विद्युत धारा का तापीय प्रभाव क्या है?
सेल प्रतिरोधक में आवेशों को लगातार धकेलता है। स्रोत उन पर कार्य करता है; प्रतिरोधक में यह कार्य कुछ चलाता नहीं, इसलिए पूरा ऊष्मा बन जाता है। चलते इलेक्ट्रॉन धातु के परमाणुओं से टकराकर ऊर्जा देते हैं, परमाणु तेज़ी से काँपते हैं और ताप बढ़ता है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।
जूल के तापन नियम की व्युत्पत्ति
मान लो प्रतिरोधक R में समय t तक धारा I बहती है और उस पर विभवांतर V है। बहा आवेश: Q = It। स्रोत द्वारा कार्य: W = VQ = VIt। यह कार्य ऊष्मा बनता है: H = VIt। ओम के नियम V = IR से:
H = I²Rt (और H = VIt = V²t/R)
जूल का तापन नियम: प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा (i) धारा के वर्ग के, (ii) दी गई धारा के लिए प्रतिरोध के और (iii) धारा बहने के समय के अनुक्रमानुपाती होती है। I एम्पियर, R ओम और t सेकंड में हो तो H जूल में।
तापीय प्रभाव के अनुप्रयोग
- तापन उपकरण: इस्त्री, टोस्टर, ओवन, केतली, रूम हीटर और गीज़र में नाइक्रोम कुंडली (उच्च प्रतिरोधकता, उच्च गलनांक, आसानी से ऑक्सीकृत नहीं)।
- विद्युत बल्ब: तंतु टंगस्टन का, जिसका गलनांक लगभग 3380 °C है, इसलिए वह सफ़ेद-गरम होकर चमक सकता है। बल्ब में अक्रिय नाइट्रोजन और आर्गन भरी होती है ताकि तंतु जले नहीं। फिर भी ज़्यादातर ऊर्जा ऊष्मा बनती है, थोड़ी ही प्रकाश।
- विद्युत फ्यूज़: कम गलनांक वाली धातु या मिश्रधातु (जैसे टिन-सीसा) का छोटा तार, उपकरण के श्रेणी में। धारा फ्यूज़ की सीमा (1 A, 2 A, 5 A, 10 A, 15 A…) से ऊपर जाए तो तार गरम होकर पिघलता है और परिपथ तोड़ देता है। सीमा सामान्य धारा से थोड़ी अधिक चुनते हैं, जैसे 220 V पर 1 kW इस्त्री लगभग 4.5 A लेती है, तो 5 A फ्यूज़।
तापन कब अवांछित है?
तारों, मोटरों, कंप्यूटर और चार्जर में यह ऊष्मा बर्बाद ऊर्जा है और पुर्ज़े ख़राब कर सकती है। इसलिए जोड़ने वाले तार मोटे ताँबे के होते हैं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पंखे या जालियाँ होती हैं, और लंबी दूरी तक बिजली बहुत ऊँचे वोल्टेज पर भेजी जाती है (ताकि धारा और I²R हानि कम रहे)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- H = I² R t (जूल का तापन नियम)
- H = V I t = V² t / R
- Q = I t, W = V Q
- मात्रक: H जूल (J), I एम्पियर, R ओम, t सेकंड
हल किए गए उदाहरण
1. 10 Ω प्रतिरोधक में 2 A धारा 30 s तक बहती है। उत्पन्न ऊष्मा?
H = 2² × 10 × 30 = 1200 J.
2. 50 Ω की इस्त्री 4 A लेती है। 1 मिनट में कितनी ऊष्मा?
H = 16 × 50 × 60 = 48 000 J = 48 kJ.
3. 20 Ω का हीटर 220 V पर 10 s चलता है। ऊष्मा?
H = V²t/R = 220² × 10 / 20 = 24 200 J.
4. हीटर की धारा तीन गुनी करने पर उसी समय में ऊष्मा कितने गुना?
H ∝ I², इसलिए 3² = 9 गुना।
5. एक केतली 5 A धारा पर 2 मिनट में 60 000 J ऊष्मा देती है। प्रतिरोध?
t = 120 s. R = 60 000 / (25 × 120) = 20 Ω.
6. 1100 W का हीटर 220 V पर चलता है। कौन-सा फ्यूज़: 2 A, 5 A या 10 A?
सामान्य धारा I = 1100/220 = 5 A. फ्यूज़ इससे थोड़ा ऊपर चाहिए, इसलिए 10 A; 5 A फ्यूज़ सामान्य उपयोग में ही उड़ जाएगा।
आम गलतियाँ
- ऊष्मा को धारा के अनुक्रमानुपाती मानना। यह I² के अनुक्रमानुपाती है, धारा दोगुनी तो ऊष्मा चार गुनी।
- H = I²Rt में t मिनट में रखना। हमेशा सेकंड में बदलो।
- फ्यूज़ को पार्श्व में जोड़ना। पूरी धारा गुज़रे, इसलिए फ्यूज़ श्रेणी में।
- हीटर कुंडली के लिए ताँबा ठीक बताना। ताँबे की प्रतिरोधकता कम है और वह ऑक्सीकृत होता है; नाइक्रोम लगता है।