Russia 7 класс Physics (advanced)
अध्याय: 5
1. Physics and its role in understanding the world
Physics as a natural science · Quantities, units, dimensions · Scientific method
- प्राकृतिक विज्ञान के रूप में भौतिकी: घटनाएँ और जुड़ाव – भौतिकी वह विज्ञान है जो प्रकृति को समझता है: चीज़ें कैसे चलती हैं, गरम होती हैं, और प्रकाश, ध्वनि, बिजली व चुंबक कैसे काम करते हैं। प्रकृति में जो कुछ भी होता है उसे घटना (phenomenon) कहते हैं। भौतिक विज्ञानी घटनाएँ देखते हैं, उनके पीछे का नियम खोजते हैं और उसे गणित में लिखते हैं। भौतिकी रसायन, जीव विज्ञान, भूगोल और तकनीक से जुड़ी है, क्योंकि उनमें भी वही नियम चलते हैं।
- मापन और मात्रक: हम कुछ भी कैसे मापते हैं – किसी चीज़ को मापना यानी उसकी तुलना एक तय मात्रा से करना, जिसे मात्रक (इकाई) कहते हैं. हर माप में एक संख्या और एक मात्रक होता है. दुनिया भर के वैज्ञानिक SI पद्धति इस्तेमाल करते हैं, जिसमें मीटर, किलोग्राम और सेकंड जैसे सात मूल मात्रक हैं. किलो (×1000), सेंटी (÷100) और मिली (÷1000) जैसे उपसर्ग मात्रक को बड़ा या छोटा करते हैं. अच्छा माप शून्य से शुरू होता है, आँख निशान के ठीक ऊपर रखकर पढ़ा जाता है, और सबसे छोटे खाने (अल्पतमांक) जितना ही सटीक होता है. पूर्णांकित मान एक छोटी सीमा छिपाता है, जिसे ऊपरी और निचली सीमा बताती हैं.
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
2. First ideas about the structure of matter
Atoms and molecules · Motion and interaction of particles · States of matter
- द्रव्य का कण मॉडल – हर द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है जो हमेशा गति करते रहते हैं। ठोस में कण पास-पास होते हैं और बस काँपते हैं; द्रव में पास होते हुए भी फिसलते हैं; गैस में दूर-दूर होकर हर दिशा में तेज़ भागते हैं। गरम करने पर कणों को ऊर्जा मिलती है: या तो वे तेज़ चलते हैं (तापमान बढ़ता है) या उनके बीच का खिंचाव टूटता है (अवस्था बदलती है, तापमान स्थिर रहता है)। गैस दाब कणों की दीवार से टक्कर से बनता है।
- ब्राउनी गति और विसरण: कणों की गति और आपसी बल – हर पदार्थ ऐसे कणों से बना है जो कभी रुकते नहीं। पानी के छोटे और तेज़ कण किसी बड़े दाने को हर तरफ़ से टकराते हैं, इसलिए दाना टेढ़े-मेढ़े रास्ते पर काँपता है। इसे ब्राउनी गति कहते हैं। यही अनवरत गति पदार्थों को अपने आप मिला देती है, इसे विसरण (diffusion) कहते हैं। गरमी से कण तेज़ होते हैं, इसलिए दोनों तेज़ हो जाते हैं। कणों के बीच बल भी होते हैं: थोड़ी दूरी पर खिंचाव और बहुत पास होने पर धक्का।
3. Motion and interaction of bodies
Motion, path and displacement · Graphs and relativity of motion · Inertia, mass, density · Forces
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- घनत्व (Density) – घनत्व बताता है कि हर इकाई आयतन में कितना द्रव्यमान ठसा है: ρ = m ÷ V। इसका SI मात्रक kg/m³ है; प्रयोगशाला में अक्सर g/cm³ लेते हैं (1 g/cm³ = 1000 kg/m³)। पानी का घनत्व 1 g/cm³ है। जो चीज़ किसी द्रव से कम घनी हो वह उसमें तैरती है, ज़्यादा घनी डूबती है।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
4. Pressure of solids, liquids and gases
Pressure and force of pressure · Pascal's law and hydrostatics · Atmospheric pressure · Archimedes' principle
- दाब: हर वर्ग मीटर पर बल – दाब प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है: P = F ÷ A। इसका SI मात्रक पास्कल है (1 Pa = 1 N/m²)। वही बल छोटे क्षेत्रफल पर ज़्यादा दाब देता है, इसीलिए पिन, चाकू और कील नुकीले होते हैं, और ट्रैक्टर व ऊँट के पैर या टायर चौड़े होते हैं। द्रव हर दिशा में दाब डालते हैं और गहराई के साथ उनका दाब बढ़ता है (P = ρgh)। गैस के कण दीवारों से टकराते रहते हैं, इसलिए गैस दाब डालती है; गैस को दबाने या गर्म करने पर दाब बढ़ता है। हवा हम पर लगभग 101 kPa का दाब डालती है। रक्तचाप धमनियों की दीवारों पर रक्त का दाब है।
- तरलों में दाब और पास्कल का नियम – तरल (द्रव या गैस) जिस सतह को छूता है, उस पर धक्का देता है। यह लंबवत बल ÷ क्षेत्रफल = दाब, P = F/A। गुरुत्व के कारण ऊपर के तरल का भार होता है, इसलिए गहराई के साथ दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh। स्थिर द्रव में एक ही गहराई पर दाब बराबर होता है, बर्तन का आकार कुछ भी हो। पास्कल का नियम: बंद तरल पर लगाया गया अतिरिक्त दाब हर जगह बराबर पहुँचता है। हाइड्रॉलिक लिफ़्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं: छोटे पिस्टन पर छोटा बल, बड़े पिस्टन पर बड़ा बल, F = f × A/a।
- वायुमंडलीय दाब – हवा का भी भार होता है। किसी सतह के ऊपर खड़ा हवा का पूरा स्तंभ उस पर दबाव डालता है; हर वर्ग मीटर पर यह धक्का ही वायुमंडलीय दाब है। समुद्र तल पर यह लगभग 101 kPa है — 760 mm पारे के स्तंभ या लगभग 10 m पानी के बराबर। ऊपर जाने पर आपके ऊपर हवा कम रह जाती है, इसलिए दाब घटता है। शांत हवा में किसी परत का भार नीचे से ऊपर लगने वाले दाब से संतुलित रहता है (द्रवस्थैतिक संतुलन)। हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर बहती है — यही पवन है।
- आर्किमिडीज़ का सिद्धांत: चीज़ें तैरती या डूबती क्यों हैं – द्रव (या गैस) में रखी हर वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगता है, जिसे उत्प्लावन बल कहते हैं। आर्किमिडीज़ का सिद्धांत कहता है: यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है, F = ρgV। वस्तु का घनत्व द्रव से कम हो तो वह तैरती है, ज़्यादा हो तो डूबती है। तैरती वस्तु उतनी ही डूबती है जितने में उत्प्लावन बल उसके भार के बराबर हो जाए।
5. Work, power, energy
Work and power · Simple machines and moment of force · Mechanical energy
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।