प्रयोग 1: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है
सामान: गत्ते के तीन कार्ड, हर कार्ड में एक ही जगह छेद, एक टॉर्च, कार्ड खड़े करने के लिए मिट्टी।
करें: कार्ड एक कतार में रखें ताकि छेद एक सीध में हों। पहले छेद पर टॉर्च जलाएँ। प्रकाश आखिरी छेद से बाहर आता है। अब बीच का कार्ड थोड़ा खिसकाएँ। प्रकाश रुक जाता है।
इससे पता चला: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। वह मोड़ पर घूम नहीं सकता। इसीलिए किसी वस्तु के पीछे छाया बनती है: वस्तु सीधी किरणों को रोक लेती है।
प्रयोग 2: दर्पण में परावर्तन
परावर्तन यानी प्रकाश का सतह से टकराकर लौटना। दर्पण पर 90° की एक रेखा खींचें। यह अभिलंब है। दर्पण पर पड़ने वाली किरण आपाती किरण है और लौटने वाली किरण परावर्तित किरण।
कोण हमेशा अभिलंब से नापें। हर बार मिलता है: आपतन कोण = परावर्तन कोण। आपाती किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही समतल में होती हैं।
समतल दर्पण में प्रतिबिंब: प्रतिबिंब दर्पण के उतना ही पीछे दिखता है जितना आप आगे खड़े हैं। वह बराबर आकार का, सीधा होता है और दायाँ-बायाँ बदल जाता है। यह आभासी प्रतिबिंब है, इसे परदे पर नहीं उतार सकते।
प्रयोग 3: काँच में अपवर्तन
अपवर्तन यानी प्रकाश का एक पारदर्शी पदार्थ से दूसरे में जाते समय मुड़ना, जैसे हवा से काँच या पानी में। काँच में प्रकाश की चाल हवा से कम होती है, इसीलिए वह मुड़ता है।
हवा से काँच में जाते समय किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। काँच से हवा में आते समय अभिलंब से दूर। समांतर सतहों वाले काँच के गुटके से निकलकर किरण पहली किरण के समांतर रहती है, बस थोड़ी खिसक जाती है।
जो किरण सतह पर सीधी (अभिलंब के साथ) पड़ती है, वह बिल्कुल नहीं मुड़ती।
प्रयोग 4: उत्तल लेंस और फोकस
उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है। यह समांतर किरणों को अंदर की ओर मोड़कर एक बिंदु, फोकस (F), पर मिला देता है। लेंस से फोकस तक की दूरी फोकस दूरी है। मोटा लेंस ज़्यादा मोड़ता है, इसलिए उसकी फोकस दूरी कम होती है।
घर पर फोकस दूरी ऐसे पता करें: आतिशी शीशे को कागज के ऊपर इस तरह पकड़ें कि धूप का सबसे छोटा, सबसे चमकीला बिंदु बने। लेंस से कागज तक की दूरी लगभग फोकस दूरी है। (बिंदु को कागज पर टिकने न दें, कागज जल सकता है।)
उत्तल लेंस वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है जो परदे पर उतरता है, जैसे कैमरे के अंदर। अवतल लेंस (बीच में पतला) किरणों को फैला देता है।
प्रयोग 5: प्रिज़्म में सफेद प्रकाश
प्रिज़्म काँच का त्रिभुजाकार टुकड़ा है। सफेद प्रकाश एक फलक से घुसते समय मुड़ता है और दूसरे फलक से निकलते समय फिर मुड़ता है। हर रंग अलग मात्रा में मुड़ता है, इसलिए सब रंग फैलकर एक पट्टी बनाते हैं: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, बैंगनी। इसे विक्षेपण कहते हैं। लाल सबसे कम और बैंगनी सबसे ज़्यादा मुड़ता है।
यानी सफेद प्रकाश कई रंगों का मेल है। इंद्रधनुष बारिश की नन्ही बूँदों से बना विक्षेपण है।
करके देखें: रसोई का प्रकाश-प्रयोग
1) खाली कटोरे में सिक्का रखें और पीछे हटें जब तक कटोरे का किनारा उसे छिपा न ले। दोस्त से धीरे-धीरे पानी डलवाएँ। सिक्का दिखने लगेगा: अपवर्तन उसे ऊपर उठा देता है। 2) गिलास के पानी में पेंसिल खड़ी करें और बगल से देखें। वह टेढ़ी दिखती है। 3) 3D में स्लाइडर चलाने से पहले अंदाज़ा लगाएँ कि लाल और बैंगनी किरण कहाँ जाएँगी, फिर जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सीधी रेखा: प्रकाश मोड़ पर नहीं घूमता; वस्तुओं की छाया बनती है
- परावर्तन: आपतन कोण = परावर्तन कोण (अभिलंब से नापे गए)
- समतल दर्पण का प्रतिबिंब: आभासी, सीधा, बराबर आकार का, दर्पण के पीछे उतनी ही दूर
- अपवर्तन: हवा से काँच में अभिलंब की ओर, काँच से हवा में अभिलंब से दूर
- उत्तल लेंस: समांतर किरणें फोकस पर मिलती हैं; मोटा लेंस = कम फोकस दूरी
- प्रिज़्म: सफेद प्रकाश 7 रंगों में बँटता है; लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे ज़्यादा मुड़ता है
हल किए गए उदाहरण
1. एक किरण समतल दर्पण पर अभिलंब से 35° का कोण बनाती है। परावर्तन कोण और आपाती-परावर्तित किरणों के बीच का कोण ज्ञात करें।
परावर्तन कोण = आपतन कोण = 35°। दोनों किरणों के बीच का कोण = 35° + 35° = 70°।
2. आप समतल दर्पण से 1.5 m आगे खड़े हैं। आप अपने प्रतिबिंब से कितनी दूर हैं?
प्रतिबिंब दर्पण के 1.5 m पीछे है। आपसे प्रतिबिंब तक दूरी = 1.5 + 1.5 = 3 m।
3. किरण हवा से काँच में अभिलंब से 30° पर जाती है। काँच के अंदर वह अभिलंब से लगभग 19° बनाती है। वह अभिलंब की ओर मुड़ी या दूर? क्यों?
19° का कोण 30° से छोटा है, इसलिए वह अभिलंब की ओर मुड़ी। काँच में प्रकाश धीमा हो जाता है और धीमे पदार्थ में जाने वाली किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
4. आतिशी शीशे को कागज से 10 cm ऊपर रखने पर धूप का सबसे छोटा चमकीला बिंदु बनता है। उसकी फोकस दूरी क्या है? और मोटे लेंस की फोकस दूरी कैसी होगी?
धूप की किरणें लगभग समांतर होती हैं, इसलिए बिंदु फोकस पर है। फोकस दूरी लगभग 10 cm है। मोटा लेंस ज़्यादा मोड़ता है, इसलिए उसकी फोकस दूरी 10 cm से कम होगी।
आम गलतियाँ
- कोण दर्पण की सतह से नापना। हमेशा अभिलंब (सतह से 90° की रेखा) से नापें।
- यह सोचना कि समतल दर्पण का प्रतिबिंब दर्पण पर बनता है। वह दर्पण के पीछे उतनी ही दूर दिखता है जितनी दूर वस्तु आगे है।
- यह मान लेना कि प्रिज़्म प्रकाश में रंग भरता है। वह सिर्फ़ उन रंगों को अलग करता है जो सफेद प्रकाश में पहले से हैं।
- यह सोचना कि काँच में जाते और निकलते समय प्रकाश एक ही तरफ़ मुड़ता है। अंदर जाते समय अभिलंब की ओर, बाहर आते समय उससे दूर।