ऊर्जा का भंडारण क्यों करते हैं
बहुत-से स्रोत कभी-कभी ही काम करते हैं: रात में सूरज नहीं, शांत दिन में हवा नहीं। पर इस्तेमाल करने वालों को हर समय ऊर्जा चाहिए। भंडार ऊर्जा तब लेता है जब वह भरपूर होती है और तब लौटाता है जब ज़रूरत हो। रास्ता: स्रोत → (कन्वर्टर) → भंडार → (कन्वर्टर) → उपयोग।
अच्छे भंडार की जाँच: कितना रखता है (क्षमता), कितनी तेज़ी से लौटाता है (शक्ति), कितना खोता है (दक्षता), कितनी देर रखता है (रिसाव), दाम, आकार और सुरक्षा।
यांत्रिक भंडारण
ऊर्जा गति या स्थिति के रूप में रखी जाती है।
- ऊँचाई (गुरुत्व): ऊपर उठा भार या ऊँची टंकी का पानी। ऊर्जा = m × g × h। पंप्ड स्टोरेज में बची बिजली से पानी ऊपर चढ़ाते हैं, फिर टरबाइन से नीचे गिराते हैं।
- कमानी (प्रत्यास्थ): दबी या कसी हुई कमानी, जैसे चाबी वाले खिलौने या यांत्रिक घड़ी में।
- फ़्लाईव्हील (गति): तेज़ घूमता भारी पहिया। वह थोड़ी देर चिकनी शक्ति देता है।
- संपीडित हवा: टंकी में दबाई हवा, जिसे छोड़कर औज़ार चलाते हैं।
अच्छाई: कई बार चक्र चलता है, छोड़ना तेज़। सीमा: कम ऊर्जा के लिए भी बड़ा आकार; घर्षण और हवा से हानि।
रासायनिक भंडारण
ऊर्जा रसायनों के बंधों में रखी जाती है।
- ईंधन: लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, गैस, हाइड्रोजन। जलाने पर गर्मी मिलती है। प्रति किलोग्राम बहुत ज़्यादा ऊर्जा।
- बैटरी: रासायनिक अभिक्रिया से बिजली बनती है। रिचार्जेबल बैटरी (जैसे लिथियम-आयन) चार्ज करते समय अभिक्रिया को उलट देती है।
बैटरी की ऊर्जा (वॉट-घंटा) = वोल्टेज (V) × क्षमता (Ah)। 12 V, 50 Ah की बैटरी में 600 Wh है। वह 60 W के लैंप को 600 ÷ 60 = 10 घंटे चला सकती है (सिद्धांत में)।
अच्छाई: छोटी और ले जाने में आसान। सीमा: कई चक्रों के बाद घिसती है, दाम, गर्मी और आग का ख़तरा, सुरक्षित निपटान।
ऊष्मीय भंडारण
ऊर्जा किसी पदार्थ में गर्मी के रूप में रखी जाती है।
Q = m × c × ΔT, जहाँ m द्रव्यमान (kg), c विशिष्ट ऊष्मा धारिता (पानी: लगभग 4200 J/kg·K) और ΔT तापमान की वृद्धि है। पानी बढ़िया भंडार है क्योंकि c बड़ा है और वह सस्ता है।
- गर्म पानी की टंकी, सोलर वाटर हीटर, रात में गर्मी देने वाले हीटर, गर्म पत्थर या पिघला नमक।
- गुप्त ऊष्मा भंडार पिघलने-जमने (बर्फ़, मोम) का उपयोग करते हैं: लगभग स्थिर तापमान पर बहुत ऊर्जा।
अच्छाई: सस्ता और सरल। सीमा: गर्मी बाहर निकलती है, इसलिए टंकी को रोधित (इंसुलेट) करें; इससे बिजली आसानी से नहीं मिलती।
कन्वर्टर, मॉड्यूलेटर और अडैप्टर
ये हिस्से बिजली का रूप बदलते हैं ताकि स्रोत, भंडार और उपयोग आपस में मेल खाएँ।
- कन्वर्टर: धारा या वोल्टेज का प्रकार बदलता है। रेक्टिफ़ायर AC को DC बनाता है; इन्वर्टर DC को AC; DC–DC कन्वर्टर वोल्टेज बढ़ाता या घटाता है। फ़ोन चार्ज करते समय AC–DC कन्वर्टर काम करता है।
- मॉड्यूलेटर: तेज़ी से चालू-बंद करके तय करता है कि कितनी शक्ति जाए। पल्स-विड्थ मॉड्यूलेशन (PWM) में 'चालू' समय जितना लंबा, शक्ति उतनी ज़्यादा (जैसे डिमर या मोटर की गति नियंत्रण)।
- अडैप्टर: दो हिस्सों को जोड़कर साथ काम करने लायक बनाता है: प्लग का आकार, वोल्टेज, संकेत। फ़ोन का चार्जर अडैप्टर है।
हर बदलाव में कुछ ऊर्जा गर्मी बनकर खोती है, इसलिए कम बदलाव का मतलब बेहतर दक्षता।
गियरबॉक्स, पट्टे और कपलिंग
ये हिस्से मोटर का घुमाव मशीन तक पहुँचाते हैं और गति तथा घुमाव-बल (बलाघूर्ण, टॉर्क) बदलते हैं।
- गियरबॉक्स: दाँतेदार पहिये। अनुपात = चलने वाले गियर के दाँत ÷ चलाने वाले गियर के दाँत। अनुपात 3 हो तो आउटपुट 3 गुना धीमा होता है और टॉर्क लगभग 3 गुना (आदर्श स्थिति में)।
- पट्टा और घिरनी, या चेन: दूरी के पार गति पहुँचाते हैं। पट्टा शांत है और मशीन बचाने के लिए फिसल सकता है; चेन नहीं फिसलती।
- कपलिंग: दो शाफ़्टों को सिरे से जोड़ती है ताकि वे साथ घूमें, और थोड़ी-सी असंरेखता सह लेती है।
गति × टॉर्क लगभग वही रहता है (शक्ति), घर्षण की हानि छोड़कर।
घूर्णन और रेखीय गति में दिशा देना (गाइडिंग)
चलने वाले हिस्सों को दिशा देनी पड़ती है ताकि वे सिर्फ़ चाहे हुए तरीक़े से और कम घर्षण से चलें।
- घूर्णन (घूमना): शाफ़्ट बेयरिंग में घूमते हैं। सादा बेयरिंग चिकनी आस्तीन होती है; बॉल या रोलर बेयरिंग में लुढ़कती गेंदें होती हैं, इसलिए घर्षण बहुत कम होता है।
- स्थानांतरण (सीधी रेखा में सरकना): पटरी, स्लाइड और गाइड छड़ें, जैसे दराज़ की रेल या प्रिंटर का सिर।
तेल या ग्रीस घिसावट घटाते हैं। अच्छी दिशा वाला हिस्सा कम घर्षण करता है, इसलिए गर्मी में कम ऊर्जा जाती है।
सीलिंग (रोधन)
सील उस जगह से द्रव, गैस या धूल को निकलने से रोकती है जहाँ हिस्से मिलते हैं।
- स्थिर सील (हिस्से हिलते नहीं): फ़्लैंज और ढक्कन के बीच गैस्केट और O-रिंग।
- गतिशील सील (एक हिस्सा हिलता है): घूमते शाफ़्ट पर लिप सील, सिलिंडर में पिस्टन सील।
सील तेल को अंदर, धूल को बाहर और दबाव को बनाए रखती है। ये घिसती हैं, इसलिए इनकी जाँच और बदली होती है। गर्म पानी की टंकी या हाइड्रोलिक भंडार की सील रिसे तो जमा ऊर्जा बेकार जाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- यांत्रिक (गुरुत्व): E = m × g × h (g ≈ 9.8 m/s²)
- बैटरी की ऊर्जा (Wh) = V × Ah; चलने का समय = ऊर्जा ÷ शक्ति
- ऊष्मीय: Q = m × c × ΔT (पानी के लिए c ≈ 4200 J/kg·K)
- दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ दी गई ऊर्जा × 100%
- गियर अनुपात = चलने वाले गियर के दाँत ÷ चलाने वाले गियर के दाँत
हल किए गए उदाहरण
1. 100 kg का भार 10 m ऊपर उठाया गया। कितनी ऊर्जा जमा हुई? (g = 9.8 m/s²)
E = m g h = 100 × 9.8 × 10 = 9800 J = 9.8 kJ।
2. 12 V, 50 Ah की बैटरी 60 W का लैंप चलाती है। सिद्धांत में कितनी देर?
ऊर्जा = 12 × 50 = 600 Wh। समय = 600 ÷ 60 = 10 घंटे।
3. एक टंकी में 200 kg पानी है। सौर ऊष्मा से उसका तापमान 40 °C बढ़ता है। कितनी गर्मी जमा हुई? (c = 4200 J/kg·K)
Q = m c ΔT = 200 × 4200 × 40 = 33 600 000 J = 33.6 MJ। kWh में: 33.6 ÷ 3.6 = 9.3 kWh।
4. एक बैटरी में 600 Wh जमा होता है। चार्जिंग में सप्लाई से 700 Wh लगा। चार्जिंग की दक्षता कितनी है?
दक्षता = 600 ÷ 700 × 100 ≈ 85.7%। बाक़ी 100 Wh गर्मी बनकर खो गया।
5. 20 दाँत वाला गियर 60 दाँत वाले गियर को चलाता है। मोटर 1200 rpm पर घूमती है। आउटपुट की गति और आदर्श टॉर्क में बदलाव बताइए।
अनुपात = 60 ÷ 20 = 3। आउटपुट गति = 1200 ÷ 3 = 400 rpm। टॉर्क लगभग 3 गुना हो जाता है (आदर्श, घर्षण से पहले)।
आम गलतियाँ
- शक्ति और ऊर्जा को मिला देना। शक्ति मतलब कितनी तेज़ी से (वॉट); ऊर्जा मतलब कितनी (जूल या वॉट-घंटा)।
- हानियों को भूल जाना। कोई भंडार जितनी ऊर्जा लेता है उतनी लौटाता नहीं।
- Q = m c ΔT या E = mgh में किलोग्राम की जगह ग्राम लगा देना।
- यह सोचना कि गियरबॉक्स ऊर्जा बढ़ाता है। वह गति और टॉर्क की अदला-बदली करता है, अतिरिक्त ऊर्जा नहीं बनाता।