घर्षण क्या है और यह क्यों होता है?
घर्षण (friction) दो छूती हुई सतहों के बीच लगने वाला बल है। यह सतहों के साथ-साथ लगता है और फिसलने का विरोध करता है। डिब्बा दाईं ओर चले तो उस पर घर्षण बाईं ओर लगता है।
ऐसा क्यों? कोई भी सतह पूरी तरह चिकनी नहीं होती। आवर्धक लेंस से देखो तो चिकनी लकड़ी पर भी छोटे-छोटे उभार और गड्ढे दिखते हैं। दो सतहें मिलती हैं तो ये उभार आपस में फँस जाते हैं। फिसलने के लिए इन्हें तोड़ना या इनके ऊपर से निकलना पड़ता है।
घर्षण को भी हर बल की तरह न्यूटन (N) में मापते हैं। कमानीदार तुला (spring balance) से गुटके को एक-सी चाल से खींचो; उसका पाठ्यांक सर्पी घर्षण के बराबर होता है।
स्थैतिक, सर्पी और लोटनिक घर्षण
स्थैतिक घर्षण (static friction)
रुकी हुई चीज़ को हल्का धक्का दो तो वह नहीं हिलती। स्थैतिक घर्षण ठीक धक्के जितना बन जाता है: 5 N धक्का, तो 5 N घर्षण। पर इसकी एक सीमा होती है।
सर्पी घर्षण (sliding/kinetic friction)
धक्का सीमा से बड़ा हुआ तो चीज़ फिसलने लगती है। अब सर्पी घर्षण लगता है, जो सीमा से थोड़ा कम होता है। इसीलिए भारी अलमारी को खिसकाना शुरू करना, उसे चलाते रहने से कठिन होता है।
लोटनिक घर्षण (rolling friction)
पहिया या गेंद लुढ़कती है तो उभारों को एक-दूसरे पर फिसलना नहीं पड़ता। इसलिए लोटनिक घर्षण बहुत कम होता है। क्रम: स्थैतिक (सीमा) > सर्पी > लोटनिक।
तरल घर्षण (कर्षण, drag)
हवा और पानी भी गति का विरोध करते हैं। चाल बढ़ने पर यह बढ़ता है। कार, हवाई जहाज़, मछली और पक्षी की धारारेखीय (streamlined) बनावट इसे घटाती है।
घर्षण किन बातों पर निर्भर करता है?
- सतह का खुरदुरापन: जितनी खुरदुरी, उतना ज़्यादा घर्षण। रेगमाल > लकड़ी > बर्फ़।
- सतहें कितने ज़ोर से दबी हैं (अभिलंब बल): भारी चीज़ पर ज़्यादा घर्षण। भार दोगुना तो घर्षण लगभग दोगुना।
- संपर्क क्षेत्रफल पर लगभग नहीं: ईंट चौड़ी तरफ़ से रखो या पतली तरफ़ से, घर्षण लगभग बराबर।
- चाल पर नहीं (धीरे फिसलती ठोस चीज़ों के लिए)।
बड़ी कक्षा के लिए: सर्पी घर्षण ≈ μ × N, जहाँ N अभिलंब बल है और μ (म्यू) दो सतहों के जोड़े की एक संख्या है।
घर्षण बढ़ाना और घटाना: एक आवश्यक बुराई
घर्षण के लाभ
घर्षण के बिना हम चल नहीं पाते, पेन नहीं पकड़ पाते, माचिस नहीं जला पाते, गाँठ नहीं बाँध पाते, साइकिल नहीं रोक पाते। कील और पेंच भी घर्षण से टिके रहते हैं।
घर्षण की हानियाँ
यह ऊर्जा को गर्मी बनाकर बर्बाद करता है (हथेलियाँ रगड़कर देखो), जूते, टायर और मशीन के पुर्ज़े घिसता है।
घर्षण बढ़ाने के उपाय
- टायर और जूतों के तलवों में खाँचे; खेल के जूतों में कीलें।
- बर्फ़ीली सड़क पर रेत; जिमनास्ट के हाथों पर चॉक पाउडर।
- ब्रेक-पैड को पहिये पर ज़ोर से दबाना।
घर्षण घटाने के उपाय
- स्नेहक (lubricant): तेल, ग्रीस, कैरम बोर्ड पर पाउडर।
- सतह को चिकना करना (पॉलिश)।
- पहिये और बॉल बेयरिंग (फिसलना लुढ़कने में बदल जाता है)।
- धारारेखीय आकार; हवा की गद्दी (होवरक्राफ़्ट)।
हमें इसकी ज़रूरत भी है और इससे नुकसान भी है, इसलिए घर्षण को आवश्यक बुराई कहते हैं। प्रकृति में जानवरों के पंजों पर खुरदुरी गद्दियाँ पकड़ देती हैं, जबकि मछली चिकनी और धारारेखीय होती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- घर्षण गति (या संभावित गति) के उल्टी ओर लगता है
- स्थैतिक घर्षण = धक्का, अधिकतम सीमा तक
- सर्पी घर्षण ≈ μ × N (N = अभिलंब बल)
- स्थैतिक (अधिकतम) > सर्पी > लोटनिक
- मात्रक: न्यूटन (N)
हल किए गए उदाहरण
1. फ़र्श पर रखे डिब्बे को 20 N से धकेला, पर वह नहीं हिला। उस पर घर्षण कितना है?
डिब्बा रुका है, तो बल संतुलित हैं। स्थैतिक घर्षण = 20 N, धक्के के उल्टी ओर।
2. एक गुटके को एक-सी चाल से खींचने पर कमानीदार तुला 6 N पढ़ती है। सर्पी घर्षण कितना है?
एक-सी चाल यानी बल संतुलित। सर्पी घर्षण = 6 N, खिंचाव के उल्टी ओर।
3. 2 kg के गुटके पर घर्षण 6 N है। उसी सतह पर ऐसे तीन गुटके (6 kg) एक के ऊपर एक रखे। घर्षण का अनुमान लगाओ।
घर्षण लगभग भार के अनुपात में होता है। भार 3 गुना, तो घर्षण ≈ 3 × 6 = 18 N।
4. डिब्बे को चलाते रहने के लिए 8 N चाहिए (सर्पी घर्षण)। तुमने 14 N से धकेला। नेट बल कितना है?
नेट बल = 14 − 8 = 6 N धक्के की दिशा में, इसलिए डिब्बे की चाल बढ़ेगी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि घर्षण हमेशा हमारे पीछे की ओर लगता है। यह सतहों के फिसलने के उल्टी ओर लगता है। चलते समय पैर पर घर्षण आगे की ओर लगता है।
- यह सोचना कि ज़्यादा संपर्क क्षेत्रफल से हमेशा ज़्यादा घर्षण। ठोस सतहों में क्षेत्रफल का असर बहुत कम है।
- यह सोचना कि स्थैतिक घर्षण हमेशा अपनी अधिकतम सीमा पर होता है। यह उतना ही होता है जितना गति रोकने को चाहिए।
- घर्षण को सिर्फ़ हानिकारक मानना। इसके बिना हम चल, लिख या ब्रेक नहीं लगा सकते।