वार्षिकी क्या है?
वार्षिकी बराबर समय-अंतर (हर महीने, हर साल) पर दी गई बराबर किस्तों का समूह है।
- साधारण वार्षिकी: हर किस्त अवधि के अंत में। ज़्यादातर ऋण और बचत योजनाएँ।
- देय वार्षिकी (annuity due): हर किस्त अवधि की शुरुआत में, जैसे पहले से दिया किराया।
- शाश्वत वार्षिकी (perpetuity): किस्तें हमेशा चलती रहें।
चिह्न: P = हर अवधि की किस्त, i = प्रति अवधि ब्याज दर (दशमलव में), n = किस्तों की संख्या। मासिक किस्त और सालाना दर r हो तो i = r/12, n = 12 × वर्ष।
भावी मूल्य: एक गुणोत्तर श्रेणी
अवधि के अंत में किस्त हो, तो पहली किस्त n − 1 अवधि ब्याज कमाती है, आखिरी 0। इसलिए
FV = P + P(1+i) + P(1+i)² + … + P(1+i)ⁿ⁻¹
यह गुणोत्तर श्रेणी है: पहला पद P, अनुपात (1+i), n पद। Sn = a(rⁿ − 1)/(r − 1) से:
FV = P · [(1+i)ⁿ − 1] / i
देय वार्षिकी में हर किस्त को एक अवधि ज़्यादा ब्याज: FVदेय = FV × (1+i)।
निक्षेप निधि (sinking fund) उल्टा पूछती है: लक्ष्य FV के लिए किस्त P कितनी? P = FV · i / [(1+i)ⁿ − 1]।
वार्षिकी का वर्तमान मूल्य
आज का पैसा बाद के उतने ही पैसे से ज़्यादा कीमती है, क्योंकि आज का पैसा ब्याज कमा सकता है। k अवधि बाद की किस्त को आज लाने के लिए (1+i)k से भाग दीजिए। इसे बट्टा (discounting) कहते हैं।
PV = P/(1+i) + P/(1+i)² + … + P/(1+i)ⁿ — फिर गुणोत्तर श्रेणी (अनुपात 1/(1+i)):
PV = P · [1 − (1+i)⁻ⁿ] / i
जाँच: PV × (1+i)ⁿ = FV। शाश्वत वार्षिकी में n → ∞, (1+i)⁻ⁿ → 0, तो PV = P / i।
ऋण और किस्तें (EMI)
आज L उधार लेकर n बराबर किस्तों में चुकाएँ, तो बैंक किस्त ऐसी रखता है कि सभी किस्तों का वर्तमान मूल्य L हो:
P = L · i / [1 − (1+i)⁻ⁿ]
हर किस्त पहले बचे हुए ऋण का ब्याज चुकाती है, बाकी से ऋण घटता है। शुरू में ज़्यादातर ब्याज; अंत में ज़्यादातर मूलधन। कुल भुगतान = n × P, कुल ब्याज = nP − L।
कितनी अवधियाँ लगेंगी, यह लघुगणक से निकालिए: n = log(…) / log(1+i), फिर ऊपर की ओर पूर्णांक लीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- FV = P·[(1+i)ⁿ − 1]/i (साधारण वार्षिकी)
- PV = P·[1 − (1+i)⁻ⁿ]/i
- देय वार्षिकी: FV या PV को (1+i) से गुणा
- ऋण किस्त: P = L·i / [1 − (1+i)⁻ⁿ]
- निक्षेप निधि: P = FV·i / [(1+i)ⁿ − 1]
- शाश्वत वार्षिकी: PV = P / i
- मासिक: i = r/12, n = 12 × वर्ष
हल किए गए उदाहरण
1. 5 साल तक हर साल के अंत में ₹1,000, 5% वार्षिक चक्रवृद्धि। भावी मूल्य?
FV = 1000 × (1.05⁵ − 1)/0.05। चरण 1: 1.05⁵ = 1.27628। चरण 2: 0.27628। चरण 3: ÷ 0.05 = 5.5256। चरण 4: × 1000 = ₹5,525.63।
2. वही किस्तें। वर्तमान मूल्य?
PV = 1000 × (1 − 1.05⁻⁵)/0.05। 1.05⁻⁵ = 0.78353। 1 − 0.78353 = 0.21647। ÷ 0.05 = 4.3295। PV = ₹4,329.48। जाँच: 4,329.48 × 1.27628 = 5,525.63 ✓
3. 1 साल तक हर महीने के अंत में ₹500, 12% वार्षिक, मासिक चक्रवृद्धि। FV?
i = 0.01, n = 12। FV = 500 × (1.01¹² − 1)/0.01 = 500 × 12.6825 = ₹6,341.25।
4. ₹10,000 का ऋण 5% पर 5 बराबर सालाना किस्तों में। किस्त?
P = 10000 × 0.05/(1 − 1.05⁻⁵) = 500/0.21647 = ₹2,309.75। कुल भुगतान ₹11,548.74, ब्याज ₹1,548.74।
5. ₹2,00,000 का ऋण 9% वार्षिक पर 3 साल, मासिक EMI?
i = 0.0075, n = 36। 1.0075⁻³⁶ = 0.76415। P = 1500/0.23585 = ₹6,359.95।
6. हर साल के अंत में ₹1,000, 5% पर। कितने साल में निधि पहली बार ₹10,000 पार करेगी?
1000(1.05ⁿ − 1)/0.05 ≥ 10000 → 1.05ⁿ ≥ 1.5 → n ≥ log 1.5 / log 1.05 = 8.31। तो 9 साल।
7. एक छात्रवृत्ति हमेशा हर साल ₹5,000 देती है। ब्याज 4%। आज कितना निवेश चाहिए?
शाश्वत वार्षिकी: PV = 5000/0.04 = ₹1,25,000।
आम गलतियाँ
- मासिक किस्तों में सालाना दर लगाना। दर को 12 से भाग दीजिए और वर्षों को 12 से गुणा।
- FV और PV में गड़बड़: भविष्य के लक्ष्य के लिए बचत → FV; आज लिया ऋण → PV।
- देय वार्षिकी (शुरुआत में किस्त) में (1+i) का अतिरिक्त गुणा भूल जाना।
- (1+i)ⁿ को बहुत जल्दी पूर्णांकित करना। कम से कम 5 दशमलव स्थान रखिए।