बल क्या है?
बल वह धक्का या खिंचाव है जो एक वस्तु दूसरी पर लगाती है। हर बल में दो वस्तुएँ होती हैं: एक जो बल लगाती है और एक जिस पर बल लगता है। इसे अन्योन्य क्रिया (interaction) कहते हैं।
बल न्यूटन (N) में स्प्रिंग तुला से मापते हैं। एक सेब का भार लगभग 1 N है।
- संपर्क बल में छूना ज़रूरी: हाथ का धक्का-खिंचाव, घर्षण, अभिलंब (सहारा) बल, रस्सी में तनाव, वायु प्रतिरोध, उत्प्लावन बल।
- असंपर्क बल दूर से काम करते हैं: गुरुत्व (भार), चुंबकीय बल, स्थिरवैद्युत बल।
बल को दिखाना: तीर और अन्योन्य क्रिया आरेख
बल की चार बातें होती हैं, इसलिए उसे तीर से दिखाते हैं:
- बल लगने का बिंदु: तीर यहीं से शुरू।
- क्रिया रेखा (दिशा): जैसे क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर।
- अभिमुख (sense): उस रेखा पर किस ओर (बाएँ-दाएँ, ऊपर-नीचे)।
- परिमाण: तीर की लंबाई, किसी पैमाने से, जैसे 1 cm = 10 N।
वस्तु–अन्योन्य क्रिया आरेख में वस्तु को घेरे में लिखते हैं और उसे छूने या खींचने वाली हर वस्तु को रेखा से जोड़ते हैं (संपर्क के लिए सीधी रेखा, असंपर्क के लिए टूटी रेखा)। मेज़ पर रखी किताब: किताब–मेज़ (संपर्क), किताब–पृथ्वी (असंपर्क)। फिर हर अन्योन्य क्रिया के लिए एक तीर बनाते हैं।
रोज़ के बल: भार, अभिलंब बल, घर्षण, तनाव, उत्प्लावन
भार पृथ्वी द्वारा वस्तु पर लगाया खिंचाव है: W = m × g, g ≈ 9.8 N/kg (अक्सर 10)। द्रव्यमान (kg) पदार्थ की मात्रा है और हर जगह वही रहता है; भार गुरुत्व के साथ बदलता है (चंद्रमा पर लगभग 1/6)। गुरुत्व, किन्हीं भी दो द्रव्यमानों के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का एक रूप है; दूरी बढ़ने पर यह कमज़ोर होता है।
अभिलंब (सहारा) बल: सतह अपने ऊपर रखी चीज़ को सतह के लंबवत ऊपर धकेलती है।
घर्षण सतहों के बीच लगता है और फिसलने का विरोध करता है। इससे हम चल पाते हैं और ब्रेक लगते हैं, पर ऊर्जा व्यर्थ होती है और पुर्ज़े घिसते हैं। खुरदरी सतह पर ज़्यादा घर्षण; तेल और पहिए इसे कम करते हैं।
तनाव खिंची रस्सी, डोरी या स्प्रिंग में लगने वाला खिंचाव है।
उत्प्लावन बल द्रव या गैस का ऊपर की ओर धक्का है। जब उत्प्लावन बल = भार, वस्तु तैरती है (जहाज़); भार ज़्यादा हो तो डूबती है (पत्थर)।
बल क्या करता है: गति और आकार बदलना
बल:
- गति शुरू या बंद कर सकता है,
- चाल बढ़ा या घटा सकता है,
- दिशा बदल सकता है,
- आकार बदल सकता है: दबाना, खींचना, मोड़ना, ऐंठना।
स्प्रिंग भार के अनुपात में खिंचती है (एक सीमा तक): भार दोगुना, खिंचाव दोगुना। यह हुक का नियम है, F = k × x। प्रत्यास्थता सीमा पार करने पर आकार हमेशा के लिए बदल जाता है, जैसे मुड़ा तार या गूँधा आटा।
संतुलित बल, साम्यावस्था और न्यूटन का तीसरा नियम
एक ही रेखा पर बल जोड़ो: एक ही दिशा → जोड़ो; उल्टी दिशा → घटाओ। जो बचे वह परिणामी (कुल) बल है।
- कुल बल = 0 → बल संतुलित: रुकी वस्तु रुकी रहती है, चलती वस्तु उसी चाल से सीधी चलती रहती है। रुकी वस्तु पर संतुलित बल = स्थैतिक साम्यावस्था (मेज़ पर किताब: भार नीचे = अभिलंब बल ऊपर)।
- कुल बल ≠ 0 → असंतुलित: चाल या दिशा बदलती है।
न्यूटन का तीसरा नियम: A जब B पर बल लगाता है, B भी A पर बराबर और उल्टा बल लगाता है। ये दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं, इसलिए एक-दूसरे को कभी नहीं काटते। पैर ज़मीन को पीछे धकेलते हैं, ज़मीन तुम्हें आगे; रॉकेट गैस को नीचे धकेलता है, गैस रॉकेट को ऊपर।
घर पर करके देखो
एक रबर बैंड हुक पर लटकाओ और नीचे छोटी थैली बाँधो। एक-एक करके सिक्के डालो (हर बार 10 सिक्के) और पैमाने से खिंचाव नापो। क्या भार दोगुना होने पर खिंचाव भी दोगुना होता है? फिर एक भारी किताब को एक उँगली से मेज़ पर धकेलो: पहले किताब नहीं हिलती (घर्षण बराबर हो जाता है), फिर अचानक फिसलती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बल का मात्रक: न्यूटन (N)
- भार: W = m × g (पृथ्वी पर g ≈ 9.8 N/kg, चंद्रमा पर लगभग 1.6 N/kg)
- परिणामी बल: एक दिशा → जोड़ो; उल्टी दिशा → घटाओ
- हुक का नियम: F = k × x (बल = स्प्रिंग नियतांक × खिंचाव)
- संतुलित: कुल बल = 0 → गति में कोई बदलाव नहीं
- न्यूटन का तीसरा नियम: F(A का B पर) = − F(B का A पर)
हल किए गए उदाहरण
1. 50 kg के छात्र का पृथ्वी पर भार (g = 10 N/kg)?
W = m g = 50 × 10 = 500 N।
2. वही छात्र चंद्रमा पर (g = 1.6 N/kg)। द्रव्यमान और भार?
द्रव्यमान 50 kg ही रहेगा। भार = 50 × 1.6 = 80 N।
3. दो बच्चे डिब्बे को दाईं ओर 30 N और 20 N से धकेलते हैं। घर्षण 15 N है। कुल बल?
दाईं ओर: 30 + 20 = 50 N। कुल = 50 − 15 = 35 N दाईं ओर, डिब्बा तेज़ होगा।
4. 4 N से स्प्रिंग 2 cm खिंचती है। 10 N से कितनी (सीमा के भीतर)?
प्रति न्यूटन खिंचाव = 2 ÷ 4 = 0.5 cm। 10 N के लिए 10 × 0.5 = 5 cm।
5. एक लैंप डोरी से स्थिर लटका है, भार 12 N। तनाव कितना?
साम्यावस्था में है, इसलिए ऊपर तनाव = नीचे भार = 12 N।
6. 3 N की खिलौना नाव तैर रही है। उत्प्लावन बल?
तैरना = संतुलन, इसलिए उत्प्लावन बल = भार = 3 N।
आम गलतियाँ
- द्रव्यमान (kg) और भार (N) को एक समझना। द्रव्यमान नहीं बदलता, भार गुरुत्व पर निर्भर है।
- सोचना कि चलती चीज़ को चलते रहने के लिए बल चाहिए। घर्षण न हो तो वह चलती ही रहेगी; बल गति बदलने के लिए चाहिए।
- सोचना कि तीसरे नियम का जोड़ा एक-दूसरे को काट देता है। दोनों बल अलग वस्तुओं पर लगते हैं।
- घर्षण का तीर गति की दिशा में बनाना। घर्षण फिसलने का विरोध करता है।