काँच के प्रिज़्म से प्रकाश का अपवर्तन
त्रिभुजाकार प्रिज़्म के दो झुके हुए फलक (अपवर्तक पृष्ठ) होते हैं। इनके बीच का कोण प्रिज़्म कोण (A) है।
- पहले फलक पर प्रकाश वायु से काँच में (विरल → सघन) जाकर अभिलंब की ओर मुड़ता है।
- दूसरे फलक पर काँच से वायु में आकर अभिलंब से दूर मुड़ता है।
- दोनों मुड़ाव किरण को प्रिज़्म के आधार की ओर ले जाते हैं।
आपतित किरण (आगे बढ़ाई गई) और निर्गत किरण के बीच का कोण विचलन कोण (D) है। काँच के स्लैब के विपरीत, प्रिज़्म की निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर नहीं होती, क्योंकि फलक समांतर नहीं हैं।
आरेख में लिखने वाले शब्द
आपतित किरण, अपवर्तित किरण, निर्गत किरण, आपतन कोण (i), अपवर्तन कोण (r), निर्गत कोण (e), विचलन कोण (D)।
श्वेत प्रकाश का वर्ण विक्षेपण
श्वेत प्रकाश की पतली किरण प्रिज़्म से गुज़रे तो पर्दे पर सात रंगों की पट्टी बनती है। यह पट्टी स्पेक्ट्रम है और रंगों में बँटना वर्ण विक्षेपण।
आधार से ऊपर क्रम: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (बैंजानीहपीनाला / VIBGYOR)।
रंग अलग क्यों होते हैं?
निर्वात में सभी रंगों की चाल बराबर होती है। काँच में बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम धीमा होता है, इसलिए बैंगनी के लिए अपवर्तनांक थोड़ा अधिक है। अधिक अपवर्तनांक → अधिक मुड़ाव। इसलिए बैंगनी का विचलन सबसे अधिक, लाल का सबसे कम।
पुनर्संयोजन (न्यूटन का प्रयोग)
न्यूटन ने पहले प्रिज़्म के बाद वैसा ही दूसरा प्रिज़्म उल्टा रखा। रंग फिर से श्वेत प्रकाश बनकर निकले। इससे सिद्ध हुआ कि प्रिज़्म रंग बनाता नहीं; श्वेत प्रकाश स्वयं सभी रंगों का मिश्रण है।
इंद्रधनुष कैसे बनता है
इंद्रधनुष बारिश के बाद आकाश में बना प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है। हवा में तैरती पानी की छोटी बूँदें छोटे प्रिज़्म जैसा काम करती हैं:
- धूप बूँद में घुसते समय अपवर्तन और वर्ण विक्षेपण।
- बूँद की पिछली सतह पर आंतरिक परावर्तन।
- बाहर निकलते समय फिर अपवर्तन, जिससे रंग और फैलते हैं।
लाल रंग ऊँची बूँदों से (लगभग 42°) और बैंगनी नीची बूँदों से (लगभग 40°) हमारी आँख तक आता है, इसलिए लाल बाहरी किनारे पर और बैंगनी भीतरी किनारे पर होता है। इंद्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखता है। धूप वाली सुबह पानी के फव्वारे से भी बनाया जा सकता है।
बोर्ड परीक्षा पर ध्यान
अक्सर पूछा जाता है: प्रिज़्म से किरण का पथ बनाकर i, e और D अंकित करना (2–3 अंक); बैंगनी सबसे अधिक क्यों मुड़ता है; वर्ण विक्षेपण और स्पेक्ट्रम का अर्थ; न्यूटन का पुनर्संयोजन; इंद्रधनुष बनने के तीन चरण और यह सूर्य के विपरीत क्यों दिखता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वर्ण विक्षेपण: श्वेत प्रकाश का रंगों में बँटना
- स्पेक्ट्रम क्रम (कम से अधिक मुड़ाव): ला ना पी ह नी जा बैं
- काँच में अपवर्तनांक: n(बैंगनी) > n(लाल), इसलिए D(बैंगनी) > D(लाल)
- प्रिज़्म: दोनों फलकों पर किरण आधार की ओर मुड़ती है
- इंद्रधनुष = अपवर्तन + वर्ण विक्षेपण + आंतरिक परावर्तन + अपवर्तन
हल किए गए उदाहरण
1. श्वेत प्रकाश प्रिज़्म से गुज़रता है। पर्दे पर आधार के सबसे पास कौन-सा रंग आएगा और क्यों?
बैंगनी। काँच का अपवर्तनांक बैंगनी के लिए सबसे अधिक है, इसलिए वह सबसे ज़्यादा मुड़कर आधार के पास पहुँचता है।
2. काँच का स्लैब प्रिज़्म की तरह श्वेत प्रकाश को रंगों में क्यों नहीं बाँटता?
स्लैब के दोनों फलक समांतर होते हैं, इसलिए दूसरे फलक का मुड़ाव पहले को ठीक उलट देता है। रंग समांतर निकलकर एक-दूसरे पर पड़ते हैं और फिर श्वेत दिखते हैं। प्रिज़्म में फलक झुके हैं, मुड़ाव जुड़ते हैं और रंग अलग हो जाते हैं।
3. कैसे दिखाएँगे कि श्वेत प्रकाश सात रंगों से बना है?
पतली किरण प्रिज़्म से गुज़ारकर स्पेक्ट्रम बनाइए। फिर वैसा ही प्रिज़्म उल्टा रखिए: रंग फिर श्वेत हो जाते हैं। बँटना और जुड़ना दोनों दिखाते हैं कि श्वेत प्रकाश मिश्रण है।
4. दोपहर में इंद्रधनुष प्रायः क्यों नहीं दिखता?
इंद्रधनुष सूर्य के ठीक विपरीत बिंदु से लगभग 40–42° पर बनता है। दोपहर में सूर्य ऊँचा होता है, तो वह बिंदु क्षितिज से बहुत नीचे चला जाता है और धनुष दिखाई नहीं देता। इसलिए इंद्रधनुष सुबह या शाम को दिखता है।
आम गलतियाँ
- लिखना कि प्रिज़्म रंग बनाता है। रंग पहले से श्वेत प्रकाश में थे; प्रिज़्म सिर्फ़ उन्हें अलग करता है।
- कहना कि लाल सबसे अधिक मुड़ता है। लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे अधिक।
- निर्गत किरण को शीर्ष की ओर मुड़ता दिखाना। दोनों फलकों पर किरण आधार की ओर मुड़ती है।
- सोचना कि सूर्य की ओर मुँह करके इंद्रधनुष दिखेगा। यह हमेशा सूर्य के विपरीत दिखता है।