AC जनित्र: सिद्धांत और भाग
AC जनित्र (प्रत्यावर्तित्र) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर चलता है: चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली घुमाने से उसका फ्लक्स बदलता है और emf प्रेरित होता है।
मुख्य भाग
- आर्मेचर: नरम लोहे के क्रोड पर लिपटी कई फेरों की कुंडली।
- क्षेत्र चुंबक: मज़बूत N और S ध्रुव जो स्थिर क्षेत्र B देते हैं।
- सर्पी वलय: कुंडली के साथ घूमने वाले दो धातु के छल्ले, हर सिरे के लिए एक।
- ब्रश: कार्बन के टुकड़े जो वलयों पर दबे रहते हैं और धारा बाहर परिपथ में ले जाते हैं।
AC जनित्र का emf
कुंडली (N फेरे, क्षेत्रफल A) कोणीय चाल ω से घूमे। समय t पर अभिलंब B से कोण θ = ωt बनाता है। फ्लक्स: Φ = N B A cos ωt।
फैराडे के नियम से e = −dΦ/dt = N B A ω sin ωt। शिखर emf e₀ = NBAω।
- कुंडली का मुँह क्षेत्र के लंबवत (θ = 0°): फ्लक्स अधिकतम, emf = 0।
- कुंडली का तल क्षेत्र के समांतर (θ = 90°): फ्लक्स 0, emf अधिकतम। यहाँ भुजाएँ क्षेत्र रेखाओं को सबसे तेज़ काटती हैं।
एक पूरे चक्कर में emf दो बार दिशा बदलता है। आवृत्ति f = ω/2π।
ट्रांसफ़ॉर्मर: सिद्धांत और बनावट
ट्रांसफ़ॉर्मर AC वोल्टता को बढ़ाता या घटाता है। यह अन्योन्य प्रेरण पर चलता है।
एक पटलित नरम लोहे के क्रोड पर दो कुंडलियाँ लिपटी होती हैं: प्राथमिक (Np फेरे, इनपुट से जुड़ी) और द्वितीयक (Ns फेरे, लोड से जुड़ी)। प्राथमिक की AC क्रोड में बदलता फ्लक्स बनाती है। वही फ्लक्स द्वितीयक से गुजरकर उसमें emf प्रेरित करता है।
ट्रांसफ़ॉर्मर स्थिर DC पर काम नहीं करता, क्योंकि स्थिर DC से फ्लक्स नहीं बदलता।
फेरों का अनुपात: उच्चायी और अपचायी
दोनों कुंडलियों के हर फेरे में उतना ही emf, dΦ/dt, बनता है। इसलिए Vs/Vp = Ns/Np।
आदर्श ट्रांसफ़ॉर्मर (कोई हानि नहीं) में इनपुट शक्ति = आउटपुट शक्ति: Vp Ip = Vs Is, तो Is/Ip = Np/Ns।
- उच्चायी (स्टेप-अप): Ns > Np। वोल्टता बढ़े, धारा घटे।
- अपचायी (स्टेप-डाउन): Ns < Np। वोल्टता घटे, धारा बढ़े।
ट्रांसफ़ॉर्मर ऊर्जा नहीं बनाता। वोल्टता जितने गुना बढ़ाता है, धारा उतने गुना घटाता है।
ऊर्जा हानियाँ और दक्षता
दक्षता η = आउटपुट शक्ति / इनपुट शक्ति × 100%। असली ट्रांसफ़ॉर्मर 95–99% तक पहुँचते हैं। हानियाँ:
- ताम्र हानि: कुंडलियों में I²R ऊष्मा। मोटे ताँबे के तार से घटती है।
- भंवर धारा हानि: लोहे के क्रोड में घूमती धाराएँ। पटलित क्रोड (पतली विद्युतरोधी पट्टियाँ) से घटती है।
- शैथिल्य हानि: क्रोड के बार-बार चुंबकित होने में ऊर्जा हानि। नरम लोहे से घटती है।
- फ्लक्स क्षरण: प्राथमिक का कुछ फ्लक्स द्वितीयक तक नहीं पहुँचता। कुंडलियों को एक के ऊपर एक लपेटकर घटाते हैं।
उच्च वोल्टता पर संचरण क्यों?
उतनी ही शक्ति P = VI के लिए ऊँची V का मतलब कम I। तारों में हानि I²R बहुत कम हो जाती है। इसीलिए बिजली 220 kV या 400 kV पर भेजी जाती है और घरों के पास घटाई जाती है।
करके देखें: एक प्रयोग
करके देखें: 3D में Vp = 220 V और Np = 5 रखें। Ns = 10 और फिर Ns = 2 के लिए Vs का अनुमान लगाइए। रीडआउट में जाँचें (440 V और 88 V)। जनित्र में रोकें, फिर "कुंडली का कोण" 0° से 90° तक खिसकाएँ। देखें e कहाँ 0 है और कहाँ सबसे बड़ा। घर पर: फ़ोन चार्जर का लेबल पढ़ें। उस पर इनपुट 100–240 V AC और आउटपुट 5 V लिखा है: यह अपचायी है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- घूमती कुंडली का फ्लक्स: Φ = N B A cos ωt
- जनित्र का emf: e = N B A ω sin ωt; शिखर e₀ = NBAω
- ω = 2πf
- ट्रांसफ़ॉर्मर: Vs/Vp = Ns/Np
- आदर्श ट्रांसफ़ॉर्मर: Vp Ip = Vs Is ⇒ Is/Ip = Np/Ns
- दक्षता: η = (Vs Is)/(Vp Ip) × 100%
- तारों में हानि: P_hani = I² R_line
हल किए गए उदाहरण
1. 100 फेरों, 0.05 m² क्षेत्रफल की कुंडली 0.2 T क्षेत्र में 50 चक्कर/s से घूमती है। शिखर emf ज्ञात करें।
ω = 2π × 50 = 314 rad/s। e₀ = NBAω = 100 × 0.2 × 0.05 × 314 = 314 V।
2. ऊपर के जनित्र में, जब कुंडली (मुँह B के लंबवत वाली स्थिति से) 30° घूम चुकी हो तब emf?
e = e₀ sin 30° = 314 × 0.5 = 157 V।
3. एक जनित्र 25 चक्कर/s पर 200 V शिखर emf देता है। 50 चक्कर/s पर शिखर emf?
e₀ ∝ ω। चाल दोगुनी तो e₀ = 400 V। आवृत्ति भी दोगुनी होकर 50 Hz।
4. ट्रांसफ़ॉर्मर में 200 प्राथमिक और 1000 द्वितीयक फेरे हैं। इनपुट 230 V है। आउटपुट वोल्टता? उच्चायी या अपचायी?
Vs = 230 × 1000/200 = 1150 V। उच्चायी (Ns > Np)।
5. अपचायी ट्रांसफ़ॉर्मर 220 V को 11 V करता है। प्राथमिक में 2000 फेरे हैं। द्वितीयक फेरे और धाराओं का अनुपात?
Ns = 2000 × 11/220 = 100 फेरे। Is/Ip = Np/Ns = 20, यानी द्वितीयक धारा प्राथमिक की 20 गुना।
6. आदर्श ट्रांसफ़ॉर्मर 220 V मेन से लोड को 11 V, 4 A देता है। प्राथमिक धारा?
Vp Ip = Vs Is ⇒ Ip = 11 × 4 / 220 = 0.2 A।
7. ट्रांसफ़ॉर्मर 220 V पर 5 A लेता है और 500 V पर 2 A देता है। दक्षता?
इनपुट = 1100 W। आउटपुट = 1000 W। η = 1000/1100 × 100 ≈ 90.9%।
8. 100 kW शक्ति 5 Ω प्रतिरोध के तारों से भेजी जाती है। हानि ज्ञात करें जब (a) 1000 V पर, (b) 20000 V पर भेजें।
(a) I = 100 A, हानि = 100² × 5 = 50 kW (आधी शक्ति!)। (b) I = 5 A, हानि = 25 × 5 = 125 W। उच्च वोल्टता से हानि 400 गुना घटी।
आम गलतियाँ
- कहना कि फ्लक्स अधिकतम होने पर emf अधिकतम। emf तब अधिकतम है जब फ्लक्स शून्य हो (कुंडली का तल B के समांतर), क्योंकि वहाँ फ्लक्स सबसे तेज़ बदलता है।
- सोचना कि ट्रांसफ़ॉर्मर बैटरी से चलता है। स्थिर DC से फ्लक्स नहीं बदलता, तो द्वितीयक में emf नहीं।
- सोचना कि उच्चायी ट्रांसफ़ॉर्मर शक्ति बढ़ाता है। वह वोल्टता बढ़ाता पर धारा घटाता है; शक्ति वही या थोड़ी कम रहती है।
- Is/Ip = Ns/Np लिखना। धारा उल्टी चलती है: Is/Ip = Np/Ns।