कर क्या है और सरकार इसे क्यों लेती है?
कर सरकार को दिया जाने वाला अनिवार्य भुगतान है। बदले में सीधे कोई चीज़ नहीं मिलती। कर ही सरकार की आय (राजस्व) का मुख्य स्रोत है।
सरकार कर का उपयोग करती है:
- सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं के लिए: सड़क, स्कूल, अस्पताल, पुलिस, रक्षा;
- आय के पुनर्वितरण के लिए: पेंशन, राशन और सहायता से गरीबों की मदद;
- व्यवहार बदलने के लिए: तंबाकू या ईंधन पर ऊँचा कर ताकि हानिकारक उपयोग घटे;
- अर्थव्यवस्था संभालने के लिए: कर घटाकर ख़र्च बढ़ाना, कर बढ़ाकर महँगाई रोकना।
मुख्य ख़र्च आमतौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, रक्षा, बुनियादी ढाँचा और कर्ज़ के ब्याज पर होता है।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर
प्रत्यक्ष कर: कमाने या रखने वाला व्यक्ति या कंपनी सीधे सरकार को देता है। इसका बोझ आगे नहीं खिसकाया जा सकता। उदाहरण: आयकर, कंपनी (निगम) कर, संपत्ति कर, पूँजीगत लाभ कर।
अप्रत्यक्ष कर: वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में जुड़ता है। विक्रेता लेकर सरकार को देता है, पर असल बोझ खरीदार पर पड़ता है। उदाहरण: भारत में GST, यूरोप और अफ़्रीका में VAT, ईंधन पर उत्पाद शुल्क, आयात पर सीमा शुल्क।
| प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष | |
|---|---|---|
| कौन देता है | कमाने/रखने वाला | खरीदार, विक्रेता के ज़रिए |
| किससे जुड़ा | आय या संपत्ति | ख़र्च |
| प्रगतिशील बन सकता है? | हाँ, आसानी से | आमतौर पर प्रतिगामी |
प्रगतिशील, आनुपातिक और प्रतिगामी कर
देखो आय का कितना हिस्सा कर में जाता है।
- प्रगतिशील: आय बढ़े तो हिस्सा भी बढ़े (आयकर स्लैब)।
- आनुपातिक (समान दर): सबका हिस्सा बराबर, जैसे सबके लिए 10%।
- प्रतिगामी: आय बढ़े तो हिस्सा घटे। सबके लिए तय राशि, या ज़रूरी चीज़ों पर कर, छोटी आय का बड़ा हिस्सा ले लेता है।
अप्रत्यक्ष कर बराबर लगते हैं (साबुन पर सबके लिए 18%), पर गरीब परिवार लगभग पूरी आय ख़र्च कर देते हैं, तो उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा कर में जाता है। असर में यह प्रतिगामी है।
कर की गणना: स्लैब, प्रभावी दर और GST/VAT
स्लैब से आयकर
आय को स्लैब में बाँटो, हर स्लैब पर उसकी दर लगाओ, फिर जोड़ो। उदाहरण स्लैब: 30,000 तक 0%; 30,001–60,000 पर 10%; 60,000 से ऊपर 20%।
80,000 के लिए: 30,000 × 0% = 0; 30,000 × 10% = 3,000; 20,000 × 20% = 4,000। कुल = 7,000।
सीमांत दर = आख़िरी कमाई पर लगी दर (यहाँ 20%)। प्रभावी (औसत) दर = 7,000 ÷ 80,000 × 100 = 8.75%। ऊँचे स्लैब में जाने पर सिर्फ़ अतिरिक्त हिस्से पर ऊँची दर लगती है।
GST / VAT
कर सहित कीमत = कीमत × (1 + दर/100)। कुल रकम में छिपा कर = कुल × दर ÷ (100 + दर)। उदाहरण: 18% पर कुल 1,180 → कर = 1,180 × 18 ÷ 118 = 180।
घर पर करके देखो
घर से तीन दुकानों के बिल लो। हर बिल में कर की पंक्ति ढूँढो (GST, VAT या बिक्री कर)। कर की दर निकालो: कर ÷ कर से पहले की कीमत × 100। फिर दो परिवार सोचो: एक महीने में 20,000 कमाता है और 18,000 ख़र्च करता है; दूसरा 2,00,000 कमाता है और 60,000 ख़र्च करता है। अगर दोनों हर ख़र्च पर 10% कर दें, तो हर एक की आय का कितना हिस्सा जाएगा? पहले अनुमान लगाओ, फिर हिसाब करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कर = कर-योग्य राशि × दर ÷ 100
- स्लैब कर = Σ (स्लैब में आय × स्लैब दर)
- प्रभावी दर = कुल कर ÷ आय × 100
- GST/VAT सहित कीमत = कीमत × (1 + r/100)
- कुल में छिपा कर = कुल × r ÷ (100 + r)
- प्रगतिशील: आय ↑ तो हिस्सा ↑; प्रतिगामी: आय ↑ तो हिस्सा ↓
हल किए गए उदाहरण
1. 50,000 की आय पर 12% का समान कर है। कर कितना?
कर = 50,000 × 12 ÷ 100 = 6,000।
2. जूतों की कीमत 5% VAT से पहले 2,400 है। कुल कीमत?
VAT = 2,400 × 5 ÷ 100 = 120। कीमत = 2,400 + 120 = 2,520।
3. बिल का कुल 590 है जिसमें 18% GST शामिल है। कर कितना है?
कर = 590 × 18 ÷ 118 = 90। कर से पहले की कीमत = 500।
4. स्लैब: 30,000 तक 0%; 30,001–60,000 पर 10%; ऊपर 20%। 80,000 पर कर और प्रभावी दर?
0 + 3,000 + (20,000 × 20%) 4,000 = 7,000। प्रभावी दर = 7,000 ÷ 80,000 × 100 = 8.75%।
5. वही स्लैब। रिया की आय 60,000 से 65,000 हो जाती है। कर कितना बढ़ा?
60,000 पर: 3,000। 65,000 पर: 3,000 + 5,000 × 20% = 4,000। बढ़त = 1,000 (सिर्फ़ अतिरिक्त 5,000 पर 20%)।
6. सबसे 2,000 का तय कर लिया जाता है। 20,000 और 2,00,000 की आय के लिए आय का हिस्सा? यह कौन-सा कर है?
20,000: 10%। 2,00,000: 1%। आय बढ़ने पर हिस्सा घटता है, इसलिए प्रतिगामी।
आम गलतियाँ
- पूरी आय पर सबसे ऊँचे स्लैब की दर लगा देना। हर स्लैब पर अपनी दर लगती है।
- कुल रकम में छिपा कर निकालने के लिए कुल × दर ÷ 100 करना। सही है कुल × दर ÷ (100 + दर)।
- यह सोचना कि चीज़ों पर बराबर दर हमेशा न्यायपूर्ण है। यह छोटी आय का बड़ा हिस्सा लेती है, इसलिए असर में प्रतिगामी है।
- सीमांत दर (आख़िरी कमाई की दर) और प्रभावी दर (कुल कर ÷ आय) को मिला देना।