France Terminale STI2D (industrial sciences and sustainable development) — Terminale specialties
अध्याय: 11
1. 1. Product design principles and sustainable development
The project approach · Systems engineering tools · Product competitiveness · Creativity and technological innovation · Environmental approach
- परियोजना प्रबंधन – परियोजना (project) एक बार का काम है जिसका साफ़ लक्ष्य, शुरुआत और अंत होता है। परियोजना प्रबंधन यानी उसकी योजना बनाकर और नियंत्रण करके उसे तय दायरे में, समय पर और बजट में पूरा करना। जीवन चक्र: आरंभ, योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और समापन। योजनाकार काम को छोटे कामों (WBS) में बाँटते हैं, गैंट चार्ट पर रखते हैं, क्रांतिक पथ ढूँढते हैं, जोखिम सँभालते हैं और अंत में सीख की समीक्षा करते हैं।
- सिस्टम इंजीनियरिंग – सिस्टम इंजीनियरिंग किसी उत्पाद को एक पूरे सिस्टम की तरह डिज़ाइन करती है। यह उपयोगकर्ता की ज़रूरत से शुरू होती है, उसे मापने लायक शर्तों में बदलती है, पदार्थ, ऊर्जा और सूचना के प्रवाह को देखती है, और V-चक्र में ऊपर चढ़ते हुए जाँचती है: सत्यापन (सही बना?) और मान्यता (सही चीज़ बनी?)।
- उत्पाद की प्रतिस्पर्धात्मकता: नवाचार, पेटेंट, एर्गोनॉमिक्स और संतुलन – कोई उत्पाद तब प्रतिस्पर्धी है जब ग्राहक को अपने दाम पर दूसरों से ज़्यादा मूल्य मिले। कंपनियाँ नवाचार (उत्पाद, प्रक्रिया, विपणन), विचारों की सुरक्षा (पेटेंट, मानक, औद्योगिक संपत्ति), लोगों के अनुकूल डिज़ाइन (एर्गोनॉमिक्स), सुविधा-लागत-ज़रूरत का संतुलन और कम पर्यावरण असर से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाती हैं।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- सतत डिज़ाइन: लोगों और धरती के अनुकूल उत्पाद – सतत (टिकाऊ) डिज़ाइन का मतलब है ऐसे उत्पाद बनाना जो हमारी ज़रूरत पूरी करें और प्रकृति व लोगों को कम से कम नुकसान दें। हर उत्पाद का जीवन चक्र है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। जीवन चक्र आकलन हर चरण का पारिस्थितिक पदचिह्न (ऊर्जा, CO₂, पानी, कचरा) जोड़ता है। सामाजिक पदचिह्न मज़दूरों और समुदायों पर असर है: वेतन, सुरक्षा, बाल श्रम, उचित व्यापार। डिज़ाइनर छह R (पुनर्विचार, मना करना, कम करना, दोबारा उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण), मरम्मत और विघटन योग्य डिज़ाइन अपनाते हैं और नियोजित अप्रचलन से बचते हैं। इको डिज़ाइन आर्थिक पक्ष भी देखता है: उत्पाद सस्ता और बनाने लायक़ हो, इसलिए अच्छा डिज़ाइन पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था में संतुलन रखता है।
2. 2. Functional and structural analysis of products
Matter, energy and information flows · Frames and envelopes · Power chains · Information chain
- सिस्टम इंजीनियरिंग – सिस्टम इंजीनियरिंग किसी उत्पाद को एक पूरे सिस्टम की तरह डिज़ाइन करती है। यह उपयोगकर्ता की ज़रूरत से शुरू होती है, उसे मापने लायक शर्तों में बदलती है, पदार्थ, ऊर्जा और सूचना के प्रवाह को देखती है, और V-चक्र में ऊपर चढ़ते हुए जाँचती है: सत्यापन (सही बना?) और मान्यता (सही चीज़ बनी?)।
- सिविल इंजीनियरिंग: इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं और मौसम से बचाती हैं – सिविल इंजीनियर घर, पुल, सड़क और बाँध जैसी संरचनाएँ डिज़ाइन करते और बनाते हैं। इमारत में एक ढाँचा होता है (स्तंभ, बीम, स्लैब, ब्रेसिंग) जो भार को नींव और मिट्टी तक पहुँचाता है, और एक आवरण (दीवारें, कर्टन वॉल, छत) जो अंदर के लोगों को बचाता है। इंजीनियर सामग्री (लकड़ी, स्टील, कंक्रीट) चुनते, बलों की जाँच करते और जगह व पर्यावरण के हिसाब से योजना बनाते हैं।
- ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy) – ऊर्जा को न बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है। वह केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है या एक वस्तु से दूसरी में जाती है। बंद तंत्र की कुल ऊर्जा हमेशा उतनी ही रहती है। घर्षण न हो तो यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) स्थिर रहती है: mgh + ½mv² = स्थिर। घर्षण हो तो कुछ यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा बन जाती है, पर कुल ऊर्जा फिर भी वही रहती है। दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ कुल दी गई ऊर्जा × 100%।
- सूचना प्रणाली (Information System) – सूचना प्रणाली (IS) लोगों, हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, डेटा, नेटवर्क और प्रक्रियाओं का ऐसा समूह है जो मिलकर सूचना जुटाता, सहेजता, संसाधित करता और बाँटता है। यह कच्चे डेटा को एक शृंखला से काम की सूचना में बदलती है: जुटाना, कोड करना, भेजना, सहेजना, संसाधित करना और दिखाना। प्रणाली एक चक्र में बनती है (योजना, विश्लेषण, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, चलाना-सुधारना)। यह काम तेज़ करती है और ज्ञान बाँटने देती है, पर इसमें ख़र्च, ख़राबी, हैकिंग और जड़ता (rigidity) का ख़तरा भी है।
3. 3. Behaviour of products
Modelling and simulation · Mechanical behaviour · Energy behaviour · Information behaviour
- इंजीनियरिंग में मॉडलिंग और सिमुलेशन – इंजीनियर कोई चीज़ बनाने से पहले उसके मॉडल पर डिज़ाइन जाँचते हैं। मॉडल भौतिक (स्केल मॉडल, प्रोटोटाइप), गणितीय (समीकरण) या डिजिटल (CAD मॉडल) हो सकता है। हर मॉडल में प्रयास (effort) चर (बल, वोल्टेज, दाब) और प्रवाह (flow) चर (चाल, धारा, प्रवाह दर) होते हैं; प्रयास × प्रवाह = शक्ति। सिमुलेशन सॉफ़्टवेयर पुर्ज़े को छोटे फ़ाइनाइट एलिमेंट में काटता है, हर एक के समीकरण लिखता है और सॉल्वर उत्तर निकालता है; चलती प्रणालियाँ छोटे टाइम स्टेप में हल होती हैं। प्रतिबल, मोड़ और सुरक्षा गुणांक जैसे परिणाम रंगीन नक्शों और ग्राफ़ से पढ़े जाते हैं। बारीक मेश या छोटा टाइम स्टेप ज़्यादा सटीक है पर ज़्यादा समय लेता है। अंत में परिणामों को सेंसर वाले असली परीक्षण से, माप की त्रुटि ध्यान में रखकर, मिलाया जाता है।
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट कैसे चलता है – नेटवर्क यानी आपस में जुड़े उपकरण जो डेटा बाँटते हैं। हर उपकरण का एक IP पता होता है। डेटा छोटे क्रमांकित पैकेटों में कटता है। राउटर हर पैकेट को एक-एक कदम उसके पते की ओर भेजते हैं, और TCP अंत में पैकेटों को क्रम से जोड़ता है। DNS वेबसाइट के नाम को IP पते में बदलता है। क्लाइंट माँगता है, सर्वर देता है। फ़ायरवॉल, पासवर्ड, अपडेट और एन्क्रिप्शन नेटवर्क को सुरक्षित रखते हैं।
- नेटवर्क कैसे बढ़े और डेटा कैसे चलता है – कंप्यूटर नेटवर्क जुड़े हुए उपकरणों का समूह है जो डेटा साझा करते हैं। नेटवर्किंग ARPANET (1969) से शुरू हुई, 1980 के दशक में विश्वविद्यालयों के लिए NSFNET बना, और दूसरे नेटवर्कों से जुड़कर इंटरनेट बना — नेटवर्कों का नेटवर्क। हर डेटा संचार के पाँच भाग हैं: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, संदेश, संचार माध्यम और प्रोटोकॉल। बैंडविड्थ वह आवृत्ति-सीमा है जो चैनल ले जा सकता है (Hz में); डेटा दर प्रति सेकंड जाने वाले बिट (bps) हैं। नेटवर्क के हर उपकरण का IP एड्रेस होता है। डेटा सर्किट स्विचिंग (पहले पक्का रास्ता बुक) या पैकेट स्विचिंग (डेटा पैकेटों में कटकर अलग-अलग चलता है) से जाता है।
4. 4. Eco-design of products
Tools to represent reality · Design approaches · Product design
- CAD मॉडलिंग: स्केच से 3D पुर्ज़े तक – CAD (कंप्यूटर एडेड डिज़ाइन) यानी किसी चीज़ को बनाने से पहले कंप्यूटर पर उसका सटीक मॉडल बनाना। डिज़ाइन हाथ के स्केच से शुरू होता है। CAD में वह कंस्ट्रेंट और डाइमेंशन वाला 2D स्केच बनता है। एक्सट्रूड, रिवॉल्व और कट जैसे 3D टूल स्केच को ठोस बनाते हैं। हर कदम फ़ीचर ट्री में सहेजा जाता है, इसलिए एक माप बदलने पर पूरा मॉडल दोबारा बन जाता है। पुर्ज़े असेंबली में जोड़े जाते हैं, सिमुलेशन से जाँचे जाते हैं, ड्रॉइंग के रूप में बाँटे जाते हैं और 3D प्रिंटर, लेज़र कटर या CNC मशीन को भेजे जाते हैं।
- पदार्थ का चयन और इको-डिज़ाइन – पदार्थ चुनने का मतलब है उत्पाद की ज़रूरत और पदार्थ की क्षमता का मेल बिठाना। पहले ज़रूरतें लिखिए (मज़बूती, वज़न, दाम, रूप, सुरक्षा, पर्यावरण)। फिर हर पदार्थ को हर ज़रूरत पर अंक दीजिए, जो बात ज़्यादा ज़रूरी है उसे ज़्यादा महत्व (भार) दीजिए और कुल अंक की तुलना कीजिए। इको-डिज़ाइन उत्पाद के पूरे जीवन को देखता है: कच्चा माल, निर्माण, इस्तेमाल और अंत। प्राकृतिक पदार्थ पेड़-पौधों, जानवरों या ज़मीन से मिलते हैं; कृत्रिम पदार्थ इंसान कारख़ाने में बनाता है। यही तरीक़ा सॉफ़्टवेयर, प्रोसेसर और इंटरफ़ेस चुनने में भी काम आता है।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
5. 5. Construction solutions
Frame and envelope components · Power components · Information components
- सिविल इंजीनियरिंग: इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं और मौसम से बचाती हैं – सिविल इंजीनियर घर, पुल, सड़क और बाँध जैसी संरचनाएँ डिज़ाइन करते और बनाते हैं। इमारत में एक ढाँचा होता है (स्तंभ, बीम, स्लैब, ब्रेसिंग) जो भार को नींव और मिट्टी तक पहुँचाता है, और एक आवरण (दीवारें, कर्टन वॉल, छत) जो अंदर के लोगों को बचाता है। इंजीनियर सामग्री (लकड़ी, स्टील, कंक्रीट) चुनते, बलों की जाँच करते और जगह व पर्यावरण के हिसाब से योजना बनाते हैं।
- ऊर्जा भंडारण: ऊर्जा को बाद के लिए सँभालना – सूरज या हवा से मिली ऊर्जा हमेशा तब नहीं होती जब हमें चाहिए। भंडार (स्टोर) ऊर्जा को बाद के लिए रखता है। यांत्रिक भंडार ऊँचाई, कमानी या घूमते पहिये में ऊर्जा रखता है (ऊँचे उठे भार के लिए E = mgh)। रासायनिक भंडार ईंधन और बैटरी में रखता है (वॉट-घंटा = वोल्ट × ऐम्पियर-घंटा)। ऊष्मीय भंडार गर्म पानी या गर्म पदार्थ में ऊष्मा के रूप में रखता है (Q = m × c × ΔT)। भंडार के आस-पास शक्ति के हिस्से होते हैं: कन्वर्टर, मॉड्यूलेटर और अडैप्टर बिजली का रूप बदलते हैं; गियरबॉक्स, पट्टे और कपलिंग गति आगे पहुँचाते हैं; बेयरिंग और स्लाइड चलते हिस्सों को दिशा देते हैं; सील द्रव को अंदर और धूल को बाहर रखती है। कोई भंडार जितना लेता है उतना वापस नहीं देता, इसलिए दक्षता 100% से कम रहती है।
- फ़िज़िकल कंप्यूटिंग: कोड से महसूस करना और हिलाना – फ़िज़िकल कंप्यूटिंग कोड को असली दुनिया से जोड़ती है। सेंसर कुछ मापते हैं (रोशनी, तापमान, दूरी, बटन) और उसे संख्या बनाते हैं। माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्राम चलाकर तय करता है कि उस संख्या का क्या करना है। एक्चुएटर (LED, बज़र, मोटर, स्क्रीन) दुनिया में कुछ करते हैं। यह इनपुट–प्रोसेस–आउटपुट चक्र लूप में बार-बार चलता है।
6. 6. Prototyping and experiments
Rapid prototyping · Experiments and tests · Verifying and validating the prototype
- प्रोटोटाइपिंग: बनाओ, परखो, बेहतर बनाओ – प्रोटोटाइप किसी उत्पाद या विचार का शुरुआती रूप है जिसे परखा जा सके। कम फ़िडेलिटी वाले प्रोटोटाइप (स्केच, काग़ज़, गत्ता) तेज़ और सस्ते हैं और विचार परखते हैं; उच्च फ़िडेलिटी वाले (3D प्रिंट, चालू मॉडल) असली चीज़ जैसे दिखते और चलते हैं। रैपिड प्रोटोटाइपिंग में 3D प्रिंटर (योगात्मक: परत-दर-परत), लेज़र कटर और CNC मशीन (घटावात्मक: पदार्थ काटकर हटाना) जैसी मशीनें लगती हैं। हर प्रोटोटाइप को साफ़ लक्ष्य और निष्पक्ष तरीक़े से परखा जाता है, नतीजे लिखे जाते हैं, और डिज़ाइन चक्र में सुधरता है: बनाओ, परखो, सीखो, सुधारो। आख़िर में प्रोजेक्ट को दस्तावेज़ बनाकर प्रस्तुत किया जाता है।
- सिस्टम इंजीनियरिंग – सिस्टम इंजीनियरिंग किसी उत्पाद को एक पूरे सिस्टम की तरह डिज़ाइन करती है। यह उपयोगकर्ता की ज़रूरत से शुरू होती है, उसे मापने लायक शर्तों में बदलती है, पदार्थ, ऊर्जा और सूचना के प्रवाह को देखती है, और V-चक्र में ऊपर चढ़ते हुए जाँचती है: सत्यापन (सही बना?) और मान्यता (सही चीज़ बनी?)।
7. Terminale specific options (choose one)
Architecture and construction · Energy and environment · Technological innovation and eco-design · Information systems and digital
- सिविल इंजीनियरिंग: इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं और मौसम से बचाती हैं – सिविल इंजीनियर घर, पुल, सड़क और बाँध जैसी संरचनाएँ डिज़ाइन करते और बनाते हैं। इमारत में एक ढाँचा होता है (स्तंभ, बीम, स्लैब, ब्रेसिंग) जो भार को नींव और मिट्टी तक पहुँचाता है, और एक आवरण (दीवारें, कर्टन वॉल, छत) जो अंदर के लोगों को बचाता है। इंजीनियर सामग्री (लकड़ी, स्टील, कंक्रीट) चुनते, बलों की जाँच करते और जगह व पर्यावरण के हिसाब से योजना बनाते हैं।
- ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत – अनवीकरणीय स्रोत (कोयला, तेल, गैस, यूरेनियम) प्रकृति के बनाने से तेज़ खर्च होते हैं, और जीवाश्म ईंधन CO₂ छोड़ते हैं। नवीकरणीय स्रोत प्रकृति फिर से भरती है: सौर (फ़ोटोवोल्टिक सेल और सौर तापन), पवन (P ∝ v³), जलविद्युत (P = η ρ g h Q), ज्वारीय, भूतापीय और जैव भार। हाइड्रोजन ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली और पानी बनाता है। धूप और हवा बदलती रहती हैं, इसलिए भंडारण (बैटरी, पंप किया पानी) और कई स्रोतों का मिश्रण चाहिए। हर स्रोत की कुछ क़ीमत है: ज़मीन, सामग्री, लागत और प्रकृति पर असर।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- सूचना प्रणाली (Information System) – सूचना प्रणाली (IS) लोगों, हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, डेटा, नेटवर्क और प्रक्रियाओं का ऐसा समूह है जो मिलकर सूचना जुटाता, सहेजता, संसाधित करता और बाँटता है। यह कच्चे डेटा को एक शृंखला से काम की सूचना में बदलती है: जुटाना, कोड करना, भेजना, सहेजना, संसाधित करना और दिखाना। प्रणाली एक चक्र में बनती है (योजना, विश्लेषण, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, चलाना-सुधारना)। यह काम तेज़ करती है और ज्ञान बाँटने देती है, पर इसमें ख़र्च, ख़राबी, हैकिंग और जड़ता (rigidity) का ख़तरा भी है।
8. Physics-chemistry: Energy
Energy and its challenges · Chemical energy · Electrical energy · Internal energy · Mechanical energy · Energy carried by light
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- गैल्वेनी सेल और नेर्न्स्ट समीकरण – गैल्वेनी सेल अपने-आप होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की ऊर्जा को बिजली में बदलता है। ऐनोड (−) पर ऑक्सीकरण और कैथोड (+) पर अपचयन होता है। हर इलेक्ट्रोड का विभव मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (0 V) से नापा जाता है। E°सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड। नेर्न्स्ट समीकरण E = E° − (0.059/n) log Q (298 K पर) किसी भी सांद्रता पर वोल्टेज बताता है, और ΔG = −nFE वोल्टेज को ऊर्जा से जोड़ता है।
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
- ऊष्मा स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण – ऊष्मा तीन तरीक़ों से चलती है। चालन में ऊष्मा कण से कण तक जाती है, कण अपनी जगह रहते हैं; पट्टी से बहाव की दर H = kA(T₁ − T₂)/L, जहाँ k ऊष्मा चालकता है। संवहन में तरल ख़ुद चलता है: गरम तरल हल्का होकर ऊपर उठता है, ठंडा नीचे आता है। विकिरण में ऊष्मा विद्युतचुंबकीय तरंगों से जाती है और किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं। कृष्णिका (blackbody) सारा विकिरण सोखती है और सबसे अच्छी उत्सर्जक है। ताप बढ़ने पर उसकी शिखर तरंगदैर्ध्य घटती है (वीन: λmT = b), और कुल उत्सर्जित शक्ति T⁴ के साथ बढ़ती है (स्टेफ़न: P = σAT⁴)। न्यूटन का शीतलन नियम: वस्तु के ठंडा होने की दर परिवेश से उसके ताप-आधिक्य के समानुपाती है।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- क्वांटम विचार: ऊर्जा पैकेट में आती है – गरम वस्तु चमकती है, और पुरानी भौतिकी उसके रंगों को समझा नहीं पाई। 1900 में मैक्स प्लांक ने अनुमान लगाया कि ऊर्जा का लेन-देन सिर्फ़ छोटे-छोटे पैकेटों में होता है। f आवृत्ति के प्रकाश के एक पैकेट की ऊर्जा E = hf होती है, जहाँ h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s। प्रकाश के इस पैकेट को फ़ोटॉन कहते हैं। इसी अनुमान से पहेली सुलझी और क्वांटम भौतिकी शुरू हुई।
9. Physics-chemistry: Matter and materials
Material properties and structure of matter · Combustions · Redox: cells, batteries and fuel cells · Acid–base reactions
- नाभिकीय भौतिकी: नाभिक और रेडियोधर्मिता – नाभिक में प्रोटॉन (Z) और न्यूट्रॉन (N) होते हैं; द्रव्यमान संख्या A = Z + N। समस्थानिकों में Z वही पर N अलग होता है। अस्थिर नाभिक अपने-आप क्षय होते हैं: अल्फ़ा क्षय में 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन निकलते हैं (A − 4, Z − 2), बीटा क्षय में एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन बनता है और इलेक्ट्रॉन निकलता है (Z + 1), गामा सिर्फ़ ऊर्जा है। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे नाभिक क्षय हो जाते हैं।
- दहन (जलना) – दहन यानी जलना: एक रासायनिक बदलाव जिसमें ईंधन ऑक्सीजन से तेज़ी से क्रिया करता है और गर्मी व रोशनी देता है। इसके लिए तीन चीज़ें चाहिए: ईंधन, ऑक्सीजन और गर्मी (ज्वलन ताप तक)। कोई एक हटाओ, आग बुझ जाती है। पूरी हवा में कार्बन-हाइड्रोजन वाले ईंधन पूरी तरह जलकर CO₂ और पानी बनाते हैं (नीली लौ)। कम हवा में अपूर्ण दहन होता है: कालिख और ज़हरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (पीली, धुएँ वाली लौ)। CO₂ चूने के पानी को दूधिया करती है। 1 ग्राम ईंधन जलने पर निकली ऊर्जा उसका ऊष्मीय मान है।
- गैल्वेनी सेल और नेर्न्स्ट समीकरण – गैल्वेनी सेल अपने-आप होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की ऊर्जा को बिजली में बदलता है। ऐनोड (−) पर ऑक्सीकरण और कैथोड (+) पर अपचयन होता है। हर इलेक्ट्रोड का विभव मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (0 V) से नापा जाता है। E°सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड। नेर्न्स्ट समीकरण E = E° − (0.059/n) log Q (298 K पर) किसी भी सांद्रता पर वोल्टेज बताता है, और ΔG = −nFE वोल्टेज को ऊर्जा से जोड़ता है।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
10. Physics-chemistry: Waves and signals
Waves and signals · Sound waves · Electromagnetic waves
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
- विद्युत चुंबकीय तरंगें – बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र धारा जैसा काम करता है। इसे विस्थापन धारा कहते हैं और यह चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। बदलता चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र बनाता है। दोनों मिलकर विद्युत चुंबकीय तरंग बनकर c = 3 × 10⁸ m/s से चलते हैं, खाली जगह में भी। E और B एक-दूसरे से और चलने की दिशा से 90° पर होते हैं, इसलिए ये तरंगें अनुप्रस्थ हैं। तरंगदैर्घ्य के क्रम में: रेडियो, सूक्ष्म तरंग, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, एक्स-किरणें, गामा किरणें।
11. Mathematics
Integration · Exponential function · Natural logarithm · Differential equations · Composition of functions · Complex numbers
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
- अवकल समीकरण – अवकल समीकरण एक फलन y को उसके अवकलजों से जोड़ता है। इसकी कोटि सबसे ऊँचा अवकलज है और घात उस अवकलज की घात (जब समीकरण अवकलजों में बहुपद हो)। व्यापक हल में स्वेच्छ अचर होते हैं; y(0) = 1 जैसी शर्त उन्हें तय करके विशिष्ट हल देती है। कक्षा 12 में तीन प्रकार के प्रथम कोटि समीकरण हल करते हैं: चर पृथक्करणीय, समघातीय (y = vx रखो) और रैखिक dy/dx + Py = Q (समाकलन गुणक e^∫P dx से गुणा करो)।
- फलन: संयुक्त, प्रतिलोम और मानक ग्राफ़ – फलन (function) एक नियम है जो हर मान्य इनपुट को ठीक एक आउटपुट देता है। मान्य इनपुट का समुच्चय प्रांत (domain) और आउटपुट का समुच्चय परिसर (range) है। g(f(x)) का मतलब है पहले f, फिर g। प्रतिलोम फलन f⁻¹, f का काम उल्टा कर देता है और उसका ग्राफ़ रेखा y = x में f के ग्राफ़ की दर्पण-छवि होता है। सिर्फ़ एकैकी (one-to-one) फलन का प्रतिलोम होता है।
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।