Italy Secondaria di secondo grado – classe 2ª Physics (liceo scientifico)
अध्याय: 1
1. Foundations, optics, heat and mechanics
Physical quantities and measurement · Geometric optics · Thermal phenomena · Equilibrium of bodies and fluids · Kinematics and Newton's laws · Work and energy
- मात्रक और मापन (कक्षा 11) – मापना यानी किसी राशि की तुलना एक तय, सबके माने हुए परिमाण से करना। उस तय परिमाण को मात्रक (unit) कहते हैं। मापा गया मान = संख्या × मात्रक। आज पूरी दुनिया SI पद्धति चलाती है, जिसमें 7 मूल मात्रक हैं: मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल और कैन्डेला। बाकी सब मात्रक (जैसे न्यूटन, जूल) इन्हीं के गुणा-भाग से बने व्युत्पन्न मात्रक हैं। किलो (10³), मिली (10⁻³) जैसे पूर्वलग्न बड़ी-छोटी संख्याओं को आसान बनाते हैं।
- प्रकाश का परावर्तन: समतल और गोलीय दर्पण – चमकदार सतह से टकराकर प्रकाश इस तरह लौटता है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर रहते हैं। समतल दर्पण का प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बराबर आकार का और दर्पण के उतना ही पीछे बनता है जितनी वस्तु आगे है। अवतल दर्पण वस्तु की जगह के हिसाब से वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जबकि उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब देता है। दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u (नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के साथ) से बिना चित्र बनाए प्रतिबिंब निकाल सकते हैं।
- प्रकाश का अपवर्तन: नियम, अपवर्तनांक और काँच का स्लैब – प्रकाश जब एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाता है तो उसकी चाल बदलती है, इसलिए वह सीमा पर मुड़ जाता है (अगर अभिलंब के साथ न गिरे)। प्रकाशिक सघन माध्यम में जाते समय वह धीमा होकर अभिलंब की ओर मुड़ता है, और बाहर आते समय तेज़ होकर अभिलंब से दूर। दो माध्यमों के लिए sin i / sin r स्थिर रहता है (स्नेल का नियम); यही स्थिरांक अपवर्तनांक है, जो प्रकाश की चालों का अनुपात भी है: n = c/v। आयताकार काँच के स्लैब से निकली किरण आपतित किरण के समांतर होती है, पर थोड़ी खिसकी हुई (पार्श्विक विस्थापन)।
- तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, कैलोरीमिति और गुप्त ऊष्मा – ताप बताता है कि वस्तु कितनी गरम है; ऊष्मा वह ऊर्जा है जो ताप के अंतर के कारण बहती है। ज़्यादातर चीज़ें गरम होकर फैलती हैं: ΔL = αLΔT, ΔA = βAΔT, ΔV = γVΔT, जहाँ β = 2α और γ = 3α। पानी 0 °C से 4 °C के बीच अपवाद है: गरम करने पर सिकुड़ता है, इसलिए 4 °C पर सबसे घना। किसी वस्तु को गरम करने की ऊष्मा Q = mcΔT, जहाँ c विशिष्ट ऊष्मा है; गैसों की दो होती हैं, Cp > Cv, और प्रति मोल Cp − Cv = R। कैलोरीमिति में गरम वस्तुओं की खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तुओं की पाई ऊष्मा। पिघलते या उबलते समय ताप स्थिर रहता है और ऊष्मा Q = mL अवस्था बदलने में लगती है।
- तरलों में दाब और पास्कल का नियम – तरल (द्रव या गैस) जिस सतह को छूता है, उस पर धक्का देता है। यह लंबवत बल ÷ क्षेत्रफल = दाब, P = F/A। गुरुत्व के कारण ऊपर के तरल का भार होता है, इसलिए गहराई के साथ दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh। स्थिर द्रव में एक ही गहराई पर दाब बराबर होता है, बर्तन का आकार कुछ भी हो। पास्कल का नियम: बंद तरल पर लगाया गया अतिरिक्त दाब हर जगह बराबर पहुँचता है। हाइड्रॉलिक लिफ़्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं: छोटे पिस्टन पर छोटा बल, बड़े पिस्टन पर बड़ा बल, F = f × A/a।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।