ऊष्मा चलने के तीन तरीक़े
- चालन: पड़ोसी कणों के बीच टक्कर और कंपन से ऊष्मा आगे जाती है। कण अपनी जगह रहते हैं। ठोसों में मुख्य तरीक़ा। धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन ऊष्मा तेज़ी से ले जाते हैं, इसलिए धातुएँ अच्छी चालक हैं।
- संवहन: तरल ख़ुद चलकर ऊष्मा ले जाता है। गरम तरल फैलकर कम घना होता है और ऊपर उठता है (उत्प्लावन); ठंडा नीचे आता है — यह प्राकृतिक संवहन। पंखा या पंप तरल को धकेले तो प्रणोदित संवहन (कार रेडिएटर, शरीर में रक्त)। उदाहरण: दिन में समुद्री समीर, रात में थल समीर; व्यापारिक पवनें।
- विकिरण: विद्युतचुंबकीय तरंगों (ज़्यादातर अवरक्त) द्वारा ऊष्मा। माध्यम नहीं चाहिए, प्रकाश की चाल से चलता है। सूर्य पृथ्वी को ऐसे ही गरम करता है।
ऊष्मा चालकता
स्थायी अवस्था में लंबाई L, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A वाली छड़ के सिरे T₁ और T₂ (T₁ > T₂) पर हों, तो ऊष्मा बहाव की दर:
H = k A (T₁ − T₂) / L
H वाट (J/s) में। k = ऊष्मा चालकता गुणांक, मात्रक W m⁻¹ K⁻¹। मान: चाँदी ≈ 406, ताँबा ≈ 385, ऐलुमिनियम ≈ 205, स्टील ≈ 50, काँच ≈ 0.8, पानी ≈ 0.6, लकड़ी ≈ 0.12, हवा ≈ 0.024।
तापीय प्रतिरोध R = L/(kA), तो H = ΔT/R, बिजली के I = V/R जैसा। एक के बाद एक (श्रेणी) पट्टियाँ: R = R₁ + R₂। साथ-साथ (समांतर): 1/R = 1/R₁ + 1/R₂।
उपयोग: बर्तनों के तले ताँबे के (ऊष्मा जल्दी फैले); थर्मस और दोहरे काँच की खिड़कियाँ हवा फँसाती हैं (कुचालक); इग्लू में बर्फ़ हवा फँसाकर अंदर गरम रखती है।
विकिरण और कृष्णिका
0 K से ऊपर हर वस्तु ऊर्जा विकिरित करती है। कितनी, यह ताप और सतह पर निर्भर है। काली, खुरदरी सतहें अच्छी तरह सोखती और छोड़ती हैं; चमकदार, सफ़ेद सतहें लौटाती हैं और कम छोड़ती हैं। अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक भी है (किरखॉफ़ का विचार)।
कृष्णिका (blackbody) अपने ऊपर पड़ने वाला सारा विकिरण सोखती है, कुछ नहीं लौटाती। यह सबसे अच्छी उत्सर्जक भी है। काली दीवारों वाले खोखले डिब्बे का छोटा छेद लगभग पूर्ण कृष्णिका जैसा है।
कृष्णिका का विकिरण कई तरंगदैर्ध्यों में फैला होता है, जिसका शिखर λm पर है। वस्तु गरम होने पर पूरा वक्र ऊपर उठता है और शिखर छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर खिसकता है। इसीलिए भट्ठी में लोहा पहले धीमा लाल, फिर नारंगी, फिर पीला-सफ़ेद चमकता है।
वीन का विस्थापन नियम
λm T = b, जहाँ b = 2.9 × 10⁻³ m K (वीन नियतांक)। ज़्यादा गरम ⇒ छोटी शिखर तरंगदैर्ध्य।
सूर्य का स्पेक्ट्रम लगभग 500 nm पर शिखर पर है, इसलिए उसकी सतह का ताप ≈ 2.9 × 10⁻³ / 500 × 10⁻⁹ ≈ 5800 K। मानव शरीर (310 K) का शिखर लगभग 9400 nm, अवरक्त में; थर्मल कैमरे यही देखते हैं।
स्टेफ़न–बोल्ट्ज़मान नियम
परम ताप T और क्षेत्रफल A वाली कृष्णिका द्वारा विकिरित कुल शक्ति:
P = σ A T⁴, σ = 5.67 × 10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴
असली वस्तु के लिए P = e σ A T⁴, जहाँ उत्सर्जकता e, 0 और 1 के बीच (कृष्णिका के लिए e = 1)। वस्तु T पर और परिवेश T₀ पर हो, तो नेट हानि P = e σ A (T⁴ − T₀⁴)।
T⁴ के कारण ताप दोगुना करने से विकिरित शक्ति 16 गुना। ग्रीनहाउस प्रभाव: पृथ्वी अवरक्त में पुनः विकिरण करती है; CO₂ और जलवाष्प जैसी गैसें उसका कुछ भाग सोखकर वापस भेजती हैं, जिससे पृथ्वी गरम रहती है।
न्यूटन का शीतलन नियम
छोटे ताप अंतर के लिए, वस्तु के ठंडा होने की दर परिवेश से उसके ताप-आधिक्य के समानुपाती है:
−dT/dt = K (T − Ts)
इसलिए गरम चाय पहले जल्दी, फिर धीरे ठंडी होती है। उपयोगी औसत रूप: (T₁ − T₂)/t = K[(T₁ + T₂)/2 − Ts]। ln(T − Ts) बनाम समय का ग्राफ़ ऋणात्मक ढाल वाली सीधी रेखा है।
करके देखो: दो चम्मच और स्याही की बूँद
1) गरम चाय में एक स्टील और एक लकड़ी का चम्मच रखो। एक मिनट बाद हत्थे छुओ: स्टील गरम (अच्छा चालक), लकड़ी ठंडी। 2) गुनगुने पानी के गिलास में तल के पास स्याही की एक बूँद डालो (किसी बड़े की मदद से हल्का गरम करो): स्याही बीच से ऊपर उठती है और किनारों से नीचे आती है। 3) 3D के चरण 6 में T = 3000 K करो, λmax लिखो, फिर 6000 K करो — λmax आधा होना चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- H = k A (T₁ − T₂) / L (W)
- तापीय प्रतिरोध R = L / (kA); H = ΔT / R
- श्रेणी: R = R₁ + R₂; समांतर: 1/R = 1/R₁ + 1/R₂
- वीन: λm T = b = 2.9 × 10⁻³ m K
- स्टेफ़न: P = e σ A T⁴; σ = 5.67 × 10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴
- नेट हानि: P = e σ A (T⁴ − T₀⁴)
- न्यूटन शीतलन: −dT/dt = K (T − Ts)
हल किए गए उदाहरण
1. 0.5 m लंबी, 10⁻⁴ m² क्षेत्रफल की ताँबे की छड़ के सिरे 100 °C और 0 °C पर हैं। ऊष्मा बहाव की दर? (k = 385 W/m K)
चरण 1: H = kAΔT/L। चरण 2: = 385 × 10⁻⁴ × 100 / 0.5। उत्तर: 7.7 W।
2. 1 m × 1 m, 4 mm मोटा काँच का शीशा। अंदर 25 °C, बाहर 5 °C। प्रति सेकंड ऊष्मा हानि? (k = 0.8 W/m K)
चरण 1: ΔT = 20 K, L = 0.004 m। चरण 2: H = 0.8 × 1 × 20 / 0.004। उत्तर: 4000 W। इसीलिए ठंडी जगहों में दोहरे काँच (बीच में हवा) लगाते हैं।
3. सूर्य का विकिरण 480 nm पर शिखर पर है। सतह का ताप? (b = 2.9 × 10⁻³ m K)
चरण 1: T = b/λm। चरण 2: = 2.9 × 10⁻³ / 480 × 10⁻⁹। उत्तर: T ≈ 6040 K।
4. 1000 K पर कृष्णिका शक्ति P छोड़ती है। 2000 K पर कितनी?
चरण 1: P ∝ T⁴। चरण 2: अनुपात = 2⁴ = 16। उत्तर: 16P।
5. 0.01 m² क्षेत्रफल का कृष्णिका गोला 1000 K पर है। विकिरित शक्ति? (σ = 5.67 × 10⁻⁸)
चरण 1: P = σAT⁴। चरण 2: T⁴ = 10¹²। चरण 3: P = 5.67 × 10⁻⁸ × 0.01 × 10¹²। उत्तर: 5670 W।
6. बराबर क्षेत्रफल की दो पट्टियाँ श्रेणी में: ताँबा (k = 385, L = 1 cm) और स्टील (k = 50, L = 1 cm)। बाहरी फलक 100 °C और 0 °C। संधि का ताप?
चरण 1: दोनों में H बराबर: 385(100 − T) = 50T। चरण 2: 38500 = 435T। उत्तर: T ≈ 88.5 °C। ज़्यादातर ताप गिरावट कुचालक (स्टील) पर होती है।
7. 20 °C के कमरे में चाय 5 मिनट में 80 °C से 60 °C होती है। 60 °C से 40 °C होने में कितना समय? (न्यूटन नियम का औसत रूप)
चरण 1: पहला भाग: 20/5 = K(70 − 20) ⇒ K = 0.08 प्रति मिनट। चरण 2: दूसरा: 20/t = 0.08 × (50 − 20) = 2.4। चरण 3: t = 20/2.4। उत्तर: t ≈ 8.3 मिनट। कमरे के ताप के पास आते-आते ठंडा होना धीमा हो जाता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि चालन में कण छड़ के साथ आगे चलते हैं। वे अपनी जगह काँपते हैं और ऊर्जा आगे देते हैं।
- स्टेफ़न नियम में °C लेना। P ∝ T⁴ में T केल्विन में होना चाहिए।
- यह सोचना कि ऊष्मा ऊपर उठती है। गरम तरल ऊपर उठता है (कम घना); ऊष्मा किसी भी दिशा में बह सकती है।
- भूलना कि अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक भी है। काली केतली चमकदार से जल्दी ठंडी होती है।