Poland Szkoła podstawowa, klasa VIII Physics
अध्याय: 4
1. Electricity
Electric charge and electrostatics · Current, voltage and resistance · Electrical energy and circuits · Experiments: electricity
- स्थिर विद्युत (Static Electricity) – दो अलग चीज़ों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जो इलेक्ट्रॉन पाता है वह ऋण आवेशित होता है, जो खोता है वह धन आवेशित। आवेश बनता या मिटता नहीं, सिर्फ़ जगह बदलता है। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, असमान आवेश खींचते हैं। आवेशित वस्तु प्रेरण से उदासीन वस्तु को भी खींचती है। भूसंपर्कण से अतिरिक्त आवेश सुरक्षित ज़मीन में चला जाता है।
- ओम का नियम – स्थिर ताप पर किसी चालक में बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है: V = I × R। R प्रतिरोध है, मात्रक ओम (Ω); 1 Ω = 1 V/1 A। ओमीय चालक का V–I ग्राफ मूल बिंदु से गुज़रती सीधी रेखा होता है।
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
2. Magnetism
Magnets and the compass · Magnetic effect of current
- चुंबकत्व: चुंबक और दिशासूचक – चुंबक लोहा, निकल और कोबाल्ट को खींचता है। इसका खिंचाव दोनों सिरों पर सबसे ज़्यादा होता है, जिन्हें उत्तर (N) और दक्षिण (S) ध्रुव कहते हैं। समान ध्रुव एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं, असमान ध्रुव खींचते हैं। चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र होता है, जिसे N से S जाती रेखाओं से दिखाते हैं; दिशासूचक की सुई इसके साथ सीधी हो जाती है। चुंबक के अंदर छोटे-छोटे चुंबक एक ही दिशा में होते हैं। पृथ्वी ख़ुद बड़ा चुंबक है। कुंडली में धारा बहाने से विद्युत चुंबक बनता है।
- विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव – जिस तार में विद्युत धारा बहती है, उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है। सीधे तार के चारों ओर यह वृत्तों में होता है, वृत्ताकार लूप के केंद्र पर लगभग सीधा होता है, और परिनालिका के अंदर एकसमान होता है, जिससे परिनालिका छड़ चुंबक जैसी बन जाती है।
3. Oscillations and waves
Periodic motion · Mechanical waves and sound
- सरल आवर्त गति (SHM) – जो गति तय समय के बाद बार-बार दोहराती है, वह आवर्ती गति है। अगर वस्तु बीच की जगह के इधर-उधर आती-जाती है और वापस खींचने वाला बल दूरी के अनुपात में है (F = −kx), तो वह सरल आवर्त गति है। इसकी स्थिति x = A sin(ωt + φ) है, जहाँ ω = 2π/T = 2πf। बीच में चाल सबसे ज़्यादा, सिरों पर त्वरण सबसे ज़्यादा, और कुल ऊर्जा ½kA² हमेशा वही रहती है।
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
4. Optics
Light travel and reflection · Refraction and lenses · Colour and electromagnetic waves · Experiments: optics
- प्रकाश का परावर्तन: समतल और गोलीय दर्पण – चमकदार सतह से टकराकर प्रकाश इस तरह लौटता है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर रहते हैं। समतल दर्पण का प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बराबर आकार का और दर्पण के उतना ही पीछे बनता है जितनी वस्तु आगे है। अवतल दर्पण वस्तु की जगह के हिसाब से वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जबकि उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब देता है। दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u (नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के साथ) से बिना चित्र बनाए प्रतिबिंब निकाल सकते हैं।
- गोलीय लेंस: प्रतिबिंब, लेंस सूत्र और क्षमता – उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और समांतर प्रकाश को अपने फोकस पर मिलाता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और प्रकाश को ऐसे फैलाता है मानो फोकस से आ रहा हो। दो आसान किरणों (एक अक्ष के समांतर, एक प्रकाशिक केंद्र से होकर) से किसी भी स्थिति का प्रतिबिंब मिल जाता है। वस्तु F₁ से परे हो तो उत्तल लेंस वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है और F₁ के अंदर हो तो आभासी, सीधा, बड़ा; अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u और क्षमता P = 1/f (मीटर में, मात्रक डायोप्टर) से आंकिक प्रश्न हल होते हैं।