Ukraine 8 клас Physics
अध्याय: 2
1. Thermal phenomena
Structure of matter and molecular motion · Temperature and thermal equilibrium · Internal energy and heat transfer · Quantity of heat and specific heat capacity · Thermal expansion · Liquids: surface tension and capillarity · Evaporation, boiling and humidity · Melting and solidification · Fuel combustion and energy conservation · Heat engines
- द्रव्य का कण मॉडल – हर द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है जो हमेशा गति करते रहते हैं। ठोस में कण पास-पास होते हैं और बस काँपते हैं; द्रव में पास होते हुए भी फिसलते हैं; गैस में दूर-दूर होकर हर दिशा में तेज़ भागते हैं। गरम करने पर कणों को ऊर्जा मिलती है: या तो वे तेज़ चलते हैं (तापमान बढ़ता है) या उनके बीच का खिंचाव टूटता है (अवस्था बदलती है, तापमान स्थिर रहता है)। गैस दाब कणों की दीवार से टक्कर से बनता है।
- ऊष्मा स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण – ऊष्मा तीन तरीक़ों से चलती है। चालन में ऊष्मा कण से कण तक जाती है, कण अपनी जगह रहते हैं; पट्टी से बहाव की दर H = kA(T₁ − T₂)/L, जहाँ k ऊष्मा चालकता है। संवहन में तरल ख़ुद चलता है: गरम तरल हल्का होकर ऊपर उठता है, ठंडा नीचे आता है। विकिरण में ऊष्मा विद्युतचुंबकीय तरंगों से जाती है और किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं। कृष्णिका (blackbody) सारा विकिरण सोखती है और सबसे अच्छी उत्सर्जक है। ताप बढ़ने पर उसकी शिखर तरंगदैर्ध्य घटती है (वीन: λmT = b), और कुल उत्सर्जित शक्ति T⁴ के साथ बढ़ती है (स्टेफ़न: P = σAT⁴)। न्यूटन का शीतलन नियम: वस्तु के ठंडा होने की दर परिवेश से उसके ताप-आधिक्य के समानुपाती है।
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता और ऊष्मा संतुलन – हर पदार्थ को गर्म होने के लिए अलग-अलग ऊर्जा चाहिए। किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c) वह ऊर्जा है जो उसके 1 kg का ताप 1 °C (या 1 K) बढ़ाती है। इसका मात्रक J/(kg·°C) है। किसी भी मात्रा को गर्म करने की ऊर्जा Q = m × c × ΔT होती है। पानी की c बहुत बड़ी है (लगभग 4200 J/(kg·°C)), इसलिए वह धीरे गर्म होता है और धीरे ठंडा होता है। जब गर्म और ठंडी चीज़ मिलती हैं और ऊष्मा बाहर नहीं जाती, तो गर्म चीज़ द्वारा दी गई ऊष्मा = ठंडी चीज़ द्वारा ली गई ऊष्मा। इसे ऊष्मा संतुलन कहते हैं और कैलोरीमीटर इसी पर काम करता है।
- अवस्था परिवर्तन: पिघलना, उबलना, वाष्पीकरण और ऊर्ध्वपातन – कोई पदार्थ गरम या ठंडा करने पर ठोस, द्रव और गैस के बीच बदल सकता है। पिघलने, उबलने, वाष्पीकरण और ऊर्ध्वपातन में ऊष्मा लगती है। जमने, संघनन और निक्षेपण में ऊष्मा बाहर निकलती है। जब अवस्था बदल रही होती है तब तापमान नहीं बदलता, क्योंकि ऊष्मा कणों के बीच का खिंचाव तोड़ने में लगती है। इस छिपी ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। वाष्पीकरण हर तापमान पर, सिर्फ़ सतह से होता है और ठंडक देता है। अवस्था परिवर्तन भौतिक परिवर्तन है: कोई नया पदार्थ नहीं बनता और द्रव्यमान वही रहता है।
- ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy) – ऊर्जा को न बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है। वह केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है या एक वस्तु से दूसरी में जाती है। बंद तंत्र की कुल ऊर्जा हमेशा उतनी ही रहती है। घर्षण न हो तो यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) स्थिर रहती है: mgh + ½mv² = स्थिर। घर्षण हो तो कुछ यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा बन जाती है, पर कुल ऊर्जा फिर भी वही रहती है। दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ कुल दी गई ऊर्जा × 100%।
- ऊष्मा इंजन – ऊष्मा इंजन वह मशीन है जो ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलती है। ईंधन जलकर ऊष्मा Q = q × m देता है, जहाँ q ईंधन का ऊष्मीय मान (दहन की ऊष्मा) और m उसका द्रव्यमान है। गर्म गैस फैलकर पिस्टन को धकेलती है या टरबाइन घुमाती है। चार स्ट्रोक इंजन चूषण, संपीडन, शक्ति और निष्कासन दोहराता है। ऊष्मा का केवल कुछ भाग उपयोगी कार्य बनता है, बाक़ी बेकार ऊष्मा बनकर निकल जाता है। दक्षता η = W ÷ Q × 100%। इंजन CO₂ और दूसरी गैसें भी छोड़ते हैं जो हवा को गंदा और धरती को गर्म करती हैं।
2. Electrical phenomena
Electric charge and electrification · Interaction of charges and Coulomb's law · Electric current and conductors · Electric circuit: current and voltage · Resistance and Ohm's law · Series and parallel connections · Work and power of current
- स्थिर विद्युत (Static Electricity) – दो अलग चीज़ों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जो इलेक्ट्रॉन पाता है वह ऋण आवेशित होता है, जो खोता है वह धन आवेशित। आवेश बनता या मिटता नहीं, सिर्फ़ जगह बदलता है। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, असमान आवेश खींचते हैं। आवेशित वस्तु प्रेरण से उदासीन वस्तु को भी खींचती है। भूसंपर्कण से अतिरिक्त आवेश सुरक्षित ज़मीन में चला जाता है।
- कूलॉम का नियम: दो आवेशों के बीच बल – आवेशित वस्तुएँ बिना छुए एक-दूसरे को धकेलती या खींचती हैं। समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं और विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं। दो छोटे (बिंदु) आवेशों के बीच बल F = k·q₁·q₂ / r² होता है, जहाँ k ≈ 9 × 10⁹ N·m²/C²। एक आवेश दोगुना करें तो बल दोगुना; दूरी दोगुनी करें तो बल एक-चौथाई। आवेश न बनता है, न नष्ट होता है, सिर्फ़ एक जगह से दूसरी जगह जाता है।
- ओम का नियम – स्थिर ताप पर किसी चालक में बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है: V = I × R। R प्रतिरोध है, मात्रक ओम (Ω); 1 Ω = 1 V/1 A। ओमीय चालक का V–I ग्राफ मूल बिंदु से गुज़रती सीधी रेखा होता है।