ऊर्जा क्या है?
किसी चीज़ में बदलाव लाने के लिए जो चाहिए, वह ऊर्जा है: चलना, गर्म होना, चमकना, खिंचना या अभिक्रिया करना। इसका SI मात्रक जूल (J) है। एक सेब (लगभग 1 N) को 1 मीटर उठाने में लगभग 1 J लगता है।
ऊर्जा के चार मुख्य गुण:
- ऊर्जा संचित की जा सकती है।
- ऊर्जा एक भंडार से दूसरे में या एक वस्तु से दूसरी में स्थानांतरित होती है।
- ऊर्जा संरक्षित रहती है: कुल ऊर्जा न बनती है, न नष्ट होती है।
- ऊर्जा फैल जाती है (क्षय), ज़्यादातर ऊष्मा बनकर, और तब कम काम की रह जाती है।
ऊर्जा के भंडार (ऊर्जा के रूप)
पुरानी किताबें ऊर्जा के रूप कहती हैं, नए पाठ्यक्रम भंडार कहते हैं। बात एक ही है।
| भंडार | कहाँ मिलता है |
|---|---|
| रासायनिक | भोजन, ईंधन, बैटरी |
| गतिज | हर चलती चीज़ |
| गुरुत्वीय स्थितिज | ऊँचाई पर रखी चीज़ |
| प्रत्यास्थ स्थितिज | खिंची या दबी स्प्रिंग, धनुष, रबर बैंड |
| ऊष्मीय (आंतरिक) | गर्म वस्तुएँ; कण जितना तेज़ कंपन करें, उतनी ज़्यादा |
| चुंबकीय | पास रखे दो चुंबक |
| स्थिरवैद्युत | पास-पास आवेश, जैसे बादल में |
| नाभिकीय | परमाणु के भीतर: सूर्य, परमाणु बिजलीघर |
प्रकाश, ध्वनि और बिजली भंडार नहीं हैं। ये ऊर्जा के चलने के रास्ते हैं।
स्थानांतरण और रूपांतरण
ऊर्जा चार रास्तों से जाती है:
- यांत्रिक: बल किसी चीज़ को खिसकाता है (कार्य)। जैसे फ़ुटबॉल को किक।
- विद्युत: धारा बहती है। जैसे बैटरी से पंखा।
- तापन: गर्म से ठंडी वस्तु की ओर।
- विकिरण: प्रकाश, अवरक्त या ध्वनि तरंगें। जैसे धूप से सड़क गर्म।
उदाहरण, टॉर्च: बैटरी का रासायनिक भंडार → विद्युत धारा → बल्ब → प्रकाश (उपयोगी) और ऊष्मा (व्यर्थ) → कमरे का ऊष्मीय भंडार।
सैंकी आरेख में यह एक मोटे तीर से दिखाते हैं जो बँट जाता है; चौड़ाई = ऊर्जा की मात्रा।
दक्षता = उपयोगी निर्गत ऊर्जा ÷ कुल निवेशी ऊर्जा × 100%। LED बल्ब लगभग 40–50% दक्ष है, पुराना फ़िलामेंट बल्ब केवल लगभग 5%।
तापन: चालन, संवहन, विकिरण और कुचालक
तापन से ऊर्जा हमेशा गर्म से ठंडे की ओर जाती है और ताप बराबर होने पर रुक जाती है: तापीय साम्य।
- चालन: ठोस में कण अपने पड़ोसी कणों को कंपन देते हैं। धातुएँ अच्छी चालक हैं (गर्म चाय में स्टील का चम्मच गर्म हो जाता है)।
- संवहन: द्रव और गैस में गर्म भाग ऊपर उठता है, ठंडा नीचे आता है (समुद्री हवा, उबलता पानी)।
- विकिरण: अवरक्त तरंगें; किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं, इसलिए सूर्य से अंतरिक्ष पार कर आती हैं। काली खुरदरी सतह ज़्यादा सोखती है, चमकीली सतह परावर्तित करती है।
कुचालक (हवा, ऊन, प्लास्टिक, फ़ोम, लकड़ी) तापन को धीमा करते हैं। थर्मस में निर्वात (चालन और संवहन रोकता है) और चमकीली दीवारें (विकिरण रोकती हैं) होती हैं। मोटी दीवारें और दोहरी खिड़कियाँ घर को सर्दी में गर्म और गर्मी में ठंडा रखती हैं।
सरल मशीनें और घर में ऊर्जा
सरल मशीन (उत्तोलक, घिरनी, ढलान, गियर) ऊर्जा नहीं बनाती। वह कम बल को ज़्यादा दूरी तक लगाने देती है: कार्य = बल × दूरी लगभग वही रहता है (घर्षण से थोड़ा ज़्यादा)। दोगुनी लंबी ढलान पर डिब्बा लगभग आधे बल से चढ़ता है।
घर में ऊर्जा खाना पकाने, गर्म-ठंडा करने, रोशनी और उपकरणों में लगती है; उद्योग में मशीनों, भट्टियों और परिवहन में। बिजली का बिल किलोवाट-घंटा (यूनिट) में आता है: 1 kWh = 36 लाख J। बचत: LED बल्ब, स्टैंडबाय बंद करना, अच्छा ऊष्मारोधन, प्रेशर कुकर।
घर पर करके देखो
एक गेंद 1 m से सख़्त फ़र्श पर गिराओ और देखो कितनी ऊपर उछलती है। वह 1 m तक कभी नहीं लौटती। बाकी ऊर्जा कहाँ गई? 20 बार ज़ोर से उछालने के बाद गेंद छुओ: थोड़ी गर्म लगेगी (ऊष्मीय भंडार) और आवाज़ भी आई (विकिरण का रास्ता)। फिर गर्म पानी के एक कप को ऊनी मोज़े में लपेटो और दूसरे को खुला छोड़ो; 15 मिनट बाद कौन ज़्यादा गर्म है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऊर्जा का मात्रक: जूल (J); 1 kJ = 1000 J; 1 kWh = 36,00,000 J
- गतिज ऊर्जा: KE = ½ m v²
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: GPE = m g h (g ≈ 9.8 N/kg)
- किया गया कार्य (यांत्रिक स्थानांतरण) = बल × दूरी
- दक्षता = उपयोगी निर्गत ऊर्जा ÷ कुल निवेशी ऊर्जा × 100%
- निवेशी ऊर्जा = उपयोगी ऊर्जा + व्यर्थ ऊर्जा
हल किए गए उदाहरण
1. फ़ोन की बैटरी से स्क्रीन चलती है। भंडार और रास्ता बताओ।
बैटरी का रासायनिक भंडार → विद्युत धारा → स्क्रीन से प्रकाश (विकिरण), साथ में फ़ोन थोड़ा गर्म होता है (ऊष्मीय भंडार)।
2. केतली 2000 J विद्युत ऊर्जा लेती है और 1600 J पानी गर्म करती है। दक्षता?
दक्षता = 1600 ÷ 2000 × 100% = 80%। बाकी 400 J केतली और हवा को गर्म करते हैं।
3. 2 kg का बैग 1.5 m ऊपर उठाया। गुरुत्वीय भंडार में कितनी ऊर्जा गई? (g = 10 N/kg)
GPE = m g h = 2 × 10 × 1.5 = 30 J।
4. 0.5 kg की गेंद 4 m/s से चल रही है। गतिज ऊर्जा?
KE = ½ × 0.5 × 4² = ½ × 0.5 × 16 = 4 J।
5. एक मोटर 75% दक्ष है और उसे 400 J मिलते हैं। कितनी ऊर्जा व्यर्थ गई?
उपयोगी = 0.75 × 400 = 300 J। व्यर्थ = 400 − 300 = 100 J (ज़्यादातर ऊष्मा और ध्वनि)।
6. गर्म चाय में स्टील का चम्मच गर्म होता है, लकड़ी का नहीं। क्यों?
स्टील अच्छा चालक है: उसके कण और मुक्त इलेक्ट्रॉन ऊर्जा जल्दी आगे बढ़ाते हैं। लकड़ी कुचालक है, उसमें ऊर्जा बहुत धीरे चलती है।
आम गलतियाँ
- कहना कि ऊर्जा "ख़त्म" हो गई। वह नष्ट नहीं होती; ज़्यादातर आसपास के ऊष्मीय भंडार में चली जाती है।
- प्रकाश, ध्वनि या बिजली को भंडार कहना। ये ऊर्जा ले जाने वाले रास्ते हैं।
- सोचना कि ठंडक कमरे में बहती है। ऊर्जा केवल गर्म से ठंडे की ओर जाती है।
- सोचना कि उत्तोलक या ढलान मुफ़्त ऊर्जा देते हैं। बल कम होता है पर दूरी बढ़ जाती है।