South 고등학교 3학년 Mathematics for Economics
अध्याय: 4
1. Numbers and economic life
Economic statistics · Percent change · Exchange rates · Gains and losses from rates · Taxes
- समष्टि आर्थिक सूचक: GDP, महँगाई और बेरोज़गारी – सरकारें कुछ मुख्य संख्याओं से देखती हैं कि अर्थव्यवस्था कैसी चल रही है। इन्हें समष्टि आर्थिक सूचक (macroeconomic indicators) कहते हैं। मुख्य हैं: वास्तविक GDP वृद्धि (उत्पादन बढ़ा या नहीं), मुद्रास्फीति (दाम कितनी तेज़ी से बढ़ रहे हैं), बेरोज़गारी (काम चाहने वालों को काम मिल रहा है या नहीं) और चालू खाता शेष (बाकी दुनिया से लेन-देन में देश की स्थिति)। हर सूचक का सूत्र भी है और सीमाएँ भी।
- प्रतिशत – प्रतिशत का अर्थ है "100 में से", इसलिए x% = x/100। किसी राशि का x% निकालने के लिए उसे x/100 से गुणा करें। प्रतिशत परिवर्तन = (परिवर्तन ÷ मूल) × 100। r% बढ़ाने के लिए (1 + r/100) से, r% घटाने के लिए (1 − r/100) से गुणा करें। क्रमागत परिवर्तनों में गुणकों को गुणा करते हैं। उल्टे प्रतिशत में नए मान को गुणक से भाग देते हैं।
- विनिमय दर: एक मुद्रा को दूसरी में बदलना – मुद्रा वह पैसा है जो कोई देश या देशों का समूह इस्तेमाल करता है। विनिमय दर एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में क़ीमत है, जैसे 1 USD = 83 INR। दूसरी मुद्रा में बदलने के लिए दर से गुणा करें, वापस बदलने के लिए भाग दें। बैंक और मुद्रा बदलने वाले विदेशी मुद्रा ऊँची दर पर बेचते और नीची दर पर ख़रीदते हैं, साथ में कमीशन ले सकते हैं, इसलिए हर अदला-बदली में थोड़ा घाटा होता है। दरें माँग और पूर्ति से बदलती हैं। मुद्रा की मूल्य-वृद्धि हो तो आयात सस्ता, निर्यात महँगा; मूल्य-ह्रास हो तो उल्टा। दर बदलने पर लोगों और कंपनियों को लाभ या हानि होती है।
- कराधान: कर के प्रकार और उनकी गणना – कर वह पैसा है जो लोगों और कंपनियों को सरकार को देना ही पड़ता है। सरकार इससे सार्वजनिक चीज़ें (सड़क, स्कूल, अस्पताल, रक्षा) चलाती है, गरीबों की मदद करती है और अर्थव्यवस्था संभालती है। प्रत्यक्ष कर सीधे आय या संपत्ति से दिए जाते हैं (आयकर, कंपनी कर, संपत्ति कर)। अप्रत्यक्ष कर चीज़ों और सेवाओं की कीमत में जुड़ते हैं (GST, VAT, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क)। अमीर अपनी आय का बड़ा हिस्सा दें तो कर प्रगतिशील, सब एक जैसा हिस्सा दें तो आनुपातिक, और गरीब बड़ा हिस्सा दें तो प्रतिगामी। आयकर में अक्सर स्लैब होते हैं: हर स्लैब की अपनी दर। प्रभावी दर = कुल कर ÷ आय × 100।
2. Sequences and finance
Simple and compound interest · Interest and discount rates · Present value · Continuous compounding · Using continuous compounding · Annuities · Present value of annuities
- चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) – ब्याज वह अतिरिक्त पैसा है जो किसी का पैसा इस्तेमाल करने के बदले मिलता है। साधारण ब्याज सिर्फ़ शुरुआती रकम (मूलधन) पर लगता है, इसलिए हर साल बराबर बढ़ता है। चक्रवृद्धि ब्याज मूलधन और अब तक मिले ब्याज दोनों पर लगता है, यानी ब्याज पर भी ब्याज। n साल बाद मिश्रधन A = P(1 + r/100)ⁿ। साल में k बार ब्याज जुड़े तो दर r/k और अवधियाँ k × n लें। हर पल ब्याज जुड़े तो A = Pe^(rt)। कीमत घटे (ह्रास) तो A = P(1 − r/100)ⁿ। चक्रवृद्धि वृद्धि एक घातांकी (exponential) वृद्धि है।
- वार्षिकी: बराबर किस्तें, भावी मूल्य और वर्तमान मूल्य – वार्षिकी (annuity) बराबर समय-अंतर पर दी गई बराबर किस्तों की श्रृंखला है, जैसे हर महीने की बचत या ऋण की किस्त। हर किस्त चक्रवृद्धि ब्याज कमाती है, इसलिए किस्तें गुणोत्तर श्रेणी बनाती हैं। साधारण वार्षिकी (हर अवधि के अंत में किस्त) का भावी मूल्य: FV = P[(1+i)ⁿ − 1]/i। वर्तमान मूल्य: PV = P[1 − (1+i)⁻ⁿ]/i। ऋण की राशि सभी किस्तों के वर्तमान मूल्य के बराबर होती है।
3. Functions and economy
Production and cost functions · Demand and supply · Utility · Equilibrium · Tax and income effects · Decisions with utility functions · Regions of inequalities
- फलन: संयुक्त, प्रतिलोम और मानक ग्राफ़ – फलन (function) एक नियम है जो हर मान्य इनपुट को ठीक एक आउटपुट देता है। मान्य इनपुट का समुच्चय प्रांत (domain) और आउटपुट का समुच्चय परिसर (range) है। g(f(x)) का मतलब है पहले f, फिर g। प्रतिलोम फलन f⁻¹, f का काम उल्टा कर देता है और उसका ग्राफ़ रेखा y = x में f के ग्राफ़ की दर्पण-छवि होता है। सिर्फ़ एकैकी (one-to-one) फलन का प्रतिलोम होता है।
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
- उपभोक्ता संतुलन: उपयोगिता, बजट रेखा और तटस्थता वक्र – उपभोक्ता संतुलन में होता है जब वह अपनी सीमित आय और दी गई कीमतों से सबसे ज़्यादा संतुष्टि पाता है और खरीद बदलना नहीं चाहता। उपयोगिता विश्लेषण में एक वस्तु के लिए शर्त MU (रुपयों में) = कीमत, दो वस्तुओं के लिए MUx/Px = MUy/Py। तटस्थता वक्र विश्लेषण में सबसे अच्छा बंडल वहाँ है जहाँ बजट रेखा सबसे ऊँचे तटस्थता वक्र को छूती है: MRS = P1/P2, और MRS घटता हुआ हो।
- रैखिक प्रोग्रामन (कक्षा 12): ग्राफ से सबसे अच्छा उत्तर खोजो – रैखिक प्रोग्रामन से हम कुछ नियम मानते हुए सबसे ज़्यादा लाभ या सबसे कम खर्च निकालते हैं। नियम सीधी रेखा वाली असमिकाएँ होती हैं, जिन्हें व्यवरोध (constraints) कहते हैं। सब व्यवरोध मिलकर अनुमत बिंदुओं का एक क्षेत्र बनाते हैं, यही सुसंगत क्षेत्र (feasible region) है। लक्ष्य Z = ax + by (उद्देश्य फलन) हमेशा इस क्षेत्र के किसी कोने पर सबसे अच्छा होता है। इसलिए: रेखाएँ खींचो, सही तरफ़ रंगो, कोने निकालो, हर कोने को Z में रखो और सबसे बड़ा या छोटा चुनो। क्षेत्र खुला (अपरिबद्ध) हो तो एक बार जाँच ज़रूर करो।
4. Differentiation and economy
Meaning of derivatives · Graphs with derivatives · Marginal product · Elasticity
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- अवकलज की मदद से वक्र अनुरेखण – y = f(x) का स्केच बनाने के लिए: प्रांत और अंतःखंड निकालो, f'(x) = 0 से स्थिर बिंदु निकालो, f'(x) के चिह्न से देखो वक्र कहाँ बढ़ता-घटता है, f''(x) से अवतलता और नति परिवर्तन बिंदु निकालो, अनंतस्पर्शी और सिरों का व्यवहार देखो, फिर सब कुछ चिकने वक्र से जोड़ो। उदाहरण: y = x³ − 3x का उच्चिष्ठ (−1, 2), निम्निष्ठ (1, −2) और नति परिवर्तन बिंदु (0, 0) है।
- माँग और पूर्ति की कीमत लोच – लोच बताती है कि कीमत बदलने पर मात्रा कितनी ज़ोर से बदलती है। माँग की कीमत लोच (PED) = माँगी गई मात्रा में % बदलाव ÷ कीमत में % बदलाव; यह ऋणात्मक होती है पर आमतौर पर चिह्न के बिना लिखते हैं। PED > 1 लोचदार (ख़रीदार ज़्यादा प्रतिक्रिया करते), PED < 1 बेलोचदार (लगभग प्रतिक्रिया नहीं), PED = 1 इकाई लोच। नज़दीकी स्थानापन्न, विलासिता की वस्तु, आय का बड़ा हिस्सा या ज़्यादा समय हो तो माँग ज़्यादा लोचदार होती है। माँग लोचदार हो तो कीमत घटाने से कुल आगम बढ़ता है; बेलोचदार हो तो कीमत बढ़ाने से। पूर्ति की कीमत लोच (PES) = पूर्ति की मात्रा में % बदलाव ÷ कीमत में % बदलाव; ख़ाली क्षमता, भंडार, आसान कच्चा माल और ज़्यादा समय हो तो पूर्ति ज़्यादा लोचदार।