United Grade 10 Integrated Mathematics II
अध्याय: 6
1. Extending the number system
Rational exponents · Rational and irrational numbers · Complex number arithmetic · Polynomial arithmetic
- घातांक के नियम – घातांक बताता है कि आधार को कितनी बार खुद से गुणा किया गया। एक ही आधार हो तो: गुणा → घातांक जोड़ें, भाग → घटाएँ, घात की घात → गुणा करें। a⁰ = 1, a⁻ⁿ = 1/aⁿ और a^(1/n) = n-वाँ मूल।
- अपरिमेय संख्याएँ: √2, √3, वर्गमूल सर्पिल और वास्तविक संख्याएँ – अपरिमेय संख्या को p/q के रूप में नहीं लिख सकते। इसका दशमलव न कभी खत्म होता है, न दोहराता है, जैसे √2 = 1.41421356… या π। फिर भी √2 को संख्या रेखा पर ठीक-ठीक दिखा सकते हैं: यह 1 भुजा वाले वर्ग का विकर्ण है। √2 और √3 अपरिमेय हैं, यह हम मानकर सिद्ध करते हैं कि वे सरलतम भिन्न हैं और फिर विरोधाभास पाते हैं। वर्गमूल सर्पिल एक-एक समकोण त्रिभुज जोड़कर √2, √3, √4, √5 … बनाता है। परिमेय और अपरिमेय मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाते हैं; हर आवर्ती दशमलव को वापस p/q में बदल सकते हैं।
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
- बहुपद: शून्यक और गुणांक – ax² + bx + c जैसे बहुपद की एक घात (सबसे बड़ी घात) होती है। शून्यक x का वह मान है जिस पर बहुपद 0 हो जाए। ग्राफ पर शून्यक वे x-निर्देशांक हैं जहाँ वक्र y = p(x), x-अक्ष से मिलता है। घात n वाले बहुपद के अधिक से अधिक n शून्यक होते हैं। ax² + bx + c के शून्यक α, β हों तो α + β = −b/a और αβ = c/a.
2. Quadratic functions and modeling
Quadratic functions and key features · Comparing linear, quadratic, exponential · Transformations and inverses
- द्विघात फलन और उनके ग्राफ़ – द्विघात फलन (quadratic function) y = ax² + bx + c है, जहाँ a ≠ 0। इसका ग्राफ़ U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं। a > 0 हो तो वक्र ऊपर खुलता है और उसका एक सबसे निचला बिंदु होता है; a < 0 हो तो नीचे खुलता है और सबसे ऊँचा बिंदु होता है। यह मोड़ बिंदु शीर्ष (vertex) है, x = −b/2a पर। शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k में शीर्ष (h, k) है।
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।
- फलनों का रूपांतरण – रूपांतरण (transformation) मूल फलन y = f(x) के ग्राफ़ को बदलता है, पर उसका बुनियादी आकार नहीं। फलन के बाहर जोड़ने से ग्राफ़ ऊपर-नीचे जाता है: f(x) + k यानी k ऊपर। कोष्ठक के अंदर का बदलाव क्षैतिज और उलटा होता है: f(x − h) यानी h दाएँ। बाहर गुणा, a·f(x), ऊर्ध्वाधर खिंचाव है (a < 0 हो तो x-अक्ष में पलटता है)। अंदर गुणा, f(bx), क्षैतिज रूप से 1/b गुना दबाता है (b < 0 हो तो y-अक्ष में पलटता है)। सब मिलाकर: y = a·f(b(x − h)) + k, और मूल का बिंदु (0, 0) पहुँचता है (h, k) पर।
3. Expressions and equations
Equivalent forms of expressions · Creating equations and inequalities · Solving quadratics incl. complex solutions · Linear-quadratic systems
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
- एक चर वाले रैखिक समीकरण – एक चर वाले रैखिक समीकरण में एक ही अज्ञात राशि (जैसे x) होती है और उसकी घात 1 होती है, जैसे 2x + 3 = 11। समीकरण एक तराज़ू जैसा है: दोनों पक्ष बराबर हैं। हल करने के लिए दोनों पक्षों पर एक जैसा काम करो (एक ही संख्या जोड़ो, घटाओ, गुणा करो या शून्य के अलावा किसी संख्या से भाग दो), जब तक x अकेला न रह जाए। आख़िर में उत्तर वापस रखकर जाँच ज़रूर करो।
- द्विघात समीकरण – जिस समीकरण में x की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0। इसके ज़्यादा से ज़्यादा दो मूल होते हैं। मूल निकालने के दो तरीक़े: गुणनखंड (मध्य पद को तोड़कर) या सूत्र x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। विविक्तकर D = b² − 4ac बताता है: D > 0 तो दो अलग वास्तविक मूल, D = 0 तो दो बराबर मूल, D < 0 तो कोई वास्तविक मूल नहीं।
- युगपत समीकरण – युगपत समीकरण वे दो या ज़्यादा समीकरण हैं जो एक ही समय पर सही होने चाहिए। उनका हल वे मान हैं जो हर समीकरण में ठीक बैठें। ग्राफ़ पर हर हल वह बिंदु है जहाँ ग्राफ़ मिलते हैं। एक रेखा और एक वक्र हो तो रेखा को वक्र में रखें (प्रतिस्थापन); द्विघात समीकरण बनेगा, जिसका विविक्तकर बताएगा कि 2, 1 या 0 हल हैं। तीन रैखिक समीकरणों में एक-एक करके चर हटाएँ।
4. Applications of probability
Independence and conditional probability · Probability rules for compound events · Probability and decisions (+)
- प्रायिकता: घटनाएँ, घटनाओं का बीजगणित और अभिगृहीत – घटना प्रतिदर्श समष्टि S का कोई भी उपसमुच्चय है। घटनाओं A और B से नई घटनाएँ बनती हैं: A नहीं (A′), A और B (A ∩ B), A या B (A ∪ B)। कोई साझा परिणाम न हो तो घटनाएँ परस्पर अपवर्जी, और मिलकर पूरा S बनाएँ तो निःशेष। अभिगृहीत: हर P(E) ≥ 0, P(S) = 1, और परस्पर अपवर्जी A, B के लिए P(A ∪ B) = P(A) + P(B)। इनसे P(A′) = 1 − P(A) और P(A ∪ B) = P(A) + P(B) − P(A ∩ B) मिलते हैं।
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
5. Similarity, right-triangle trigonometry and proof
Similarity transformations · Proving similarity theorems · Right-triangle trigonometry · Proving geometric theorems · Pythagorean identity
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- त्रिकोणमितीय अनुपात (sin, cos, tan) – समकोण त्रिभुज में एक न्यून कोण θ चुनो। θ के सामने वाली भुजा लंब (सम्मुख), θ को छूने वाली छोटी भुजा आधार (आसन्न), और सबसे लंबी भुजा कर्ण। sin θ = लंब/कर्ण, cos θ = आधार/कर्ण, tan θ = लंब/आधार। cosec, sec, cot इनके उल्टे हैं। ये अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर हैं, त्रिभुज के आकार पर नहीं। 0°, 30°, 45°, 60°, 90° की टेबल याद करो।
- तर्क और उपपत्ति: गणितज्ञ कैसे दिखाते हैं कि कोई बात हमेशा सत्य है – उपपत्ति (proof) सही कारणों की ऐसी कड़ी है जो दिखाती है कि कथन हर स्थिति में सत्य है। कथन सत्य या असत्य होता है; 'यदि P तो Q' (P ⇒ Q) का अर्थ है P होने पर Q ज़रूर होगा, पर उसका विलोम Q ⇒ P ग़लत भी हो सकता है। P ⇔ Q का अर्थ दोनों दिशाएँ सही। मुख्य विधियाँ: प्रत्यक्ष उपपत्ति (ज्ञात तथ्यों से क़दम-दर-क़दम, जैसे विषम संख्या 2n + 1); सभी स्थितियाँ जाँचकर उपपत्ति; प्रति-उदाहरण से खंडन (एक असफल स्थिति दावे को गिरा देती है); विरोधाभास से उपपत्ति (उल्टा मानकर असंभव तक पहुँचना)। ज्यामितीय उपपत्ति में हर पंक्ति का कारण लिखा जाता है (समांतर रेखाएँ, सर्वांगसम और समरूप त्रिभुज)। विश्लेषणात्मक उपपत्ति निर्देशांक लेती है; संश्लेषणात्मक उपपत्ति शुद्ध ज्यामिति।
- त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ – सर्वसमिका वह समीकरण है जो हर मान्य कोण के लिए सही हो। कर्ण 1 वाले समकोण त्रिभुज पर पाइथागोरस से: sin²A + cos²A = 1। cos²A से भाग देने पर 1 + tan²A = sec²A (A ≠ 90°)। sin²A से भाग देने पर 1 + cot²A = cosec²A (A ≠ 0°)। इनसे एक अनुपात से दूसरा निकालते हैं और दूसरे कथन सिद्ध करते हैं।
6. Circles with and without coordinates
Circle theorems · Arc length and sector area · Circles and parabolas by equation · Coordinate proofs with circles · Volume formulas
- वृत्त: जीवाएँ और कोण – जीवा वृत्त के दो बिंदुओं को मिलाती है। लंबी जीवा केंद्र पर बड़ा कोण बनाती है, और बराबर जीवाएँ बराबर कोण। केंद्र से जीवा पर डाला लंब उसे आधा करता है, और बराबर जीवाएँ केंद्र से बराबर दूरी पर होती हैं। कोई चाप केंद्र पर जो कोण बनाता है, वह वृत्त के बाकी हिस्से के किसी भी बिंदु पर बने कोण का दोगुना होता है, इसलिए अर्धवृत्त का कोण 90° है। चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का जोड़ 180° होता है।
- त्रिज्यखंड और वृत्तखंड का क्षेत्रफल – त्रिज्यखंड वृत्त का पिज़्ज़ा जैसा टुकड़ा है: क्षेत्रफल = θ/360 × πr²। उसका किनारा चाप है: लंबाई = θ/360 × 2πr। वृत्तखंड = त्रिज्यखंड − अंदर का त्रिभुज।
- शंकु परिच्छेद (कक्षा 11): वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त और अतिपरवलय – द्वि-शंकु को समतल से काटने पर वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय या अतिपरवलय बनता है; शीर्ष से कटे तो बिंदु, रेखा या रेखा-युग्म (अपभ्रष्ट)। वृत्त: (x − h)² + (y − k)² = r²। परवलय y² = 4ax: नाभि (a, 0), नियता x = −a, नाभिलंब 4a, e = 1। दीर्घवृत्त x²/a² + y²/b² = 1: c² = a² − b², e = c/a < 1, नाभिलंब 2b²/a, PF₁ + PF₂ = 2a। अतिपरवलय x²/a² − y²/b² = 1: c² = a² + b², e > 1, |PF₁ − PF₂| = 2a।
- निर्देशांक प्रमाण: निर्देशांकों से ज्यामिति सिद्ध करना – निर्देशांक प्रमाण में हम आकृति को ग्रिड पर रखते हैं और बीजगणित से उसके तथ्य सिद्ध करते हैं। दूरी सूत्र से लंबाई, मध्य-बिंदु सूत्र से समद्विभाजन, और ढलान से समांतर (बराबर ढलान) या लंब (ढलानों का गुणनफल −1) सिद्ध होता है। वृत्त के लिए: बिंदु (x, y) केंद्र (h, k) और त्रिज्या r वाले वृत्त पर तभी है जब (x − h)² + (y − k)² = r²; पूर्ण वर्ग बनाकर उलझा समीकरण इसी रूप में आता है।
- पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन: ठोसों का संयोजन – बहुत सी चीज़ें दो सरल ठोसों को जोड़कर बनती हैं, जैसे बेलन के ऊपर शंकु। पृष्ठीय क्षेत्रफल सिर्फ़ बाहर की सतह है, इसलिए जोड़ वाला छिपा हिस्सा नहीं गिनते। आयतन अंदर की जगह है, इसलिए हिस्सों के आयतन सीधे जोड़ देते हैं।