परावर्तन क्या है? परावर्तन के दो नियम
जब प्रकाश किसी चिकनी चमकदार सतह से टकराकर उसी माध्यम में लौट आता है तो इसे परावर्तन कहते हैं। आने वाली किरण आपतित किरण, लौटने वाली परावर्तित किरण, और टकराने वाले बिंदु पर सतह से 90° पर खींची रेखा अभिलंब कहलाती है।
- पहला नियम: आपतन कोण = परावर्तन कोण (∠i = ∠r)। दोनों कोण अभिलंब से नापे जाते हैं, दर्पण से नहीं।
- दूसरा नियम: आपतित किरण, उस बिंदु पर अभिलंब और परावर्तित किरण, तीनों एक ही तल में होते हैं।
ये नियम हर परावर्तक सतह पर लागू होते हैं: समतल दर्पण, गोलीय दर्पण, पानी भी। गोलीय दर्पण में किसी बिंदु का अभिलंब उस बिंदु को वक्रता केंद्र से मिलाने वाली रेखा है।
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब
समतल दर्पण का प्रतिबिंब हमेशा:
- आभासी और सीधा होता है: परावर्तित किरणें असल में नहीं मिलतीं, बस दर्पण के पीछे के एक बिंदु से आती लगती हैं, इसलिए परदे पर नहीं आता;
- वस्तु के बराबर आकार का (आवर्धन = +1);
- दर्पण के उतना ही पीछे जितनी वस्तु आगे है;
- पार्श्व उल्टा: आपका दायाँ हाथ बायाँ दिखता है। इसीलिए एम्बुलेंस के आगे AMBULANCE उल्टा लिखा होता है।
गोलीय दर्पण: अवतल और उत्तल
गोलीय दर्पण एक खोखले चमकदार गोले का कटा हुआ हिस्सा है। अगर चमकदार तरफ़ अंदर धँसी है तो अवतल दर्पण, और अगर चमकदार तरफ़ बाहर उभरी है तो उत्तल दर्पण।
ज़रूरी शब्द
- ध्रुव (P): दर्पण की सतह का बीच का बिंदु।
- वक्रता केंद्र (C): उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण हिस्सा है। अवतल में सामने, उत्तल में पीछे।
- वक्रता त्रिज्या (R): दूरी PC।
- मुख्य अक्ष: P और C से होकर जाने वाली सीधी रेखा।
- मुख्य फोकस (F): वह बिंदु जहाँ समांतर किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं (अवतल) या जहाँ से आती लगती हैं (उत्तल)।
- फोकस दूरी (f): दूरी PF।
- द्वारक: परावर्तक सतह की चौड़ाई।
छोटे द्वारक वाले दर्पण के लिए R = 2f, यानी F ठीक P और C के बीच में है।
किरण आरेख बनाने के नियम
प्रतिबिंब ढूँढ़ने के लिए वस्तु के सिरे से इनमें से कोई दो किरणें लें। जहाँ वे मिलें (या मिलती लगें), वहीं प्रतिबिंब का सिरा है।
- मुख्य अक्ष के समांतर किरण परावर्तन के बाद F से गुज़रती है (अवतल) या F से आती लगती है (उत्तल)।
- F से होकर आने वाली (अवतल) या F की ओर जाती (उत्तल) किरण लौटकर अक्ष के समांतर जाती है।
- C से होकर (अवतल) या C की ओर (उत्तल) जाने वाली किरण अभिलंब के साथ टकराकर उसी रास्ते लौटती है।
- ध्रुव P पर गिरने वाली किरण अक्ष के दूसरी ओर उतने ही कोण पर लौटती है।
3D बेंच में नारंगी किरण नियम 1 और हरी-नीली किरण नियम 4 मानती है। बिंदीदार रेखाएँ दिखाती हैं कि किरणें कहाँ से आती लगती हैं: वही आभासी प्रतिबिंब है।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब (वस्तु की हर स्थिति)
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | बिंदु जैसा, बहुत छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| C से परे | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| C पर | C पर | बराबर | वास्तविक, उल्टा |
| C और F के बीच | C से परे | बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| F पर | अनंत पर | बहुत बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
पैटर्न देखिए: वस्तु जैसे-जैसे अनंत से F की ओर आती है, वास्तविक प्रतिबिंब F से दूर भागता है और बड़ा होता जाता है। F के अंदर प्रतिबिंब आभासी और सीधा हो जाता है। कहानी के चरण 4 में या वस्तु खींचकर छहों स्थितियाँ देखें।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर, दर्पण के पीछे | बिंदु जैसा | आभासी, सीधा |
| अनंत और P के बीच कहीं भी | P और F के बीच, दर्पण के पीछे | छोटा | आभासी, सीधा |
उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब कभी F को पार नहीं करता और कभी वास्तविक नहीं होता। वस्तु जितनी पास, प्रतिबिंब उतना बड़ा (फिर भी वस्तु से छोटा)।
अवतल और उत्तल दर्पण के उपयोग
- अवतल: टॉर्च, गाड़ी की हेडलाइट और सर्चलाइट (F पर बल्ब रखने से तेज़ समांतर किरण-पुंज); दाढ़ी बनाने और मेकअप के दर्पण (F के अंदर चेहरा = बड़ा सीधा प्रतिबिंब); दाँत के डॉक्टर का दर्पण; सौर कुकर और सौर भट्टी (धूप F पर इकट्ठा)।
- उत्तल: कार और स्कूटर के पीछे देखने वाले दर्पण (हमेशा सीधा प्रतिबिंब और बहुत बड़ा दृष्टि क्षेत्र); तीखे मोड़ों पर और दुकानों में सुरक्षा के लिए।
गोलीय दर्पण के लिए नई कार्तीय चिह्न परिपाटी
- ध्रुव P को मूल बिंदु और मुख्य अक्ष को x-अक्ष मानें।
- वस्तु हमेशा बाईं ओर रखें, यानी प्रकाश बाएँ से दाएँ चलता है।
- आपतित प्रकाश की दिशा में (P के दाएँ) नापी दूरी धनात्मक, उल्टी दिशा में (बाएँ) ऋणात्मक। इसलिए u हमेशा ऋणात्मक।
- अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक, नीचे ऋणात्मक।
नतीजा: अवतल दर्पण का f ऋणात्मक, उत्तल का f धनात्मक। वास्तविक प्रतिबिंब (सामने) का v ऋणात्मक, आभासी (पीछे) का v धनात्मक।
दर्पण सूत्र और आवर्धन
वस्तु दूरी u, प्रतिबिंब दूरी v और फोकस दूरी f का संबंध दर्पण सूत्र है:
1/v + 1/u = 1/f
आवर्धन बताता है कि प्रतिबिंब कितने गुना बड़ा है और सीधा है या उल्टा:
m = h′/h = −v/u
- m ऋणात्मक → वास्तविक और उल्टा; m धनात्मक → आभासी और सीधा।
- |m| > 1 → बड़ा; |m| < 1 → छोटा।
हल करने का तरीका: ज्ञात मान चिह्न के साथ लिखें, सूत्र में रखें, अज्ञात निकालें, फिर उत्तर के चिह्न से प्रकृति बताएँ। बोर्ड परीक्षा में इस भाग से आम तौर पर एक किरण आरेख (2–3 अंक) और एक दर्पण सूत्र का आंकिक प्रश्न (3 अंक) आता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ∠i = ∠r (परावर्तन के नियम)
- R = 2f
- दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f
- आवर्धन: m = h′/h = −v/u
- अवतल दर्पण: f ऋणात्मक; उत्तल दर्पण: f धनात्मक; u हमेशा ऋणात्मक
हल किए गए उदाहरण
1. एक अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 30 cm है। चिह्न सहित फोकस दूरी बताइए।
f = R/2 = 30/2 = 15 cm। अवतल दर्पण का F सामने, यानी आपतित प्रकाश की उल्टी दिशा में है, इसलिए f = −15 cm।
2. एक उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 12 cm है। वक्रता त्रिज्या निकालिए।
R = 2f = 2 × 12 = 24 cm। वक्रता केंद्र दर्पण के पीछे है, इसलिए R = +24 cm।
3. 20 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने 30 cm पर वस्तु रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, आवर्धन और प्रकृति बताइए।
u = −30 cm, f = −20 cm। 1/v = 1/f − 1/u = −1/20 + 1/30 = (−3 + 2)/60 = −1/60, तो v = −60 cm। m = −v/u = −(−60)/(−30) = −2। प्रतिबिंब दर्पण के सामने 60 cm पर: वास्तविक, उल्टा, दुगना बड़ा (वस्तु C और F के बीच, प्रतिबिंब C से परे)।
4. 4 cm ऊँची वस्तु 15 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने 10 cm पर है। प्रतिबिंब की स्थिति और ऊँचाई निकालिए।
u = −10, f = −15। 1/v = −1/15 + 1/10 = (−2 + 3)/30 = 1/30, तो v = +30 cm (दर्पण के पीछे)। m = −v/u = −30/(−10) = +3। h′ = 3 × 4 = 12 cm। आभासी, सीधा, 3 गुना बड़ा: दाढ़ी बनाने का दर्पण ऐसे ही काम करता है।
5. 20 cm फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण के सामने 20 cm पर वस्तु है। प्रतिबिंब बताइए।
u = −20, f = +20। 1/v = 1/20 − 1/(−20) = 1/20 + 1/20 = 1/10, तो v = +10 cm। m = −10/(−20) = +0.5। प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 10 cm पर, आभासी, सीधा, आधे आकार का।
6. एक अवतल दर्पण दर्पण से 60 cm दूर परदे पर वस्तु से तीन गुना बड़ा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। वस्तु कहाँ है और फोकस दूरी कितनी है?
परदे पर प्रतिबिंब वास्तविक है: v = −60 cm और m = −3 (वास्तविक प्रतिबिंब उल्टा)। m = −v/u → −3 = 60/u → u = −20 cm। 1/f = 1/v + 1/u = −1/60 − 1/20 = (−1 − 3)/60 = −4/60, तो f = −15 cm। वस्तु सामने 20 cm पर, फोकस दूरी 15 cm।
7. एक कार के उत्तल पश्च-दृश्य दर्पण की R = 3 m है। उसके 5 m पीछे एक बस है। बस के प्रतिबिंब की स्थिति और आकार का अनुपात निकालिए।
f = R/2 = +1.5 m, u = −5 m। 1/v = 1/1.5 + 1/5 = 0.667 + 0.200 = 0.867, तो v ≈ +1.15 m। m = −v/u = 1.15/5 ≈ 0.23। प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 1.15 m पर, आभासी, सीधा और लगभग एक-चौथाई आकार का, इसलिए छोटे दर्पण में बड़ा क्षेत्र दिख जाता है।
आम गलतियाँ
- आपतन कोण को अभिलंब की जगह दर्पण की सतह से नापना।
- चिह्न भूल जाना: u = −30 की जगह +30 रखना। वस्तु हमेशा बाईं ओर है, इसलिए u हमेशा ऋणात्मक।
- अवतल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक लेना। अवतल का f ऋणात्मक और उत्तल का धनात्मक होता है।
- यह कहना कि आभासी प्रतिबिंब परदे पर आ सकता है। सिर्फ़ वास्तविक प्रतिबिंब (जहाँ किरणें सच में मिलती हैं) परदे पर आता है।