कण कभी रुकते नहीं
आसपास की हर चीज़ बहुत छोटे टुकड़ों से बनी है जिन्हें कण (परमाणु और अणु) कहते हैं। वे इतने छोटे हैं कि दिखते नहीं। बड़ी बात यह है: ये कण हमेशा चलते रहते हैं। गैस में वे तेज़ उड़ते हैं। द्रव में एक-दूसरे के पास से फिसलते हैं। ठोस में वे अपनी जगह पर ही काँपते हैं।
हमें यह गति क्यों नहीं दिखती? क्योंकि हर कण बहुत छोटा है। हम बस उन सबका मिला-जुला असर देखते हैं।
ब्राउनी गति
सन् 1827 में वैज्ञानिक रॉबर्ट ब्राउन ने सूक्ष्मदर्शी से पानी में परागकण के छोटे दाने देखे। दाने टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर काँपते रहे और कभी रुके नहीं। आज हम जानते हैं कि क्यों: पानी के कण दिखते नहीं, पर वे दाने को हर तरफ़ से बार-बार टक्कर मारते हैं। हर पल एक तरफ़ से थोड़ी ज़्यादा टक्कर आती है, इसलिए दाने को किसी भी दिशा में हल्का धक्का मिल जाता है।
- रास्ता अनियमित और टेढ़ा-मेढ़ा होता है।
- छोटा दाना ज़्यादा काँपता है। बड़ा पत्थर बिल्कुल नहीं हिलता, क्योंकि टक्करें आपस में कट जाती हैं।
- गरम द्रव में दाना तेज़ काँपता है।
ब्राउनी गति इस बात का सबूत है कि पदार्थ गतिशील कणों से बना है। दाना दिखने वाली चीज़ है। पानी के चलते कण वह कारण हैं जो हमें नहीं दिखते।
विसरण (Diffusion)
विसरण का मतलब है कि एक पदार्थ के कण अपने आप दूसरे पदार्थ में फैल जाते हैं, जब तक समान रूप से मिल न जाएँ। चलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। कण वहाँ से जाते हैं जहाँ वे ज़्यादा हैं, वहाँ जहाँ कम हैं।
- गैसों में यह तेज़ है: इत्र की महक पूरे कमरे में पहुँच जाती है।
- द्रवों में धीमा है: स्याही कुछ मिनटों में पानी में फैलती है।
- ठोसों में बहुत ही धीमा है: दो धातु के टुकड़े सटाकर रखें तो एक पतली परत मिलने में सालों लगते हैं।
गरमी में विसरण तेज़ होता है, क्योंकि कण तेज़ चलते हैं। हल्के और छोटे कणों में भी यह तेज़ होता है।
आकर्षण और प्रतिकर्षण
कण एक-दूसरे पर बल भी लगाते हैं। जब दो कण थोड़ी दूरी पर हों तो वे एक-दूसरे को खींचते हैं (आकर्षण)। इसीलिए पानी की बूँद जुड़ी रहती है और ठोस अपना आकार रखता है। जब वे बहुत पास आ जाएँ तो एक-दूसरे को धकेलते हैं (प्रतिकर्षण)। इसीलिए पत्थर या लोहे को दबाकर छोटा करना आसान नहीं।
ठोस में खिंचाव ज़्यादा होता है (कण पास-पास), द्रव में कम, और गैस में लगभग नहीं (कण दूर-दूर)। इसीलिए गैस पूरे बर्तन में फैल जाती है।
घर पर करके देखो
दो साफ़ गिलास लो: एक में ठंडा पानी, दूसरे में गुनगुना पानी (उबलता नहीं)। दोनों में बिना हिलाए खाने के रंग या स्याही की एक-एक बूँद डालो। घड़ी से समय देखो। पहले अनुमान लगाओ कि कौन जल्दी फैलेगा, फिर जाँचो। रंग पूरे गिलास में कितनी देर में फैला, लिख लो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ब्राउनी गति = दिखने वाले दाने की अनियमित टेढ़ी-मेढ़ी गति, जो न दिखने वाले चलते कणों के धक्कों से होती है
- विसरण = कणों का ज़्यादा वाली जगह से कम वाली जगह की ओर फैलना, जब तक पूरा मिश्रण एक-सा न हो जाए
- गरमी बढ़ी तो कण तेज़, इसलिए विसरण तेज़ और ब्राउनी गति ज़्यादा
- दूर हों तो आकर्षण (खिंचाव), बहुत पास हों तो प्रतिकर्षण (धक्का)
हल किए गए उदाहरण
1. पानी में परागकण का दाना टेढ़े-मेढ़े रास्ते पर चलता है। उसे क्या चलाता है?
पानी के न दिखने वाले कण उसे हर तरफ़ से बार-बार टक्कर मारते हैं। हर पल टक्करें बराबर नहीं होतीं, इसलिए दाने को अनियमित धक्के मिलते हैं।
2. कमरे के एक कोने में इत्र की शीशी खोली गई। कुछ देर में सबको महक आने लगी। इस प्रक्रिया का नाम बताओ और समझाओ।
यह विसरण है। इत्र के कण अनियमित रूप से चलते हुए वहाँ से फैलते हैं जहाँ वे ज़्यादा हैं, वहाँ जहाँ कम हैं, और हवा में मिल जाते हैं।
3. गरम चाय में चीनी ठंडी चाय से जल्दी क्यों घुलती है?
गरम चाय के कण तेज़ चलते हैं। वे चीनी से ज़्यादा बार टकराते हैं और उसे दूर ले जाते हैं। ऊँचे तापमान पर विसरण तेज़ होता है।
4. गैस को छोटे सिलिंडर में आसानी से दबाया जा सकता है पर ठोस को नहीं। क्यों?
गैस में कण दूर-दूर हैं और उनके बीच बल बहुत कम है, इसलिए खाली जगह बहुत है। ठोस में कण पहले से बहुत पास हैं, इसलिए और पास लाने पर वे ज़ोर से धक्का देते हैं।
5. पानी में बड़ा लोहे का गोला ब्राउनी गति क्यों नहीं दिखाता?
गोला इतना बड़ा है कि सब तरफ़ से टक्करें लगभग बराबर होती हैं और कट जाती हैं। सिर्फ़ बहुत छोटे दाने को ही साफ़ धक्का महसूस होता है।
6. दो कण 5 इकाई दूर थे, फिर 1 इकाई पास कर दिए गए। उनके बीच का बल क्या करेगा?
5 इकाई पर वे एक-दूसरे को खींचते हैं (आकर्षण)। 1 इकाई पर बहुत पास होने से वे एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं (प्रतिकर्षण)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि दाना अपने आप चलता है। उसे न दिखने वाले कण धक्का देते हैं।
- यह सोचना कि ठंड में कण रुक जाते हैं। वे धीमे होते हैं, पर पूरी तरह कभी नहीं रुकते।
- यह कहना कि विसरण के लिए चलाना या हवा चाहिए। वह अपने आप होता है, चलाने से बस जल्दी होता है।
- दोनों को मिला देना: ब्राउनी गति दाने की चाल है; विसरण दो पदार्थों का आपस में मिलना है।