सम्मिश्र संख्याओं की आवश्यकता क्यों?
किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग करें: 3² = 9, (−3)² = 9, 0² = 0। उत्तर कभी ऋणात्मक नहीं आता। इसलिए x² + 1 = 0 का कोई वास्तविक हल नहीं।
इसके लिए एक नई संख्या आयोटा (i) ली गई, जिसमें i² = −1। तो √(−1) = i और √(−9) = 3i।
सम्मिश्र संख्या z = a + ib है, जहाँ a, b वास्तविक हैं। a को वास्तविक भाग Re(z) और b को काल्पनिक भाग Im(z) कहते हैं। वास्तविक संख्याएँ भी सम्मिश्र हैं (b = 0)। 3D का चरण 1 देखें: i यानी 1 का चौथाई घुमाव।
i की घातें
i¹ = i, i² = −1, i³ = −i, i⁴ = 1, फिर यही क्रम दोहराता है। iⁿ निकालने के लिए n को 4 से भाग दें और शेषफल लें। उदाहरण: 102 = 4 × 25 + 2, इसलिए i¹⁰² = −1।
ध्यान दें: √a·√b = √(ab) तभी सही है जब a और b दोनों ऋणात्मक न हों। √(−4)·√(−9) = 2i·3i = 6i² = −6, न कि 6।
सम्मिश्र संख्याओं का बीजगणित
- समानता: a + ib = c + id तभी, जब a = c और b = d।
- योग: (a + ib) + (c + id) = (a + c) + i(b + d)। यह संवृत, क्रमविनिमेय और साहचर्य है; 0 योज्य तत्समक और −z योज्य प्रतिलोम है।
- अंतर: (a − c) + i(b − d)।
- गुणन: कोष्ठक की तरह गुणा करें और i² = −1 रखें: (a + ib)(c + id) = (ac − bd) + i(ad + bc)। यह भी क्रमविनिमेय, साहचर्य और योग पर बंटनकारी है; 1 गुणात्मक तत्समक है।
- गुणात्मक प्रतिलोम: z = a + ib ≠ 0 के लिए z⁻¹ = (a − ib)/(a² + b²)।
- भाग: z₁/z₂ = z₁·z₂⁻¹, यानी ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें।
संयुग्मी और मापांक
z = a + ib का संयुग्मी z̄ = a − ib (काल्पनिक भाग का चिह्न बदलें)। मापांक |z| = √(a² + b²)। काम के नियम: z·z̄ = |z|², |z₁z₂| = |z₁||z₂|, |z₁/z₂| = |z₁|/|z₂|।
दो अवास्तविक सम्मिश्र संख्याओं में ‘बड़ी-छोटी’ का अर्थ नहीं होता; केवल उनके मापांक की तुलना कर सकते हैं।
आर्गंड तल
दो लंबवत अक्ष बनाएँ: क्षैतिज वास्तविक अक्ष और ऊर्ध्वाधर काल्पनिक अक्ष। संख्या a + ib बिंदु (a, b) है। इस चित्र को आर्गंड तल (सम्मिश्र तल) कहते हैं।
- वास्तविक संख्याएँ वास्तविक अक्ष पर, शुद्ध काल्पनिक संख्याएँ काल्पनिक अक्ष पर।
- |z| बिंदु की मूल बिंदु O से दूरी है (पाइथागोरस, चरण 5)।
- z̄ वास्तविक अक्ष में z का दर्पण प्रतिबिंब है।
- z₁ + z₂ समांतर चतुर्भुज का चौथा कोना है (चरण 3)।
- i से गुणा = O के चारों ओर 90° वामावर्त घुमाव (चरण 4)।
सम्मिश्र मूल वाले द्विघात समीकरण
ax² + bx + c = 0 के मूल x = (−b ± √D)/2a हैं, जहाँ D = b² − 4ac।
- D > 0: दो अलग वास्तविक मूल। D = 0: दो बराबर मूल।
- D < 0: √D = i√(−D), तो x = (−b ± i√(−D))/2a। मूल सम्मिश्र और संयुग्मी जोड़ा होते हैं।
उदाहरण: x² + 2x + 5 = 0, D = −16, √D = 4i, x = −1 ± 2i। 3D के खेल वाले चरण में आज़माएँ।
बोर्ड परीक्षा के लिए
कक्षा 11 में बीजगणित इकाई लगभग 25 अंक की है। इस अध्याय से पूछा जाता है: i की घात (1 अंक), भागफल को a + ib रूप में लिखना (2–3 अंक), मापांक, संयुग्मी, प्रतिलोम (2 अंक), D < 0 वाले द्विघात (2–3 अंक)। उत्तर हमेशा a + ib रूप में दें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- i = √(−1), i² = −1, i³ = −i, i⁴ = 1
- z = a + ib; Re(z) = a, Im(z) = b
- (a + ib)(c + id) = (ac − bd) + i(ad + bc)
- z̄ = a − ib; |z| = √(a² + b²); z·z̄ = |z|²
- z⁻¹ = z̄ / |z|² = (a − ib)/(a² + b²)
- ax² + bx + c = 0, D < 0: x = (−b ± i√(−D)) / 2a
हल किए गए उदाहरण
1. i⁵⁷ और i⁻³ ज्ञात कीजिए।
57 = 4 × 14 + 1, इसलिए i⁵⁷ = i। i⁻³ = 1/i³ = 1/(−i) = −1/i। ऊपर-नीचे i से गुणा: −i/i² = −i/(−1) = i। तो i⁻³ = i।
2. (5 − 3i) + (−2 + 7i) और (5 − 3i) − (−2 + 7i) सरल कीजिए।
योग: वास्तविक 5 − 2 = 3, काल्पनिक −3 + 7 = 4 → 3 + 4i। अंतर: वास्तविक 5 + 2 = 7, काल्पनिक −3 − 7 = −10 → 7 − 10i।
3. (2 + 3i)(4 − i) का गुणा कीजिए।
8 − 2i + 12i − 3i²। i² = −1 रखें: 8 + 3 + 10i = 11 + 10i।
4. z = 3 − 4i का मापांक, संयुग्मी और गुणात्मक प्रतिलोम ज्ञात कीजिए।
|z| = √(9 + 16) = 5। z̄ = 3 + 4i। z⁻¹ = z̄/|z|² = (3 + 4i)/25 = 3/25 + (4/25)i। जाँच: (3 − 4i)(3 + 4i)/25 = 1।
5. (1 + 2i)/(3 − i) को a + ib रूप में लिखिए।
ऊपर-नीचे 3 + i से गुणा। हर: 9 + 1 = 10। अंश: (1 + 2i)(3 + i) = 3 + 7i + 2i² = 1 + 7i। उत्तर: 1/10 + (7/10)i।
6. 2x² − 2x + 1 = 0 हल कीजिए।
D = 4 − 8 = −4 < 0, √D = 2i। x = (2 ± 2i)/4 = 1/2 ± (1/2)i। दोनों मूल संयुग्मी हैं।
7. वास्तविक x, y ज्ञात कीजिए यदि (x + 2y) + i(2x − y) = 5 + 5i।
भागों की तुलना: x + 2y = 5, 2x − y = 5। दूसरे से y = 2x − 5। फिर x + 4x − 10 = 5, इसलिए x = 3, y = 1।
8. यदि (a + ib)/(c + id) = x + iy, तो दिखाइए (a² + b²)/(c² + d²) = x² + y²।
दोनों ओर मापांक लें: √(a² + b²)/√(c² + d²) = √(x² + y²)। वर्ग करने पर परिणाम मिलता है।
आम गलतियाँ
- i² = 1 लिखना। सही है i² = −1।
- √(−4)·√(−9) = √36 = 6 लिखना। पहले 2i·3i = 6i² = −6 लिखें।
- सम्मिश्र संख्या से सीधे भाग देना। हमेशा हर के संयुग्मी से ऊपर-नीचे गुणा करें।
- 3 + 2i > 1 + i कहना। अवास्तविक सम्मिश्र संख्याओं में क्रम नहीं होता; मापांक की तुलना करें।