अपवर्तन क्या है और प्रकाश क्यों मुड़ता है?
प्रकाश जब तिरछा होकर एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाता है, जैसे हवा से पानी या काँच में, तो उसकी दिशा बदल जाती है। इसे अपवर्तन कहते हैं। इसका कारण है कि अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग होती है: हवा में लगभग 3 × 10⁸ m/s, पानी में लगभग 2.25 × 10⁸ m/s, काँच में लगभग 2 × 10⁸ m/s।
जिस माध्यम में प्रकाश धीमा चलता है वह प्रकाशिक सघन, और जिसमें तेज़ चलता है वह प्रकाशिक विरल कहलाता है। प्रकाशिक घनत्व और द्रव्यमान घनत्व एक बात नहीं: मिट्टी का तेल पानी से हल्का है, फिर भी प्रकाशिक रूप से सघन है।
- विरल → सघन (हवा से काँच): प्रकाश धीमा होकर अभिलंब की ओर मुड़ता है (r < i)।
- सघन → विरल (काँच से हवा): प्रकाश तेज़ होकर अभिलंब से दूर मुड़ता है (r > i)।
- अगर प्रकाश अभिलंब के साथ गिरे (i = 0°) तो बिल्कुल नहीं मुड़ता, हालाँकि चाल फिर भी बदलती है।
अपवर्तन के नियम (स्नेल का नियम)
- पहला नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं।
- दूसरा नियम (स्नेल का नियम): किसी एक रंग के प्रकाश और माध्यमों के एक जोड़े के लिए आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात स्थिर रहता है।
sin i / sin r = स्थिरांक = n₂₁
यह स्थिरांक पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक है। कहानी के चरण 3 में i और r दोनों बदलते हैं, पर अनुपात वही रहता है।
अपवर्तनांक
अपवर्तनांक बताता है कि कोई माध्यम प्रकाश को कितना धीमा करता है, और इसलिए कितना मोड़ता है।
सापेक्ष अपवर्तनांक
माध्यम 1 से माध्यम 2 में जाते प्रकाश के लिए:
n₂₁ = माध्यम 1 में प्रकाश की चाल / माध्यम 2 में प्रकाश की चाल = v₁/v₂
निरपेक्ष अपवर्तनांक
जब माध्यम 1 निर्वात (या हवा, लगभग वही) हो:
n = c / v
निर्वात में प्रकाश सबसे तेज़ है, इसलिए किसी भी पदार्थ का n हमेशा 1 से बड़ा होता है। इसका कोई मात्रक नहीं। साथ ही n₂₁ = n₂/n₁ और n₁₂ = 1/n₂₁।
| माध्यम | n (लगभग) |
|---|---|
| हवा | 1.0003 |
| पानी | 1.33 |
| मिट्टी का तेल | 1.44 |
| क्राउन काँच | 1.52 |
| हीरा | 2.42 |
हीरे का अपवर्तनांक बहुत बड़ा है, इसीलिए वह इतना चमकता है।
आयताकार काँच के स्लैब से अपवर्तन
काँच के स्लैब पर गिरी किरण दो बार मुड़ती है: पहली सतह पर (हवा → काँच) अभिलंब की ओर, और दूसरी सतह पर (काँच → हवा) अभिलंब से दूर।
- दोनों सतहें समांतर हैं, इसलिए दूसरी सतह का मुड़ना पहली का असर ठीक उलट देता है। इसलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर होती है और निर्गत कोण e = आपतन कोण i।
- पर किरण बगल में खिसक जाती है। आपतित किरण (आगे बढ़ाई हुई) और निर्गत किरण के बीच की लंब दूरी को पार्श्विक विस्थापन कहते हैं।
- स्लैब मोटा हो, i बड़ा हो या अपवर्तनांक बड़ा हो तो यह खिसकाव बढ़ता है। i = 0° पर कोई खिसकाव नहीं।
यही प्रयोगशाला का मशहूर प्रयोग है: स्लैब की रूपरेखा बनाइए, किरण के साथ पिनें लगाइए और चाँदे से i, r और e नापिए।
रोज़मर्रा में अपवर्तन और बोर्ड परीक्षा के संकेत
- टंकी या तालाब असल से कम गहरा दिखता है (आभासी गहराई < वास्तविक गहराई)।
- पानी में आधी डूबी पेंसिल सतह पर मुड़ी दिखती है।
- मोटे काँच के स्लैब से अक्षर ऊपर उठे दिखते हैं।
- तारे टिमटिमाते हैं क्योंकि तारों का प्रकाश बदलते अपवर्तनांक वाली हवा की परतों से गुज़रता है।
परीक्षा में क्या पूछते हैं: दोनों नियम, अपवर्तनांक की परिभाषा और n = c/v के आंकिक प्रश्न (1–3 अंक), तालिका से कौन सा माध्यम प्रकाशिक सघन है, और काँच के स्लैब का किरण आरेख जिसमें e = i और पार्श्विक विस्थापन दिखाना हो (2–3 अंक)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- sin i / sin r = n₂₁ (स्नेल का नियम)
- n₂₁ = v₁ / v₂ = n₂ / n₁
- निरपेक्ष अपवर्तनांक: n = c / v, जहाँ c = 3 × 10⁸ m/s
- n₁₂ = 1 / n₂₁
- काँच का स्लैब: निर्गत कोण e = आपतन कोण i
हल किए गए उदाहरण
1. काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। काँच में प्रकाश की चाल निकालिए।
v = c/n = (3 × 10⁸)/1.5 = 2 × 10⁸ m/s।
2. एक द्रव में प्रकाश 2.25 × 10⁸ m/s से चलता है। द्रव का अपवर्तनांक बताइए।
n = c/v = (3 × 10⁸)/(2.25 × 10⁸) = 1.33 (यह पानी है)।
3. पानी का n = 1.33 और काँच का n = 1.5 है। पानी के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक निकालिए।
n(पानी के सापेक्ष काँच) = n_काँच / n_पानी = 1.5/1.33 ≈ 1.13।
4. हवा से एक किरण √2 (≈ 1.414) अपवर्तनांक वाले माध्यम में 45° पर जाती है। अपवर्तन कोण निकालिए।
sin r = sin i / n = sin 45° / √2 = (1/√2)/√2 = 1/2, तो r = 30°।
5. √3 अपवर्तनांक वाले काँच के स्लैब पर किरण 60° पर गिरती है। अंदर अपवर्तन कोण और निर्गत कोण बताइए।
sin r = sin 60°/√3 = (√3/2)/√3 = 1/2, तो r = 30°। सतहें समांतर हैं, इसलिए किरण e = i = 60° पर, आपतित किरण के समांतर निकलती है।
6. काँच (n = 1.5) और हीरे (n = 2.42) में प्रकाश कहाँ तेज़ है? हीरे में चाल निकालिए।
चाल = c/n, इसलिए छोटे n वाले काँच में प्रकाश तेज़ है। हीरे में v = 3 × 10⁸/2.42 ≈ 1.24 × 10⁸ m/s, जबकि काँच में 2 × 10⁸ m/s।
7. प्रकाश पानी (n = 1.33) से काँच (n = 1.5) में 30° आपतन कोण पर जाता है। अपवर्तन कोण निकालिए।
दो माध्यमों के लिए स्नेल का नियम: n₁ sin i = n₂ sin r। sin r = 1.33 × 0.5 / 1.5 ≈ 0.443, तो r ≈ 26.3°। किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है क्योंकि काँच पानी से प्रकाशिक सघन है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि प्रकाश हमेशा अभिलंब की ओर मुड़ता है। वह सघन माध्यम में जाते समय ही अभिलंब की ओर मुड़ता है; बाहर निकलते समय दूर मुड़ता है।
- यह सोचना कि अभिलंब के साथ गिरी किरण (i = 0°) मुड़ती है। वह सीधी जाती है, बस चाल बदलती है।
- प्रकाशिक घनत्व को द्रव्यमान घनत्व समझ लेना (मिट्टी का तेल पानी पर तैरता है, फिर भी प्रकाशिक सघन है)।
- अपवर्तनांक का मात्रक लिखना या 1 से कम मान लेना। यह चालों का अनुपात है, इसका मात्रक नहीं होता और यह हमेशा 1 या उससे अधिक होता है।