धातु में विद्युत धारा क्या है?
आवेश के बहने की दर को धारा कहते हैं: I = q / t. मात्रक ऐम्पियर (A)। 1 A यानी हर सेकंड 1 कूलॉम आवेश गुज़रना।
धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो किसी एक परमाणु से बँधे नहीं होते। जिन परमाणुओं ने इलेक्ट्रॉन छोड़ा, वे स्थिर धन आयन बन जाते हैं। ताँबे के हर घन मीटर में लगभग 8.5 × 1028 मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। इस संख्या को n (संख्या घनत्व) कहते हैं।
धारा की दिशा वह मानी जाती है जिधर धन आवेश चलता। इलेक्ट्रॉन ऋण हैं, इसलिए वे धारा की उल्टी दिशा में चलते हैं।
धारा घनत्व j = I / A, यानी इकाई क्षेत्रफल से धारा (मात्रक A/m²)। इसकी दिशा होती है, यह सदिश है।
बेतरतीब गति: बिना सेल के धारा क्यों नहीं
कमरे के ताप पर मुक्त इलेक्ट्रॉन लगभग 105 m/s की चाल से बेतरतीब दिशाओं में चलते हैं और आयनों से टकराकर दिशा बदलते रहते हैं। दो टक्करों के बीच के औसत समय को विश्रांति काल τ कहते हैं (ताँबे में लगभग 10−14 s)।
दिशाएँ बेतरतीब हैं, इसलिए सब इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग शून्य है। किसी पटल से जितने इधर जाते हैं, उतने ही उधर। कुल धारा शून्य।
अपवाह वेग: धीमा औसत खिसकाव
क्षेत्र E लगने पर हर इलेक्ट्रॉन पर बल eE लगता है और त्वरण a = eE/m (E के उल्टी दिशा में)। दो टक्करों के बीच उसे अतिरिक्त वेग a·t मिलता है। सब इलेक्ट्रॉनों का औसत लें तो यह a·τ होता है।
अपवाह वेग = क्षेत्र लगाने पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग:
vd = eEτ / m (दिशा: E के उल्टी)
यह बहुत छोटा होता है, लगभग 10−4 से 10−3 m/s.
I = n e A vd की व्युत्पत्ति
क्षेत्रफल A वाला तार लो। समय Δt में हर इलेक्ट्रॉन vdΔt दूरी खिसकता है। तो लंबाई vdΔt वाले बेलन के सारे इलेक्ट्रॉन पटल पार कर लेते हैं।
- बेलन का आयतन = A vd Δt
- इलेक्ट्रॉनों की संख्या = n A vd Δt
- गुज़रा आवेश = e n A vd Δt
- धारा = आवेश ÷ समय: I = n e A vd
A से भाग दो: j = n e vd. vd = eEτ/m रखो तो j = (ne²τ/m)E, यानी ओम का नियम अपने मूल रूप में: j = σE.
गतिशीलता (Mobility)
गतिशीलता μ = इकाई विद्युत क्षेत्र में अपवाह वेग:
μ = vd / E = eτ / m
SI मात्रक: m²V−1s−1. इसे हमेशा धनात्मक लेते हैं। τ बड़ा (कम टक्करें) तो गतिशीलता ज़्यादा। अर्धचालकों में इलेक्ट्रॉन और होल की गतिशीलता अलग होती है। गतिशीलता से: I = n e A μ E और σ = n e μ.
इलेक्ट्रॉन इतने धीमे, फिर बल्ब तुरंत क्यों जलता है?
तार पहले से मुक्त इलेक्ट्रॉनों से भरा है। स्विच बंद होते ही विद्युत क्षेत्र लगभग प्रकाश की चाल से पूरे तार में फैल जाता है। बल्ब के तंतु समेत हर जगह के इलेक्ट्रॉन एक साथ खिसकने लगते हैं। किसी इलेक्ट्रॉन को स्विच से बल्ब तक जाना नहीं पड़ता।
करके देखो: 3D में और घर पर
3D में (पहले अनुमान, फिर जाँच): E = 1 फिर E = 2 करो। स्लाइडर हिलाने से पहले सोचो vd का क्या होगा। फिर E वही रखकर A = 3 करो और धारा का अनुमान लगाओ।
घर पर: मेज़ पर 10 सिक्के एक-दूसरे से सटाकर लाइन में रखो। एक छोर का सिक्का हल्के से धकेलो। दूसरे छोर का सिक्का लगभग तुरंत हिलता है, पर हर सिक्का ज़रा-सा ही खिसका। यही बात इलेक्ट्रॉनों पर लागू है।
बोर्ड परीक्षा में क्या पूछा जाता है
अपवाह वेग और विश्रांति काल की परिभाषा (1–2 अंक); I = n e A vd या j = σE की व्युत्पत्ति (3 अंक); vd और μ पर आंकिक प्रश्न; लंबाई या वोल्टेज दोगुना करने पर अपवाह वेग पर असर।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I = q / t
- j = I / A
- vd = eEτ / m
- I = n e A vd
- j = n e vd = σE, σ = ne²τ/m
- μ = vd / E = eτ / m
- σ = n e μ
हल किए गए उदाहरण
1. किसी तार से 1 मिनट में 120 C आवेश गुज़रता है। धारा ज्ञात करो।
चरण 1: t = 60 s. चरण 2: I = q/t = 120/60. उत्तर: I = 2 A.
2. 1.6 A धारा में हर सेकंड कितने इलेक्ट्रॉन गुज़रते हैं? (e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C)
चरण 1: हर सेकंड आवेश = 1.6 C. चरण 2: संख्या = q/e = 1.6 / 1.6 × 10⁻¹⁹. उत्तर: 10¹⁹ इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड।
3. 1.0 × 10⁻⁶ m² क्षेत्रफल वाले ताँबे के तार में 1.7 A धारा है। n = 8.5 × 10²⁸ m⁻³. अपवाह वेग ज्ञात करो।
चरण 1: vd = I/(n e A). चरण 2: n e A = 8.5 × 10²⁸ × 1.6 × 10⁻¹⁹ × 10⁻⁶ = 1.36 × 10⁴. चरण 3: vd = 1.7 / 1.36 × 10⁴ = 1.25 × 10⁻⁴ m/s, यानी लगभग 0.125 mm/s.
4. ऊपर वाले तार में एक इलेक्ट्रॉन को 1 m खिसकने में कितना समय लगेगा?
चरण 1: t = दूरी / vd = 1 / 1.25 × 10⁻⁴. चरण 2: t = 8000 s ≈ 2.2 घंटे। अपवाह बहुत धीमा है, फिर भी बल्ब तुरंत जलता है।
5. 0.5 V/m क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन 2 × 10⁻⁴ m/s से खिसकते हैं। गतिशीलता और विश्रांति काल ज्ञात करो। (m = 9.1 × 10⁻³¹ kg)
चरण 1: μ = vd/E = 2 × 10⁻⁴ / 0.5 = 4 × 10⁻⁴ m²V⁻¹s⁻¹. चरण 2: τ = μm/e = 4 × 10⁻⁴ × 9.1 × 10⁻³¹ / 1.6 × 10⁻¹⁹. चरण 3: τ ≈ 2.3 × 10⁻¹⁵ s.
6. तार को खींचकर लंबाई दोगुनी कर दी, विभवांतर वही रखा। अपवाह वेग पर क्या असर?
चरण 1: E = V/l, लंबाई दोगुनी तो E आधा। चरण 2: vd = eEτ/m, यानी vd ∝ E. चरण 3: vd आधा हो जाता है। (क्षेत्रफल भी आधा, इसलिए धारा एक-चौथाई, पर vd सिर्फ़ E पर निर्भर है।)
7. एक ही पदार्थ के दो तार, क्षेत्रफल A और 2A, सिरे से सिरा जुड़े हैं और धारा I बह रही है। अपवाह वेगों की तुलना करो।
चरण 1: श्रेणी में दोनों में समान धारा। चरण 2: vd = I/(neA). चरण 3: vd ∝ 1/A, इसलिए पतले तार में अपवाह वेग दोगुना: v₁ : v₂ = 2 : 1.
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि इलेक्ट्रॉन स्विच से बल्ब तक दौड़ते हैं। वे बस 1 mm/s के आसपास खिसकते हैं; तेज़ी से क्षेत्र फैलता है।
- तापीय चाल (~10⁵ m/s, बेतरतीब) और अपवाह चाल (~10⁻⁴ m/s, व्यवस्थित) को एक समझ लेना।
- भूल जाना कि इलेक्ट्रॉन E और परंपरागत धारा दोनों की उल्टी दिशा में खिसकते हैं।
- यह कहना कि निश्चित वोल्टेज पर vd क्षेत्रफल पर निर्भर है। निश्चित V और l पर vd = eVτ/(ml), A पर निर्भर नहीं; सिर्फ़ धारा बदलती है।