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तरंगाग्र और हाइगेंस का सिद्धांत

तरंगाग्र वह सतह है जिस पर तरंग के सभी बिंदु समान कला में हों। बिंदु स्रोत से गोलीय तरंगाग्र, दूर स्रोत से समतल तरंगाग्र; किरणें तरंगाग्र के लंबवत् होती हैं। हाइगेंस सिद्धांत: तरंगाग्र का हर बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत है, और इनका अग्र आवरण नया तरंगाग्र है। इससे परावर्तन में i = r और अपवर्तन में sin i / sin r = v₁/v₂ = n₂/n₁ सिद्ध होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक छोटा दीपक हर दिशा में प्रकाश भेजता है। नीले वृत्त उन बिंदुओं को जोड़ते हैं जहाँ तरंग समान कला में है। ये वृत्त (3D में गोले) गोलीय तरंगाग्र हैं।
  2. अब दीपक बहुत दूर है। बहुत बड़े गोले का छोटा हिस्सा सपाट दिखता है। इसलिए तरंगाग्र सीधे हैं: समतल तरंगाग्र। किरणें (नारंगी) उनके लंबवत् हैं।
  3. हाइगेंस का विचार: तरंगाग्र का हर बिंदु अपनी छोटी तरंगिका भेजता है। समय t बाद सभी तरंगिकाओं को छूती रेखा खींचें। वही नया तरंगाग्र है।
  4. परावर्तन: तरंगाग्र का बिंदु A पहले दर्पण छूता है, B बाद में। A की तरंगिका उतनी ही बढ़ती है जितना B चलता है। दोनों त्रिभुज बराबर, इसलिए कोण i = कोण r।
  5. अपवर्तन: माध्यम 2 में प्रकाश धीमा है, इसलिए A की तरंगिका छोटी है। नया तरंगाग्र मुड़ जाता है। sin i / sin r = v₁ / v₂।
  6. अब आप खेलें। दृश्य चुनें, समय t चलाएँ, कोण i और n₂ बदलें। तरंगाग्र को मुड़ता देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या तरंगाग्र प्रकाश की कोई असली रेखा है?

यह समान कला वाले बिंदुओं को जोड़ने वाली काल्पनिक सतह है, जैसे लहरों के सारे शिखर जोड़ना। इससे तरंग की चाल समझ आती है।

सूर्य का प्रकाश समतल तरंग के रूप में क्यों आता है?

सूर्य के तरंगाग्र विशाल गोले हैं। पृथ्वी तक पहुँचने वाला छोटा भाग इतना कम मुड़ा है कि लगभग सपाट है।

तरंगिकाएँ पीछे की ओर क्यों नहीं जातीं?

हाइगेंस ने केवल आगे वाला भाग माना। बाद में विस्तृत तरंग सिद्धांत ने दिखाया कि पीछे वाली तरंगें कट जाती हैं।

परावर्तन में BC = AE क्यों?

B और A की तरंगिका दोनों एक ही माध्यम में एक ही समय तक चलते हैं, इसलिए समान दूरी तय करते हैं।

काँच में घुसते समय तरंगाग्र क्यों मुड़ता है?

जो भाग पहले घुसता है वह धीमा हो जाता है, बाकी अभी तेज़ है। एक ओर पीछे रह जाती है और तरंगाग्र घूम जाता है, जैसे कतार में चलते बच्चों का एक सिरा कीचड़ में पहुँचे तो कतार मुड़ जाती है।

क्या काँच में रंग (आवृत्ति) बदलता है?

नहीं। आवृत्ति स्रोत तय करता है। काँच में चाल घटती है, इसलिए तरंगदैर्ध्य छोटी होती है, पर रंग वही रहता है।

तरंगाग्र क्या है?

प्रकाश एक तरंग है। किसी पल, उन सभी बिंदुओं को जोड़ें जहाँ तरंग समान कला में है (जैसे सभी शिखर)। जो सतह बनती है वह तरंगाग्र है। तरंगाग्र तरंग की चाल से आगे बढ़ता है।

किरण वह दिशा है जिसमें तरंग चलती है। यह हमेशा तरंगाग्र के लंबवत् होती है। समांतर किरणें = समतल तरंगाग्र; फैलती किरणें = गोलीय तरंगाग्र।

हाइगेंस का सिद्धांत

क्रिस्टियान हाइगेंस (1678) ने यह जानने का आसान तरीका दिया कि समय t बाद तरंगाग्र कहाँ होगा:

  1. तरंगाग्र का हर बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का नया स्रोत है। ये तरंग की चाल से आगे की ओर फैलती हैं।
  2. समय t बाद हर तरंगिका की त्रिज्या v t है। आगे की ओर इन सबको छूने वाली सतह (अग्र आवरण) नया तरंगाग्र है।

पीछे की ओर तरंग क्यों नहीं? हाइगेंस ने उसे छोड़ दिया; बाद के सिद्धांत (फ्रेनेल, किरखॉफ़) ने दिखाया कि पीछे वाली तरंग कट जाती है।

समतल तरंग का परावर्तन: i = r की उपपत्ति

समतल तरंगाग्र AB दर्पण MN से i कोण पर मिलता है। सिरा A पहले दर्पण छूता है।

चरण 1

B को दर्पण तक BC दूरी तय करनी है। इसमें समय t लगता है, BC = v t।

चरण 2

इसी समय में A की तरंगिका त्रिज्या AE = v t तक बढ़ती है (वही माध्यम, वही चाल)।

चरण 3

C से इस तरंगिका पर स्पर्श रेखा CE खींचें। CE परावर्तित तरंगाग्र है।

चरण 4

त्रिभुज ABC और CEA दोनों समकोण (B और E पर) हैं, AC उभयनिष्ठ है, और BC = AE। इसलिए ये सर्वांगसम हैं, जिससे कोण BAC = कोण ECA।

आपतित तरंगाग्र और दर्पण के बीच कोण i है; परावर्तित तरंगाग्र और दर्पण के बीच r। अतः i = r। दोनों किरणें और अभिलंब एक तल में हैं — दूसरा नियम।

समतल तरंग का अपवर्तन: स्नेल नियम की उपपत्ति

माध्यम 1 (चाल v₁) में समतल तरंगाग्र AB, माध्यम 2 (चाल v₂) की सतह से i कोण पर मिलता है।

चरण 1

सिरा B माध्यम 1 में BC = v₁ t चलकर सतह पर पहुँचता है।

चरण 2

इस बीच A की तरंगिका माध्यम 2 में AE = v₂ t चलती है।

चरण 3

स्पर्श रेखा CE अपवर्तित तरंगाग्र है। यह सतह से r कोण बनाती है।

चरण 4

त्रिभुज ABC में: sin i = BC/AC = v₁t/AC। त्रिभुज AEC में: sin r = AE/AC = v₂t/AC।

चरण 5

sin i / sin r = v₁ / v₂। n = c/v से v₁/v₂ = n₂/n₁, अतः n₁ sin i = n₂ sin r — स्नेल का नियम।

v₂ < v₁ (सघन माध्यम) हो तो r < i: किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। दोनों माध्यमों में आवृत्ति वही रहती है (स्रोत तय करता है), इसलिए तरंगदैर्ध्य बदलती है: λ₂ = λ₁ v₂/v₁।

सघन से विरल, और क्या नहीं बदलता

प्रकाश धीमे (सघन) से तेज़ माध्यम में जाए तो माध्यम 2 में A की तरंगिका BC से बड़ी होती है, इसलिए r > i। जब A की तरंगिका इतनी बड़ी हो कि C से स्पर्श रेखा न खिंच सके (v₂t > AC), तो अपवर्तित तरंगाग्र नहीं बनता — यही पूर्ण आंतरिक परावर्तन है, और सीमा से sin C = v₁/v₂ मिलता है।

तरंगाग्र लेंस और दर्पण को भी समझाते हैं: उत्तल लेंस समतल तरंगाग्र के बीच के हिस्से को (मोटे काँच के कारण) अधिक धीमा करता है, इसलिए तरंगाग्र मुड़कर फोकस की ओर अभिसरित होता है।

करके देखें: थाली में लहरें

स्टील की सपाट थाली में थोड़ा पानी भरें। बीच में उँगली से छुएँ: वृत्त फैलते हैं — वृत्ताकार तरंगाग्र। अब एक किनारे पर पैमाना डुबोकर धीरे धकेलें: सीधी लहरें — समतल तरंगाग्र। आधे हिस्से में मोटी काँच की प्लेट रखकर पानी उथला करें: लहरें धीमी होकर पार करते समय मुड़ती हैं, अपवर्तन की तरह। 3D में समय स्लाइडर चलाएँ और तरंगिकाओं से नया तरंगाग्र बनता देखें।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. (a) छोटे बल्ब, (b) प्रकाशित पतली झिरी, (c) सूर्य से किस आकार का तरंगाग्र आता है?

चरण 1: बिंदु स्रोत → गोलीय। चरण 2: रेखीय स्रोत (झिरी) → बेलनाकार। चरण 3: सूर्य बहुत दूर है, हम तक पहुँचने वाला भाग समतल तरंगाग्र है।

2. हवा में 600 nm तरंगदैर्ध्य का प्रकाश पानी (n = 4/3) में जाता है। पानी में चाल, तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति बताएँ।

चरण 1: आवृत्ति = c/λ = 3 × 10⁸ / 600 × 10⁻⁹ = 5 × 10¹⁴ Hz (पानी में भी वही)। चरण 2: v = c/n = 2.25 × 10⁸ मी/से। चरण 3: λ = 600 × 3/4 = 450 nm।

3. हवा में समतल तरंग काँच (n = 1.5) पर 60° पर पड़ती है। तरंगाग्र परिणाम से अपवर्तन कोण बताएँ।

चरण 1: sin i / sin r = n₂/n₁ = 1.5। चरण 2: sin r = 0.866/1.5 = 0.577। चरण 3: r ≈ 35.3°।

4. अपवर्तन की हाइगेंस रचना में हवा में BC = 6 सेमी है। उतने ही समय में काँच (n = 1.5) में A की तरंगिका कितनी चलती है?

चरण 1: AE/BC = v₂/v₁ = 1/1.5। चरण 2: AE = 4 सेमी। काँच में तरंगिका छोटी है, इसलिए तरंगाग्र मुड़ता है।

5. प्रकाश काँच (v = 2 × 10⁸ मी/से) से पानी (v = 2.25 × 10⁸ मी/से) में जाता है। तरंगाग्र से क्रांतिक कोण बताएँ।

चरण 1: sin C = v₁/v₂ (धीमे से तेज़)। चरण 2: = 2/2.25 = 0.889। चरण 3: C ≈ 62.7°।

6. उत्तल लेंस पर समतल तरंगाग्र पड़ता है। हाइगेंस के विचार से बताएँ कि कैसा तरंगाग्र निकलता है।

चरण 1: तरंगाग्र का बीच वाला भाग सबसे मोटे काँच से गुज़रता है और सबसे अधिक धीमा होता है। चरण 2: किनारे पतले काँच से निकलकर आगे हो जाते हैं। चरण 3: तरंगाग्र एक बिंदु की ओर मुड़ा गोलीय बन जाता है — फोकस पर अभिसरित होता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. तरंगाग्र किसकी सतह है?
2. बहुत दूर के तारे से प्रकाश पृथ्वी पर पहुँचता है:
3. हाइगेंस सिद्धांत के अनुसार तरंगाग्र का हर बिंदु किसका स्रोत है?
4. तरंगाग्र से sin i / sin r बराबर है:
5. प्रकाश सघन माध्यम में जाए तो क्या नहीं बदलता?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरल शब्दों में हाइगेंस का सिद्धांत क्या है?

तरंगाग्र का हर बिंदु एक छोटे नए स्रोत की तरह तरंगिकाएँ भेजता है। थोड़ी देर बाद इन सबको छूने वाली सतह नया तरंगाग्र है।

तरंगाग्र के प्रकार कौन-से हैं?

गोलीय (बिंदु स्रोत से), बेलनाकार (झिरी जैसे रेखीय स्रोत से) और समतल (बहुत दूर के स्रोत से)।

हाइगेंस सिद्धांत स्नेल का नियम कैसे सिद्ध करता है?

एक ही समय में तरंगाग्र का सिरा पहले माध्यम में v₁t और A की तरंगिका दूसरे माध्यम में v₂t चलती है। समकोण त्रिभुजों से sin i/sin r = v₁/v₂ = n₂/n₁ मिलता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12प्रकाशिकी

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