प्रकाश स्रोत और हम कैसे देखते हैं
प्रकाश स्रोत वह है जो अपनी रोशनी ख़ुद देता है। जैसे सूरज, तारे, मोमबत्ती की लौ, बल्ब, मोबाइल की स्क्रीन। इन्हें दीप्त (luminous) वस्तुएँ कहते हैं।
ज़्यादातर चीज़ें जैसे किताब, पेड़ या चाँद रोशनी नहीं बनातीं। ये अदीप्त (non-luminous) हैं। ये तभी दिखती हैं जब किसी स्रोत की रोशनी इन पर पड़कर हमारी आँख में आए।
तो देखना एक कड़ी है: स्रोत → वस्तु → आँख। पूरे अँधेरे कमरे में किताब नहीं दिखती, क्योंकि उससे कोई रोशनी नहीं आती।
प्रकाश सीधी रेखा में चलता है
छेद वाले तीन कार्ड से मोमबत्ती को देखिए। मोमबत्ती तभी दिखती है जब तीनों छेद एक सीधी रेखा में हों। एक कार्ड खिसकाया तो रोशनी रुक गई। इससे पता चलता है कि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। इसे प्रकाश का सरल रेखीय गमन (rectilinear propagation) कहते हैं।
इसे हम एक मॉडल से बनाते हैं: किरण (ray) एक सीधी रेखा है जिस पर तीर रोशनी की दिशा बताता है। बहुत सारी किरणें मिलकर किरण-पुंज (beam) बनाती हैं। किरण कोई असली चीज़ नहीं, यह छाया और प्रतिबिंब समझने का एक चित्र-औज़ार है।
प्रकाश कितना तेज़ है?
निर्वात (vacuum) में प्रकाश लगभग 3 लाख km हर सेकंड (3 × 108 m/s) चलता है। सूरज की रोशनी को पृथ्वी तक आने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं। प्रकाश ध्वनि से बहुत तेज़ है, इसलिए बिजली पहले दिखती है और गड़गड़ाहट बाद में सुनाई देती है।
पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी
- पारदर्शी (transparent): लगभग सारी रोशनी जाने देता है; आर-पार साफ़ दिखता है (साफ़ काँच, साफ़ पानी, हवा)।
- पारभासी (translucent): कुछ रोशनी जाने देता है पर बिखेर देता है; धुँधला दिखता है (बटर पेपर, घिसा काँच, पतला कपड़ा)।
- अपारदर्शी (opaque): रोशनी बिल्कुल नहीं जाने देता (लकड़ी, धातु, ईंट, आपका हाथ)।
रोशनी किसी चीज़ पर पड़े तो तीन बातें हो सकती हैं: पार निकल जाए (पारगमन), लौट आए (परावर्तन) या सोख ली जाए (अवशोषण, जिससे चीज़ गर्म होती है)। सफ़ेद रोशनी कई रंगों का मेल है। हरी पत्ती हरा रंग लौटाती है और बाक़ी सोख लेती है; काली टी-शर्ट लगभग सारे रंग सोख लेती है, इसलिए धूप में गर्म होती है। पानी या काँच में जाते समय रोशनी मुड़ती भी है (अपवर्तन); दर्पण और लेंस परावर्तन और अपवर्तन से प्रतिबिंब बनाते हैं। इनके अलग पाठ हैं।
छाया, प्रच्छाया, उपच्छाया और ग्रहण
छाया तब बनती है जब कोई अपारदर्शी वस्तु रोशनी रोकती है। इसके लिए प्रकाश स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा (सतह) चाहिए। रोशनी सीधी चलती है, इसलिए छाया की आकृति वस्तु जैसी होती है।
बहुत छोटे (बिंदु) स्रोत से छाया तीखी बनती है। चौड़े स्रोत से छाया के दो भाग होते हैं: प्रच्छाया (umbra), बीच का गहरा भाग जहाँ बिल्कुल रोशनी नहीं पहुँचती, और उपच्छाया (penumbra), हल्का किनारा जहाँ स्रोत के कुछ हिस्से से रोशनी पहुँचती है।
छाया का आकार: वस्तु को बल्ब के पास लाओ तो छाया बड़ी होती है। समरूप त्रिभुजों से, छाया ÷ वस्तु = (बल्ब से पर्दे की दूरी) ÷ (बल्ब से वस्तु की दूरी)।
ग्रहण
सूर्य ग्रहण: चाँद सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है और उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण: पृथ्वी सूरज और चाँद के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। प्रच्छाया में ग्रहण पूर्ण होता है, उपच्छाया में आंशिक। ग्रहण में भी सूरज को सीधे कभी न देखें।
पिनहोल कैमरा
पिनहोल कैमरा (सूक्ष्म छिद्र कैमरा) एक बंद डिब्बा है जिसके आगे बहुत छोटा छेद और पीछे पतले कागज़ का पर्दा होता है। वस्तु के ऊपरी हिस्से की किरणें सीधे छेद से होकर पर्दे पर नीचे गिरती हैं; निचले हिस्से की किरणें ऊपर। इसलिए प्रतिबिंब उल्टा बनता है और दाएँ-बाएँ भी बदल जाता है।
- छेद बड़ा → प्रतिबिंब चमकीला पर धुँधला।
- डिब्बा लंबा → प्रतिबिंब बड़ा।
- प्रतिबिंब की ऊँचाई ÷ वस्तु की ऊँचाई = डिब्बे की लंबाई ÷ वस्तु की दूरी।
घर पर करके देखें
छाया का पैमाना: अँधेरे कमरे में मोबाइल की टॉर्च दीवार पर डालिए। एक सिक्का टॉर्च से 20 cm पर, फिर 40 cm पर रखिए। हर बार छाया नापिए। पहले अनुमान लगाइए: सिक्का टॉर्च के पास लाने पर छाया बढ़ेगी या घटेगी? फिर 3D के आख़िरी चरण के स्लाइडर से जाँचिए।
पिनहोल व्यूअर: जूते के डिब्बे के एक सिरे में पिन से छेद कीजिए और दूसरे सिरे पर खिड़की काटकर बटर पेपर चिपकाइए। सिर और डिब्बे को काले कपड़े से ढककर छेद को चमकीली खिड़की की ओर कीजिए। खिड़की उल्टी दिखेगी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रकाश सीधी रेखा में चलता है (सरल रेखीय गमन)
- निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3 × 10⁸ m/s = 3 लाख km/s
- दूरी = चाल × समय
- छाया ÷ वस्तु = बल्ब से पर्दे की दूरी ÷ बल्ब से वस्तु की दूरी
- पिनहोल कैमरा: प्रतिबिंब ÷ वस्तु = डिब्बे की लंबाई ÷ वस्तु की दूरी
- प्रच्छाया = पूरी छाया; उपच्छाया = आंशिक छाया
हल किए गए उदाहरण
1. दीप्त और अदीप्त में बाँटिए: सूरज, चाँद, जलती मोमबत्ती, दर्पण, जुगनू।
दीप्त (अपनी रोशनी): सूरज, जलती मोमबत्ती, जुगनू। अदीप्त: चाँद और दर्पण; ये सिर्फ़ पड़ी हुई रोशनी लौटाते हैं।
2. सूरज की रोशनी पृथ्वी तक लगभग 500 s में आती है। प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है। सूरज कितनी दूर है?
दूरी = चाल × समय = 3 × 10⁸ × 500 = 1.5 × 10¹¹ m = 15 करोड़ km।
3. 6 cm ऊँचा खिलौना छोटे बल्ब से 20 cm दूर है। दीवार बल्ब से 80 cm दूर है। छाया कितनी ऊँची होगी?
छाया ÷ वस्तु = 80 ÷ 20 = 4। छाया = 4 × 6 cm = 24 cm।
4. पिनहोल कैमरा 15 cm लंबा है। 10 m ऊँचा पेड़ 50 m दूर है। प्रतिबिंब कितना ऊँचा होगा?
प्रतिबिंब ÷ वस्तु = 0.15 m ÷ 50 m = 0.003। प्रतिबिंब = 0.003 × 10 m = 0.03 m = 3 cm, उल्टा।
5. बिजली दिखी और गड़गड़ाहट 3 s बाद सुनाई दी। ध्वनि की चाल 340 m/s है। बिजली कितनी दूर थी, और प्रकाश का समय क्यों छोड़ सकते हैं?
दूरी ≈ 340 × 3 = 1020 m, लगभग 1 km। प्रकाश 1 km लगभग 0.000003 s में तय कर लेता है, जो पता भी नहीं चलता।
6. लंबी ट्यूबलाइट से छाया के किनारे धुँधले और छोटी LED से तीखे क्यों होते हैं?
चौड़े स्रोत से छाया के किनारे वाले हिस्से पर ट्यूब के कुछ भाग की ही रोशनी पहुँचती है। यही उपच्छाया है, इसलिए किनारा धुँधला। छोटी LED लगभग बिंदु स्रोत है, उपच्छाया नहीं बनती, किनारा तीखा।
आम गलतियाँ
- चाँद को प्रकाश स्रोत मानना। वह सिर्फ़ सूरज की रोशनी लौटाता है।
- सोचना कि देखने के लिए रोशनी आँख से निकलती है। रोशनी वस्तु से आँख के अंदर आती है।
- कहना कि छाया में वस्तु का रंग या बारीकी दिखती है। छाया सिर्फ़ अँधेरी आकृति है।
- पिनहोल कैमरे का प्रतिबिंब सीधा मानना। किरणें छेद पर क्रॉस करती हैं, इसलिए प्रतिबिंब उल्टा होता है।