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प्रकाश कैसे चलता है

प्रकाश सूरज या बल्ब जैसे स्रोतों से निकलता है और सीधी रेखा में चलता है। कोई चीज़ तब दिखती है जब उससे रोशनी हमारी आँख में आती है। पारदर्शी चीज़ें रोशनी जाने देती हैं, पारभासी थोड़ी जाने देती हैं, अपारदर्शी रोक देती हैं। रुकी हुई रोशनी से छाया बनती है; बड़े स्रोत से गहरी प्रच्छाया और हल्की उपच्छाया बनती है। पिनहोल कैमरा उल्टा प्रतिबिंब बनाता है। प्रकाश बहुत तेज़ है: लगभग 3 लाख km हर सेकंड।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. बल्ब अपनी रोशनी ख़ुद बनाता है। किताब नहीं बनाती। रोशनी बल्ब से किताब तक जाती है, टकराकर लौटती है और आँख में आती है। ऐसे हमें दिखता है।
  2. छेद वाले तीन कार्ड। छेद एक सीध में हों तो रोशनी पार हो जाती है। एक कार्ड खिसकाओ तो रोशनी रुक जाती है। प्रकाश सीधी रेखा में चलता है।
  3. रोशनी काँच, बटर पेपर और लकड़ी पर पड़ती है। काँच जाने देता है, पेपर थोड़ी जाने देता है, लकड़ी रोक देती है। रंगीन चीज़ें एक रंग लौटाती हैं, बाक़ी सोख लेती हैं।
  4. अपारदर्शी गेंद किरणों को रोकती है, तो पर्दे पर छाया बनती है। बड़े बल्ब से बीच में गहरी छाया (प्रच्छाया) और किनारे पर हल्की छाया (उपच्छाया) बनती है।
  5. पिनहोल कैमरा। लौ के ऊपर की किरणें छोटे छेद से क्रॉस होकर नीचे गिरती हैं। प्रतिबिंब उल्टा बनता है।
  6. अब आपकी बारी। गेंद को बल्ब के पास या दूर खिसकाइए और छाया को बड़ा-छोटा होते देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

आँखें खुली होने पर भी अँधेरे कमरे में क्यों नहीं दिखता?

देखने के लिए रोशनी को आँख के अंदर आना पड़ता है। स्रोत नहीं, तो चीज़ों से कोई रोशनी नहीं लौटती।

क्या चाँद प्रकाश स्रोत है?

नहीं, चाँद अदीप्त है। वह सूरज की रोशनी लौटाता है, जैसे पहले चरण में किताब बल्ब की रोशनी लौटाती है।

कैसे साबित करें कि रोशनी सीधी चलती है?

छेद वाले तीन कार्ड लीजिए। छेद एक सीध में हों तभी मोमबत्ती दिखती है। एक कार्ड खिसकाइए, रोशनी रुक जाएगी।

धूप में काली शर्ट ज़्यादा गर्म क्यों लगती है?

काला रंग लगभग सारी रोशनी सोख लेता है और उसे गर्मी में बदलता है। सफ़ेद ज़्यादातर रोशनी लौटा देता है।

कुछ छायाओं के किनारे धुँधले क्यों होते हैं?

चौड़ा स्रोत किनारे वाले भाग को आंशिक रोशनी देता है। यही उपच्छाया है, इसलिए किनारा नरम दिखता है।

पिनहोल का प्रतिबिंब उल्टा क्यों?

वस्तु के ऊपर और नीचे की किरणें सीधी चलकर छेद पर क्रॉस करती हैं। ऊपर वाली नीचे और नीचे वाली ऊपर पहुँचती है।

बल्ब की ओर चलने पर मेरी छाया बड़ी क्यों होती है?

बल्ब के पास होने पर आपके किनारों को छूने वाली किरणें दीवार तक पहुँचते-पहुँचते ज़्यादा फैल जाती हैं, इसलिए छाया बड़ी। स्लाइडर से देखिए।

प्रकाश स्रोत और हम कैसे देखते हैं

प्रकाश स्रोत वह है जो अपनी रोशनी ख़ुद देता है। जैसे सूरज, तारे, मोमबत्ती की लौ, बल्ब, मोबाइल की स्क्रीन। इन्हें दीप्त (luminous) वस्तुएँ कहते हैं।

ज़्यादातर चीज़ें जैसे किताब, पेड़ या चाँद रोशनी नहीं बनातीं। ये अदीप्त (non-luminous) हैं। ये तभी दिखती हैं जब किसी स्रोत की रोशनी इन पर पड़कर हमारी आँख में आए।

तो देखना एक कड़ी है: स्रोत → वस्तु → आँख। पूरे अँधेरे कमरे में किताब नहीं दिखती, क्योंकि उससे कोई रोशनी नहीं आती।

प्रकाश सीधी रेखा में चलता है

छेद वाले तीन कार्ड से मोमबत्ती को देखिए। मोमबत्ती तभी दिखती है जब तीनों छेद एक सीधी रेखा में हों। एक कार्ड खिसकाया तो रोशनी रुक गई। इससे पता चलता है कि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। इसे प्रकाश का सरल रेखीय गमन (rectilinear propagation) कहते हैं।

इसे हम एक मॉडल से बनाते हैं: किरण (ray) एक सीधी रेखा है जिस पर तीर रोशनी की दिशा बताता है। बहुत सारी किरणें मिलकर किरण-पुंज (beam) बनाती हैं। किरण कोई असली चीज़ नहीं, यह छाया और प्रतिबिंब समझने का एक चित्र-औज़ार है।

प्रकाश कितना तेज़ है?

निर्वात (vacuum) में प्रकाश लगभग 3 लाख km हर सेकंड (3 × 108 m/s) चलता है। सूरज की रोशनी को पृथ्वी तक आने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं। प्रकाश ध्वनि से बहुत तेज़ है, इसलिए बिजली पहले दिखती है और गड़गड़ाहट बाद में सुनाई देती है।

पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी

रोशनी किसी चीज़ पर पड़े तो तीन बातें हो सकती हैं: पार निकल जाए (पारगमन), लौट आए (परावर्तन) या सोख ली जाए (अवशोषण, जिससे चीज़ गर्म होती है)। सफ़ेद रोशनी कई रंगों का मेल है। हरी पत्ती हरा रंग लौटाती है और बाक़ी सोख लेती है; काली टी-शर्ट लगभग सारे रंग सोख लेती है, इसलिए धूप में गर्म होती है। पानी या काँच में जाते समय रोशनी मुड़ती भी है (अपवर्तन); दर्पण और लेंस परावर्तन और अपवर्तन से प्रतिबिंब बनाते हैं। इनके अलग पाठ हैं।

छाया, प्रच्छाया, उपच्छाया और ग्रहण

छाया तब बनती है जब कोई अपारदर्शी वस्तु रोशनी रोकती है। इसके लिए प्रकाश स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा (सतह) चाहिए। रोशनी सीधी चलती है, इसलिए छाया की आकृति वस्तु जैसी होती है।

बहुत छोटे (बिंदु) स्रोत से छाया तीखी बनती है। चौड़े स्रोत से छाया के दो भाग होते हैं: प्रच्छाया (umbra), बीच का गहरा भाग जहाँ बिल्कुल रोशनी नहीं पहुँचती, और उपच्छाया (penumbra), हल्का किनारा जहाँ स्रोत के कुछ हिस्से से रोशनी पहुँचती है।

छाया का आकार: वस्तु को बल्ब के पास लाओ तो छाया बड़ी होती है। समरूप त्रिभुजों से, छाया ÷ वस्तु = (बल्ब से पर्दे की दूरी) ÷ (बल्ब से वस्तु की दूरी)।

ग्रहण

सूर्य ग्रहण: चाँद सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है और उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण: पृथ्वी सूरज और चाँद के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। प्रच्छाया में ग्रहण पूर्ण होता है, उपच्छाया में आंशिक। ग्रहण में भी सूरज को सीधे कभी न देखें।

पिनहोल कैमरा

पिनहोल कैमरा (सूक्ष्म छिद्र कैमरा) एक बंद डिब्बा है जिसके आगे बहुत छोटा छेद और पीछे पतले कागज़ का पर्दा होता है। वस्तु के ऊपरी हिस्से की किरणें सीधे छेद से होकर पर्दे पर नीचे गिरती हैं; निचले हिस्से की किरणें ऊपर। इसलिए प्रतिबिंब उल्टा बनता है और दाएँ-बाएँ भी बदल जाता है।

घर पर करके देखें

छाया का पैमाना: अँधेरे कमरे में मोबाइल की टॉर्च दीवार पर डालिए। एक सिक्का टॉर्च से 20 cm पर, फिर 40 cm पर रखिए। हर बार छाया नापिए। पहले अनुमान लगाइए: सिक्का टॉर्च के पास लाने पर छाया बढ़ेगी या घटेगी? फिर 3D के आख़िरी चरण के स्लाइडर से जाँचिए।

पिनहोल व्यूअर: जूते के डिब्बे के एक सिरे में पिन से छेद कीजिए और दूसरे सिरे पर खिड़की काटकर बटर पेपर चिपकाइए। सिर और डिब्बे को काले कपड़े से ढककर छेद को चमकीली खिड़की की ओर कीजिए। खिड़की उल्टी दिखेगी।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दीप्त और अदीप्त में बाँटिए: सूरज, चाँद, जलती मोमबत्ती, दर्पण, जुगनू।

दीप्त (अपनी रोशनी): सूरज, जलती मोमबत्ती, जुगनू। अदीप्त: चाँद और दर्पण; ये सिर्फ़ पड़ी हुई रोशनी लौटाते हैं।

2. सूरज की रोशनी पृथ्वी तक लगभग 500 s में आती है। प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है। सूरज कितनी दूर है?

दूरी = चाल × समय = 3 × 10⁸ × 500 = 1.5 × 10¹¹ m = 15 करोड़ km।

3. 6 cm ऊँचा खिलौना छोटे बल्ब से 20 cm दूर है। दीवार बल्ब से 80 cm दूर है। छाया कितनी ऊँची होगी?

छाया ÷ वस्तु = 80 ÷ 20 = 4। छाया = 4 × 6 cm = 24 cm।

4. पिनहोल कैमरा 15 cm लंबा है। 10 m ऊँचा पेड़ 50 m दूर है। प्रतिबिंब कितना ऊँचा होगा?

प्रतिबिंब ÷ वस्तु = 0.15 m ÷ 50 m = 0.003। प्रतिबिंब = 0.003 × 10 m = 0.03 m = 3 cm, उल्टा।

5. बिजली दिखी और गड़गड़ाहट 3 s बाद सुनाई दी। ध्वनि की चाल 340 m/s है। बिजली कितनी दूर थी, और प्रकाश का समय क्यों छोड़ सकते हैं?

दूरी ≈ 340 × 3 = 1020 m, लगभग 1 km। प्रकाश 1 km लगभग 0.000003 s में तय कर लेता है, जो पता भी नहीं चलता।

6. लंबी ट्यूबलाइट से छाया के किनारे धुँधले और छोटी LED से तीखे क्यों होते हैं?

चौड़े स्रोत से छाया के किनारे वाले हिस्से पर ट्यूब के कुछ भाग की ही रोशनी पहुँचती है। यही उपच्छाया है, इसलिए किनारा धुँधला। छोटी LED लगभग बिंदु स्रोत है, उपच्छाया नहीं बनती, किनारा तीखा।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. इनमें से दीप्त कौन है?
2. घिसा हुआ (frosted) काँच है:
3. पिनहोल कैमरे का प्रतिबिंब होता है:
4. चंद्र ग्रहण में बीच में कौन होता है?
5. वस्तु को बल्ब के पास लाने पर छाया:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रकाश का सरल रेखीय गमन क्या है?

इसका मतलब है प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। छाया, ग्रहण और पिनहोल कैमरे का प्रतिबिंब इसी कारण बनते हैं।

प्रच्छाया और उपच्छाया में क्या अंतर है?

प्रच्छाया छाया का गहरा बीच वाला भाग है जहाँ बिल्कुल रोशनी नहीं पहुँचती। उपच्छाया हल्का बाहरी भाग है जहाँ स्रोत के कुछ हिस्से की रोशनी पहुँचती है।

प्रकाश कितनी तेज़ी से चलता है?

निर्वात में लगभग 3 × 10⁸ m/s (3 लाख km प्रति सेकंड)। पानी और काँच में थोड़ा धीमा।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

नीदरलैंडVWO 2 (onderbouw)Light and sound
यूक्रेन9 класLight phenomena
चीन八年级(初二)Ch.4 Light

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