विद्युत आवेश और वस्तुएँ आवेशित कैसे होती हैं
हर चीज़ परमाणुओं से बनी है। परमाणु में धनात्मक प्रोटॉन और ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन होते हैं। आम तौर पर ये बराबर होते हैं, इसलिए वस्तु उदासीन (neutral) रहती है।
दो चीज़ों को रगड़ने पर कुछ इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जिसे इलेक्ट्रॉन मिले वह ऋणात्मक बनती है, जिसने खोए वह धनात्मक।
आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है। 1 C बहुत बड़ा है, इसलिए माइक्रोकूलॉम चलता है: 1 µC = 10⁻⁶ C। सबसे छोटा आवेश एक इलेक्ट्रॉन का है, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C। हर आवेश e का पूर्ण गुणज होता है, इसे आवेश का क्वांटीकरण कहते हैं।
आवेश संरक्षण (Conservation of charge)
आवेश न बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है। वह सिर्फ़ एक वस्तु से दूसरी पर जाता है। इसलिए किसी बंद समूह का कुल आवेश हमेशा वही रहता है।
उदाहरण: काँच की छड़ को रेशम से रगड़ें। छड़ +q और रेशम −q हो जाता है। कुल = 0, पहले जैसा।
दो एक-जैसी धातु की गेंदें छूती हैं तो आवेश बराबर बँट जाता है: +6 µC और 0 → +3 µC और +3 µC। कुल फिर भी +6 µC (3D का तीसरा चरण)।
समान आवेश प्रतिकर्षित, विपरीत आवेश आकर्षित
- + और + → दूर धकेलते हैं (प्रतिकर्षण)
- − और − → दूर धकेलते हैं (प्रतिकर्षण)
- + और − → पास खींचते हैं (आकर्षण)
बल दोनों आवेशों को जोड़ने वाली सीधी रेखा पर लगता है। दोनों पर बल बराबर होता है, दिशाएँ उलटी (न्यूटन का तीसरा नियम)।
आवेशित कंघी कागज़ के उदासीन टुकड़ों को भी खींच लेती है, क्योंकि वह कागज़ के अंदर के आवेशों को थोड़ा खिसका देती है।
कूलॉम का नियम और बिंदु आवेश
बिंदु आवेश वह आवेशित वस्तु है जो दूसरी वस्तुओं की दूरी की तुलना में इतनी छोटी हो कि उसका सारा आवेश एक बिंदु पर माना जा सके।
1785 में चार्ल्स ऑगस्टिन डी कूलॉम ने ऐंठन तुला से यह बल नापा। दूरी r पर रखे दो बिंदु आवेश q₁ और q₂ के लिए:
F = k · q₁ · q₂ / r²
- k ≈ 9 × 10⁹ N·m²/C² (हवा या निर्वात में)। k = 1/(4πε₀), ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² C²/(N·m²)।
- F ∝ q₁q₂: एक आवेश दोगुना, बल दोगुना।
- F ∝ 1/r²: दूरी दोगुनी, बल 1/4; तिगुनी, बल 1/9।
SI मात्रक लें: आवेश C में, दूरी m में, बल N में। सूत्र में सिर्फ़ मान डालें; आकर्षण या प्रतिकर्षण चिह्नों से तय करें।
विद्युत क्षेत्र का विचार
बिना छुए आवेश धक्का कैसे देता है? हर आवेश अपने चारों ओर विद्युत क्षेत्र बनाता है। उस क्षेत्र में रखा दूसरा आवेश बल महसूस करता है।
क्षेत्र की तीव्रता E = F / q (न्यूटन प्रति कूलॉम)। बिंदु आवेश के पास E = kQ / r²। क्षेत्र रेखाएँ अगले पाठ में।
करके देखें: गुब्बारा प्रयोग
दो गुब्बारे फुलाइए और धागे बाँधिए। दोनों को बालों या ऊनी स्वेटर पर रगड़िए। पास-पास लटकाइए: वे दूर हट जाते हैं (समान आवेश)। अब एक को बालों के पास लाइए: बाल खिंचते हैं। गुब्बारे को धीरे-धीरे दूर ले जाइए और देखिए खिंचाव कितनी जल्दी कम होता है। यही 1/r² नियम है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- F = k · q₁ · q₂ / r²
- k = 1/(4πε₀) ≈ 9 × 10⁹ N·m²/C²
- q = n · e, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
- पहले का कुल आवेश = बाद का कुल आवेश
- E = F / q
हल किए गए उदाहरण
1. +1 µC के दो आवेश 1 m दूर हैं। बल ज्ञात कीजिए।
F = 9×10⁹ × (1×10⁻⁶)(1×10⁻⁶) / 1² = 9×10⁻³ N = 0.009 N। दोनों धनात्मक, इसलिए प्रतिकर्षण।
2. +2 µC और −3 µC आवेश 30 cm दूर हैं। बल और उसका प्रकार बताइए।
r = 0.3 m। F = 9×10⁹ × 6×10⁻¹² / 0.09 = 0.054 / 0.09 = 0.6 N। चिह्न विपरीत, इसलिए आकर्षण।
3. दो आवेशों के बीच बल 8 N है। दूरी दोगुनी कर दी। नया बल?
F ∝ 1/r²। r दोगुना तो r² चार गुना। नया F = 8 / 4 = 2 N।
4. बल 5 N है। एक आवेश तिगुना और दूरी आधी कर दी। नया बल?
आवेश ×3 → बल ×3। दूरी ÷2 → बल ×4। नया F = 5 × 3 × 4 = 60 N।
5. एक-जैसी धातु की गेंदों पर +8 µC और −2 µC हैं। छूकर अलग करने पर हर एक पर आवेश?
कुल = +8 − 2 = +6 µC। बराबर बाँटें: हर गेंद पर +3 µC।
6. किसी वस्तु से कितने इलेक्ट्रॉन निकालें कि आवेश +3.2 × 10⁻¹⁹ C हो? और +1 µC के लिए?
n = q/e। 3.2×10⁻¹⁹ C के लिए n = 2। 1×10⁻⁶ C के लिए n = 10⁻⁶ / 1.6×10⁻¹⁹ = 6.25 × 10¹² इलेक्ट्रॉन।
आम गलतियाँ
- सूत्र में डालने से पहले cm को m में और µC को C में न बदलना।
- r का वर्ग करना भूल जाना। r = 0.2 m हो तो r² = 0.04 लें, 0.2 नहीं।
- ऋण चिह्न को F में डाल देना। बल का मान निकालें; आकर्षण या प्रतिकर्षण चिह्नों से तय करें।
- यह सोचना कि बड़े आवेश पर बड़ा बल लगता है। दोनों पर बल बराबर होता है।