China 八年级(初二) Physics
अध्याय: 13
1. Introduction – starting scientific exploration
What physics studies; scientific inquiry
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
2. Ch.1 Mechanical motion
Measuring length and time · Describing motion; relativity of motion · Speed · Measuring speed
- मापन और मात्रक: हम कुछ भी कैसे मापते हैं – किसी चीज़ को मापना यानी उसकी तुलना एक तय मात्रा से करना, जिसे मात्रक (इकाई) कहते हैं. हर माप में एक संख्या और एक मात्रक होता है. दुनिया भर के वैज्ञानिक SI पद्धति इस्तेमाल करते हैं, जिसमें मीटर, किलोग्राम और सेकंड जैसे सात मूल मात्रक हैं. किलो (×1000), सेंटी (÷100) और मिली (÷1000) जैसे उपसर्ग मात्रक को बड़ा या छोटा करते हैं. अच्छा माप शून्य से शुरू होता है, आँख निशान के ठीक ऊपर रखकर पढ़ा जाता है, और सबसे छोटे खाने (अल्पतमांक) जितना ही सटीक होता है. पूर्णांकित मान एक छोटी सीमा छिपाता है, जिसे ऊपरी और निचली सीमा बताती हैं.
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
3. Ch.2 Sound
Production and travel of sound · Pitch, loudness, timbre · Uses of sound · Noise and its control · Interdisciplinary: sound-proof room model
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
- ध्वनिरोधी (साउंडप्रूफ) कमरे का मॉडल बनाओ – ध्वनिरोधी कमरा शोर को बाहर (या अंदर) रोकता है। ध्वनि एक कंपन है, इसलिए हम उसे भारी और घनी दीवारों से रोकते हैं जो उसे लौटा देती हैं, नरम और छिद्रदार चीज़ों से जो उसे सोख लेती हैं, और बीच में हवा वाली परतों से। ज़रा-सी दरार से आवाज़ रिस जाती है, इसलिए हर दरार बंद करनी होती है। इस प्रोजेक्ट में तुम निष्पक्ष परीक्षण करके अलग-अलग सामग्री परखोगे, डेसिबल में शोर लिखोगे, फिर छोटा कमरा बनाकर उसे लक्ष्यों (शोर, खर्च, मोटाई) के हिसाब से जाँचोगे।
4. Ch.3 Changes of state
Temperature · Melting and solidification · Vaporisation and liquefaction · Sublimation and deposition · Interdisciplinary: kitchen state changes · Water cycle and water resources
- ताप (तापमान) – ताप बताता है कि कोई चीज़ कितनी गरम या ठंडी है। हर वस्तु के छोटे-छोटे कण हमेशा हिलते रहते हैं; ताप उनकी औसत गतिज ऊर्जा का माप है (वे औसतन कितनी तेज़ी से हिलते हैं)। इसे थर्मामीटर से डिग्री सेल्सियस (°C), केल्विन (K, SI मात्रक) या डिग्री फ़ारेनहाइट (°F) में मापते हैं। K = °C + 273 और °F = 9/5 × °C + 32। सबसे कम संभव ताप परम शून्य है: 0 K = −273 °C। गरम और ठंडी वस्तु छूने पर ऊष्मा गरम से ठंडी की ओर बहती है, जब तक दोनों का ताप बराबर न हो (तापीय साम्य)।
- अवस्था परिवर्तन: पिघलना, उबलना, वाष्पीकरण और ऊर्ध्वपातन – कोई पदार्थ गरम या ठंडा करने पर ठोस, द्रव और गैस के बीच बदल सकता है। पिघलने, उबलने, वाष्पीकरण और ऊर्ध्वपातन में ऊष्मा लगती है। जमने, संघनन और निक्षेपण में ऊष्मा बाहर निकलती है। जब अवस्था बदल रही होती है तब तापमान नहीं बदलता, क्योंकि ऊष्मा कणों के बीच का खिंचाव तोड़ने में लगती है। इस छिपी ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। वाष्पीकरण हर तापमान पर, सिर्फ़ सतह से होता है और ठंडक देता है। अवस्था परिवर्तन भौतिक परिवर्तन है: कोई नया पदार्थ नहीं बनता और द्रव्यमान वही रहता है।
- रसोई में अवस्था परिवर्तन – रसोई में अवस्था परिवर्तन हर जगह दिखते हैं। मक्खन का पिघलना ठोस से द्रव है। पानी उबलना और कपड़े सूखना द्रव से गैस है। ठंडे ढक्कन पर भाप गैस से द्रव है। बर्फ़ की ट्रे में पानी द्रव से ठोस है। पदार्थ में गर्मी जाए तो वह पिघलता है या गैस बनता है। गर्मी निकले तो वह जमता है या संघनित होता है। ये भौतिक परिवर्तन हैं: पदार्थ वही रहता है। अंडा पकना या रोटी-केक सेंकना नए पदार्थ बनाता है, इसलिए वह रासायनिक परिवर्तन है, अवस्था परिवर्तन नहीं।
- जल चक्र और जल संसाधन: अवस्था परिवर्तन और पानी की बचत – जल चक्र सूरज की ऊर्जा से चलने वाला अवस्था परिवर्तनों का चक्र है। सूरज की गर्मी से समुद्र और नदियों का द्रव पानी वाष्प बनता है (द्रव से गैस, गर्मी अंदर)। ऊपर ठंडी हवा में वाष्प संघनित होकर बूँदें और बादल बनाती है (गैस से द्रव, गर्मी बाहर)। बूँदें बारिश बनकर गिरती हैं, या ठंड में बर्फ़ या ओले (ठोस)। पिघली बर्फ़ और बारिश वापस समुद्र में जाती है। पृथ्वी का सिर्फ़ लगभग 2.5 प्रतिशत पानी मीठा है और उसमें भी ज़्यादातर बर्फ़ है, इसलिए पानी बचाना ज़रूरी है।
5. Ch.4 Light
Rectilinear propagation · Reflection · Plane-mirror images · Refraction · Dispersion; colours
- प्रकाश कैसे चलता है – प्रकाश सूरज या बल्ब जैसे स्रोतों से निकलता है और सीधी रेखा में चलता है। कोई चीज़ तब दिखती है जब उससे रोशनी हमारी आँख में आती है। पारदर्शी चीज़ें रोशनी जाने देती हैं, पारभासी थोड़ी जाने देती हैं, अपारदर्शी रोक देती हैं। रुकी हुई रोशनी से छाया बनती है; बड़े स्रोत से गहरी प्रच्छाया और हल्की उपच्छाया बनती है। पिनहोल कैमरा उल्टा प्रतिबिंब बनाता है। प्रकाश बहुत तेज़ है: लगभग 3 लाख km हर सेकंड।
- प्रकाश का परावर्तन: समतल और गोलीय दर्पण – चमकदार सतह से टकराकर प्रकाश इस तरह लौटता है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर रहते हैं। समतल दर्पण का प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बराबर आकार का और दर्पण के उतना ही पीछे बनता है जितनी वस्तु आगे है। अवतल दर्पण वस्तु की जगह के हिसाब से वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जबकि उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब देता है। दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u (नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के साथ) से बिना चित्र बनाए प्रतिबिंब निकाल सकते हैं।
- प्रकाश का अपवर्तन: नियम, अपवर्तनांक और काँच का स्लैब – प्रकाश जब एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाता है तो उसकी चाल बदलती है, इसलिए वह सीमा पर मुड़ जाता है (अगर अभिलंब के साथ न गिरे)। प्रकाशिक सघन माध्यम में जाते समय वह धीमा होकर अभिलंब की ओर मुड़ता है, और बाहर आते समय तेज़ होकर अभिलंब से दूर। दो माध्यमों के लिए sin i / sin r स्थिर रहता है (स्नेल का नियम); यही स्थिरांक अपवर्तनांक है, जो प्रकाश की चालों का अनुपात भी है: n = c/v। आयताकार काँच के स्लैब से निकली किरण आपतित किरण के समांतर होती है, पर थोड़ी खिसकी हुई (पार्श्विक विस्थापन)।
- काँच के प्रिज़्म से अपवर्तन, प्रकाश का वर्ण विक्षेपण और इंद्रधनुष – काँच का प्रिज़्म प्रकाश को दो बार मोड़ता है, दोनों बार आधार की ओर; कुल मुड़ाव विचलन कोण है। श्वेत प्रकाश का हर रंग थोड़ा अलग मुड़ता है (बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम), इसलिए प्रिज़्म उसे रंगों की पट्टी – स्पेक्ट्रम – में फैला देता है। उल्टा रखा दूसरा प्रिज़्म रंगों को फिर श्वेत बना देता है। वर्षा की बूँदें छोटे प्रिज़्म और दर्पण जैसा काम करके इंद्रधनुष बनाती हैं।
6. Ch.5 Lenses
Lenses · Lenses in daily life · Convex-lens imaging rules · The eye and glasses · Interdisciplinary: make a telescope
- गोलीय लेंस: प्रतिबिंब, लेंस सूत्र और क्षमता – उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और समांतर प्रकाश को अपने फोकस पर मिलाता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और प्रकाश को ऐसे फैलाता है मानो फोकस से आ रहा हो। दो आसान किरणों (एक अक्ष के समांतर, एक प्रकाशिक केंद्र से होकर) से किसी भी स्थिति का प्रतिबिंब मिल जाता है। वस्तु F₁ से परे हो तो उत्तल लेंस वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है और F₁ के अंदर हो तो आभासी, सीधा, बड़ा; अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u और क्षमता P = 1/f (मीटर में, मात्रक डायोप्टर) से आंकिक प्रश्न हल होते हैं।
- मानव नेत्र: संरचना, समंजन क्षमता और दृष्टि दोष – हमारी आँख एक जीवित कैमरा है। कॉर्निया और नेत्र लेंस प्रकाश को मोड़कर दृष्टिपटल (रेटिना) पर वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब बनाते हैं। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की मोटाई बदलती हैं ताकि दूर और पास दोनों चीज़ें साफ़ दिखें – यही समंजन है। नेत्र गोलक बहुत लंबा या छोटा हो, या लेंस सख़्त हो जाए, तो प्रतिबिंब रेटिना से चूक जाता है; सही चश्मा उसे वापस रेटिना पर ले आता है।
- प्रकाशिक यंत्र: सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शक – कोई चीज़ कितनी बड़ी दिखती है, यह आँख पर बने कोण पर निर्भर है। सरल सूक्ष्मदर्शी (एक उत्तल लेंस) m = 1 + D/f (प्रतिबिंब D पर) या D/f (अनंत पर) देता है। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में छोटी फोकस दूरी का अभिदृश्यक और नेत्रिका: m = mₒ × mₑ ≈ (L/fₒ)(D/fₑ)। खगोलीय दूरदर्शक में लंबी फोकस दूरी का अभिदृश्यक और छोटी की नेत्रिका: सामान्य समायोजन में m = fₒ/fₑ, नली की लंबाई fₒ + fₑ। परावर्ती दूरदर्शक में अभिदृश्यक अवतल दर्पण होता है।
7. Ch.6 Mass and density
Mass · Density · Measuring density of liquids and solids · Uses of density
- द्रव्यमान और भार – द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा है। यह हर जगह समान रहता है और भौतिक तुला से किलोग्राम (kg) में मापा जाता है। भार उस द्रव्यमान पर गुरुत्व का खिंचाव है। यह एक बल है, न्यूटन (N) में स्प्रिंग तराज़ू से मापा जाता है और हर ग्रह पर बदलता है: W = m × g।
- घनत्व (Density) – घनत्व बताता है कि हर इकाई आयतन में कितना द्रव्यमान ठसा है: ρ = m ÷ V। इसका SI मात्रक kg/m³ है; प्रयोगशाला में अक्सर g/cm³ लेते हैं (1 g/cm³ = 1000 kg/m³)। पानी का घनत्व 1 g/cm³ है। जो चीज़ किसी द्रव से कम घनी हो वह उसमें तैरती है, ज़्यादा घनी डूबती है।
8. Ch.7 Force
Force · Elastic force · Gravity
- बल: धक्का और खिंचाव – बल दो वस्तुओं के बीच का धक्का या खिंचाव है। इसका मात्रक न्यूटन (N) है। संपर्क बल में छूना ज़रूरी है (धक्का, घर्षण, अभिलंब बल, तनाव, उत्प्लावन); असंपर्क बल दूर से काम करते हैं (गुरुत्व, चुंबकीय, विद्युत)। बल को तीर से दिखाते हैं: शुरुआत = बल लगने का बिंदु, दिशा, लंबाई = परिमाण। बल चाल, दिशा या आकार बदल सकता है। बल संतुलित हों तो रुकी वस्तु रुकी रहती है (साम्यावस्था)। बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A, B को धकेले तो B भी A को उतना ही उल्टा धकेलता है (न्यूटन का तीसरा नियम)।
- प्रत्यास्थ बल और स्प्रिंग तराज़ू – स्प्रिंग को खींचने, दबाने या मोड़ने पर वह वापस खींचती या धकेलती है। यही वापस खींचने वाला बल प्रत्यास्थ बल है। प्रत्यास्थ सीमा के भीतर खिंचाव बल के अनुसार बढ़ता है (भार दोगुना तो खिंचाव दोगुना) और छोड़ने पर स्प्रिंग अपनी पुरानी लंबाई पर लौट आती है। स्प्रिंग तराज़ू इसी से बल न्यूटन में मापता है।
- गुरुत्व और भार: W = m × g – पृथ्वी हर वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है। यह खिंचाव वस्तु का भार है, एक बल जो हमेशा सीधा नीचे की ओर होता है। इसे W = m × g से निकालते हैं, जहाँ पृथ्वी पर g लगभग 9.8 N प्रति kg है। हर वस्तु ऐसे व्यवहार करती है मानो उसका पूरा भार एक बिंदु पर लगा हो, जिसे गुरुत्व केंद्र कहते हैं।
9. Ch.8 Motion and force
Newton's first law; inertia · Balance of two forces · Friction · Adding forces on one line
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- घर्षण: फिसलने का विरोध करने वाला बल – घर्षण दो सतहों के बीच लगने वाला संपर्क बल है। यह हमेशा गति के उल्टी ओर लगता है, या उस दिशा के उल्टी ओर जिधर चीज़ खिसकना चाहती है। हर सतह पर बहुत छोटे उभार होते हैं जो एक-दूसरे में फँस जाते हैं। स्थैतिक घर्षण रुकी हुई चीज़ को हिलने नहीं देता; यह धक्के के बराबर बढ़ता है, पर एक सीमा तक। चीज़ फिसलने लगे तो सर्पी घर्षण लगता है, जो थोड़ा कम होता है। लोटनिक (रोलिंग) घर्षण और भी बहुत कम होता है। सतह जितनी खुरदुरी और चीज़ जितनी भारी, घर्षण उतना ज़्यादा। संपर्क क्षेत्रफल से इस पर लगभग कोई असर नहीं पड़ता। घर्षण से हम चल पाते हैं, लिख पाते हैं, ब्रेक लगा पाते हैं; पर इससे ऊर्जा गर्मी बनकर बर्बाद होती है और चीज़ें घिसती हैं। खाँचे (ट्रेड) और पकड़ से इसे बढ़ाते हैं; तेल, चिकनी सतह, पहिये और बॉल बेयरिंग से घटाते हैं।
10. Ch.9 Pressure
Pressure · Liquid pressure · Atmospheric pressure · Interdisciplinary: piston pump · Fluid pressure and speed
- दाब: हर वर्ग मीटर पर बल – दाब प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है: P = F ÷ A। इसका SI मात्रक पास्कल है (1 Pa = 1 N/m²)। वही बल छोटे क्षेत्रफल पर ज़्यादा दाब देता है, इसीलिए पिन, चाकू और कील नुकीले होते हैं, और ट्रैक्टर व ऊँट के पैर या टायर चौड़े होते हैं। द्रव हर दिशा में दाब डालते हैं और गहराई के साथ उनका दाब बढ़ता है (P = ρgh)। गैस के कण दीवारों से टकराते रहते हैं, इसलिए गैस दाब डालती है; गैस को दबाने या गर्म करने पर दाब बढ़ता है। हवा हम पर लगभग 101 kPa का दाब डालती है। रक्तचाप धमनियों की दीवारों पर रक्त का दाब है।
- तरलों में दाब और पास्कल का नियम – तरल (द्रव या गैस) जिस सतह को छूता है, उस पर धक्का देता है। यह लंबवत बल ÷ क्षेत्रफल = दाब, P = F/A। गुरुत्व के कारण ऊपर के तरल का भार होता है, इसलिए गहराई के साथ दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh। स्थिर द्रव में एक ही गहराई पर दाब बराबर होता है, बर्तन का आकार कुछ भी हो। पास्कल का नियम: बंद तरल पर लगाया गया अतिरिक्त दाब हर जगह बराबर पहुँचता है। हाइड्रॉलिक लिफ़्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं: छोटे पिस्टन पर छोटा बल, बड़े पिस्टन पर बड़ा बल, F = f × A/a।
- वायुमंडलीय दाब – हवा का भी भार होता है। किसी सतह के ऊपर खड़ा हवा का पूरा स्तंभ उस पर दबाव डालता है; हर वर्ग मीटर पर यह धक्का ही वायुमंडलीय दाब है। समुद्र तल पर यह लगभग 101 kPa है — 760 mm पारे के स्तंभ या लगभग 10 m पानी के बराबर। ऊपर जाने पर आपके ऊपर हवा कम रह जाती है, इसलिए दाब घटता है। शांत हवा में किसी परत का भार नीचे से ऊपर लगने वाले दाब से संतुलित रहता है (द्रवस्थैतिक संतुलन)। हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर बहती है — यही पवन है।
- पिस्टन पंप: हवा के दाब का काम – पिस्टन पंप हवा के दाब की मदद से पानी ऊपर चढ़ाता है। पिस्टन ऊपर खींचने पर उसके नीचे दाब कम हो जाता है, इसलिए कुएँ के पानी पर लगा हवा का दाब पानी को अंदर वाल्व से धकेल देता है। पिस्टन नीचे दबाने पर वह वाल्व बंद हो जाता है और पानी पिस्टन के ऊपर पहुँचता है। अगली बार ऊपर खींचने पर वह टोंटी से बाहर आता है। हवा का दाब अकेले पानी को लगभग 10 m ही चढ़ा सकता है।
- द्रव की चाल और दाब – जहाँ द्रव या गैस तेज़ चलती है वहाँ उसका दाब कम होता है। जहाँ धीमी चलती है वहाँ दाब ज़्यादा होता है। यही बरनौली का सिद्धांत है। संकरे होते पाइप में द्रव तेज़ हो जाता है और दाब घट जाता है। हवाई जहाज़ के पंख के ऊपर हवा तेज़ चलती है, इसलिए ऊपर दाब कम होता है और नीचे का ज़्यादा दाब पंख को ऊपर धकेलता है (उठाव)।
11. Ch.10 Buoyancy
Buoyant force · Archimedes' principle · Floating and sinking; applications · Interdisciplinary: mini hydrometer
- आर्किमिडीज़ का सिद्धांत: चीज़ें तैरती या डूबती क्यों हैं – द्रव (या गैस) में रखी हर वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगता है, जिसे उत्प्लावन बल कहते हैं। आर्किमिडीज़ का सिद्धांत कहता है: यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है, F = ρgV। वस्तु का घनत्व द्रव से कम हो तो वह तैरती है, ज़्यादा हो तो डूबती है। तैरती वस्तु उतनी ही डूबती है जितने में उत्प्लावन बल उसके भार के बराबर हो जाए।
12. Ch.11 Work and mechanical energy
Work · Power · Kinetic and potential energy · Mechanical energy transformation
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
13. Ch.12 Simple machines
Levers · Interdisciplinary: steelyard balance · Pulleys · Mechanical efficiency
- उत्तोलक: छोटे धक्के से भारी चीज़ कैसे उठती है – उत्तोलक एक मज़बूत छड़ है जो एक स्थिर बिंदु, आलंब, के चारों ओर घूमती है। यह तब संतुलित होती है जब भार × भार भुजा = प्रयास × प्रयास भुजा (आघूर्ण का नियम)। प्रयास भुजा लंबी हो तो कम प्रयास लगता है। आलंब, भार और प्रयास की जगह से उत्तोलक प्रथम, द्वितीय या तृतीय वर्ग के होते हैं।
- घिरनी (Pulley): डोरी से भार उठाना आसान – घिरनी एक खाँचेदार पहिया है जो डोरी को राह देता है। स्थिर घिरनी सिर्फ बल की दिशा बदलती है। चल घिरनी और घिरनी-समूह भार को डोरी के कई भागों में बाँट देते हैं, इसलिए प्रयास = भार ÷ भागों की संख्या, पर डोरी ज़्यादा खींचनी पड़ती है। चक्र-धुरी और आनत तल भी छोटा बल लगाने के बदले लंबी दूरी लेते हैं।
- यांत्रिक दक्षता: कितना कार्य सच में काम आया? – कोई भी असली मशीन तुम्हारे लगाए पूरे कार्य को उपयोगी कार्य नहीं बना पाती। कुछ कार्य घर्षण और मशीन के पुर्ज़ों को हिलाने में व्यर्थ चला जाता है। दक्षता η = उपयोगी कार्य ÷ कुल कार्य × 100%। यह हमेशा 100% से कम रहती है। तेल लगाने और हल्के पुर्ज़े लेने से यह बढ़ती है।