रखना। चरण: कौन-सा काम चाहिए यह तय करें, सूचना दें, व्यक्ति चुनें, वेतन और काम तय करें, और सुरक्षा का प्रशिक्षण दें। 3D में मोटा नियम है: एक श्रमिक लगभग 2 हेक्टेयर संभालता है। श्रमिक कम हों तो काम देर से होता है और उपज घटती है।
वित्तीय संसाधन और यूरोपीय संघ की निधि
वित्तीय संसाधन वह पैसा है जिससे खेती शुरू और जारी रहती है। तीन मुख्य स्रोत हैं।
- अपना पैसा: बचत या पिछले मौसम का लाभ। इसे लौटाना नहीं पड़ता, पर यह सीमित होता है।
- ऋण (लोन): बैंक से लिया पैसा, जो ब्याज सहित लौटाना होता है।
- अनुदान या सब्सिडी: सरकार या किसी संघ से किसानों की मदद के लिए मिला पैसा। इसे लौटाना नहीं पड़ता, पर नियम मानने पड़ते हैं। यूरोप में साझा कृषि नीति (CAP) जैसी यूरोपीय संघ की निधियाँ किसानों की मदद करती हैं। भारत में किसान क्रेडिट कार्ड (खेती का ऋण) और पीएम-किसान (आय सहायता) उदाहरण हैं।
अच्छी योजना तीनों स्रोत मिलाती है और देखती है कि खेत उधार चुका सकेगा या नहीं।
लागत: प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, स्थिर, परिवर्ती
लागत वह पैसा है जो उत्पादन के लिए खर्च होता है। लागत को दो तरीकों से बाँटते हैं।
तरीका 1: स्थिर या परिवर्ती। स्थिर लागत उपज कम हो या ज़्यादा, वही रहती है: भूमि का किराया, बीमा, ऋण का ब्याज, स्थायी श्रमिक का वेतन। परिवर्ती लागत उपज की मात्रा के साथ बदलती है: बीज, खाद, कीटनाशक, ईंधन, मौसमी मज़दूरी।
तरीका 2: प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष लागत एक फ़सल से सीधे जुड़ती है: गेहूँ का बीज सिर्फ़ गेहूँ के लिए है। अप्रत्यक्ष लागत कई फ़सलों में बँटी होती है: ट्रैक्टर का शेड, बिजली, प्रबंधक का वेतन।
कुल लागत = स्थिर लागत + परिवर्ती लागत। लाभ = आय − कुल लागत। आय लागत से कम हो तो हानि होती है।
करके देखिए: अपना खेत चलाइए
3D में भूमि और श्रमिक के स्लाइडर चलाइए। पहले अनुमान लगाइए: 2 हेक्टेयर बढ़ाएँ और नया श्रमिक न रखें तो लाभ का क्या होगा? फिर जाँचिए। घर पर भी कीजिए: एक महीने का परिवार का खर्च लिखिए। हर मद को स्थिर (किराया, स्कूल फ़ीस) या परिवर्ती (सब्ज़ी, मोबाइल डेटा) चिह्नित कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कुल लागत = स्थिर लागत + परिवर्ती लागत
- आय = मात्रा × दाम
- लाभ = आय − कुल लागत
- प्रति हेक्टेयर लागत = कुल लागत ÷ हेक्टेयर
- सम-विच्छेद मात्रा = स्थिर लागत ÷ (दाम − प्रति इकाई परिवर्ती लागत)
हल किए गए उदाहरण
1. एक खेत की स्थिर लागत प्रति वर्ष 5,000 और परिवर्ती लागत 300 प्रति हेक्टेयर है। खेत 10 हेक्टेयर का है। कुल लागत ज्ञात कीजिए।
परिवर्ती लागत = 300 × 10 = 3,000। कुल लागत = 5,000 + 3,000 = 8,000।
2. इसी खेत में 10 हेक्टेयर पर 4 टन प्रति हेक्टेयर उपज होती है और 250 प्रति टन बिकती है। आय और लाभ ज्ञात कीजिए।
मात्रा = 4 × 10 = 40 टन। आय = 40 × 250 = 10,000। लाभ = 10,000 − 8,000 = 2,000।
3. ऊपर वाले खेत की प्रति हेक्टेयर लागत ज्ञात कीजिए।
प्रति हेक्टेयर लागत = 8,000 ÷ 10 = 800।
4. इन लागतों को छाँटिए: (क) गेहूँ का बीज, (ख) ट्रैक्टर शेड का बीमा, (ग) सब मशीनों का डीज़ल, (घ) गेहूँ के खेत का किराया।
(क) प्रत्यक्ष और परिवर्ती। (ख) अप्रत्यक्ष और स्थिर। (ग) अप्रत्यक्ष और परिवर्ती। (घ) गेहूँ से प्रत्यक्ष और स्थिर।
5. एक किसान 1 टन खाद 480 प्रति टन में खरीदता है। 20 किसानों की सहकारी समिति थोक में 420 प्रति टन पर, हर किसान के लिए 1 टन खरीदती है। 20 किसान मिलकर कितना बचाते हैं?
प्रति टन बचत = 480 − 420 = 60। 20 किसानों की: 60 × 20 = 1,200।
6. स्थिर लागत 6,000 है। दाम 250 प्रति टन और परिवर्ती लागत 100 प्रति टन है। सम-विच्छेद मात्रा ज्ञात कीजिए।
हर टन से 250 − 100 = 150 बचता है। सम-विच्छेद = 6,000 ÷ 150 = 40 टन। 40 टन से कम पर खेत घाटे में रहता है।
7. एक परियोजना की लागत 10,000 है। अनुदान 50% देता है और बैंक ऋण 3,000 देता है। अपना कितना पैसा चाहिए?
अनुदान = 5,000। ऋण = 3,000। अपना पैसा = 10,000 − 5,000 − 3,000 = 2,000।
आम गलतियाँ
- "परिवर्ती" का मतलब "छोटा" समझना। इसका मतलब है कि उत्पादन की मात्रा बदलने पर लागत बदलती है।
- दोनों बाँटने के तरीकों को मिला देना: स्थिर/परिवर्ती और प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष अलग हैं। एक लागत पर दोनों नाम लग सकते हैं।
- लाभ निकालते समय स्थिर लागत भूल जाना। फ़सल कमज़ोर हो तब भी किराया और वेतन देना पड़ता है।
- अनुदान को ऋण या ऋण को मुफ़्त पैसा समझना। ऋण ब्याज सहित लौटाना पड़ता है।