उत्तोलक क्या है?
उत्तोलक (लीवर) एक मज़बूत छड़ है जो एक स्थिर बिंदु के चारों ओर घूम सकती है। इस स्थिर बिंदु को आलंब (fulcrum) कहते हैं।
हर उत्तोलक के पाँच भाग होते हैं:
- आलंब: वह बिंदु जिसके चारों ओर छड़ घूमती है।
- भार (load): जिसे हम उठाना या हिलाना चाहते हैं।
- प्रयास (effort): जो बल हम लगाते हैं।
- भार भुजा: आलंब से भार तक की दूरी।
- प्रयास भुजा: आलंब से प्रयास तक की दूरी।
भुजा हमेशा आलंब से नापी जाती है, बल की दिशा से समकोण पर।
आघूर्ण का नियम: उत्तोलक कब संतुलित होता है?
जो बल किसी चीज़ को घुमाता है, उसका आघूर्ण (moment) यानी घुमाने वाला असर होता है। आघूर्ण = बल × आलंब से दूरी। इसकी इकाई न्यूटन मीटर (N·m) है।
उत्तोलक तब संतुलित होता है जब दोनों ओर के आघूर्ण बराबर हों:
भार × भार भुजा = प्रयास × प्रयास भुजा
इसलिए लंबी प्रयास भुजा में कम प्रयास लगता है। दरवाज़े का हैंडल कब्ज़े से दूर इसीलिए लगाते हैं।
यांत्रिक लाभ
यांत्रिक लाभ (MA) = भार ÷ प्रयास = प्रयास भुजा ÷ भार भुजा। MA 1 से ज़्यादा हो तो उत्तोलक हमारा बल बढ़ाता है। 1 से कम हो तो ज़्यादा बल लगता है, पर भार तेज़ और दूर तक चलता है।
उत्तोलक मुफ़्त ऊर्जा नहीं देता: कम बल लगाओगे तो ज़्यादा दूरी तक धकेलना पड़ेगा।
उत्तोलक के तीन वर्ग
बीच में क्या है, उसी से वर्ग तय होता है।
- प्रथम वर्ग: आलंब बीच में। MA 1 से ज़्यादा, बराबर या कम हो सकता है। उदाहरण: सी-सॉ, कैंची, सब्बल, प्लास, तराज़ू।
- द्वितीय वर्ग: भार बीच में। प्रयास भुजा हमेशा बड़ी, इसलिए MA हमेशा 1 से ज़्यादा। उदाहरण: ठेला, बोतल ओपनर, सरौता।
- तृतीय वर्ग: प्रयास बीच में। MA हमेशा 1 से कम, पर भार तेज़ और दूर तक चलता है। उदाहरण: चिमटी, मछली पकड़ने की छड़, झाड़ू, चिमटा।
शरीर और खेल में उत्तोलक
हड्डियाँ छड़ हैं, जोड़ आलंब हैं, मांसपेशियाँ प्रयास लगाती हैं और शरीर का हिस्सा या पकड़ी हुई चीज़ भार है।
- प्रथम वर्ग: सिर हिलाना। गर्दन का जोड़ आलंब है, चेहरे का भार एक ओर और गर्दन की मांसपेशियाँ पीछे।
- द्वितीय वर्ग: पंजों पर खड़े होना। पंजे का अगला भाग आलंब, शरीर का भार बीच में, पिंडली की मांसपेशी एड़ी को ऊपर खींचती है।
- तृतीय वर्ग: बाँह मोड़ना। कोहनी आलंब, बाइसेप्स कोहनी के पास खींचती है, हाथ में भार। शरीर के ज़्यादातर उत्तोलक तृतीय वर्ग के हैं: ये बल देकर बदले में गति और हिलने की बड़ी दूरी पाते हैं।
खेल में लंबा उत्तोलक (सीधी बाँह, बैट या रैकेट) सिरे को तेज़ चलाता है, इसलिए गेंद तेज़ जाती है।
प्रोजेक्ट: अपना स्टीलयार्ड तराज़ू बनाओ
स्टीलयार्ड एक पुराना तराज़ू है जो एक ही उत्तोलक से बनता है। तौलने की चीज़ आलंब के पास छोटी भुजा पर टँगती है। एक छोटा खिसकने वाला बाट लंबी भुजा पर तब तक खिसकाते हैं जब तक छड़ सीधी न हो जाए।
आघूर्ण के नियम से भारी चीज़ के लिए बाट को और दूर ले जाना पड़ता है। इसलिए लंबी भुजा पर द्रव्यमान के निशान लगाए जा सकते हैं।
घर पर करके देखो
- 30 cm का स्केल लो। 10 cm के निशान पर धागा बाँधकर टाँगो (यह आलंब है)।
- 0 cm वाले सिरे पर छोटी थैली टाँगो (भार भुजा 10 cm)।
- दूसरी ओर 20 g के सिक्कों का गुच्छा बाट की तरह टाँगो। सीधा होने तक खिसकाओ।
- थैली में जाने-पहचाने द्रव्यमान (20 g, 40 g, 60 g) रखो और हर बार बाट की जगह पर निशान लगाओ। इसे अंशांकन (calibration) कहते हैं।
- जाँचो: क्या निशान बराबर दूरी पर आते हैं? आने चाहिए, क्योंकि आघूर्ण द्रव्यमान के साथ बराबर बढ़ता है।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
3D का आख़िरी चरण खोलो। 6 kg (60 N) का भार 1 m पर रखो। अनुमान लगाओ कि 3 m पर कितना प्रयास चाहिए। (उत्तर: 60 × 1 ÷ 3 = 20 N।) फिर सेट करके छड़ को संतुलित होते देखो। अब प्रयास बदले बिना उसे 1.5 m पर ले जाओ: छड़ किधर झुकेगी?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आघूर्ण = बल × आलंब से लंबवत दूरी (N·m)
- संतुलन (आघूर्ण का नियम): भार × भार भुजा = प्रयास × प्रयास भुजा
- यांत्रिक लाभ MA = भार ÷ प्रयास
- MA = प्रयास भुजा ÷ भार भुजा (आदर्श उत्तोलक)
- भार = द्रव्यमान × g, g ≈ 10 N/kg
हल किए गए उदाहरण
1. 300 N का भार आलंब से 0.5 m पर है। दूसरी ओर प्रयास 1.5 m पर है। कितना प्रयास चाहिए?
प्रयास × 1.5 = 300 × 0.5 = 150, तो प्रयास = 150 ÷ 1.5 = 100 N। MA = 300 ÷ 100 = 3।
2. 30 kg का बच्चा सी-सॉ के बीच से 2 m पर बैठा है। 40 kg का व्यक्ति कहाँ बैठे कि संतुलन हो?
भार: 300 N और 400 N। 300 × 2 = 400 × d, तो d = 600 ÷ 400 = 1.5 m, दूसरी ओर।
3. ठेले में 600 N की ईंटें पहिए की धुरी से 0.4 m पर हैं। हत्थे धुरी से 1.2 m पर हैं। प्रयास और वर्ग बताओ।
प्रयास × 1.2 = 600 × 0.4 = 240, तो प्रयास = 200 N। भार बीच में है, इसलिए द्वितीय वर्ग। MA = 3।
4. बाइसेप्स कोहनी से 0.04 m पर खींचती है और हाथ में 50 N का भार कोहनी से 0.32 m पर है। मांसपेशी को कितना बल लगाना होगा?
प्रयास × 0.04 = 50 × 0.32 = 16, तो प्रयास = 400 N। MA = 0.125। तृतीय वर्ग: बल ज़्यादा, पर हाथ 8 गुना दूर और तेज़ चलता है।
5. स्टीलयार्ड में भार का हुक आलंब से 5 cm पर है और बाट 100 g का है। 1 kg की मछली तौलने पर बाट कहाँ होगा?
1000 g × 5 cm = 100 g × d, तो d = 50 cm (g दोनों ओर कट जाता है)।
6. 1.2 m लंबे सब्बल का आलंब 1500 N के पत्थर वाले सिरे से 0.2 m पर है। दूसरे सिरे पर कितना प्रयास चाहिए?
भार भुजा 0.2 m, प्रयास भुजा 1.0 m। प्रयास = 1500 × 0.2 ÷ 1.0 = 300 N। MA = 5।
आम गलतियाँ
- भुजा को छड़ के सिरे से नापना, आलंब से नहीं।
- तृतीय वर्ग को "बेकार" समझना। इसमें बल ज़्यादा लगता है पर गति और दूरी मिलती है।
- kg और N मिला देना: दोनों ओर एक ही इकाई रखो (या × 10 N/kg करो)।
- सोचना कि उत्तोलक कार्य बचाता है। यह बल बचाता है, पर दूरी बढ़ जाती है।