ओम का नियम क्या कहता है?
विभवांतर (V) परिपथ में आवेश को धकेलता है। आवेश का बहाव ही विद्युत धारा (I) है। हर पदार्थ इस बहाव का थोड़ा विरोध करता है; इस विरोध को प्रतिरोध (R) कहते हैं, जिसकी इकाई ओम (Ω) है।
ओम का नियम कहता है कि ताप न बदले तो विभवांतर दोगुना करने पर धारा भी दोगुनी हो जाती है। V/I का अनुपात स्थिर रहता है और यही प्रतिरोध है।
V–I ग्राफ
धातु के तार के लिए विभवांतर और धारा का ग्राफ मूल बिंदु से गुजरती सीधी रेखा होता है। V–I रेखा की ढलान प्रतिरोध के बराबर है। ज़्यादा ढलान यानी ज़्यादा प्रतिरोध। बल्ब और डायोड ओम के नियम का पालन नहीं करते।
प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर करता है?
तार के लिए R = ρL/A। लंबाई (L) बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है, मोटाई यानी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A) बढ़ने पर घटता है, और पदार्थ की प्रतिरोधकता (ρ) पर निर्भर करता है। ज़्यादातर धातुओं में ताप बढ़ने पर प्रतिरोध भी बढ़ता है।
परिपथ में खुद आज़माएँ
एनिमेशन में स्लाइडर से बैटरी का विभवांतर और प्रतिरोध बदलें। चलते आवेशों की रफ़्तार और अमीटर की रीडिंग देखें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- V = I × R
- I = V / R, R = V / I
- इकाइयाँ: V वोल्ट (V), I एम्पियर (A), R ओम (Ω)
- R = ρL / A (तार का प्रतिरोध)
हल किए गए उदाहरण
1. 12 V की बैटरी 4 Ω के प्रतिरोध से जुड़ी है। धारा ज्ञात करें।
I = V / R = 12 / 4 = 3 A।
2. 230 V लगाने पर लैंप में 0.5 A धारा बहती है। उसका प्रतिरोध ज्ञात करें।
R = V / I = 230 / 0.5 = 460 Ω।
3. 15 Ω के हीटर में 2 A धारा के लिए कितना विभवांतर चाहिए?
V = I × R = 2 × 15 = 30 V।
आम गलतियाँ
- मिलीएम्पियर को बदले बिना लगाना: 200 mA = 0.2 A।
- यह मानना कि ओम का नियम हर उपकरण पर लागू होता है। बल्ब और डायोड का V–I ग्राफ सीधा नहीं होता।
- यह कहना कि प्रतिरोध विभवांतर पर निर्भर है। ओमीय चालक में R स्थिर रहता है; V और I साथ बदलते हैं।
- V–I और I–V ग्राफ की ढलान में गड़बड़: V–I ढलान = R, I–V ढलान = 1/R।