अपवर्तन और स्नेल का नियम
अपवर्तन यानी एक माध्यम से दूसरे में जाते समय प्रकाश का मुड़ना, क्योंकि उसकी चाल बदलती है। अपवर्तनांक n बताता है कि उस माध्यम में प्रकाश कितना धीमा है: n = c / v। हवा n ≈ 1, पानी 1.33, काँच लगभग 1.5, हीरा 2.42।
स्नेल का नियम: n₁ sin i = n₂ sin r। i पहले माध्यम में और r दूसरे में कोण है, दोनों अभिलंब से। आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- विरल से सघन (हवा → काँच): अभिलंब की ओर (r < i)।
- सघन से विरल (काँच → हवा): अभिलंब से दूर (r > i)।
माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का आपेक्षिक अपवर्तनांक n₂₁ = n₂/n₁ = v₁/v₂। ध्यान दें n₁₂ = 1/n₂₁।
आभासी गहराई
पानी भरी बाल्टी की तली में रखा सिक्का ऊपर उठा दिखता है। सिक्के से आती किरणें पानी से निकलते समय अभिलंब से दूर मुड़ती हैं, और आँख उन्हें पीछे ऊँचे बिंदु तक ले जाती है। ठीक ऊपर से देखने पर:
n = वास्तविक गहराई / आभासी गहराई
सिक्का d(1 − 1/n) ऊपर उठा दिखता है। पानी में 40 सेमी गहरा सिक्का लगभग 30 सेमी गहरा दिखता है। इसी मोड़ से सूरज असली सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त के 2 मिनट बाद तक दिखता है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन
सघन से विरल माध्यम में जाते समय r, i से बड़ा होता है। i बढ़ाने पर r पहले 90° पर पहुँचता है। जिस i पर ऐसा होता है, वह क्रांतिक कोण C है। स्नेल के नियम में r = 90° रखें (n₁ = n, n₂ = 1):
sin C = 1/n (सामान्य रूप में sin C = n₂/n₁)
i > C हो तो अपवर्तित किरण बन ही नहीं सकती, पूरा प्रकाश सघन माध्यम में लौट आता है। यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) है। दो शर्तें:
- प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाए।
- आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो।
काँच (n = 1.5) के लिए C ≈ 41.8°, पानी के लिए ≈ 48.8°, हीरे के लिए ≈ 24.4°। TIR 100% प्रकाश लौटाता है, किसी भी चाँदी लगे दर्पण से बेहतर।
प्रकाशीय तंतु
प्रकाशीय तंतु काँच या प्लास्टिक का बहुत पतला धागा है। इसके क्रोड (core) का अपवर्तनांक चारों ओर के आवरण (cladding) से अधिक होता है। एक सिरे से घुसा प्रकाश क्रोड-आवरण की दीवार पर C से बड़े कोण पर टकराता है, बार-बार TIR होता है और दूसरे सिरे से लगभग बिना हानि निकलता है, तंतु धीरे मुड़ा हो तब भी।
उपयोग: इंटरनेट और फ़ोन सिग्नल, अस्पताल में एंडोस्कोप, सजावटी लैंप। TIR के अन्य उपयोग: हीरे की चमक, दूरबीन और पेरिस्कोप में पूर्ण परावर्ती प्रिज़्म (प्रकाश को 90° या 180° मोड़ना), मरीचिका।
प्रिज़्म से अपवर्तन
प्रिज़्म में दो समतल अपवर्तक सतहें प्रिज़्म कोण A पर मिलती हैं। किरण i कोण पर आती है, r₁ पर मुड़ती है, दूसरी सतह पर r₂ से मिलती है और e कोण पर निकलती है। किरण का कुल मुड़ना विचलन कोण δ है।
चरण 1: अंदर के कोण
दोनों अभिलंब और प्रिज़्म की सतहें एक चतुर्भुज बनाती हैं, जिससे r₁ + r₂ = A।
चरण 2: विचलन
पहली सतह पर किरण (i − r₁) और दूसरी पर (e − r₂) मुड़ती है। δ = (i − r₁) + (e − r₂) = i + e − (r₁ + r₂), यानी δ = i + e − A।
चरण 3: न्यूनतम विचलन
i बढ़ाने पर δ पहले घटता है, सबसे छोटे मान δm पर पहुँचता है, फिर बढ़ता है। δm पर किरण प्रिज़्म में सममित चलती है: i = e और r₁ = r₂ = A/2। तब i = (A + δm)/2, इसलिए
n = sin((A + δm)/2) / sin(A/2)
पतला प्रिज़्म
छोटे A (कुछ डिग्री) के लिए sin x ≈ x, इसलिए δ = (n − 1)A। पतले प्रिज़्म में विचलन i पर निर्भर नहीं।
करके देखें: प्रकाश गायब करें
पारदर्शी गिलास में पानी भरें और उसे आँख से थोड़ा ऊपर पकड़ें। नीचे से, किनारे से पानी की सतह देखें। तिरछे कोण पर सतह चाँदी जैसी चमकती है: यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन है। या अंधेरे कमरे में बोतल के छेद से गिरती पानी की धार में मोबाइल टॉर्च डालें: प्रकाश मुड़ी धार के साथ चलता है, तंतु की तरह। 3D में पहले अनुमान लगाएँ कि किस कोण पर किरण बाहर निकलना बंद करेगी, फिर जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n = c / v
- n₁ sin i = n₂ sin r
- n = वास्तविक गहराई / आभासी गहराई
- sin C = 1/n (sin C = n₂/n₁)
- r₁ + r₂ = A
- δ = i + e − A
- n = sin((A + δm)/2) / sin(A/2)
- पतला प्रिज़्म: δ = (n − 1)A
हल किए गए उदाहरण
1. प्रकाश हवा से काँच (n = 1.5) में 45° पर जाता है। अपवर्तन कोण बताएँ।
चरण 1: 1 × sin 45° = 1.5 × sin r। चरण 2: sin r = 0.707/1.5 = 0.471। चरण 3: r ≈ 28.1°। अभिलंब की ओर मुड़ती है।
2. पानी (n = 1.33) में प्रकाश की चाल बताएँ।
चरण 1: v = c/n। चरण 2: v = 3 × 10⁸ / 1.33। चरण 3: v ≈ 2.26 × 10⁸ मी/से।
3. 24 सेमी गहरे पानी (n = 4/3) की तली में सिक्का है। ऊपर से कितना गहरा दिखेगा?
चरण 1: आभासी गहराई = वास्तविक गहराई / n। चरण 2: 24 ÷ (4/3) = 18 सेमी। चरण 3: सिक्का 6 सेमी ऊपर उठा दिखता है।
4. अपवर्तनांक 1.5 वाले काँच का क्रांतिक कोण बताएँ।
चरण 1: sin C = 1/1.5 = 0.667। चरण 2: C ≈ 41.8°। काँच के अंदर 41.8° से बड़े कोण पर टकराने वाली किरण पूरी लौटती है।
5. किसी माध्यम का क्रांतिक कोण 30° है। उसका अपवर्तनांक और उसमें प्रकाश की चाल बताएँ।
चरण 1: n = 1/sin C = 1/0.5 = 2। चरण 2: v = c/n = 1.5 × 10⁸ मी/से।
6. प्रकाश काँच (n = 1.5) से पानी (n = 1.33) में जाता है। काँच-पानी सतह पर क्रांतिक कोण बताएँ।
चरण 1: sin C = n₂/n₁ = 1.33/1.5 = 0.887। चरण 2: C ≈ 62.5°। यह काँच-हवा से बड़ा है क्योंकि पानी का n काँच के करीब है।
7. 60° कोण वाला प्रिज़्म 30° न्यूनतम विचलन देता है। अपवर्तनांक बताएँ।
चरण 1: n = sin((A + δm)/2) / sin(A/2)। चरण 2: = sin 45° / sin 30° = 0.707/0.5। चरण 3: n ≈ 1.414 (= √2)।
8. प्रिज़्म (A = 60°, n = √2) पर न्यूनतम विचलन की स्थिति में r₁, आपतन कोण और δm बताएँ।
चरण 1: δm पर r₁ = r₂ = A/2 = 30°। चरण 2: sin i = √2 × 0.5 = 0.707, i = 45°। चरण 3: i = e, इसलिए δm = 2i − A = 30°।
9. 5° कोण और n = 1.6 वाला पतला प्रिज़्म हवा में है। विचलन बताएँ। पानी (n = 1.33) में डुबोने पर?
चरण 1: हवा में δ = (n − 1)A = 0.6 × 5° = 3°। चरण 2: पानी में आपेक्षिक n = 1.6/1.33 ≈ 1.2। चरण 3: δ = 0.2 × 5° = 1°। पानी में विचलन घट जाता है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि हवा से काँच में जाते समय भी TIR हो सकता है। इसके लिए प्रकाश सघन से विरल में जाना चाहिए।
- कोण सतह से नापना, अभिलंब से नहीं।
- 60° जैसे बड़े प्रिज़्म के लिए δ = (n − 1)A लगाना। यह केवल पतले प्रिज़्म के लिए है।
- भूल जाना कि न्यूनतम विचलन पर i = e और r₁ = r₂ = A/2।